NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
हरियाणा चुनाव : ऑटो मोबाईल श्रमिकों का प्रदर्शन, कहा सरकार की नीतियां मंदी से निपटने में नाकाम
पूरे हरियाणा में 21 तारीख़ को विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में पूरे प्रदेश में मज़दूरों की छंटनी और बेरोज़गारी बड़े मुद्दे हैं। अगर यह ग़ुस्सा मज़दूर वर्ग के मतदान में दिखा तो सत्ताधारी बीजेपी के लिए यह चुनाव आसान नहीं होगा।
मुकुंद झा
12 Oct 2019
workers protest

हरियाणा चुनाव के बीच विभिन्न ऑटोमोबाइल यूनिट  के लगभग हज़ार कर्मचारियों ने आर्थिक मंदी के कारण वेतन और भत्तों में कटौती के ख़िलाफ़ शुक्रवार 11 अक्टूबर को विरोध मार्च निकाला। श्रमिकों ने स्थानीय प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें ठेका प्रथा और फ़िक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट(सीमित अवधि रोज़गार) सिस्टम को समाप्त करने और आर्थिक मंदी के कारण अपनी नौकरी खो देने वालों के लिए बेरोज़गारी भत्ते की मांग शामिल थी।

बेलसोनिका ऑटो कंपोनेंट इंडिया इंप्लाइज़ यूनियन के नेतृत्व में, दस मज़दूर यूनियनों से जुड़े कर्मचारी, सीटू सहित कई केंद्रीय ट्रेड युनियनों के नेता भी शामिल हुए। दोपहर में दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर राजीव चौक चौराहे पर एकत्र हुए और ज्ञापन सौंपने के लिए मिनी सचिवालय तक मार्च किया।

बीते कुछ महीने में यह बात अमूमन रोज़ ही सुनाई देती है कि आज फ़लां कंपनी ने  इतने मज़दूरों को काम पर से हटा दिया। इसके पीछे सभी का एक ही तर्क होता है कि बाज़ार में भारी मंदी है, और मजबूरन उन्हें ये करना पड़ रहा है। यह बात साफ़ है कि भारत आज भारी आर्थिक मंदी के दौर से गुज़र रहा है। लगातार जीडीपी में गिरावट इसको सत्यापित भी कर रही है। लेकिन क्या इसका अर्थ यह है कि इसका सारा दोष मज़दूरों पर मढ़कर उनके रोज़गार छीन लिए जाएँ! हमारे यहाँ यही हो रहा है। मारुती, हौंडा जैसे कई बड़े उद्योग हैं जिन्होंने मंदी की आड़ में मज़दूरों की छंटनी की है और अभी तक यह सिलसिला जारी है।

सरकार को भी यह समझ में आ रहा है कि आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब है। वो भी इससे निपटने के लिए कुछ क़दम उठा रही है लेकिन क्या वो काफ़ी और उचित दिशा में हैं! मज़दूरों के मुताबिक़ तो नहीं! मज़दूरों ने सरकारी कंपनी मालिकों द्वारा मज़दूरों की छंटनी को लेकर कहा कि कंपनी "मीठा मीठा गप कड़वा कड़वा थू थू" वाली नीति पर चल रही है। यानी जब मुनाफ़ा हो रहा था तो इन कंपनियों ने उसका फ़ायदा ख़ुद उठाया और अब घाटा मज़दूरों को झेलने के लिए कह रही है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा, "सामान्य स्थितियों में पूंजीपतियों ने जमकर मुनाफ़ा कमाया, लेकिन कभी भी मज़दूरों को इस मुनाफ़े में हिस्सेदार नहीं बनाया। मज़दूरों का हमेशा ही भंयकर शोषण किया गया। ठेका मज़दूरों के तो पसीने ही नहीं ख़ून को भी सिक्कों मे डाल लिया गया। तो अब मंदी के दौर में जबकि पूंजिपतियों को मुनाफ़ा कम हो रहा है तो इसकी सज़ा भला हम मज़दूर क्यों भुगतें?"

मज़दूर नेताओं ने इस मंदी के लिए पूंजीपतियों के मुनाफ़ा कमाने के लालच और सरकार की ग़लत नीतियों को ज़िम्मेदार बताया। और कहा कि सरकार अब जो इससे निपटने के लिए नीति बना रही है, वो भी ग़लत दिशा में है।

बेलसोनिका ऑटो कम्पोनेन्ट इम्पलॉइज़ यूनियन के महासचिव जसवीर सिंह ने न्यूज़क्लिक को बताया, "सरकार ने पूंजीपतियों को जो 1.45 लाख करोड़ रुपये की छूट देने का निर्णय किया है, उसे तत्काल वापस लेना चाहिए और इसके बदले आम जनता को राहत देना चाहिए।अप्रत्यक्ष कर को ख़त्म किया जाना चाहिए और सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक ख़र्च करना चाहिए। जिससे लोगों की सेविंग बढ़ेगी और अंतत: वो बाज़ार में अपनी बचत राशि को ख़र्च करेंगे। जो अपने आप मांग को बढ़ाएगा। सरकार को चाहिए कि जो कंपनी इस मंदी के कारण बंद हो रही है उसका सरकारीकरण कर अपने हाथों में ले ले।"

इन मज़दूरों के तर्क के विपरीत सरकार सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में बेच रही है।

इस सभा को संबोधित करते हुए मज़दूर संगठन सीटू के प्रदेश अध्यक्ष सतबीर सिंह ने कहा, "एक तरफ़ सरकार मेहनतकशो पर हमले कर रही है, वहीं दूसरी ओर मज़दूरों और समाज की एकता को तोड़ने के लिए जाति, भाषा, धर्म और क्षेत्र का ज़हर जनता में घोल रही है।" उन्होंने हरियाणा  की निवर्तमान बीजेपी सरकार को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा कि बीजेपी पूरे प्रदेश में 75 पार का नारा दे रही है, लेकिन 75 पार तो पेट्रोल के दाम हो गए हैं और जनता इस बार प्रदेश में मज़दूर और श्रमिक विरोधी सरकार को उखाड़ फेंकेगी।

पूरे हरियाणा में 21 तारीख़ को विधानसभा चुनाव हैं।  ऐसे में पूरे प्रदेश में मज़दूरों की छंटनी और बेरोज़गारी बड़े मुद्दे हैं। अगर यह ग़ुस्सा मज़दूर वर्ग के मतदान में दिखा तो सत्ताधारी बीजेपी के लिए यह चुनाव आसान नहीं होगा।

Haryana Assembly Elections
Protest of auto mobile workers
unemployment
economic crises
BJP
Congress
CITU
GDP growth-rate

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान


बाकी खबरें

  • भाषा
    हड़ताल के कारण हरियाणा में सार्वजनिक बस सेवा ठप, पंजाब में बैंक सेवाएं प्रभावित
    28 Mar 2022
    हरियाणा में सोमवार को रोडवेज कर्मी देशव्यापी दो दिवसीय हड़ताल में शामिल हुए जिससे सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बाधित हुईं। केंद्र की कथित गलत नीतियों के विरुद्ध केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त मंच ने…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: “काश! हमारे यहां भी हिंदू-मुस्लिम कार्ड चल जाता”
    28 Mar 2022
    पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल और इस्लामिक देश है। अब संकट में फंसे इमरान ख़ान के सामने यही मुश्किल है कि वे अपनी कुर्सी बचाने के लिए कौन से कार्ड का इस्तेमाल करें। व्यंग्य में कहें तो इमरान यही सोच रहे…
  • भाषा
    केरल में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत लगभग सभी संस्थान बंद रहे
    28 Mar 2022
    राज्य द्वारा संचालित केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की बसें सड़कों से नदारत रहीं, जबकि टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और निजी बसें भी राज्यभर में नजर नहीं आईं। ट्रक और लॉरी सहित वाणिज्यिक वाहनों के…
  • शिव इंदर सिंह
    विश्लेषण: आम आदमी पार्टी की पंजाब जीत के मायने और आगे की चुनौतियां
    28 Mar 2022
    सत्ता हासिल करने के बाद आम आदमी पार्टी के लिए आगे की राह आसन नहीं है। पंजाब के लोग नई बनी सरकार से काम को ज़मीन पर होते हुए देखना चाहेंगे।
  • सुहित के सेन
    बीरभूम नरसंहार ने तृणमूल की ख़ामियों को किया उजागर 
    28 Mar 2022
    रामपुरहाट की हिंसा ममता बनर्जी की शासन शैली की ख़ामियों को दर्शाती है। यह घटना उनके धर्मनिरपेक्ष राजनीति की चैंपियन होने के दावे को भी कमज़ोर करती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License