NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पतंजली-रूचि सोया मामला : उच्च अधिकारियों ने डाला होगा बैंकों पर दबाव
पतंजलि को क़र्ज़ देने के मामले में लंबे समय तक कतराने के बाद, आख़िरकार एसबीआई और कुछ अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पतंजलि को क़र्ज़ देने का फ़ैसला कर लिया है।
पृथ्वीराज रूपावत
20 Dec 2019
Ramdev
सौजन्य: लाइवमिंट

योग गुरू से बिज़नेस टायकून में तब्दील हुए रामदेव की अगुवाई वाली पतंजलि जिस तरह से खाद्य तेल का निर्माण करने वाली कंपनी रूचि सोया का अधिग्रहण करने जा रही है, वह एक बार फिर से क्रोनी कैपिटल का एक और नायाब नमूने के रूप में सामने आकर उभर रहा है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा पतंजलि ग्रुप को अनेक डाउनग्रेडिंग देने के चलते जो सार्वजनिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अभी तक क़र्ज़ देने से कतरा रहे थे, अब सुनने में आ रहा है कि इस विवादास्पद समूह को फ़ंड मुहैया कराने पर राज़ी हो गए हैं।

सूत्रों के ज़रिये न्यूज़क्लिक को पता चला है कि पतंजलि के प्रति बैंकों के रुख में आए इस अचानक बदलाव के पीछे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हुए लोगों का हाथ हो सकता है।

यह बात प्रकाश में आई है कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और कुछ अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने रूचि सोया के अधिग्रहण के लिए पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (पीएएल) को 4,000 करोड़ रुपये तक का क़र्ज़ देने का फ़ैसला किया है। खाद्य तेल बनाने वाली कंपनी ने दिसंबर 2017 में इन्सोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत दिवालियेपन की कार्यवाही आरंभ कर दी थी।

अक्टूबर में, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को सलाह दी थी कि वे आध्यात्मिक गुरुओं द्वारा समर्थित स्व-सहायता समूहों और कंपनियों को लोन देने में किसी भी तरह का संकोच न करें। जहाँ यह सुझाव पतंजलि समूह के पक्ष में जाती हुई दिखाई जान पड़ती थी, वहीँ इस विषय के जानकार लोगों ने इस नासमझी वाले बयान की जमकर खिल्ली उड़ाई थी।

इस साल अप्रैल में रूचि सोया की एसबीआई की अगुवाई वाली लेनदारों वाली कमेटी ने पतंजलि एग्रो लिमिटेड (पीएएल) द्वारा पेश किये गए एक प्रस्ताव योजना पर अपनी सहमति व्यक्त की थी। योजना के अनुसार, पीएएल समूह ने 4,350 करोड़ के धनराशि की पेशकश की थी, जिसमें से रूचि सोया के ऋणदाताओं को उनके बकाया राशि में से 4,240 करोड़ रुपये की धनराशि मिलनी थी, और बाकी बचे 110 करोड़ रुपये की धनराशि को रूचि सोया के पोस्ट मर्जर उपरांत उसके विस्तार पर निवेश करने का प्रस्ताव था। वास्तव में, क़र्ज़दाताओं ने इस डील के माध्यम से तक़रीबन 65% के नुकसान झेलने के लिए खुद को राज़ी किया, क्योंकि रूचि सोया का कुल बकाया 12,100 करोड़ रुपये का था।

पतंजलि समूह के प्रवक्ता एस के तिजारवाला ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि पीएल ने एसबीआई के साथ ग्रुप के स्पेशल परपज व्हीकल पतंजलि कंसोर्टियम अधिग्रहण प्राइवेट लिमिटेड (पीसीएपीएल) के एस्क्रौ खाते में प्रस्तावित योजना के अनुसार पूरे इक्विटी हिस्से का 1,150 करोड़ रुपये जमा कर दिया था। पीसीएपीएल का गठन इसी साल मई में किया गया था, जिसे पूर्ण अधिग्रहण के बाद रूचि सोया के अंदर समाहित कर दिया जाने वाला है। पतंजलि ने दावा किया कि वह बैंकों से ऋण के प्रबंधन के ज़रिये इस लेनदेन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए बकाया 3,200 करोड़ की धनराशि की व्यवस्था में लगी हुई है।

जहाँ इस प्रस्ताव योजना को लागू करने की अंतिम तिथि 21 नवंबर थी, वहीं पतंजलि समूह ने राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के समक्ष कई बार समय सीमा को आगे बढ़ाने की अपील की। तत्पश्चात एनसीएलएटी ने मंगलवार को इस समय सीमा को 23 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। हालांकि अपीलीय ट्रिब्यूनल ने लेनदारों की कमेटी को इस बात की छूट दे रखी है कि यदि पतंजलि तय समय सीमा के भीतर भुगतान करने के अपने वादे में विफल साबित होती है, तो वे उससे इस संबंध में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

अक्टूबर और नवंबर में, आईसीआरए (ICRA) और सीएआरए (CARE) सहित कम से कम तीन रेटिंग एजेंसियों ने पतंजलि की बैंक ऋण सुविधाओं के लिए रेटिंग को घटा दिया है। इसके बाद से  कई अख़बारों ने इस विषय में सूचना जारी की है कि पतंजलि को ऋण देने को लेकर एसबीआई सहित कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आशंकित हैं।

इस मामले में ईमेल द्वारा सवालों के स्पष्टीकरण को लेकर पतंजलि समूह ने अभी तक कोई उत्तर नहीं दिया है। एक बार उनकी ओर से प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही इस स्टोरी को अपडेट किया जा सकेगा।

अक्टूबर में केयर रेटिंग एजेंसी ने पीएएल (PAL)  की ‘लम्बी अवधि की बैंकिंग सुविधाओं’ को CARE A + से  घटाकर CARE A- में डाउनग्रेड कर दिया है। एजेंसी के अनुसार 31 मार्च, 2019 तक अधिग्रहण किये जा रहे रूचि सोया का आकार पीएएल (PAL) के कुल मूल्य का 151% बैठता है।

रेटिंग एजेंसी आईसीआरए (ICRA) ने अक्टूबर में पीएएल (PAL ) के 'पूंजी आधारित कैश क्रेडिट लिमिट' साधन को ICRA A + से घटाकर ICRA BBB तक डाउनग्रेड कर दिया है। आईसीआरए के अनुसार, "पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के प्रदर्शन के बारे में पर्याप्त सूचना प्रदान नहीं किये जाने के चलते उसकी क्रेडिट जोखिम के बारे में अनिश्चितता बनी हुई है, और इसलिये उसकी रेटिंग में गिरावट की गई है।

रूचि सोया के शीर्ष ऋणदाताओं में से भारतीय स्टेट बैंक का कुल बकाया 1,800 करोड़ रुपये का है, जिसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के 816 करोड़ रुपये, पंजाब नेशनल बैंक के 743 करोड़ रुपये, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक का 608 करोड़ रुपये और डीबीएस के 243 करोड़ रुपयों की धनराशि अटकी पड़ी थी। 

सनद रहे कि इस साल जनवरी में, गौतम अडानी द्वारा प्रवर्तित अदानी विल्मर लिमिटेड ने दिवाला प्रक्रिया में देरी का हवाला देते हुए रूचि सोया के अधिग्रहण करने की दौड़ से ख़ुद को बाहर कर लिया था।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Higher-Ups May Have Pressured Banks to Fund Patanjali for Ruchi Soya’s Acquisition

Patanjali
ruchi soya
PMO
IBC
SBI
Baba Ramdev
Credit Ratings
Resolution Process

Related Stories

कैसे राष्ट्रीय बैंकों के समर्थन से रुचि सोया के ज़रिये अमीर बनी पतंजलि

पेट्रोल डीजल के दाम याद दिलाया तो धमकाने लगे रामदेव!

सद्भाव बनाम ध्रुवीकरण : नेहरू और मोदी के चुनाव अभियान का फ़र्क़

रामदेव विरोधी लिंक हटाने के आदेश के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया की याचिका पर सुनवाई से न्यायाधीश ने खुद को अलग किया

खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!

ख़बरों के आगे-पीछे: 23 हज़ार करोड़ के बैंकिंग घोटाले से लेकर केजरीवाल के सर्वे तक..

मोदी के नेतृत्व में संघीय अधिकारों पर बढ़ते हमले

गुजरात : एबीजी शिपयार्ड ने 28 बैंकों को लगाया 22,842 करोड़ का चूना, एसबीआई बोला - शिकायत में नहीं की देरी

DCW का SBI को नोटिस, गर्भवती महिलाओं से संबंधित रोजगार दिशा-निर्देश वापस लेने की मांग

किसानों और सरकारी बैंकों की लूट के लिए नया सौदा तैयार


बाकी खबरें

  • Cuba
    ऋचा चिंतन
    वैश्विक एकजुटता के ज़रिये क्यूबा दिखा रहा है बिग फ़ार्मा आधिपत्य का विकल्प
    11 Jan 2022
    दुनिया को बिग फ़ार्मा के एकाधिकारवादी चलन का एक विकल्प सुझाते हुए क्यूबा मुनाफ़े से कहीं ज़्यादा अहमियत लोगों को देता है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, राज्य से वित्त पोषित अनुसंधान को बढ़ावा देता…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,68,063 नए मामले, 277 मरीज़ों की मौत 
    11 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 2.29 फ़ीसदी यानी 8 लाख 21 हज़ार 446 हो गयी है।
  • kashi
    विजय विनीत
    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: कैसे आस्था के मंदिर को बना दिया ‘पर्यटन केंद्र’
    11 Jan 2022
    काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप सड़क के किनारे श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का न्यास सुविधा केंद्र है। यहां एक हेल्प डेस्क है, जिसके बाहर कांच के गेट पर 300 रुपये में सुगम दर्शन का पोस्टर चस्पा किया गया है।…
  • security lapse
    शिव इंदर सिंह
    “मोदी की सुरक्षा में चूक या राजनीतिक ड्रामा?” क्या सोच रहे हैं पंजाब के लोग! 
    11 Jan 2022
    जिला लुधियाना के नौजवान किसान जगजीत सिंह का कहना है, “पहली बात तो किसान मोदी के काफिले से करीब एक किलोमीटर दूरी पर थे। दूसरी बात उनके पास कोई हथियार नहीं थे। वह कम से कम मोदी को काले झंडे दिखा सकते…
  • Rahul and Modi
    ओंकार पूजारी
    2022 तय कर सकता है कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का भविष्य
    11 Jan 2022
    कमज़ोर कांग्रेस इतनी कमज़ोर नहीं है कि औपचारिक मोर्चे या भाजपा विरोधी ताक़तों की अनौपचारिक समझ के मामले में किसी भी अखिल भारतीय भाजपा विरोधी परियोजना से बाहर हो जाए।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License