NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हिसार : दिल्ली सल्तनत चलाने से लेकर इस्पात सिटी तक का सफ़र!
शहरनामा: शौर्य, बलिदान व देश पर मर मिटने और गौरवशाली राजनीतिक परंपरा का गवाह रहा हिसार शहर एक बादशाह के दूध बेचने वाली से हुए प्रेम की कहानी भी समेटे हुए है।
अमित सिंह
14 Oct 2019
hisar

हिसार: हरियाणा में विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद से सियासी पार्टियों में हलचल मची हुई है। सत्तापक्ष और विपक्ष अपने अपने स्तर पर योजनाएं बना रहे हैं। राजनीतिक दलों के केंद्र में हिसार प्रमुख रूप से है। राज्य में इसी ज़िले में सबसे ज्यादा सात विधानसभा सीटे हैं। लेकिन सिर्फ इस शहर का इतना ही राजनीतिक महत्व नहीं है। बल्कि यह शहर शौर्य, बलिदान व देश पर मर मिटने और गौरवशाली राजनीतिक परंपरा का गवाह रहा है। साथ ही एक बादशाह और दूध बेचने वाली से प्रेम की कहानी भी समेटे हुआ है। आज इसे इस्पात का शहर भी कहा जाता है।

इतिहासकारों का कहना है कि साल 1353 से लेकर 1357 तक देश की राजधानी दिल्ली का प्रशासन हिसार से चलता था। दिल्ली सल्तनत के सुल्तान फिरोजशाह तुगलक इस काल में ज्यादातर समय हिसार में रहे। दरअसल मार्च 1354 में फिरोजशाह तुगलक ने हिसार की स्थापना की और 4 साल अधिकांश समय यहां गुजारा। यहीं से देश का शासन चलाया।

बादशाह और दूध बेचने वाली की प्रेमकहानी

तुगलक के हिसार से जुड़ाव की बड़ी वजह उनकी प्रेम कहानी थी। जनश्रुतियों की मानें तो यह घटना उस समय की है, जब फिरोजशाह को गद्दी नहीं मिली थी और वह शहजादे थे। उन दिनों हिसार के इस इलाके में घना जंगल हुआ करता था, जहां शहजादा फिरोज शिकार खेलने निकल जाते थे।

Capture_20.PNG
करीब 1342 में फिरोजशाह तुगलक शिकार खेलने हिसार आए थे। खेलते समय वह बेहोश होकर घोड़े से गिर गए। गूजरी नामक युवती वहां से जा रही थी। उसने उनके मुंह में दूध डाला तो शहजादे को होश आया। गूजरी ने शहजादे के प्राण बचाए। शहजादे ने उनसे जीवन साथी बनाने का प्रस्ताव रखा लेकिन गूजरी ने दिल्ली जाने से इंकार कर दिया। इस पर फिरोजशाह ने हिसार में फिरोजशाह का भवन, लाट की मस्जिद, तहखाने, गूजरी महल और बाग बनवाया। इसी से हिसार शहर अस्तित्व में आया। हिसार की सरकारी वेबसाइट पर भी इस कहानी का जिक्र मिलता है।

फिरोजशाह तुगलक द्वारा अपनी रानी गूजरी के लिए बनवाया गया गूजरी महल 1356 में बन कर तैयार हुआ। यह एक विशाल आयताकार मंच पर खड़ा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इसको एक केंद्रीय संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है।

प्रागैतिहासिक काल का इतिहास

‘हिसार’ फारसी शब्द है। इसका अर्थ किला या घेरा है। हिसार जिले में अग्रोहा, राखीगढ़ी, (बनावाली, कुनाल और भिरडाना अब फतेहाबाद जिला में) नामक स्थलों की खुदाई के दौरान पहली बार मानव सभ्यता के अवशेष मिले हैं, जिनके अध्ययन से प्रि हड़प्पन सेटलमेंट और प्रागैतिहासिक काल के इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है।

image 3_1.jpg
इतना ही नहीं फिरोजशाह के किले की शान एक लाट है। यह लाट वास्तव में अशोक की लाट बताई जाती है। इसकी वास्तुकला, संस्कृत के लेख धरती में दबा लाट का भाग इस बात की पुष्टि करते हैं कि फिरोजशाह ने इसे कहीं से उखाड़कर यहां स्थापित करवाया होगा।

तुगलक के बाद मुगल काल में जिसे हिसार की जागीर मिली, वही अगला उत्तराधिकारी बना। कहा जाता है कि मुगल काल में जिसे भी अगला उत्तराधिकारी घोषित करना होता, उसे हिसार की जागीर दी जाती थी। यानी अप्रत्यक्ष रूप से वही उत्तराधिकारी होता था। इसमें हुमायुं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां इन सभी को उत्तराधिकारी घोषित करने से पहले हिसार की जागीर दी गई।

1857 में हो गया था आज़ाद

हिसार 1857 में ही अंग्रेजी राज से आजाद हो गया था। 29 मई, 1857 को क्रांतिकारियों ने डिप्टी कलेक्टर विलियम वेडरबर्न समेत कई अंग्रेजों की हत्या करने के बाद नागोरी गेट पर आज़ादी की पताका लहराई थी। उस हार से ब्रिटिश हुकूमत खूब बौखलाई। बीकानेर से फौज बुलाकर अंग्रेजों ने शहर पर फिर से कब्जे के लिए बड़ा हमला किया। हिसार और आसपास के गांवों के क्रांतिकारी पूरी ताकत के साथ अंग्रेजों से टकराए। लेकिन 19 अगस्त, 1857 को हिसार दोबारा से अंग्रेजों के कब्जे में चला गया।

तब 500 से 600 क्रांतिकारी शहीद और जख्मी हुए थे। कई अंग्रेज भी मारे गए थे। उस समय अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह या स्वतंत्रता संग्राम में सरकारी मुलाजिमों की सक्रिय भूमिका थी। यही वजह थी कि बगावत के आरोप में सात कर्मचारियों को फांसी पर लटकाया गया। कई क्रांतिकारियों की जमीन-जायदाद को जब्त करके जेल में डाल दिया था।

अंग्रेजों के राज में दिल्ली क्षेत्र के अधीन तीन जिले होते थे जिन्हें सेंट्रल, साउदर्न वेस्टर्न जिलों के नाम पुकारा जाता था। वेस्टर्न जिले में भिवानी, हिसार, हांसी, सिरसा, फतेहाबाद रोहतक का क्षेत्र होता था। 1861 में हिसार को ज़िले का दर्जा दिया गया। 1966 में हरियाणा गठन के समय हिसार प्रदेश का सबसे बड़ा ज़िला था।

सबसे पहले हिसार से भिवानी के रूप में 22 दिसंबर, 1972 को अलग जिले का गठन हुआ। 1974 में जींद जिला बनाया गया तो हिसार जिले का कुछ हिस्सा जींद में जोड़ दिया गया। एक सितंबर 1975 को सिरसा का गठन किया तो वो भी हिसार जिले में से ही किया गया। 15 जुलाई 1997 में हिसार जिले से एक नए जिले का गठन हुआ जिसे फतेहाबाद जिले के रूप में जानते है।

बंसीलाल और भजनलाल का हिसार

तीन जिलों के अलग हो जाने के बावजूद हिसार ने तेजी से विकास किया। इस शहर के विकास में पहले चौधरी बंसीलाल और बाद में भजनलाल का बड़ा ही योगदान रहा। यह अकेला ऐसा शहर है जिसमें तीन-तीन सरकारी यूनिवर्सिटी हैं। एशिया की सबसे बड़ी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और ऑटो मार्किट भी हिसार में ही है।

image 4.jpg
हिसार का पशुधन फार्म एशिया में सबसे बढ़िया है। 1815 में स्थापित पशुधन फार्म विदेश तक मशहूर है। हिसार में इसके साथ ही अश्व अनुसंधान केंद्र, भेड़ प्रजनन अनुसंधान केंद्र, भैंस अनुसंधान केंद्र भी हैं।

केंद्रीय भैंस अनुसंधान केन्द्र हिसार 25 लाख रुपये की मुर्राह भैंसें तैयार करके पूरे देश में प्रसिद्धि पा चुका है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार की पहचान है। इसकी स्थापना 1970 में हुई थी। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय भी हिसार को खास बनाता है।

गुरु जंभेश्वर तकनीकी विश्वविद्यालय और अग्रोहा का मेडिकल कॉलेज भी हिसार को खास पहचान देते हैं। सेना की छावनी व बीएसएफ कैंप से हिसार का महत्व बढ़ा है।

अब यह शहर राजधानी दिल्ली में बढ़ते एयर ट्रैफिक का बोझ कम करने के लिए काउंटर मैगनेट सिटी बनने की दहलीज पर खड़ा है। हिसार में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाए जाने की चर्चा है। हिसार को इस्पात नगरी, स्टील सिटी और मैग्नेट सिटी के नाम से भी जाना जाता है।

यहां पर जहाजों की रिपेयरिंग का काम शुरू भी हो चुका है। इस तरह हिसार देश का पहला ऐसा शहर होगा जहां विमानों की मरम्मत होगी। अब तक विमानों को मरम्मत के लिए विदेश भेजा जाता है।

(यह आलेख अन्य तमाम लेखों और हिसार के लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है)

Haryana
Hisar
Delhi Sultanate
Steel city
Haryana Assembly Elections
history of hisar
Hisar of Bansi Lal and Bhajan Lal
BJP
Congress

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामले घटकर 10 लाख से नीचे आए 
    08 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 67,597 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 9 लाख 94 हज़ार 891 हो गयी है।
  • Education Instructors
    सत्येन्द्र सार्थक
    शिक्षा अनुदेशक लड़ रहे संस्थागत उत्पीड़न के ख़िलाफ़ हक़ की लड़ाई
    08 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को आश्वस्त किया था कि 2019 तक उन्हें नियमित कर दिया जायेगा। लेकिन इस वादे से भाजपा पूरी तरह से पलट गई है।
  • Chitaura Gathering
    प्रज्ञा सिंह
    यूपी चुनाव: मुसलमान भी विकास चाहते हैं, लेकिन इससे पहले भाईचारा चाहते हैं
    08 Feb 2022
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गांव के मुआयने से नफ़रत की राजनीति की सीमा, इस इलाक़े के मुसलमानों की राजनीतिक समझ उजागर होती है और यह बात भी सामने आ जाती है कि आख़िर भाजपा सरकारों की ओर से पहुंचायी जा…
  • Rajju's parents
    तारिक़ अनवर, अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव : गांवों के प्रवासी मज़दूरों की आत्महत्या की कहानी
    08 Feb 2022
    महामारी की शुरूआत होने के बाद अपने पैतृक गांवों में लौटने पर प्रवासी मज़दूरों ने ख़ुद को बेहद कमज़ोर स्थिति में पाया। कई प्रवासी मज़दूर ऐसी स्थिति में अपने परिवार का भरण पोषण करने में पूरी तरह से असहाय…
  • Rakesh Tikait
    प्रज्ञा सिंह
    सरकार सिर्फ़ गर्मी, चर्बी और बदले की बात करती है - राकेश टिकैत
    08 Feb 2022
    'वो जाटों को बदनाम करते हैं क्योंकि उन्हें कोई भी ताक़तवर पसंद नहीं है' - राकेश टिकैत
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License