NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
पहला ‘पथ के साथी’ सम्मान कवि-संस्कृतिकर्मी शोभा सिंह को
चयन समिति में योगेन्द्र आहूजा, राकेश तिवारी, मनोज रूपड़ा, किरण सिंह, अलहद कशीकार और रचना त्यागी शामिल रहे। शोभा सिंह को यह सम्मान अगस्त माह में दिल्ली में प्रदान किया जायेगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Jul 2020
शोभा सिंह

नई दिल्ली: सिद्धान्त फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2020 का पहला 'पथ के साथी' सम्मान कवि-कथाकार और संस्कृतिकर्मी शोभा सिंह को दिए जाने की घोषणा की गई है।

सिद्धान्त फाउंडेशन की स्थापना साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में सकारात्मक हस्तक्षेप के उद्देश्य से वर्ष 2015 में की गई थी। इस वर्ष से संस्था ने किसी एक लेखक या कलाकार को हर साल ‘पथ के साथी’ सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया है।

फाउंडेशन की न्यासी रचना त्यागी की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार यह सम्मान लेखकों-कलाकारों के साहित्यिक-कलात्मक अवदान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का एक विनम्र प्रयास है। इसका उद्देश्य लम्बे समय से रचनात्मक पथ पर चल रहे साथियों की संघर्षपूर्ण यात्रा की ओर समाज का ध्यान आकृष्ट करना भी है।

इस कड़ी में पहले ‘पथ के साथी’ सम्मान के लिए शोभा सिंह के नाम का चयन किया गया है। चयन समिति में योगेन्द्र आहूजा, राकेश तिवारी, मनोज रूपड़ा, किरण सिंह, अलहद कशीकार और रचना त्यागी शामिल रहे। शोभा सिंह को यह सम्मान अगस्त माह में दिल्ली में प्रदान किया जायेगा।

शोभा सिंह का जन्म 9 जून, 1952 को इलाहाबाद में हुआ। शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद व दिल्ली में हुई। आपका एक कविता संग्रह ‘अर्द्ध-विधवा’ 2014 में ‘गुलमोहर क़िताब’ प्रकाशन से प्रकाशित है। दूसरा कविता संग्रह प्रकाशनाधीन है और एक कहानी संग्रह भी तैयार है। आपकी रचनाएँ ‘पहल’, ‘जनसंदेश टाइम्स’, ‘वागर्थ’, ‘जनसत्ता’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘आजकल’, ‘समकालीन जनमत’, ‘पक्षधर’, ‘दलित अस्मिता’ आदि पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। कवि वीरेन डंगवाल ने आपकी कविताओं पर टिप्पणी करते हुए लिखा है कि ‘शोभा का कवि व्यक्तित्व व्यापक राजनैतिक चरित्र वाली कविताओं से बेहतर उन कविताओं में मुखर हुआ है, जो चरित्र में तो राजनैतिक हैं, पर जिनके केंद्र में औरतें हैं–- लड़ती-भिड़ती, लुटती-पिटती, लहुलुहान मगर बजिद हार नहीं मानती।’

शोभा सिंह यथार्थ की विडम्बना को कविता की भाषा देती हैं। इनकी कविताएँ प्रथम दृष्टया सामान्य कविताएँ होने का धोखा रचती हैं, लेकिन उनकी सहजता के आकर्षण में उलझे हुए आप पाते हैं कि ये कविताएँ अपने समय का दस्तावेज़ रच रही हैं। पाठक के मन में चलने वाली उन बहुस्तरीय जीवन-बिम्ब बहुल कविताओं के अर्थ धीरे-धीरे खुलते हैं। जिन करुण और दारुण सच्चाईयों को बहस से बाहर रखने की कोशिश रहती है, ऐसे विषय उनके यहाँ ज़रूर मिलेंगे। शोभा सिंह का वाम राजनैतिक-सांस्कृतिक व महिला आन्दोलन से बहुत पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है।

आइए पढ़ते हैं शोभा सिंह की एक अप्रकाशित कविता-

रुकैया बानो

 

एक शहर के भीतर

कई शहर की तरह

एक साथ कई किरदारों में जीती

कई घर और कई घरों की

लाडली

रुकैया बानो

 

परंपरागत छवि में क़ैद औरत को

नकारती

अंधेरे में रोशनी की तरह

एक नए तेवर के साथ

हमें लंबे सपनों से

बाहर निकालती

कहती - देखो

दुनिया, हक़ीक़त में बदलती है

रिश्ते एहसास से चलते हैं

 

समाज के आख़िरी सोपान पर

हाशिये की तय जगह पर

खड़ी थी मैं

अपनी ख़ूबसूरती का दंश

बचपन से जवानी तक भोगा

 

ग़रीबी और ख़ूबसूरती पर बस न था

बेची और ख़रीदी जाती रही

प्रेम बर्फ़ का ठोस गोला

जिसे चाह कर भी पिघला न सकी

बदहाल किया काली खौलती रातों ने

अंगार बरसते दिनों ने

बदलते हालात के ताने-तिश्नों ने

बहुत बार हैरान परेशान किया

भागते रहना

काम की तलाश

बच्चे थे

सिर्फ़ मेरी ज़िम्मेदारी में

उनकी बेहतरी सोचते

तरकीब लगाते

मेरी दुनिया में ढेर सारे बच्चे

कब शामिल हो गए

उनकी यातना की छटपटाहट

कब मेरी बन गई

मज़लूम औरतें

उनके वजूद में धंसे कांटे

उनसे संवाद का रिश्ता बनाना

उनकी मदद करना

संगठन की सीख

प्रयोग में उतारना

बस-जूझ जाना

स्नेह का जल

धीरे-धीरे रिसता हुआ

सूखी धरती को

फिर हरा भरा करेगा

मुझे विश्वास था

स्वाभिमान की लौ को

ज़िन्दा रखने में कामयाबी मिलेगी

यूं - कई बार पंख

परवाज़ भरते जले भी

चट्टानें टूटीं

गर्द ग़ुबार से

दम भी घुटा

लड़ाई जारी रही

 

दिनों का हिसाब रखती धरती ने

आसमान में रंग भरा

ऋतुओं में बहार

और

मन में नई फ़सल की आमद का सुख

 

लम्हा-लम्हा वक़्त

कहां-से-कहां पहुंच गया

एक सवाल

क्या एक आम औरत की तरह

तुम्हारा जीवन रहा

रुकैया बानो

वे काम जो तुम्हें

बहुत खास बनाता था

वो अपने हिस्से की धूप

जिसे

पसार दिया था तुमने सबके लिए

और जब तपन बहुत बढ़ी

तुमने अपनी छांव भी बांट दी

दुख के हथियारों का वार झेलती

शीतल चांदनी के सुकून को

रखा अपने पास

संकट में खर्च करने के लिए

सांस लेना-जीना

सिर्फ़ अपने लिए नहीं

सब के बीच

बीज की तरह बंट गई तुम

खुले दिल

दिलों को जोड़ते जाना

नफ़रत की राजनीति से बहुत दूर

मज़बूती से खड़ी

रुकैया बानो

तुम्हें सलाम!

...

Shobha Singh
hindi poet
hindi poetry
Siddhant Foundation

Related Stories

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

देवी शंकर अवस्थी सम्मान समारोह: ‘लेखक, पाठक और प्रकाशक आज तीनों उपभोक्ता हो गए हैं’

गणेश शंकर विद्यार्थी : वह क़लम अब खो गया है… छिन गया, गिरवी पड़ा है

अदम गोंडवी : “धरती की सतह पर” खड़े होकर “समय से मुठभेड़” करने वाला शायर

हमें यह शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है : भगत सिंह की पसंदीदा शायरी

विशेष: ...मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

इतवार की कविता : तुम्हारी जाति क्या है कुमार अंबुज?

राही मासूम रज़ा : साझा भारतीय संस्कृति के भाष्यकार

एक दिन सुन लीजिए जो कुछ हमारे दिल में है...

फिर फिर याद आए विष्णु खरे


बाकी खबरें

  • up elections
    अफ़ज़ल इमाम
    यूपी चुनाव को लेकर बड़े कॉरपोरेट और गोदी मीडिया में ज़बरदस्त बेचैनी
    24 Jan 2022
    यदि यूपी जैसे बड़े राज्य में गैर भाजपा सरकार बन जाती है तो जनता के बुनियादी सवाल और आर्थिक मुद्दे देश की राजनीति के केंद्र बिंदु बन जाएंगे।
  • JNU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जेएनयू में छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में एक व्यक्ति गिरफ़्तार, GSCASH बहाली की मांग
    24 Jan 2022
    जेएनयू की पीएचडी छात्रा के साथ विश्वविद्यालय परिसर में छेड़छाड़ की घटना घटी थी जिसने जेएनयू प्रशासन और दिल्ली की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के 100 से अधिक घंटे के बाद रविवार को 27…
  • slaughter house
    सौरभ शर्मा
    अवैध बूचड़खानों पर योगी सरकार के प्रतिबंध से ख़त्म हुई बहराइच के मीट व्यापारियों की आजीविका 
    24 Jan 2022
    साल 2017 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अवैध बूचड़खानों पर प्रतिबंध लगा दिया, जिससे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मांस के कारोबार में शामिल हजारों लोगों के जीवन और उनकी आजीविका पर काफी बुरा असर पड़ा…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3 लाख से ज़्यादा नए मामले, 439 मरीज़ों की मौत
    24 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,06,064 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5.69 फ़ीसदी यानी 22 लाख 49 हज़ार 335 हो गयी है।
  • hum bharat ke log
    शंभूनाथ शुक्ल
    हम भारत के लोग: झूठी आज़ादी का गणतंत्र!
    24 Jan 2022
    दरअसल सरकारें ग़रीब आदमी की बजाय पूंजीपतियों के हाथ में खेलती हैं इसलिए ग़रीबों का हक़ मारकर उनका पैसा अमीरों, दलालों, सत्तासीन वर्गों के पास चला जाता है। जब तक इस पर अंकुश नहीं लगेगा तब तक यह आज़ादी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License