NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कला
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
नफ़रत के बीच इप्टा के ‘’ढाई आखर प्रेम के’’
देश में एक-दूसरे के प्रति फैलाई जा रही नफ़रत को इप्टा ने कला के माध्यम से मिटाने की मुहिम चलाई है। इप्टा की ‘’ढाई आखर प्रेम की यात्रा’’ में लोगों को खासकर युवाओं को जागरूक किया जा रहा है।  
रवि शंकर दुबे
15 Apr 2022
dhai aakhar prem ke

देश में नफरत के खिलाफ अमन, चैन, भाईचारे और सद्भाव का संदेश लेकर जैसे कभी कबीर निकले थे, रविदास निकले थे, ज्योतिबा फूले निकले थे, वैसे ही आज इंसानियत के लिए कुछ कर गुज़रने का जज्बा रखने वाले नौजवान निकले हैं। अपनी आंखों के सामने देश की शांति को भंग होता देख चुके बुजुर्ग निकले हैं। भारतीय जन नाट्य संघ यानी इप्टा के साथ...

आज़ादी के 75वें साल के अवसर पर देश की संस्कृति का संदेश देते हुए इप्टा ‘’ढाई आखर प्रेम की’’ सांस्कृतिक यात्रा निकाल रही है। जिसमें नुक्कड़ नाटकों के ज़रिए, गीतों के ज़रिए, भाषणों के ज़रिए, नृत्य के ज़रिए, संवादों के ज़रिए लोगों को देश में बह रही नफरत के खिलाफ जागरुक किया जा रहा है।

इप्टा के ‘’ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा’’ की शुरुआत 9 अप्रैल को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नगर निगम गार्डेन से हुई थी, जिसे इप्टा के महासचिव राकेश वेदा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस दौरान एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। जिसमें राकेश वेदा ने इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य बताया, उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जिस तरह से नफरत फैलाई जा रही है उसके प्रतिरोध स्वरूप प्रेम का प्रसार करना है, आज लोगों को नफरत की नहीं प्रेम की ज़रूरत है। राकेश वेदा ने कहा कि कला जनता के नाम प्रेम पत्र होता है, कला प्रेम के प्रसार का एक सशक्त माध्यम है।

राकेश वेदा के संबोधन के बाद ‘’ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा’’ में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत नाचा थिएटर ग्रुप ने की, इस ग्रुप के वरिष्ठ रंगकर्मी निसार अली और उनके साथियों ने एक बेहतरीन गम्मत ‘’ढाई आखर प्रेम का’’ की प्रस्तुति दी। इस गम्मत के ज़रिए बताया गया कि परिवार हो या देश, प्रेम के आभाव में टूट जाता है। प्रेम लोगों को जोड़ता है, लेकिन दूषित सत्ता लोगों को बांटने का लगातार कुंठित प्रयास करती है। इस गम्मत का निर्देशन रंगमंच और नाचा के निर्देशक निसार अली ने किया।

पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपणिया ने दी प्रस्तुति

यात्रा नगर निगम गार्डन से ओसीएम चौक, आकाशवाणी होते हुए संस्कृति विभाग के मुक्ताकाशी मंच पर पहुंची, जहां पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपणिया का कबीर गायन सम्पन्न हुआ। पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपणिया की ख्यति पूरे देश के साथ-साथ दुनिया में भी है। टिपणियां कबीर गायन के अग्रिम पंक्ति के वरिष्ठ कलाकार हैं। उन्होंने कबीर के भजनों की शानदार प्रस्तुति कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

10 अप्रैल को ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा बिलासपुर पहुंची। बिलासपुर के सरगांव में यात्रा का ज़ोरदार स्वागत हुआ, इस दौरान राकेश वेदा, झारखंड इप्टा से शैलेन्द्र कुमार ने लोगों से संवाद किया और नाचा थिएटर कलाकारों ने कार्यक्रम की प्रस्तुति की।

बिलासपुर में मुख्य कार्यक्रम सिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। जिसकी शुरुआत कलाकार राघव दीक्षित ने बांसुरी वादन से की। इस कार्यक्रम में इप्टा बिलासपुर द्वारा शोभा टाह फाउंडेशन की ओर से 25 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवारों को सम्मानित किया गया और शहीदों को याद किया गया।

इस कार्यक्रम में सूफी भजन गायन की पेशकश की गई। इस दौरान राकेश वेदा, शैलेन्द्र कुमार, छत्तीसगढ़ इप्टा अध्यक्ष मणिमय मुखर्जी के अलावा कांग्रेस नेता अनिल टाह, क्रेडाई अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव, ईश्वर सिंह दोस्त, रामकुमार तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार नथमल शर्मा, आशिष सिंह, ओमप्रकाश गंगोत्री, नंदकुमार कश्यप, शहर विधायक शैलेष पांडेय आदि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

11 अप्रैल भी ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा बिलासपुर में रही। इस दिन ये यात्रा आधारशिला विद्या मंदिर पहुंची। यहां स्कूली छात्र-छात्राओं को इप्टा और उसकी इस यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया। सांस्कृतिक यात्रा के अंतिम कार्यक्रम में युवाओं से बातचीत की गई। इसमें युवाओं को अध्ययनशील रहने और प्रश्न करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान सीएमडी कालेज के अध्यक्ष संजय दुबे, रंजीत सिंह , महेन्द्र गंगोत्री के अलावा मधुकर गोरख, सचिन शर्मा, अरुण दाभड़कर, मोबिन अहमद, साक्षी शर्मा आदि मौजूद रहे।

12 मार्च यानी मंगलवार की शाम को इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा का अंबिकापुर में आगमन हुआ। दरिमा चौक से एक छोटी सांस्कृतिक रैली के रूप में यह यात्रा शहर के मुख्य मार्ग सदर रोड और देवोगंज रोड से होते हुए माखन बिहार पहुंची। मुख्य आयोजन स्थानीय कला केंद्र के पास माई अंबिकापुर के खुले हुए मंच पर हुआ। इस दौरान इप्टा अंबिकापुर के संस्थापक सदस्य एवं वरिष्ठ रंगकर्मी प्रितपाल सिंह ने स्थानीय इप्टा अंबिकापुर की गतिविधियों पर आधारित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस जन गीत गायन में युवा गायक काव्य मिश्रा तथा अमरदीप ने अपने आलापों से समा बांध दिया।

कार्यक्रम के अगले क्रम में शास्त्रीय संगीत के स्थानीय कलाकार साजन पाठक ने दो प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। बिलासपुर से पधारे निसार अहमद ने कविताओं और जन गीतों की अभनिय पूर्ण प्रस्तुति दी। इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश ने लोगों को इस यात्रा के उद्देश्य से परिचित कराया और कहा कि आज के ही दिन यानी 12 अप्रैल 1954 को रंगकर्मी सफदर हाशमी का जन्म हुआ था जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन जन चेतना लाने के लिए नाटकों को समर्पित कर दिया।

इप्टा की ढाई आखर प्रेम के सांस्कृतिक यात्रा पांचवे दिन यानी 13 अप्रैल को झारखंड के गढ़वा ज़िला पहुंची, रंका कस्बे में क्षेत्रीय इप्टा के साथियों द्वारा सांस्कृतिक यात्रा की अगवानी की गई और वहीं स्टैंड पर सड़क के किनारे इप्टा के बैनर तले जनगीत प्रस्तुत किया गया। कम समय में भी पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई। यात्रा में चल रहे साथियों का स्वागत सत्तू पिलाकर स्वागत किया गया। इसके बाद यात्रा गढ़वा शहर पहुंची। यहां पर जलियांवाला बाग के शहीदों की याद में समर्पित कार्यक्रम स्थल पर सांस्कृतिक यात्रा में चल रहे साथियों का स्वागत सम्मान किया गया। स्वागत सम्मान से पहले कार्यक्रम स्थल से रैली के स्वरूप में सभी साथी व वहां उपस्थित समुदाय अंबेडकर चौक पहुंचे जहां इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश वेदा, मणिमय मुखर्जी सहित गढ़वा इप्टा इकाई के साथियों द्वारा अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण कर जनता के पक्ष में नारा लगाकर आवाज बुलंद की गई। इसके बाद झारखंड इप्टा के साथियों ने ‘’मुस्लमां और हिन्दू की जान, कहां है मेरा हिंदुस्तान” और हक़ की लड़ाई आदि जनगीत ढोलक, हार्मोनियम और खंजड़ी की धुन के साथ प्रस्तुत किया।

14 अप्रैल यानी गुरुवार को इप्टा की ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा छत्तीसगढ़ के चंदवा पहुंची। चंदवा के पेंशनर समाज भवन में सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा सांस्कृतिक यात्रा के सभी सदस्यों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में इप्टा द्वारा सामाजिक एकता पर गीत प्रस्तुत किए गए। इस दौरान पेंशनर समाज में आयोजित अंबेडकर जयंती पर भी प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अंबेडकर के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में इप्टा द्वारा ज्वलंत मुद्दों पर बनाई गई प्रदर्शनी भी लगाई गई। मौके पर सागर सुमन, दीपू सिन्हा, साजिद खान, अयूब खान, बाबर खान, असगर खान के अलावा सांस्कृतिक यात्रा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश वेदा, राष्ट्रीय सचिव शैलेंद्र कुमार, राजेश श्रीवास्तव, नाचा से निशाद अली, जेएनयू की वर्षा आंनद समेत कई शिक्षक और बुद्धिजीवी मौजूद रहे।

इप्टा की इस ‘ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा’’ का असल उद्देश्य स्वाधीनता संग्राम के गर्भ से निकले स्वतंत्रता, समता, न्याय और बंधुत्व के उन मूल्यों के तलाश की कोशिश है, जो आजकल नफरत, वर्चस्व और दंभ की खाई में डूब-सा गया है। यह यात्रा उन तमाम शहीदों, समाज सुधारकों और भक्ति आंदोलन और सूफीवाद के पुरोधाओं का स्मरण हैं, जिन्होंने भाषा, जाति, लिंग और धार्मिक पहचान से इतर मुनष्यता की मुक्ति और लोगों से प्रेम को अपना एकमात्र आदर्श घोषित किया। साथ ही यह यात्रा नई पीढ़ी को जागरूक करने की भी एक ज़रिया है। ये सांस्कृतिक यात्रा छत्तीसगढ़ के रायपुर से चली थी, जो मावनवता को अमन और प्रेम की एक नई राह दिखाते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश के तमाम शहरों में होते हुए ये यात्रा 22 मई को मध्यप्रदेश में समाप्त होगी।

आपको बता दें कि इप्टा की इस शानदार मुहिम, इस अभियान को लेखकों, सांस्कृति संगठनों प्रगतिशील लेखक संघ(प्रलेस), जनवादी लेखक संघ(जलेस), जन संस्कृति मंच(जसम), दलित लेखक संघ(दलेस) और जन नाट्य मंच(जनम) ने भी अपना सहयोग दिया है।  इतना ही नहीं इप्टा की इस यात्रा को स्वतंत्र और सच लिखने वाले पत्रकारों समेत देशभर के कलाकारों का बखूबी समर्थन मिला है।

Dhaai Akshar Prem Ke
IPTA
Indian Public Theater Association
75 years of Independence
cultural tour
Hate Crime
Hate Speeches

Related Stories

प्रेम, सद्भाव और इंसानियत के साथ लोगों में ग़लत के ख़िलाफ़ ग़ुस्से की चेतना भरना भी ज़रूरी 

इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा यूपी में: कबीर और भारतेंदु से लेकर बिस्मिल्लाह तक के आंगन से इकट्ठा की मिट्टी

समाज में सौहार्द की नई अलख जगा रही है इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा


बाकी खबरें

  • uttarakhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखंड चुनाव: थपलियालखेड़ा सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा से वंचित
    02 Feb 2022
    उत्तराखंड राज्य बने लगभग 22 साल हो गए हैं, पर आज भी अंतर्राष्ट्रीय सीमा और पहाड़ी इलाकों में जरुरी सुविधा से लोग वंचित हैं। गांव के लोगों को ज़रूरी सुविधाओं के लिए नेपाल पर निर्भर होना पड़ता है।
  • ASEEM
    अनिल सिन्हा
    यूपी के चुनाव मैदान में आईपीएस अफसरः क्या नौकरशही के इस राजनीतिकरण को रोकना नहीं चाहिए?
    02 Feb 2022
    ईडी के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह और कानपुर के पुलिस कमिश्नर असीम अरुण को टिकट देकर भाजपा ने निश्चित तौर पर नौकरशाही की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
  • सोनिया यादव
    जेंडर बजट में कटौती, मोदी सरकार के ‘अमृतकाल’ में महिलाओं की नहीं कोई जगह
    02 Feb 2022
    महामारी के बाद की स्थिति में भी महिलाओं की जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने के लिए सरकार कोई खास पहल करती दिखाई नहीं दे रही। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जेंडर बजट का हिस्सा कुल बजट का केवल 4.4 प्रतिशत था, जो…
  • Myanmar
    चेतन राणा
    तख़्तापल्ट का एक वर्ष: म्यांमार का लोकतंत्र समर्थक प्रतिरोध आशाजनक, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एकजुटता डगमग
    02 Feb 2022
    आसियान, भारत और चीन ने म्यांमार में सैन्य तख्तापलट की न केवल निंदा की है, बल्कि अलग-अलग स्तर पर सैन्य सत्ता को वैधता भी प्रदान की है। इनकी प्रेस विज्ञप्तियों में वहां लोकतंत्र के प्रति सामान्य…
  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध
    02 Feb 2022
    पिछले दिनों झारखंड सरकार के कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्रदेश के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों की नियुक्तियों के लिए भोजपुरी, मगही व अंगिका भाषा को धनबाद और बोकारो जिला की स्थानीय भाषा का दर्जा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License