NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
भारत
राजनीति
क्या केजरीवाल सरकार की नई औद्योगिक नीति लघु उद्योगों और श्रमिकों के लिए घातक है?
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में अब से किसी भी नए औद्योगिक क्षेत्र के अंदर केवल हाईटेक इंडस्ट्री और सर्विस इंडस्ट्री लग सकेंगी। मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री लगाने की इजाजत नहीं होगी। इस निर्णय के बाद दिल्ली का प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र खत्म होगा और दिल्ली में साफ सुथरी और ग्रीन इंडस्ट्री लगेगी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Nov 2020
 अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि दिल्ली में अब से किसी भी नए औद्योगिक क्षेत्रों के अंदर केवल हाईटेक इंडस्ट्री और सर्विस इंडस्ट्री लग सकेंगी। मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री (विनिर्माण उद्योग) लगाने की इजाजत नहीं होगी।

उन्होंने दावा किया कि इस निर्णय के बाद दिल्ली का प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र खत्म होगा और दिल्ली में साफ सुथरी और ग्रीन इंडस्ट्री लगेगी। परन्तु इससे बड़े स्तर पर छोटे उद्योगों और उनके श्रमिकों को प्रभावित करने की संभावना जताई जा रही है।

बता दें कि केंद्रीय आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के तहत 'उद्योग' की परिभाषा को बदलने के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद उन्होंने यह घोषणा की है।

इसके अनुसार औद्योगिक क्षेत्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) समूहों और घरानों के साथ-साथ डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड एकाउंटेंट जैसे पेशेवरों को अपने काम धंधे लगाने की छूट होगी। जिसमे सरकार कर और भूमि दरों में रियायतें प्रदान भी करेगी। मौजूदा निर्माण उद्योग को सेवाओं के क्षेत्र में बदलने का विकल्प दिया जाएगा। इससे सवाल उठते हैं कि क्या प्रस्तावित उपाय प्रदूषण पर अंकुश लगाने में मदद कर सकता है और इसका राजधानी की कामकाजी आबादी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

नारायणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आरएन गुप्ता ने न्यूज़क्लिक को बताया कि विनिर्माण इकाइयों को सेवाओं के क्षेत्रो में बदलने का निर्णय इतना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, “हम देशव्यापी लॉकडाउन के बाद पिछले छह महीनों से वास्तव में अच्छी स्थिति में नहीं हैं। हम अभी भी उससे उबरने की कोशिश कर रहे हैं। नरेला और ओखला में उद्योग कथित तौर पर मजदूरों की कमी और कम मांग के साथ लॉकडाउन के बाद से अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उन्होंने दिल्ली सरकार से बिजली बिल माफी जैसी मदद करने के लिए कहा है ताकि उन्हें इस कठिन समय में मदद मिल सके।”

गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में छोटे उद्योगों के लिए शिफ्टिंग एक बहुत जटिल काम होगा। उन्होंने कहा, “सेवाओं के लिए संक्रमण का मतलब है कि मोटा निवेश, प्रौद्योगिकी और मैनपॉवर की आवश्यकता होगी। यह भी याद रखना चाहिए कि दिल्ली में ज्यादातर लघु उद्योग हैं और बड़े उद्योग पड़ोसी राज्यों में स्थानांतरित हो चुके हैं।”

हजारों श्रमिकों के अनिश्चित भविष्य और मौजूदा उद्योगों से जुड़े स्व-रोज़गारी लोगों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने पूछा, "आप इन लोगों के साथ क्या करने जा रहे हैं?"

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इनफॉर्मल सेक्टर के असिस्टेंट प्रोफेसर अविनाश कुमार के अनुसार प्रस्तावित नीतियों में आम आदमी पार्टी की राजनीति है। NewsClick से बात करते हुए उन्होंने कहा, “आम आदमी पार्टी खुद को शहरी आधारित पार्टी के रूप में देखती है जहाँ अधिक सौंदर्यीकरण और शहरीकरण पर अधिक ध्यान दिया जाता है। हालांकि, अगर हम दिल्ली के इतिहास को देखें, तो यह निश्चित रूप से इस शहर की प्रकृति नहीं है।”

उन्होंने कहा “सबसे पहले ऑफिस और आईटी पार्क केवल सीमित रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। विनिर्माण उद्योगों को स्थानांतरित करने का कदम प्रदूषण से निपटने में सक्षम नहीं होगा, लेकिन श्रमिकों को प्रभावित जरूर करेगा। दिल्ली सरकार की नई नीति पहले से ही संघर्षरत प्रवासी श्रमिकों को और परेशान करेगी।”

वहीं, मज़दूर संगठन सीटू दिल्ली इकाई के सचिव सिद्धेश्वर शुक्ला के अनुसार दिल्ली में उत्पादन इकाइयाँ अनुमानित 10 लाख श्रमिकों को रोजगार देती हैं।

उन्होंने कहा, “कारखानों को विभिन्न कौशल आधारित कारीगर और कार्यालयों में काम करने वाले लोगों की आवश्यकता होती है। यदि दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तावित संक्रमण होता है, तो विस्थापित श्रमिकों को कौन नौकरी देगा? श्रमिकों को महामारी और उसके बाद के लॉकडाउन में सबसे खराब हालत में देखा गया है। वे अपने कर्ज का भुगतान करने के लिए गहने और घर बेच रहे हैं क्योंकि उन्हें कई-कई जगह छह महीने तक नियोक्ताओं द्वारा भुगतान नहीं किया गया है।”

शुक्ला ने प्रदूषण को रोकने के लिए नीति की प्रभावशीलता पर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने पूछा “जहां तक प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों का सवाल है, मुझे लगता है कि केवल दो औद्योगिक क्षेत्र हैं जो रिंग रोड और मुख्य शहर के दायरे में आते हैं। कई इकाइयाँ शहर के बाहरी इलाके में स्थित हैं। अब, जब आप उन्हें पानीपत या सोनीपत में स्थानांतरित करना चाहते हैं, तब भी क्या गारंटी है कि उनका प्रदूषण दिल्ली तक नहीं पहुंचेगा? ”

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार प्रदूषण को रोकने में वास्तव में रुचि रखती है, तो उसे मध्यम वर्ग को कारों का कम उपयोग करने और सार्वजनिक परिवहन में स्थानांतरित करने का निर्देश देना चाहिए ,लेकिन कोई इसपर नहीं बोलेगा।

आईटी मामलों के जानकार और सलाहकार बप्पा सिन्हा के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र आईटी कंपनियों को अपने औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित करने के लिए आकर्षित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन एक शहर से दूसरे शहर में ऐसी कंपनियों का प्रवास करना उस प्रोत्साहन पर निर्भर करेगा जो दिल्ली सरकार उन्हें प्रदान करेगी।

उन्होंने कहा, “आईटी उद्योग को काम करने के लिए मूल रूप से सस्ती अचल संपत्ति यानि जमीन और बिल्डिंग आदि और प्रतिभा पूल की आवश्यकता होती है। वर्तमान में, दिल्ली में अचल संपत्ति इतनी महंगी है कि आईटी उद्योगों ने खुद को गुड़गांव, फरीदाबाद और नोएडा में स्थानांतरित करना उचित समझा है। अब, इन शहरों में आईटी उद्योगों का एक मौजूदा आधार है और अब वे सब माइग्रेट करेंगे यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी।”

Arvind Kejriwal
Industrial policy
Kejriwal government
Manufacturing industry
Delhi Pollution
Air Pollution
CITU

Related Stories

बिहार की राजधानी पटना देश में सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर

दिल्ली से देहरादून जल्दी पहुंचने के लिए सैकड़ों वर्ष पुराने साल समेत हज़ारों वृक्षों के काटने का विरोध

साल 2021 में दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी थी : रिपोर्ट

विश्व जल दिवस : ग्राउंड वाटर की अनदेखी करती दुनिया और भारत

देहरादून: सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के कारण ज़हरीली हवा में जीने को मजबूर ग्रामीण

हवा में ज़हर घोल रहे लखनऊ के दस हॉटस्पॉट, रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तैयार किया एक्शन प्लान

हर नागरिक को स्वच्छ हवा का अधिकार सुनिश्चित करे सरकार

दिल्ली ही नहीं गुरुग्राम में भी बढ़ते प्रदूषण से सांसों पर संकट

वोट बैंक की पॉलिटिक्स से हल नहीं होगी पराली की समस्या

वायु प्रदूषण की बदतर स्थिति पर 5 राज्यों की बैठक, गोपाल राय ने दिया 'वर्क फ़्रॉम होम' का सुझाव


बाकी खबरें

  • poverty
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता
    11 Mar 2022
    राष्ट्रवाद और विकास के आख्यान के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं ने रोटी और स्वाधीनता के विमर्श को रोटी बनाम स्वाधीनता बना दिया है।
  • farmer
    सुरेश गरीमेल्ला
    सरकारी इंकार से पैदा हुआ है उर्वरक संकट 
    11 Mar 2022
    मौजूदा संकट की जड़ें पिछले दो दशकों के दौरान अपनाई गई गलत नीतियों में हैं, जिन्होंने सरकारी कंपनियों के नेतृत्व में उर्वरकों के घरेलू उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया और आयात व निजी क्षेत्र द्वारा उत्पादन…
  • सोनिया यादव
    पंजाब : कांग्रेस की हार और ‘आप’ की जीत के मायने
    11 Mar 2022
    कांग्रेस को जो नुक़सान हुआ, उसका लगभग सीधा लाभ 'आप' को मिला। मौजूदा वक़्त में पंजाब के लोगों में नाराज़गी थी और इस कारण लोगों ने बदलाव को ही विकल्प मानते हुए आम आदमी पार्टी पर भरोसा किया है।
  • विजय विनीत
    यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !
    11 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में विपक्ष के पास मुद्दों की भरमार रहने के बावजूद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव मोदी-योगी का जादू बेअसर नहीं कर सके। बार-बार टिकटों की अदला-बदली और लचर रणनीति ने स
  • LOOSERES
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: कई दिग्गजों को देखना पड़ा हार का मुंह, डिप्टी सीएम तक नहीं बचा सके अपनी सीट
    11 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की वापसी हो गई है, हालांकि इस प्रचंड जीत के बावजूद कई दिग्गज नेता अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License