NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
खुदरा महंगाई दर में रिकॉर्ड उछाल से आम लोगों पर महंगाई की मार पिछले 6 महीने में सबसे ज़्यादा
महंगाई की मार लगातार पड़ती आ रही है। लेकिन फिर भी यह चर्चा के केंद्र में इसलिए नहीं उभरती, क्योंकि महंगाई की मार वह वर्ग नहीं सहन करता जो टीवी पर नियंत्रण रखता है।
अजय कुमार
14 Jan 2022
poverty
फ़ोटो साभार: सोशल मीडिया

साल 2021 के दिसंबर महीने के खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी हुए हैं। नेशनल स्टैटिसटिकल ऑफिस के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने की खुदरा महंगाई दर  5.59% पर थी। यह पिछले छह महीनों में खुदरा महंगाई दर का सबसे ऊंचा स्तर था। खुदरा महंगाई दर का यह आंकड़ा इतना ऊंचा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित 6% की महंगाई की सहनशील सीमा को छू रहा है।
सरल शब्दों में समझें तो यह कि अगर खुदरा महंगाई दर 6% को पार कर जाती है तो इसका मतलब है कि पानी सर से ऊपर निकल गया है। महंगाई मालिक को मुनाफा देने की बजाय मालिक को घाटा देने की तरफ बढ़ती जा रही है। अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह साबित होती जा रही है।

यह तो खुदरा महंगाई दर को लेकर के तकनीकी बातचीत हुई अब थोड़ा इस तकनीकी बात को तोड़कर समझते हैं कि यह बात भी समझ में आए कि इस आंकड़ें का हमारे और आपके जैसे आम लोगों के लिए क्या मतलब है?

खुदरा महंगाई दर उन सामानों और सेवाओं की कीमत के आधार पर निकाली जाती है जिसे ग्राहक सीधे खरीदता है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार कुछ सामानों और सेवाओं के समूह के कीमतों का लगातार आकलन कर खुदरा महंगाई दर निकालती है। सरकार ने इसके लिए फार्मूला फिक्स किया है। जिसके अंतर्गत तकरीबन 45% भार भोजन और पेय पदार्थों को दिया है और करीबन 28 फ़ीसदी भार सेवाओं को दिया है। यानी खुदरा महंगाई दर का आकलन करने के लिए सरकार जिस समूह की कीमतों पर निगरानी रखती है उस समूह में 45% हिस्सा खाद्य पदार्थों का है, 28 फ़ीसदी हिस्सा सेवाओं का है। यह दोनों मिल कर के बड़ा हिस्सा बनाते हैं। बाकी हिस्से में कपड़ा जूता चप्पल घर इंधन बिजली जैसे कई तरह के सामानों की कीमतें आती है।।

अब यहां समझने वाली बात यह है कि भारत के सभी लोगों के जीवन में खाद्य पदार्थों पर अपनी आमदनी का केवल 45% हिस्सा खर्च नहीं किया जाता है। साथ में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सेवाओं पर अपनी आय का केवल 28% हिस्सा नहीं खर्च किया जाता है। जो सबसे अधिक अमीर हैं जिनकी आमदनी करोड़ों में है, वे अपनी कुल आमदनी का जितना खाद्य पदार्थों पर खर्च करते हैं वह उनके कुल आमदनी का रत्ती बराबर हिस्सा होता है।

लेकिन भारत में 80% कामगारों की आमदनी महीने की ₹10,000 से भी कम है। इनके घर में खाद्य पदार्थों पर कुल आय का 45% से अधिक हिस्सा खर्च होता है। इनके घर में बच्चों के पढ़ाई लिखाई और दवाई के इलाज पर 28% से अधिक हिस्सा खर्च होता है। तकरीबन 80 से 90% हिस्सा दो वक्त की रोटी और अपने बच्चे की सरकारी स्कूल में पढ़ाई पर ही खर्च हो जाता होगा।

मतलब यह है कि खुदरा महंगाई भले 6 महीने के सबसे ऊंचे स्तर 5.59 फ़ीसदी पर पहुंच गई है। तकनीकी तौर पर कीमतें 2020 के दिसंबर के मुकाबले 2021 के दिसंबर महीने में 5.59% अधिक दर्ज की जाती होंगी। लेकिन इसका असर भारत में काम में लगी आबादी के 80% हिस्से पर बहुत ज्यादा पड़ रही होगी। उनके लिए घर चलाना बहुत अधिक मुश्किल हो गया होगा। अपने बच्चों को पढ़ाना लिखाना और बीमारी पर इलाज कराना बहुत ज्यादा कठिन हो गया होगा।

महंगाई की मार लगातार पड़ते आ रही है। लेकिन फिर भी यह चर्चा के केंद्र में इसलिए नहीं उभरता क्योंकि महंगाई की मार वह वर्ग नहीं सहन करता जो टीवी पर नियंत्रण रखता है। टीवी और अखबार के बहस में हिस्सा लेता है। महंगाई की मार आमदनी के पायदान पर सबसे नीचे मौजूद लोगों पर पड़ती है। उनके घरों में खर्चे की डायरी के पन्ने बार-बार पलटे जाते हैं। दूध अंडा हरी सब्जी की उपभोग पर कटौती की जाती है। कॉपी किताब कलम पेंसिल पर कम से कम खर्च करने की सलाह दी जाती है। प्रार्थना की जाती है कि घर में कोई बीमार ना पड़े। महंगाई का डर नीचे मौजूद लोगों को सताता है। वह इस डर के भीतर ही जीते हैं।

इस डर के ऊपर करोना की तीसरी लहर तो कहर बनकर टूट गई होगी। भीषण बेरोजगारी और बेकारी लगातार बढ़ते जा रही है।

बेरोजगारी भी बढ़ रही है, कंपनियों की उत्पादन क्षमता भी कम हो रही है और महंगाई भी अधिक बढ़ रही है।यह अर्थव्यवस्था के कुचक्र का सबसे नायाब उदाहरण है। यह बताता है कि सरकार अपने कामकाज में पूरी तरह से फेल हुई है।

इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन का कहना है कि दुनिया का औसत लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 57% का है। लेकिन भारत का औसत लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 40% के आसपास टिका है। उत्तर प्रदेश का तो 32% पर पहुंच गया है। इसका मतलब यह है कि ढेर सारे लोग जीवन की सबसे बुरी बीमारी बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। ढेर सारे लोग बेकारी की परेशानी से इतना निराश है की नौकरी की तलाश करना ही बंद कर दिया है। उन पर सोचिए कि महंगाई की कितनी बड़ी मार पड़ती होगी?

सरकार को लगता है कि वह लोगों की जेब में चंद पैसा डाल कर और चंद सुविधाएं पहुंचा कर वोट हासिल कर लेगी। लेकिन यही चालबाजी अर्थव्यवस्था पर लागू नहीं होती है। जीवन स्तर को बढ़ाने पर लागू नहीं होती। अगर कायदे से देखा जाए तो नरेंद्र मोदी सरकार अर्थव्यवस्था के हर पहलू पर फेल हुई है। भारतीय अर्थव्यवस्था आज अजीब हालत में पहुंच गई है। मांग की कमी है। रोजगार नहीं है। लेकिन महंगाई बढ़ रही है।

अर्थव्यवस्था के यह सारे कलपुर्जे मीडिया को पैसा खिलाकर अपने लिए प्रोपेगेंडा फैलाने से ठीक नहीं होते हैं। इनके लिए गहरे तौर पर काम करना होता है। लंबा सोच कर काम करना होता है। भारत से मनरेगा जैसी योजना हटा दी जाए तो बेरोजगारी का आलम इतना खतरनाक है कि बढ़ती हुई महंगाई कईयों किस जिंदगी को लील ले। सरकार को लग रहा है कि वह सब कुछ मैनेज कर लेगी लेकिन अर्थव्यवस्था का कुचक्र इतना गहरा होता जा रहा है कि हर वक्त आम लोगों पर वह कहर बनकर टूटता है। खुदरा महंगाई दर इसका एक उदाहरण भर है। थोक महंगाई दर पिछले कई महीनों से दहाई अंक के ऊपर बनी हुई है, यानी महंगाई की मार आने वाले वक्त में कम नहीं होने वाली।

poverty
Inflation
Food Inflation
Rising inflation
Retail inflation
National Statistical Office

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

गतिरोध से जूझ रही अर्थव्यवस्था: आपूर्ति में सुधार और मांग को बनाये रखने की ज़रूरत

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान


बाकी खबरें

  • मालिनी सुब्रमण्यम
    छत्तीसगढ़ : युद्धग्रस्त यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों ने अपने दु:खद अनुभव को याद किया
    09 Mar 2022
    कई दिनों की शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलने के बाद, अंततः छात्र अपने घर लौटने कामयाब रहे।
  • EVM
    श्याम मीरा सिंह
    मतगणना से पहले अखिलेश यादव का बड़ा आरोप- 'बनारस में ट्रक में पकड़ीं गईं EVM, मुख्य सचिव जिलाधिकारियों को कर रहे फोन'
    08 Mar 2022
    पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव परिणामों में गड़बड़ी की आशंकाओं के बीच अपनी पार्टी और गठबंधन के कार्यकर्ताओं को चेताया है कि वे एक-एक विधानसभा पर नज़र रखें..
  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    मालिक महान है बस चमचों से परेशान है
    08 Mar 2022
    भारत एक मौज के इस एपिसोड में संजय राजौरा आज बात कर रहे हैं Ukraine और Russia के बीच चल रहे युद्ध के बारे में, के जहाँ एक तरफ स्टूडेंट्स यूक्रेन में अपनी जान बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार से सवाल…
  •  DBC
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों की हड़ताल 16वें दिन भी जारी, कहा- आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए
    08 Mar 2022
    DBC के कर्मचारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।  ये कर्मचारी 21 फरवरी से लगातार हड़ताल पर हैं। इस दौरान निगम के मेयर और आला अधिकारियो ने इनकी मांग पूरी करने का आश्वासन भी दिया। परन्तु…
  • Italy
    पीपल्स डिस्पैच
    इटली : डॉक्टरों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के ख़िलाफ़ हड़ताल की
    08 Mar 2022
    इटली के प्रमुख डॉक्टरों ने 1-2 मार्च को 48 घंटे की हड़ताल की थी, जिसमें उन्होंने अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग की और स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के ख़िलाफ़ चेतवनी भी दी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License