NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
इराक़ : विरोध स्थलों पर लिंग विभाजन के ख़िलाफ़ हज़ारों महिलाओं का मार्च
महिलाओं ने यह प्रदर्शन तब किया जब इराक़ी धर्मगुरु मुक्तदा अल सद्र ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों में लिंग अलगाव की पहल की।
पीपल्स डिस्पैच
14 Feb 2020
इराक़

सुरक्षा बलों और सशस्त्र मिलिट्री द्वारा सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ की गई हिंसा और हत्याओं के विरोध में देश भर की सैकड़ों इराक़ी महिलाओं ने प्रदर्शनों में भाग लिया। हिंसा के विरोध के अलावा, इराक़ी महिलाओं ने समानता की भी मांग की और इराक़ी मर्दों के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लेने के अपने अधिकार पर भी ज़ोर दिया। वे इराक़ी शिया धर्मगुरू मुक़तदा अल-सदर द्वारा दिये गए एक बेतुके बयान  के बाद सड़कों पर उतरीं, जिसमें सद्र ने कहा था कि विरोध प्रदर्शनों में महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग रहना चाहिए।

सद्र का यह दक़ियानूसी निर्देश उनके ऑफ़िशियल ट्विटर अकाउंट पर भी शेयर किया गया था। इसमें प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन स्थल पर बने टेंट में ना मिलने और साथ ना बैठने के लिए आगाह किया गया था। प्रदर्शन शुरू होने से ठीक पहले सद्र ने ट्विटर के माध्यम से प्रदर्शनकारियों पर फिर निशाना साधा और उन पर "नग्नता व्याप्त, संकीर्ण, शराबी, अभद्रता, ऐय्याशी" करने जैसे इल्ज़ाम लगाए, साथ ही उन्हें काफ़िर भी कहा। सद्र ने यह भी कहा कि "ईरान शिकागो बनता जा रहा है", शिकागो के बारे में सद्र का कहना है कि अमेरिका के इस शहर में होमोसेक्सुयलिटि जैसा नैतिक ढीलापन है। इराक़ी जनता ने सोशल मीडिया पर दक़ियानूसी धर्मगुरु के बयानों की आलोचना की। कुछ ने व्यंग्यात्मक तस्वीरें भी पोस्ट कीं जिसमें मर्द और औरत एक दूसरे के कपड़े पहने हुए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारी महिलाओं के समर्थन में #SheIsTheRevolution और #DaughtersOfTheNation जैसे हैशटैग भी चलाये।

यह प्रदर्शन इराक़ के मुख्य शहरों जैसे बग़दाद, बसरा, नसीरियाह, नजफ़ और कर्बला और अन्य शहरों में हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में महिलाओं ने अंग्रेज़ी और अरबी में पोस्टर बनाए थे, जिन पर "मर्द-औरत को अलग करने से अच्छा है, कि धर्म और सरकार को अलग किया जाए" , "रोको, विद्रोह करो, और मुस्कुराओ क्योंकि तुम राष्ट्र हो, क्रांति तुमसे ही आएगी" जैसी बातें लिखी थीं। उन्होंने "महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव बंद करो" , "लैंगिक भेदभाव बंद करो" जैसे नारे भी लगाए। प्रदर्शन में आए मर्दों ने भी महिलाओं के समर्थन में हाथ पकड़ कर उनके दोनों तरफ़ बैरियर बनाए।

सरकारी हिंसा, अक्षमता, बेरोज़गारी, ग़रीबी और बुनियादी सेवाओं की कमी के ख़िलाफ़ पिछले साल 1 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से 200 से अधिक लोगों के घायल होने के साथ, सरकारी हिंसा में 600 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए हैं।

 

iraqi women
iraq protests
gender discrimination
iraqi sadr
conservative sadr

Related Stories

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: महिलाओं के संघर्ष और बेहतर कल की उम्मीद

बढ़ती लैंगिक असमानता के बीच एक और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

रश्मि रॉकेट : महिला खिलाड़ियों के साथ होने वाले अपमानजनक जेंडर टेस्ट का खुलासा

प्रेरक पहलः बीएचयू में दलित महिला प्रोफेसर ने हटवाया लैंगिक नाइंसाफ़ी का ठप्पा

छत्तीसगढ़ की वीडियो की सच्चाई और पितृसत्ता की अश्लील हंसी

जेंडर के मुद्दे पर न्यायपालिका को संवेदनशील होने की ज़रूरत है!

कोरोना और कॉलेज छात्राओं की घर वापसी

क्या दहेज प्रथा कभी खत्म हो पाएगी?

बोलती लड़कियां, अपने अधिकारों के लिए लड़ती औरतें पितृसत्ता वाली सोच के लोगों को क्यों चुभती हैं?


बाकी खबरें

  • Olaf Scholz
    एम. के. भद्रकुमार
    मास्को की नपी-तुली कूटनीति काम कर रही है
    21 Feb 2022
    यूक्रेन पर रूसी हमले की संभावना सही मायने में कभी थी ही नहीं। हालांकि, अगर यूक्रेनी सेना अलगाववादी ताक़तों पर हमला करती है, तो डोनबास क्षेत्र में मास्को के हस्तक्षेप का होना सौ फ़ीसदी तय है।
  • sultanpur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनावः सुल्तानपुर चीनी मिल राज्य सरकार की अनदेखी से हुई जर्जर
    21 Feb 2022
    "सुल्तानपुर चीनी मिल के सही ढ़ंग से न चलने की वजह से इस इलाके के गन्ने की उपज प्राइवेट क्रशर मशीन में किसान मजबूरन दे देते हैं जहां से उनको गन्ने की कीमत आधी या दो-तिहाई ही मिल पाती है।"
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में पीएम मोदी ने पार की चुनावी मर्यादा, जागो चुनाव आयोग
    21 Feb 2022
    आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अखिलेश यादव पर साधे गए निशाने पर बात की और उसको हास्यास्पद बताया। उसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी टिप्पणी की कैसे एक…
  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव चौथा चरण: लखीमपुर हिंसा और गोवंश से फ़सलों की तबाही जैसे मुद्दे प्रमुख
    21 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में तीन चरणों के चुनावों के बाद अब चौथे चरण के लिए जंग शुरू हो गई है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद अब अवध की चुनावी परिक्रमा लगातार जारी है। लेकिन चौथे चरण में अवध की वो सीटे भी हैं जहां…
  • Ballia
    विजय विनीत
    बलिया: ''सबके वोटे के चिंता बा, चुनाव बाद रसड़ा चीनी मिल के बात केहू ना करे ला''
    21 Feb 2022
    देसी चीनी और गुड़ के लिए मशहूर रसड़ा, कभी ''रसदा'' के नाम से जाना जाता था। रसड़ा इलाके में कई घंटे गुजारने के बाद हमें इस बात का एहसास हो चला था कि रसड़ा में हर आदमी की जुबां पर सिर्फ़ एक ही सवाल है…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License