NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जम्मू-कश्मीर : डोमिसाइल क़ानून पर टिप्पणी को लेकर ट्रेड यूनियन नेता निलंबित
चार दिन पहले कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने कहा था कि नए डोमिसाइल क़ानून को लेकर सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके लोगों को उकसाने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ वे कार्रवाई शुरू करेंगे।
सागरिका किस्सू
08 Apr 2020
जम्मू-कश्मीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि वे डोमिसाइल क़ानून के मामले में सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को खंगालेंगे और शरारती तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करेंगे। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) विभाग के सहायक लाइनमैन ताहिर अहमद शॉल को कथित रूप से"आपत्तिजनक पोस्ट" लिखने के लिए निलंबित कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर लाइनमैन ने लिखा था कि "क्या डोमिसाइल क़ानून अल्ताफ बुखारी और उनके साथियों के लिए अप्रैल फूल का गिफ्ट है?" कथित तौर पर, ये निलंबन आदेश पीएचई राजौरी के एक्जक्यूटिव इंजीनियर द्वारा जारी किया गया है। शॉल ट्रेड यूनियन नेता भी है और राजौरी में पीएचई कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन में अक्सर सबसे आगे देखा जाता है।

चार दिन पहले कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने कहा था कि वे सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके नए डोमिसाइल क़ानून को लेकर लोगों को उकसाने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करेंगे। उन्होंने कहा था कि "गिरफ्तारियां संभव है।" एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर न्यूजक्लिक से बातचीत में कहा, "यह विक्षिप्त है। हम बाहर निकल कर विरोध नहीं कर सकते। हम अपनी आवाज़ नहीं उठा सकते। अब, हम सोशल मीडिया पर भी अपने विचार व्यक्त नहीं कर सकते। यह क्या है? क्या वे हमसे डरते हैं? या वे जानते हैं कि वे गलत कर रहे हैं। यह उत्पीड़न है।”

इस बीच, ताहिर शॉल ने ऐसी किसी भी बात को लिखने से इनकार किया है। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया कि उनका फेसबुक अकाउंट कथित तौर पर हैक कर लिया गया था और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनकी ओर से क्या पोस्ट किया जा रहा है। शॉल ने कहा, "मैंने उन्हें यह भी बताया कि मेरा अकाउंट हैक हो गया है लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी।" आदेश में लिखा है, "शॉल के मामले को लेकर जांच चल रही है इसलिए उनके द्वारा सोशल मीडिया पर दुर्व्यवहार के लिए निलंबन किया गया है।"

जम्मू-कश्मीर सरकारी कर्मचारी (आचरण) नियम, 1971 के नियम 13 के उपनियम (3) के तहत शॉल को निलंबित कर दिया गया है। इस नियम के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी सरकार की नीति या सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की लिखित या अन्य तरीकों से सार्वजनिक तौर पर या संघ की बैठकों या चर्चाओं में आलोचना नहीं करेगा और न ही वह ऐसी चर्चाओं और आलोचनाओं में किसी भी तरीके से हिस्सा लेगा।

शॉल इस निलंबन आदेश को अपने साथ बदला लेने के प्रयास के रूप में देखते है। हाल ही में, उन्होंने राजौरी में 700 पीएचई के दिहाड़ी श्रमिकों के लंबित वेतन की मांग के लिए एक आंदोलन किया था। उन्होंने कहा, “इन कर्मचारियों को भुगतान किए पांच महीने हो चुके हैं। उनमें से अधिकांश 40 वर्ष से ज़्यादा उम्र के हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन पीएचई विभाग को दे दिया है और बदले में उनके पास अपने परिवार को खिलाने पिलाने के लिए भी पैसे नहीं है।"

पीएचई में एक्जक्यूटिव इंजीनियर मुश्ताक ने न्यूज़क्लिक को बताया, “शॉल पहले विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई करते रहे हैं। वह सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने के लिए कार्यकर्ताओं को उकसाते रहे है। श्रमिक सड़कों पर हैं और अब, यह फेसबुक पोस्ट लोगों को भड़काने का एक और प्रयास था। इसलिए उच्च अधिकारियों को निर्णय लेना पड़ा।"

फरवरी महीने में राजौरी में विरोध स्थल पर एक पीएचई श्रमिक की मौत ने प्रदर्शनकारियों में गुस्सा पैदा कर दिया था। कोटदारदा गांव का रहने वाले चालीस वर्षीय मोहम्मद शाबिर राजौरी शहर में पीएचई कार्यालय के बाहर धरने के दौरान गिर गया था। उसे पास के अस्पताल ले जाने पर मृत घोषित कर दिया गया। इसके तुरंत बाद प्रदर्शनकारियों ने शबीर के शव को बाहर निकाला और प्रशासन के ख़िलाफ़ नारेबाजी करते हुए मुख्य सड़क को अवरुद्ध कर दिया।

शॉल ने कहा, “वे केवल विरोध कर सकते हैं। वे और क्या कर सकते हैं? उनकी बातों को अनसुनी कर दी गई है। वे गरीब लोग हैं। यहां तक कि अगर वे मर जाते हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।”

लंबे समय से पीएचई श्रमिक लंबित वेतन और अपनी नौकरियों को नियमित करने सहित अपनी लंबे समय से मांगों को पूरा नहीं करने के लिए प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे हैं। अपनी मांगों को उठाने के लिए प्रदर्शनकारी श्रमिकों को पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

दिहाड़ी श्रमिकों को उनके मेहनताने के तौर पर रोजाना225 रुपये देने का प्रावधान है। हालांकि, श्रमिकों का कहना है कि उन्हें ये मामूली रकम भी नहीं मिल पाया है। केंद्र सरकार वेतन अधिनियम के तहत 520 रुपये दिहाड़ी देने का प्रावधान है जो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं है। पीएचई श्रमिक ने कहा, “प्रशासनिक ढांचे के बदलाव के बाद हमें वेतन अधिनियम का लाभ मिलने का उम्मीद था लेकिन यह अभी भी लागू नहीं हुआ है। सरकार डोमिसाइल कानूनों और अन्य मुद्दों को लेकर चिंतित है लेकिन जम्मू-कश्मीर के ग़रीब लोगों की परवाह नहीं है।”

प्रदर्शनकारी पीएचई श्रमिक अपनी दुर्दशा को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए बार बार दुख जताया। एक प्रदर्शनकारी ने पहले न्यूज़क्लिक को बताया था, “राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के नेताओं ने सभी मांगों को पूरा करने का वादा किया था। हालांकि, चुनाव जीतने के बाद, वे उन वादों को भूल गए। बार-बार याद दिलाने के बाद हमारे पास सरकार के खिलाफ विरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।”

अंग्रेजी में लिखे गए मूल आलेख को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

J&K PHE Worker and Trade Union Leader Suspended for FB Post on Domicile Law

PHE
domicile law
Jammu and Kashmir
Tahir Shawl
JK Police
J&K PHE Department
freedom of expression
Attack on freedom of expression

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद

जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती

जम्मू-कश्मीर परिसीमन से नाराज़गी, प्रशांत की राजनीतिक आकांक्षा, चंदौली मे दमन


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामले घटकर 10 लाख से नीचे आए 
    08 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 67,597 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 9 लाख 94 हज़ार 891 हो गयी है।
  • Education Instructors
    सत्येन्द्र सार्थक
    शिक्षा अनुदेशक लड़ रहे संस्थागत उत्पीड़न के ख़िलाफ़ हक़ की लड़ाई
    08 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को आश्वस्त किया था कि 2019 तक उन्हें नियमित कर दिया जायेगा। लेकिन इस वादे से भाजपा पूरी तरह से पलट गई है।
  • Chitaura Gathering
    प्रज्ञा सिंह
    यूपी चुनाव: मुसलमान भी विकास चाहते हैं, लेकिन इससे पहले भाईचारा चाहते हैं
    08 Feb 2022
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गांव के मुआयने से नफ़रत की राजनीति की सीमा, इस इलाक़े के मुसलमानों की राजनीतिक समझ उजागर होती है और यह बात भी सामने आ जाती है कि आख़िर भाजपा सरकारों की ओर से पहुंचायी जा…
  • Rajju's parents
    तारिक़ अनवर, अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव : गांवों के प्रवासी मज़दूरों की आत्महत्या की कहानी
    08 Feb 2022
    महामारी की शुरूआत होने के बाद अपने पैतृक गांवों में लौटने पर प्रवासी मज़दूरों ने ख़ुद को बेहद कमज़ोर स्थिति में पाया। कई प्रवासी मज़दूर ऐसी स्थिति में अपने परिवार का भरण पोषण करने में पूरी तरह से असहाय…
  • Rakesh Tikait
    प्रज्ञा सिंह
    सरकार सिर्फ़ गर्मी, चर्बी और बदले की बात करती है - राकेश टिकैत
    08 Feb 2022
    'वो जाटों को बदनाम करते हैं क्योंकि उन्हें कोई भी ताक़तवर पसंद नहीं है' - राकेश टिकैत
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License