NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
जंतर-मंतर : एमटेक फीस बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ इंजीनियरिंग छात्रों का प्रदर्शन
अब तक आईआईटी में एमटेक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को हर सेमेस्टर में 10 से 30 हजार रुपये तक की फीस देनी होती थी। लेकिन अब इसे एक झटके में बढ़ा कर दो लाख रुपये सालाना कर दिया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 Oct 2019
jantar mantar protest

मानव संसाधन और विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) द्वारा आईआईटी में एमटेक के हालिया शुल्क वृद्धि के खिलाफ अखिल भारतीय इंजीनियरिंग छात्र परिषद द्वारा जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में सैकड़ों छात्रों ने हिस्सा लिया। मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की सलाह से हाल ही में एमटेक की फीस में 900 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही छात्रों को मिलने वाले वजीफे (स्टाइपेंड) को भी रद्द कर दिया है।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि जो पाठ्यक्रम शुल्क लगभग 10,000 से 30,000 रुपये था, अब धीरे-धीरे बढ़कर 2 लाख रुपये हो जाएगा।

छात्रों के प्रदर्शन को संबोधित करते हुए गेट अकादमी, भिलाई, छत्तीसगढ़ के निदेशक उमेश ढांडे ने कहा, 'यह फैसला उन छात्रों के खिलाफ है, जो पढ़ाई करना चाहते हैं। केंद्र सरकार केवल अमीर घरों के लड़कों के लिए एमटेक कार्यक्रम रखना चाहती है। हम सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हैं और मांग करते हैं कि बढ़ी हुई फीस वापस ली जाय। साथ ही छात्रों को दी जाने वाली स्टाइपेंड भी बहाल की जाय।'

उन्होंने कहा कि एमटेक की फीस में 900 प्रतिशत का इजाफा निश्चित रूप से शिक्षा की गुणवत्ता को खराब करेगा। खासकर गेट परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र इससे हतोत्साहित होंगे।
IMG-20191004-WA0012.jpg
आपको बता दें कि शुक्रवार को प्रदर्शन में हिस्सा लेने गाजियाबाद, भोपाल, जमशेदपुर, जयपुर, इलाहाबाद समेत देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र जंतर-मंतर आए थे।

प्रदर्शन में हिस्सा लेने आए जमशेदपुर एनआईटी से ग्रेजुएट आरसी भास्कर ने कहा, 'सरकार ने फीस वृद्धि के पीछे ड्राप आउट को जिम्मेदार बताया है। लेकिन इसके लिए छात्रों को जिम्मेदार बतलाना गलत है। दरअसल ज्यादातर छात्र इसलिए पाठ्यक्रम को बीच में ही छोड़ देते हैं क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां (पीएसयू) अगस्त से सितंबर के बीच भर्ती के परिणामों की घोषणा करती हैं। अब 12, 500 की स्टाइपेंड के लिए लोग अपनी 12—15 लाख की नौकरी नहीं छोड़ देंगे।'

उन्होंने आगे कहा,'लेकिन जो छात्र नहीं सेलेक्ट होते हैं वह अपना कोर्स पूरा करते हैं। एमटेक करने वाले ज्यादातर छात्र मिडिल क्लास या गरीब परिवारों से आते हैं। ऐसे में स्टाइपेंड उनके लिए बड़े सहारे का काम करता है।'

एक अन्य प्रदर्शनकारी छात्रा अरुणिमा त्यागी कहती हैं, 'बीच में पढ़ाई छोड़ने का बचकाना तर्क देकर फीस में इतनी भारी बढ़ोतरी किसी भी नजरिए से उचित नहीं है। काउंसिल को अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। एक दूसरा तर्क भी चल रहा है कि आईआईएम की फीस ज्यादा है तो आईआईटी से एमटेक की फीस भी ज्यादा होनी चाहिए लेकिन आईआईएम में पढ़ाई के बाद प्लेसमेंट बेहतर होता है। वो प्लेसमेंट की सुविधा एमटेक के बाद हासिल नहीं है। इस पर कोई भी बात नहीं कर रहा है।'

आपको बता दें कि शुल्क वृद्धि को वापस लेने की मांग को लेकर 66,000 से अधिक छात्रों ने सोशल मीडिया पिटीशन पर हस्ताक्षर किए हैं। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग कर इस फैसले को वापस लेने की अपील की है।

क्या निर्णय लिया है एमएचआरडी ने

दसअसल सरकार ने देश के 23 आईआईटी में एमटेक के पाठ्यक्रमों में सुधार के लिए एक तीन-सदस्यीय समिति का गठन किया था। उस समिति की सिफारिशों के आधार पर नए प्रस्तावों पर फैसला किया गया है।
IMG-20191004-WA0013.jpg
हाल ही में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में हुई बैठक में आईआईटी काउंसिल ने अपनी बैठक में कई नए प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई है।

अब तक आईआईटी में एमटेक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को हर सेमेस्टर में पांच से 10 हजार रुपये तक की फीस देनी होती थी। लेकिन अब इसे एक झटके में बढ़ा कर बीटेक पाठ्यक्रम के समकक्ष यानी दो लाख रुपये सालाना करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) के जरिए दाखिला लेने वाले छात्रों को हर महीने 12,400 रुपये की जो फेलोशिप मिलती थी उसे भी बंद करने का फैसला किया गया है।

सरकार का कहना है कि छात्र एमटेक की पढ़ाई का इस्तेमाल नौकरियां तलाशने या किसी प्रतियोगी परीक्षा में पास होने के लिए करते हैं। यही वजह है कि इन पाठ्यक्रमों की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों की तादाद 50 फीसदी से ज्यादा है। यह सरकारी संसाधनों की बर्बादी तो है ही, इससे दूसरे छात्र पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं। उनकी दलील है कि अगर कोई छात्र एमबीए की डिग्री हासिल करने के लिए 20 लाख खर्च कर सकता है तो वह आईआईटी से मास्टर डिग्री के लिए चार लाख जरूर खर्च कर सकता है।

protest on jantar mantar
Engineering students protest
Against fee hike
IIT
IIT-MTech
MHRD

Related Stories

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

दिल्ली: एसएससी जीडी भर्ती 2018 के अभ्यर्थियों की नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन

राहुल समेत कई विपक्षी नेताओं ने ‘किसान संसद’ पहुंचकर जताया समर्थन

दिल्ली बलात्कार कांड: जनसंगठनों का कई जगह आक्रोश प्रदर्शन; पीड़ित परिवार से मिले केजरीवाल, राहुल और वाम दल के नेता

महिला किसान संसद, CM येदियुरप्पा का इस्तीफ़ा और अन्य ख़बरें

किसान संसद: अब देश चलाना चाहती हैं महिला किसान

'देशभर में जलाई गई लेबर कोड्स की प्रतियां'

बीएचयू: सोते हुए छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई, थाना घेराव के बाद गिरफ़्तार छात्र हुए रिहा

दिल्ली : विश्वविद्यालयों को खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने हिरासत में  लिया

किसान आंदोलन के समर्थन में दिल्ली में महिला, छात्र, मज़दूर संगठनों का हल्ला बोल


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License