NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
"तुम जितना दबाने की कोशिश करोगे हौसले उतने ही बुलंद होते जाएंगे..."
जीरा भारती के हमलावरों की अभी तक गिरफ़्तारी न होना एक बार फिर यूपी सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जीरा भारती कहती हैं चूंकि वह दलित समाज की महिला हैं और उसपर लाल झंडा पार्टी की कार्यकर्ता तो स्वाभाविक है सामंती वर्ग बौखलाया है।
सरोजिनी बिष्ट
21 Jul 2020
जीरा भारती

"मेरे विरोधी जितना मुझे डराने और आवाज़ दबाने की कोशिश करेंगे मैं उतनी ही ताक़त से लडूंगी, मैं उनके हमलों से डरने वाली नहीं" कॉमरेड जीरा भारती ने जब यह बात कही तो आवाज़ में न कोई घबराहट थी न ही चेहरे पर कोई भय। हमला होने की वजह से शरीर में दर्द जरूर था लेकिन जज़्बा हमेशा की तरह बुलंद था।  

एक जुलाई यानी हमले वाले दिन  को याद करते हुए वह कहती हैं, “सब कुछ इतना अचानक हुआ कि वह कुछ समझ पाती उससे पहले ही उन दोनों लोगों ने मेरे साथ अभद्र व्यवहार और मार पिटाई शुरू कर दी।” जीरा भारती पर यह कोई पहला हमला नहीं इससे पहले भी दो बार हमला हो चुका है।

IMG-20200721-WA0009.jpg

स्कूटी पर आगे जीरा भारती (फाइल फोटो

इस पूरी घटना को समझने से पहले जीरा भारती कौन है, इसे समझना जरूरी है। कामरेड जीरा यूपी के मिर्जापुर जिले के रिकशांखुर्द गांव की रहने वाली हैं।  दलित समाज की मुखर आवाज़ हैं। करीब एक दशक से कम्युनिस्ट पार्टी भाकपा-माले की उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी की सदस्य है साथ ही खेत मजदूर सभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और महिला संगठन ऐपवा की भी एक सशक्त नेता हैं। पार्टी के विभिन्न मोर्चों पर आंदोलनरत रहते हुए गरीब, मज़दूरों और जरूरतमंदों की सशक्त आवाज़ बनकर सत्ताधारियों की गरीब विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ लड़ती रही हैं और आज भी संघर्षरत हैं जबकि सत्ता संरक्षण की आड़ में गुंडा तत्वों ने बार बार इनपर कभी हमला कर कभी डरा धमकाकर हर बार रोकने की कोशिश की है।

घटना गत एक जुलाई की है जब जीरा भारती स्कूटी से घर लौट रही थीं। उसी क्रम में दो लोगों ने उनका रास्ता रोककर न केवल उन पर यौन हमला किया बल्कि जाति सूचक गाली देते हुए उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया। पर इस पूरे प्रकरण में सामंती गुंडों के साथ साथ  पुलिस का रवैया भी कम शोषणपूर्ण न था। एक ने शारीरिक शोषण किया तो दूसरे ने मानसिक शोषण। घटना होने के तीन घंटे बाद पुलिस घटना स्थल पहुंची।

जीरा भारती ने कि बार बार उनके द्वारा पुलिस चौकी फोन करने के बाद भी किसी ने फोन नहीं उठाया और अगर बात हुई भी तो पुलिस का रवैया नकरात्मक ही था, अंत में  जब उन्होंने एसपी को फोन लगाया तब कहीं जाकर पुलिस घटना स्थल पहुंची। गंभीर रूप से चोटिल होने के बावजूद एफआईआर दर्ज कराने के लिए भी जीरा भारती को काफी मशक्कत करनी पड़ी तो वहीं  हमलावरों के परिवार वाले पुलिस चौकी आकर उल्टा इनके खिलाफ केस बनाने की जुगत लगाते रहे। दबंगों के दबाव में पुलिस जीरा भारती का केस रफा दफा करने की कोशिश में लगी रही और कार्रवाई के बजाय मामले पर दिनभर लीपापोती करने का प्रयास करती रही। जनदबाव में अगले दिन देर शाम धारा  354, 504, 506 और दलित उत्पीडन के तहत मामला दर्ज हुआ। भारती की गंभीर चोटों की जांच व इलाज के लिए मिर्जापुर अस्पताल प्रशासन ने वाराणसी रेफर किया है।

जीरा भारती ने  बताया कि एक जुलाई को हुए यौन हमले से पहले भी करीब पिछले पांच सालों के दरम्यान उनपर दो हमले और हो चुके हैं और इतना ही नहीं जब तकरीबन डेढ़ साल पहले उन्होंने अपने गांव में राशन और उचित मजदूरी भुगतान को लेकर आंदोलन किया था तो गांव का ही एक तबका जो भाजपा समर्थित था, उनके ख़िलाफ़ धरने पर बैठ गया था और उन पर आरोप यह लगाया गया कि जीरा भारती नक्सली है और कई नक्सलियों के संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी साजिश कर उन्हें जेल भिजवाने की पूरी तैयारी थी लेकिन यहां भी विरोधियों को मुंह की खानी पड़ी।

जीरा भारती कहती हैं चूंकि वह दलित समाज की महिला हैं और उसपर लाल झंडा पार्टी की कार्यकर्ता तो स्वाभाविक है सामंती वर्ग बौखलाया है। जीरा भारती के नेतृत्व में आंदोलन करने वाले उनके गांव के दलित समाज के लोगों से जब बात हुई तो इस घटना को लेकर हर किसी के मन में आक्रोश था और न्याय पाने की अंत तक लड़ने का जज़्बा। वे कहते हैं सामंती वर्ग भला ये यह कैसे स्वीकार कर ले कि एक दलित समाज की महिला उनके सामने तन कर खड़ी हो जाए इसलिए बार बार उन्हें दबाने की कोशिश है और यह सिर्फ उन्हें दबाने की कोशिश नहीं बल्कि दलित समाज को दबाने और डराने की कोशिश है।  

अभी तक यौन हमलावरों की  गिरफ्तारी न होने के सवाल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उत्तर प्रदेश में अपराधी किस कदर सत्ता संरक्षण में न केवल पल रहे हैं बल्कि बैखौफ घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। आज घटना के इतने दिन बाद भी सामंती गुंडों की कोई गिरफ्तारी नहीं हुई इसके बावजूद  जीरा भारती ने हार नहीं मानी है यह अपने आप में एक विजेता होने की निशानी दर्शाता है।

यह पूरी घटना यही दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश नहीं अपराध प्रदेश बनता जा रहा है जहां सत्ता का संरक्षण पाकर अपराधी मौज लूट रहे हैं और भुक्तभोगी न्याय के लिए दर दर भटक रहे हैं। 

(सरोजिनी बिष्ट स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Jeera Bharti
Attack on Jeera Bharti
UttarPradesh
UP police
UP Law And Order
yogi sarkar
Yogi Adityanath
communist parties
CPI-ML

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

मलियाना नरसंहार के 35 साल, क्या मिल पाया पीड़ितों को इंसाफ?

यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?


बाकी खबरें

  • New year
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: नये साल के लक्षण अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं...
    02 Jan 2022
    नहीं-नहीं, हम ओमिक्रॉन की बात नहीं कर रहे हैं। ओमिक्रॉन हमारे नये साल का सगुन नहीं बिगाड़ सकता। हम बात कर रहे हैं...
  • cartoon
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: हैप्पी न्यू ईयर सरकार जी!
    02 Jan 2022
    एक व्यंग्यकार के लिए नव वर्ष के अवसर पर व्यंग्य लिखते हुए शुभकामनाएं देना बहुत ही मुश्किल काम है। यह इतना ही मुश्किल काम है जितना मुश्किल काम है सरकार जी के लिए कुछ भी करना।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    2022 में सत्ता, सियासत और समाज
    01 Jan 2022
    नया साल भारत की सत्ता-राजनीति और समाज के लिए कैसा होगा? जनतंत्र का क्या होगा हाल? सत्ताधारियो और विपक्षियों के समक्ष क्या-क्या हैं बड़ी चुनौतियां? कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के सियासत की कैसी…
  • jewar airport
    न्यूज़क्लिक टीम
    जेवर एयरपोर्ट: दूसरे फेज़ के अधिग्रहण में किसान कर रहे बेहतर मुआवज़े की माँग
    01 Jan 2022
    जेवर एयरपोर्ट निर्माण के दूसरे फेज़ में 6 गाँव की 1344 हेक्टेयर ज़मीन का अधिग्रहण की ज़रूरत हैI इन गाँव के किसान 26 दिसंबर को एक महापंचायत में जुटे जिसमें इस बात पर आम सहमति बनाने की कोशिश हुई कि वे…
  • अनिल जैन
    साल 2021: भारत के 'तालिबानीकरण' की परियोजना सरकारी शक्ल लेती दिखी!
    01 Jan 2022
    हर कैलेंडर वर्ष अपने दामन में तमाम तरह की कड़वी-मीठी यादें समेटते हुए बिदा होता है। ये यादें अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को लेकर भी होती हैं और राष्ट्रीय घटनाओं को लेकर भी। राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक, वि
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License