NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
झारखंड: गौकशी के आरोप के बहाने आदिवासियों पर हिंदुत्ववादियों का हमला, आदिवासी संगठनों ने दी चेतावनी!
झारखंड के सिमडेगा के भेड़ीकुदर गाँव के अंबेरा टोली में हुई गौकशी के नाम पर सात आदिवासियों को सरेआम बेइज्जत करते हुए सर मुंडवा कर गाँव घुमाने की घटना पर प्रदेश के आदिवासी संगठन आक्रोशित हैं।
अनिल अंशुमन
01 Oct 2020
jharkhand gaukashi

...आदिवासी लोग क्या खाएगा, क्या नहीं खाएगा का आदेश देनेवाले ‘दिकू समाज’ और बजरंग दल जैसे हिंदुवादी संगठनों के लोग कौन होते हैं जो बाहर से आकर हमारे ही इलाके में हमसे आज पूछ रहें हैं। आदिवासियों के रहन–सहन और खान–पान से इतनी ही परेशानी है तो वे यहाँ से चले जाएँ। कायरों की भांति हमारे निहत्थे लोगों पर हमला नहीं करें और यदि लड़ना ही है तो आमने–सामने आकर लड़ें। पुलिस प्रशासन उन्हें कानून हाथ में लेने की छूट दे रहा है तो हम भी यही रास्ता अपनाने को मजबूर हो जाएँगे....!

उक्त चुनौती विभिन्न आदिवासी संगठनों के लोगों ने सिमडेगा के भेड़ीकुदर गाँव के अंबेरा टोली में हुई गौकशी के नाम पर सात आदिवासियों को सरेआम बेइज्जत करते हुए सर मुंडवा कर गाँव घुमाने की घटना पर आक्रोशित होकर दी है।

 ज्ञात हो कि गत 25 सितंबर को झारखंड के दक्षिणी छोटनागपुर के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सिमडेगा ज़िला स्थित भेड़ीकुदर गाँव के अंबेरा टोली में कतिपय कट्टर हिंदुवादी ( ग्रामीणों के अनुसार बजरंग दल ) संगठनों के 60–70 लोगों की हरवे– हथियारों से लैस संगठित भीड़ ने सुबह– सुबह धावा बोल दिया। गौहत्या करने का आरोप लगाते हुए आदिवासी टोले के सात लोगों को पकड़कर मारा पीटा और अपमानित करते हुए दूसरे टोले में ले जाकर सबों के सर मुंडवाकर पूरे गाँव में घुमाया। ‘ जय श्री राम ’ नारा लगाने को कहा और नहीं बोलने पर मारते–पीटते हुए जातिसूचक गंदी गालियां दीं।

gaukshi 7.jpeg

उधर , गौहत्या होने की सुनियोजित सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने की बजाय पीड़ितों को ही ‘ गौहत्या ’ के आरोप में पकड़कर थाना ले गयी। बाद में सबों की घरों की तलाशी में कुछ भी आपत्तीजनक सामान नहीं मिलने पर छोड़ दिया।

हैरानी की बात है कि मुफ़स्सिल थाना से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर दिन दहाड़े हुई इस घटना की खबर स्थानीय से लेकर राज्य तक की मीडिया ने पूरी तरह से दबाये रखा। 25 सितंबर को जब स्थानीय आदिवासी सामाजिक कार्यकर्त्ता के प्रयासों से एक स्थानीय न्यूज़ चैनल के संवाददाता द्वारा जब इस कांड की खबर भुक्तभोगी पीड़ितों की तस्वीर समेत उनके बयान की वीडियो वायरल की गयी तो सबको पता चला।

जिससे व्यापक आदिवासी समाज के लोगों में काफी रोष फ़ैल गया। आक्रोशित आदिवासी संगठनों के लोगों ने सिमडेगा शहर में विरोध मार्च निकालकर बजरंग दल व कट्टर हिंदुवादी संगठनों के पुतले जलाए। सरकार से सभी दोषियों पर अवलंब कड़ी कारवाई करने की मांग करते हुए कांड करनेवाले हिन्दुत्ववादी संगठनों को आमने – सामने की लड़ाई लड़ने तक की खुली चुनौती दी है।

वायरल वीडियो में पीड़ित आदिवासी राज सिंह कुल्लू ने बताया है कि बजरंग दल के लोगों ने सुबह सुबह ही आकर हमलोगों पर हमला बोला और जातिसूचक गालियां देते हुए पीटा । इसका विरोध करने वाले लोगों को भी धमकाकर चुप कर दिया। हमलोगों ने गौहत्या के आरोप को गलत बताया तो एक फर्जी वीडियो – जिसमें एक मातल बूढ़ा कह रहा है यहाँ गौकाशी होती है, दिखाकर हमारे बाल मुंडवाकर सारेआम अपमानित करते हुए पूरा गाँव घुमाया।

कुल्लू की पत्नी ने बताया है कि वे लोग हमें गालियां देते हुए कह रहे थे कि – हम ही यहाँ के सबकुछ हैं और अगर यहाँ रहना है तो हम जो चाहेंगे वही करना होगा। तुमलोग गाय माता को मारकर खाते हो इसलिए यहाँ से चले जाओ।  

दूसरे पीड़ित आदिवासी युवा दीपक कुल्लू ने भी अपने बयान में बताया है कि जब मैंने देखा कि कुछ लोग हमारे जीजा जी को पीट रहें हैं तो मैंने उसका विरोध किया तो मुझ पर भी गौकाशी में शामिल रहने का आरोप लगाकर पीटने लगे और मेरा भी सर मुंडवाकर ‘ जय श्री राम ’ का नारा लगाने को कहा।
           
 इस कांड से पूरे प्रदेश के आदिवासी समुदाय के लोग काफी क्षुब्ध हो उठे हैं । सोशल मीडिया से के जरिये आसपास के सभी आदिवासियों से इस घटना का कड़ा विरोध करने और सभी दोषियों को सबक सीखाने लिए वहाँ पहुँचने का लगातार आह्वान जारी किया जा रहा है।

gaukashi 2.jpg

झारखंड आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता प्रेमचंद मुर्मू ने आक्रोशपूर्ण लहजे में कहा कि बीजेपी के झारखंड की सत्ता से बेदखल होने से झल्लाया संघ परिवार अब यहाँ ‘गौकशी’ विरोध के नाम पर आदिवासी समाज के धर्मान्तरण मुद्दा उछालने का हथकंडा चला रहा है । वैसे भी ये इनकी पुरानी फितरत और आदत रही है कि जहां भी इनकी पार्टी की सरकार नहीं बन पाती है तो वहाँ किसी न किसी बहाने आए दिन सुनियोजित धार्मिक उन्माद कुचक्र रचकर वहाँ की सरकार और समाज को अस्थिर करते रहना।
 
खबरों के अनुसार इस कांड के पीड़ित राज सिंह कूल्लू की पत्नी की ओर से दायर मुकदमे के तहत एसटी / एससी अधिनियम का केस दर्ज़ किया गया है। जिसमें अभी तक 5 अभियुक्तों की ही गिरफ्तारी हुई है और शेष फरार हैं । जिनके खिलाफ संपत्ति जप्त करने की बात कहकर ये दर्शाने की कवायद की जा रही है कि ‘ पुलिस कितनी मुस्तैद ’ है ?

जबकि इसके उलट स्थानीय आदिवासियों के अनुसार इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध और हमलावर कट्टर हिंदुवादियों के पक्ष में ही रही है। वरना घटना के उपरांत वहाँ आकर हमलावरों की बजाय पीड़ितों को ही नहीं पकड़कर ले जाती।

दो दिन पूर्व वहाँ गए एक आदिवासी सामाजिक संगठन के जांच दल ने जारी रिपोर्ट में बताया है कि सारे पीड़ित लोग ‘ खड़िया ’ आदिवासी समुदाय के हैं और यह समुदाय गौमांस नहीं खाता है । इस घटना को एक सुनियोजित एजेंडे के एक परीक्षण के तौर पर अंजाम दिया गया है।

आदिवासी समाज के एक्टिविष्ट झारखंड में आदिवासी समाज का भगवाकरण किए जाने की साजिश का विरोध कर रहे आदिवासियों पर बढ़ रहे प्रायोजित हमलों पर सवाल उठा रहें हैं कि - भाजपा राज में ‘ गौहत्या विरोध ’ के नाम पर 2017 में गढ़वा ज़िला स्थित बड़कोल खुर्द में आदिवासी युवा रमेश मिंज की पिटाई से हुई मौत का इंसाफ कब होगा। 10 अप्रैल 2019 को गुमला ज़िला स्थित डुमरी प्रखण्ड के जुरमु गाँव के पीड़ित आदिवासियों को भी आज तक इंसाफ क्यों नहीं मिला । जो मृत गाय की खाल उतार रहे थे लेकिन उनपर गौकाशी का आरोप लगाकर संगठित हमले का शिकार बनाया गया । हेमंत सोरेन की सरकार जमीनी स्तर पर इन मामलों पर कब गंभीर होगी ?                                                                                                

 

tribals protest
Jharkhand
tribal communities
Rumor of cow slaughter

Related Stories

गुजरात: पार-नर्मदा-तापी लिंक प्रोजेक्ट के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ने की तैयारी!

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध

'सोहराय' उत्सव के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली अभद्रता का जिक्र करने पर आदिवासी महिला प्रोफ़ेसर बनीं निशाना 

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

झारखंड: बेसराजारा कांड के बहाने मीडिया ने साधा आदिवासी समुदाय के ‘खुंटकट्टी व्यवस्था’ पर निशाना


बाकी खबरें

  • aicctu
    मधुलिका
    इंडियन टेलिफ़ोन इंडस्ट्री : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ख़राब नियोक्ताओं की चिर-परिचित कहानी
    22 Feb 2022
    महामारी ने इन कर्मचारियों की दिक़्क़तों को कई गुना तक बढ़ा दिया है।
  • hum bharat ke log
    डॉ. लेनिन रघुवंशी
    एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता
    22 Feb 2022
    सभी 'टूटे हुए लोगों' और प्रगतिशील लोगों, की एकता दण्डहीनता की संस्कृति व वंचितिकरण के ख़िलाफ़ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगा, जो इस प्रणाली से लाभ उठाते…
  • MGNREGA
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ग्रामीण संकट को देखते हुए भारतीय कॉरपोरेट का मनरेगा में भारी धन आवंटन का आह्वान 
    22 Feb 2022
    ऐसा करते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र ने सरकार को औद्योगिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर आने की उसकी उम्मीद के खिलाफ आगाह किया है क्योंकि खपत की मांग में कमी से उद्योग की क्षमता निष्क्रिय पड़ी हुई है। 
  • Ethiopia
    मारिया गर्थ
    इथियोपिया 30 साल में सबसे ख़राब सूखे से जूझ रहा है
    22 Feb 2022
    इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 70 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है क्योंकि लगातार तीसरी बार बरसात न होने की वजह से देहाती समुदाय तबाही झेल रहे हैं।
  • Pinarayi Vijayan
    भाषा
    किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन
    22 Feb 2022
    विजयन ने राज्य विधानसभा में कहा, ‘‘केरल विभिन्न क्षेत्रों में कहीं आगे है और राज्य ने जो वृद्धि हासिल की है वह अद्वितीय है। उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक हितों के साथ की गयी अनुचित टिप्पणियों के तौर पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License