NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
पिछले साल 3,05,000 से अधिक श्रमिकों ने म्यांमार से पलायन किया
श्रम, आव्रजन और जनसंख्या मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार साल 2019 में 3,05,000 से अधिक श्रमिक पलायन कर गए।
पीपल्स डिस्पैच
18 Jan 2020
myanmar
Courtesy: Zarni Phyo/The Myanmar Times

जब से रोहिंग्या संकट म्यांमार में गहराया है तब से देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई है। पिछले साल श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा काम के लिए विदेशों में चला गया। श्रम, आव्रजन और जनसंख्या मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 2019 में 3,05,000 से अधिक लोग पलायन कर गए।

पलायन करने वाले इन लोगों में बड़ी संख्या थाईलैंड पहुंची है जबकि मलेशिया मंत्रालय के अनुसार इन लोगों का दूसरा पसंदीदा देश मलेशिया है। हालांकि, सरकारी अधिकारी यह कह रहे हैं कि वर्तमान में म्यांमार के चार मिलियन से अधिक श्रमिक विदेशों में काम कर रहे हैं। मंत्रालय ने दावा किया कि कुछ प्रतिशत श्रमिक सीमाओं को पार करने के लिए अनौपचारिक तरीके से जोखिम उठाते रहते हैं। इस आंकड़े के मुताबिक ये श्रमिक ज्यादातर मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, कोरिया, जापान, यूएई, जॉर्डन, कतर और मकाओ जाते हैं।

प्रवासन के बाद श्रमिकों के अधिकांश या तो उद्योगों और समुद्री क्षेत्रों या थाईलैंड में कृषि व्यवसायों में नौकरी करते हैं जहां एक बहुत बड़ा हिस्सा म्यांमार के श्रमिक रहते हैं। मई 2019 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस पर म्यांमार के प्रवासी श्रमिकों के साथ-साथ थाईलैंड के समूहों ने एक बयान में अधिक से अधिक "न्यूनतम मजदूरी, काम की सुरक्षा, बेहतर सामाजिक सुरक्षा और सुचारू कार्य परमिट और वीजा विस्तार आवेदन प्रक्रियाओं पर जोर दिया।"

म्यांमार श्रमिक संगठनों ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि म्यांमार से आने वाले मज़दूरों की एक बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों से आती है। 2 जनवरी को थाईलैंड ने थाई-म्यांमार सीमा पर तीन प्रमुख सीमाओं के माध्यम से 74,731 बिना दस्तावेज वाले म्यांमार श्रमिकों को म्यांमार के अधिकारियों को सौंप दिया है। श्रमिकों के साथ किया गया ये व्यवहार बेहतर नहीं है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के सर्वेक्षण 'म्यांमार लेबर इसू फ्रॉम द पर्सपेक्टिव ऑफ द इंटरप्राइजेज' के अनुसार इस देश का अभी भी एशिया के सबसे ग़रीब देशों में शुमार होता है और इसे सबसे कम विकसित देश के रूप में बताया गया है। इस स्टडी में उल्लेख किया गया है, "इसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि प्रधान है, जिसकी उत्पादकता कम है और अविकसित ढ़ांचा और वित्तीय प्रणालियों से बाधित है।“

वर्तमान में, अनौपचारिक क्षेत्र गरीबी में जीने वाले अधिकांश अनौपचारिक श्रमिकों के रोजगार के लिए म्यांमार की रीढ़ है। इस तरह मौजूदा बिगड़ी हुई स्थिति इन श्रमिकों को काम के लिए अपने देश से पलायन करने के लिए मजबूर करती है।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

migration
Myanmar
Workers Migration
Rohingya
Social-Economical
Myanmar Labor Organizations
International Labor Organization

Related Stories

किसान आंदोलन के 4 महीने पर भारत बंद, चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला और अन्य ख़बरें

महाराष्ट्र के आंतरिक पलायन में सबसे अधिक मज़दूर मराठवाड़ा क्यों लौटे?

‘भारत बचाओ...’ : 9 अगस्त को देश भर में मज़दूरों का 'जेल भरो' आंदोलन

प्रवासी का मतलब और पीड़ा समझते हैं आप?

आईएलओ फाॅर सोशल जस्टिस’ : नई परिस्थिति में श्रम अधिकार और काम का भविष्य

हरियाणा चुनाव : प्रवासी श्रमिक आर्थिक रूप से टूटा और राजनीतिक रूप से शक्तिहीन है

माइग्रेशन पर लगाम लगा पाने में असफल रही हैं सरकारें 


बाकी खबरें

  • एम. के. भद्रकुमार
    'सख़्त आर्थिक प्रतिबंधों' के साथ तालमेल बिठाता रूस  
    13 Mar 2022
    व्लादिमीर पुतिन की पहली प्राथमिकता यही है कि वह ख़ुद को अपने लोगों के प्रति जवाबदेह बनाये रखें।
  • voting
    स्पंदन प्रत्युष
    विधानसभा चुनाव: एक ख़ास विचारधारा के ‘मानसिक कब्ज़े’ की पुष्टि करते परिणाम 
    13 Mar 2022
    पंजाब में सत्ता विरोधी लहर ने जहां कांग्रेस सरकार को तहस-नहस कर दिया, वहीं उत्तर प्रदेश में ऐसा कुछ नहीं हुआ। इस पहेली का उत्तर मतदाताओं के दिमाग पर असर डालने वाली पार्टी की विचारधारा की भूमिका में…
  • सोनिया यादव
    विधानसभा चुनाव 2022: पहली बार चुनावी मैदान से विधानसभा का सफ़र तय करने वाली महिलाएं
    13 Mar 2022
    महिला सशक्तिकरण के नारों और वादों से इतर महिलाओं को वास्तव में सशक्त करने के लिए राजनीति में महिलाओं को अधिक भागीदार बनाना होगा। तभी उनके मुद्दे सदन में जगह बना पाएंगे और चर्चा का विषय बन पाएंगे।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में हिन्दुत्व की जीत नहीं, ये नाकारा विपक्ष की हार है!
    12 Mar 2022
    देश के सबसे बड़े राज्य-यूपी में भाजपा की सत्ता में दोबारा वापसी को मीडिया और राजनीति के बड़े हिस्से में 'हिन्दुत्व' की जीत के तौर पर देखा जा रहा है. क्या यह सच है? क्या यह यूपी में विपक्ष का…
  • cpim
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    अनुसूचित जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति और मकान किराए के 525 करोड़ रुपए दबाए बैठी है शिवराज सरकार: माकपा
    12 Mar 2022
    माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार की ओर से 2.80 लाख अनुसूचित जाति के छात्रों के खाते में पहुंचने वाली 425 करोड़ की छात्रवृत्ति, मात्र 206 छात्रों के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License