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"लव जिहाद" क़ानून : भारत लड़ रहा है संविधान को बचाने की लड़ाई
इन क़ानूनों को "लव जिहाद" की समस्या  को हल करने के लिए लाया गया था। लव जिहाद एक षड्यंत्र अवधारणा है, जिसमें बीजेपी और दक्षिणपंथी विश्वास करते हैं।
समीना दलवई
05 Oct 2021
Love jihad

उत्तर प्रदेश और अन्य बीजेपी शासित राज्यों में लागू किया गया लव जिहाद क़ानून मनुस्मृति में उल्लेखित मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है। समीना दलवई लिखती हैं कि यह क़ानून हमारे संविधान में स्वीकृत की गए मूल्यों के विरोधाभास में भी है।

22 साल की मुस्कान जहां को सरकारी रैन बसेरे में गर्भपात हुआ है, जहां उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के नए लव जिहाद क़ानून के तहत रखा गया है। यह क़ानून पहले नवम्बर, 2020 में एक अध्यादेश के तौर पर लाया गया था। बाद में फरवरी में प्रदेश विधानसभा ने इसे पास किया। इसी क़ानून के तहत उनके पति को एक अज्ञात जेल में 2 हफ्ते तक रखा गया था।

 क़ानून, किसी व्यक्ति द्वारा अपना धर्म परिवर्तन कर दूसरे के साथ शादी करने को प्रतिबंधित करता है। दूल्हा और दुल्हन दोनों को ही नए क़ानून में अपराधिक धाराओं का सामना करना पड़ता है।

उत्तर प्रदेश बीजेपी शासित राज्यों में पहला प्रदेश था, जहां लव  जिहाद क़ानून से ख्यात इस अधिनियम को लाया गया था। बाद में दूसरे प्रदेशों ने भी उत्तर प्रदेश की राह पकड़ी।

क्या कहता है क़ानून?

10 महीने से लागू क़ानून कहता है कि जो भी व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन करना चाहता है, उसे जिला प्रशासन को 60 दिनों का नोटिस देना होगा। ताकि जिला प्रशासन जांच कर सके कि क्या धर्म परिवर्तन गलत प्रभाव, दबाव, लालच या गलत प्रतिनिधित्व के ज़रिए तो नहीं किया जा रहा है। अगर बिना सरकारी जांच के किसी व्यक्ति या महिला ने धर्म परिवर्तन कर शादी की है, तो वह वैध नहीं होगी।

अगर कोई महिला अपना धर्म परिवर्तन करती है और शादी करती है, तो उसके परिवार का कोई भी सदस्य महिला के पति के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर कर सकता है। फिर यह साबित करने की ज़िम्मेदारी कि शादी के दौरान किसी तरह के गलत प्रभाव, बल, गलत प्रतिनिधित्व, दबाव, लालच या किसी दूसरे फर्जी तरीके का इस्तेमाल नहीं किया गया, यह पति की जिम्मेदारी हो जाती है। जबकि पति को मुकदमा दायर होने के तुरंत बाद ही गिरफ्तार कर लिया जाता है।पति को इसके लिए 2 से 10 साल तक की सजा हो सकती है।

 लव जिहाद क़ानून और इसकी जड़ें तथाकथित लव जिहाद की समस्या को हल करने के लिए बनाए गए है। लव जिहाद बीजेपी नेताओं और दूसरे दक्षिण पंथियों के बीच लोकप्रिय षड्यंत्र सिद्धांत है। इस धारणा के मुताबिक, मुस्लिम धर्मगुरु एक षड्यंत्र के तहत कुछ मुस्लिम युवाओं को दूसरे धर्मों की युवतियों को शादी करने के लिए प्रेरित, प्रायोजित और प्रशिक्षित करते हैं। ताकि उनके बच्चे मुस्लिम हों। इस तरह से दुनिया में मुस्लिमों की आबादी बढ़ जाएगी।

 अब तक इस अवधारणा के पक्ष में कोई जनसांख्यकीय, राजनीतिक या क़ानूनी सबूत नहीं मिला है। ऊपर से यह यह सिद्धांत महिलाओं के लिए अपमानजनक है। जिनके बारे में यह मानता है कि वे अपने तर्किक फ़ैसले लेने में सक्षम नहीं हैं और सिर्फ़ बच्चे पैदा करने का जरिया हैं, जिनसे एक धर्म फैलेगा।

लव जिहाद का सिद्धांत पितृसत्ता द्वारा अपनी बेटियों के ऊपर से शक्ति खोने के डर से उपजा है। पितृसत्तात्मक परंपरा के मुताबिक पिता फैसले लेने वाली सबसे ताकतवर संस्था है। पिता का फर्ज़ है कि वो शादी की परंपरा में अपनी बेटी का कन्यादान  करे।

लेकिन बदलते वक़्त में शिक्षित महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। बाहरी दुनिया से उनका संपर्क और आर्थिक स्वतंत्रता में वृद्धि हुई है। वे अपने फैसले लेने लगी हैं। जिसमें शादी करने का फैसला भी शामिल है। इससे जातीय पितृसत्ता में खलबली मच गई। खासकर तब जब महिलाएं खुद से अलग जाति या धर्म का साथी चुन लें।

कैसे दूसरे वैधानिक प्रावधान अंतरधार्मिक शादियों को प्रभावित करते हैं?

यहां तक कि प्रगतिशील नज़र आने वाले क़ानूनों में भी इस समस्या को जगह देने संबंधी कमजोरियां नज़र आती हैं।

पहले बात करते हैं विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की। यह अधिनियम धार्मिक भिन्नता से परे दो भारतीयों को शादी करने की सुविधा देता है। बशर्ते संबंधित लोगों को अपने स्थानीय रजिस्ट्री को 30 दिन का वक़्त देना होगा । नोटिस देने के कम से कम 30 दिन पहले संबंधित लोगों को उस इलाके में रहना जरूरी है, जहां वे नोटिस दे रहे हैं। साथ ही शादी करने का उद्देश्य रजिस्ट्री ऑफिस में प्रकाशित होना चाहिए।

इसका नतीजा स्वाभाविक है। घर से भागे हुए किसी जोड़े को आसानी से पकड़ा जा सकता है और घर लाया जा सकता है। कुछ मामलों में इन जोड़ों को मर दिया जाता है, जिससे ऑनर किलिंग के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है।

दूसरी समस्या रेप के अपराधिक क़ानून को लागू करने को लेकर है। 18 साल से कम उम्र की किसी भी तरह का यौन सम्बंध आईपीसी के हिसाब से रेप माना जाता है। इस प्रावधान का उपयोग बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए किया गया था।

लेकिन यह प्रावधान अवयस्क युवा महिला की सहमति को भी खारिज करता है, जो अपने प्रेमी के साथ संबंध बनाती है। लड़की का परिवार, लड़के पर रेप का मुकदमा लगा सकता है और लड़के को जेल में जाना पड़ सकता है। जबकि लड़की को उसकी सहमति के बगैर परिवार के पास वापस भेजा जा सकता है। इस मामले में तब प्यार को रेप मान लिया जाता है।

कैसे क़ानून जिंदगियों और संवैधानिक मूल्यों का उल्लघंन करता है?

उत्तर प्रदेश में बनाए गए क़ानून का भयावह नतीजे सामने आ रहे हैं। इस क़ानून के तहत पहला मुकदमा 21 साल के मुस्लिम  युवक पर किया गया, जिसका अतीत में एक हिन्दू महिला के साथ संबंध था। युवा महिला ने लड़के की तरफ से किसी भी तरह के गलत काम से इंकार किया। इसलिए लड़के को छोड़ दिया गया।

बाद में महिला की शादी एक हिन्दू से हो गई। यहां कहानी का दुखद  खात्मा हो जाना चाहिए था।  लेकिन मामला एक कदम आगे बढ़ा। नए क़ानून से लैस होने के बाद लड़की के पिता ने लड़की के प्रेमी के खिलाफ एक मामला दर्ज कराया कि वह लड़की पर धर्म परिवर्तन के दबाव बना रहा है।

इस साल जुलाई तक उत्तर प्रदेश पुलिस ने नए क़ानून के तहत 63 मामले दर्ज किए हैं, 80  लोगों को गिरफ़्तार किया है, वहीं 162 लोगों को मुकदमों में नामजद किया है। जबकि 21 लोग फिलहाल फरार हैं। इसी तरह के क़ानूनों में मध्य प्रदेश और गुजरात में भी गिरफ्तारियां हुई हैं।

यहां देखा जा सकता है की एक क़ानून कितना विध्वंसक हो सकता है। क़ानून बनाने वालों को अपने चुनने वालों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। एक तानाशाह सरकार अपने नागरिकों, खासकर महिलाओं को नियंत्रित करना चाहती है। लेकिन क्या लोकतंत्र के दिल में रहने वाला एक सजग समाज इसकी अनुमति दे सकता है? 

भारत फिलहाल अपने संविधान की लड़ाई लड़ रहा है: एक तरफ बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा तैयार किया गया संविधान है, जो समता, भाईचारे और न्याय पर आधारित है। दूसरी तरफ मनु स्मृति है, जो प्राचीन हिंदू धर्म ग्रंथ है, जो जाति, लिंग और धर्म जैसी पैदाइश के आधार पर बनाई गई पहचानें की सामाजिक श्रेष्ठता का उपबंध करता है।

आज भारतीय जो भी चुनेंगे, उसका उपमहाद्वीप के भविष्य पर लंबा प्रभाव होगा 

(समीना दलवई जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

“Love Jihad” Laws: India is Facing a Battle of Constitutions

Fundamental Rights
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Right to privacy
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