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ट्रांसपोर्ट उद्योग को बचाने की मांग को लेकर श्रमिकों का देशव्यापी प्रदर्शन
केरल, कर्नाटक, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड समेत कई राज्यों में पुलिस के दमन के बाद भी विरोध प्रदर्शन हुए। इसमें संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों ने भाग लिया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Aug 2020
ट्रांसपोर्ट उद्योग

लॉकडाउन के कारण आजीविका पर पड़े प्रभाव और पेट्रोल, डीजल की बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ बुधवार को ट्रांसपोर्ट कर्मियों ने देशव्यापी प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व ऑल इंडिया कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स आर्गेनाइजेशन्स (AICCORTWO )ने किया। प्रदर्शन को इंडियन फ़ेडरेशन ऑफ़ ऐप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ने भी अपना समर्थन दिया।

ट्रांसपोर्ट कर्मियों की कहना है कि लॉकडाउन के कारण उनकी आजीविका पर जो प्रभाव पड़ा है उसकी न तो सरकार ने और ना ही कंपनियों ने भरपाई की या कोई मदद पहुंचाई। राहत देने के बजाय सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में बेतहाशा वृद्धि कर दी है जिसे तत्काल कम किया जाना चाहिए।

ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन के महासचिव के के दिवाकरन ने इस प्रदर्शन को सफल बताते हुए कहा कि, "केरल, कर्नाटक, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड समेत कई राज्यों में पुलिस के दमन के बाद भी विरोध प्रदर्शन हुए। इसमें संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों ने भाग लिया। "

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आपको बता दें कि AICCORTWO ट्रांसपोर्ट श्रमिक यूनियन का संयुक्त मंच है। इसमें नेशनल ट्रेड फेडरेशन ऑफ इंडियन रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स, ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन, इंडियन नेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन, महाराष्ट्र स्टेट ट्रांसपोर्ट कामगार संगठन, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन, दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) वर्कर्स यूनिटी सेंटर , तेलंगाना मजदूर यूनियन, तमिलनाडु सरकार परिवहन निगम कर्मचारी महासंघ और सर्व कर्मचारी संघ जैसी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़ी यूनियन शामिल हैं।

गौरतलब है कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर में लगभग 10 करोड़ श्रमिक है और उनकी मांग को लेकर दिवाकरण ने कहा, 'कोरोना महामारी से पहले ही रोड ट्रांसपोर्ट उद्योग के श्रमिक संकट में थे। महामारी ने उनकी समस्याओं में और वृद्धि की और लॉकडाउन ने तो इस पूरे उद्योग को लगभग तबाह ही कर दिया।'

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पिछले महीने ही AICCORTWO ने केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को 7 जून को डीजल और पेट्रोल पर बढ़े हुए उत्पाद शुल्क को वापस लेने और बढ़ी हुई कीमतों के रोलबैक सहित अपनी 12-सूत्री मांगों के बारे में और अपने विरोध की जानकारी दी थी।

श्रमिकों के 12 सूत्री मांग में- माल और सेवा कर(जीएसटी)के तहत पेट्रोलियम उत्पाद लाना; सड़क परिवहन श्रमिकों के लिए अलग सामाजिक सुरक्षा कानून; मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019को वापस लेने; असंगठित क्षेत्र के परिवहन श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय वेतन नीति; राज्य सड़क परिवहन उपक्रमों state road transport undertakings (एसटीयू) को बजटीय सहायता; डीजल और मोटर वाहन के पार्ट्स पर उत्पाद शुल्क और बिक्री कर से एसटीयू की छूट और छह महीने की अवधि के लिए सभी असंगठित क्षेत्र परिवहन श्रमिकों को 7,500 रुपये की की आर्थिक मदद किया जाए ।

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दिवाकरन ने कहा, "राम मंदिर मुद्दे के कारण पूरे असम में धारा 144 लागू करने के कारण सख्त लॉकडाउन किया गया है। इसके बाद भी गुवाहाटी और बोंगाईगांव में विरोध प्रदर्शन हुए।"

AICCORTWO ने कहा," निजी गाड़ियों के अवैध संचालन के कारण उन्हें वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही अन्य कारणों से राज्यों के एसटीयू को परिचालन की लागत बढ़ी है। ऐसी स्थिति में श्रमशक्ति में कमी की जा रही है और इसके चलते श्रमिक बलि का बकरा बनते जा रहे हैं, मार्च 2021 तक मजदूरी और सेवानिवृत्ति देय राशि के भुगतान में देरी या महंगाई भत्ते की अदायगी में देरी होगी।"

तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (TSRTC) कर्मचारी संघ के के राजी रेड्डी ने कहा कि पुलिस ने हैदराबाद में कई श्रमिकों को हिरासत में लिया है। फिर भी तेलंगाना में सभी बस डिपो के सामने श्रमिकों और कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में उबर, ओला, स्विगी और अन्य ऐप के साथ काम करने वाले कर्मचारियों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियनों द्वारा उठाए जा रहे है मांगों का समर्थन करते हुए, इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के जनरल सेक्रेटरी शेख सलाउद्दीन ने कहा, “ऐप आधारित ड्राइवर और डिलीवरी वर्कर्स लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद से सड़कों पर रहे हैं। उनके पास कोई सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं है। सरकार को 25 लाख से अधिक ऐप-आधारित श्रमिकों की शिकायतों को समझना चाहिए और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना चाहिए।”

ट्रेड यूनियनों ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन किए हैं, जबकि परिवहन कर्मचारी मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 को वापस लेने की भी लगातार मांग कर रहे हैं।

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