NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नीतीश सरकार ने विकास के नाम पर चलवा दिया बुलडोज़र, बेघर हुए सैकड़ों ग़रीब
4 अक्टूबर ‘विश्व आवास दिवस’ के दूसरे ही दिन नीतीश कुमार सरकार के ‘विकास के बुलडोजर’ ने सैकड़ों झुग्गी-झोपड़ीवासियों की ज़िंदगियों को तबाह कर दिया।
अनिल अंशुमन
11 Oct 2021
Malahi

बिहार के विधान सभा चुनाव में डबल इंजन की सरकार होने के अंतहीन फायदे गिनाकर गरीब बेघरों से भी वोट झटकने वाले कुर्सी पर काबिज़ होते ही कैसे अपना असली रंग दिखाते हैं, इसी का नज़ारा दिखाता है राजधानी पटना स्थित मलाही पकड़ी में बसे सैकड़ों गरीब परिवारों पर चालाया गए बुलडोजर का ‘सुशासनी काण्ड’। जहाँ 4 अक्टूबर ‘विश्व आवास दिवस’ के दूसरे ही दिन नीतीश कुमार की डबल इंजन सरकार के ‘विकास के बुलडोजर’ ने सैकड़ों हथियारबंद पुलिसकर्मियों के डंडों के बल पर सैकड़ों ग़रीबों की ज़िंदगियों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है।

विरोध करने वालों में महिलाओं और बच्चों तक को नहीं बख्शा गया। पुलिस की बर्बर मार से घायल 40 वर्षीय राजेश ठाकुर का सर फट गया और दूसरे दिन ही अस्पताल में उसकी मौत हो गयी।          

ये भी पढ़ें : खोरी गांव विस्थापन: सुप्रीम कोर्ट ने तोड़-फोड़ पर नहीं लगाई रोक; पुनर्वास योजना में दी राहत
                                                                    
बताया जाता है कि उस दिन बिना कोई पूर्व सूचना दिए ही सुबह 9 बजे नगर एसएसपी के नेतृत्व में सैकड़ों हथियारबंद पुलिस ने पूरी बस्ती को घेर कर आधे घंटे के अन्दर अपनी झोपड़ियाँ ख़ाली करने का फरमान सुना दिया. उधर बस्ती वाले जो पिछले दिनों प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन से निश्चिन्त अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, अचानक हुए इस हमले से बदहवास से हो गये. महिलायें बच्चों के लिए खाना पका रहीं थीं और मर्द बाहर मजदूरी के लिए जाने की तैयारी में थे।

उजड़े हुए घर 

पल भर में वहां घुस आये हथियारबंद पुलिस के जवानों ने भद्दी भद्दी गलियाँ देते हुए उनके घरों में रखे सामानों को बाहर फेंक दिया, झुग्गी-झोपड़ियों को तहस नहस किये जाने से हर तरफ चीख पुकार मच गयी. बस्ती के गुस्साए लोग भी वहाँ से गुजरने वाली सड़क को जाम कर के जोरदार विरोध प्रकट करने लगे. जवाब में सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने लाठियां भांजते हुए सभी झुग्गियों पर बुलडोजर चलवा दिया. कुछ ही देर में सारी बस्ती कूड़े के मालवे में तब्दील कर दी गयी.बेघरों के बचे खुचे सामानों में भी आग लगा दी गयी. औरतें चीत्कार करने लगीं और आक्रोशित गरीबों ने भी पुलिस पर हमला बोल दिया.

ये भी पढ़ें: उत्तराखंड: विकास के नाम पर 16 घरों पर चला दिया बुलडोजर, ग्रामीणों ने कहा- नहीं चाहिए ऐसा ‘विकास’

जिसमें पुलिस की पिटाई से राजेश ठाकुर बुरी तरह से ज़ख़्मी हो गया और दर्जनों घायल हो गए. कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी बताया कि पुलिस की लाठी से कई घायल जब भागकर पास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो पुलिस वहाँ भी पहुँच गयी और इलाज करा रहे सभी घायलों को पीटने लगी, दूसरे दिन मृतक राजेश ठाकुर के शव को लेकर सड़क जाम कर दी गई. घटना की खबर सुनकर मौके पर पहुंचे माले विधायक दल नेता महबूब आलम भी इंसाफ़ की मांग को लेकर वहीं सड़क पर धरना देने के लिए बैठ गए. साथ सभी वामपंथी दलों के कार्यकर्त्ता पीड़ित बेघरों के साथ प्रतिवाद में शामिल हो गए. बाद में वहाँ पहुंचे उच्चाधिकारियों के आश्वासन के बाद जाम और धरना हटा.

10 अक्टूबर को इस कांड के खिलाफ मलाही पकड़ी में ही भाकपा माले व सीपीआइ समेत अन्य वाम दलों और सामाजिक जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने ‘राजेश ठाकुर श्रद्धांजली सभा’ कर सरकार व प्रशासन पर यहाँ के गरीबों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया. क्योंकि पिछले अगस्त माह में जब यहाँ के लोगों ने वैकल्पिक आवास उपलब्ध करने की मांग को लेकर दो दिनों तक अनवरत धरना दिया गया था. तो प्रशासन ने ही उन्हें ज़ल्द से ज़ल्द दूसरी जगह बसाने का वायदा करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था होने तक नहीं उजाड़े जाने का आश्वासन दिया था.

श्रद्धांजली सभा में मृतक राजेश ठाकुर के परिजनों को उचित मुआवजा व दोषी पुलिस को सज़ा देने के साथ साथ सभी उजाड़े गए बेघर गरीबों को अविलम्ब बसाने की मांग की गयी.                   

ये भी पढ़ें: फरीदाबाद की संजय नगर बस्ती पर रेलवे ने चलाया बुलडोज़र, उजड़ गए बरसों से रह रहे दलित मज़दूर परिवार

उक्त कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माले विधायक और खेत ग्रामीण मजदूर सभा के राज्य नेता गोपाल रविदास ने नीतीश कुमार सरकार की गरीब विरोधी नीतियों पर तीखा विरोध जताया. अपने संबोधन में कहा कि मलाही पकड़ी में वर्षों से बसे हुए गरीबों को उजाड़े जाने की घटना ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि नितीश कुमार व भाजपा की डबल इंजन की सरकार विकास की नहीं बल्कि हक़ीक़त में ये गरीबों पर चलाई जा रही बुलडोजर की सरकार है. जो राजधानी को स्मार्ट सिटी व सुन्दर बनाने तथा मेट्रो चलाने के नाम पर गरीबों को ही हटाने पर आमादा दिख रही है. जिस राजधानी को अपनी हाड़-तोड़ मेहनत से सुन्दर बनाने वाले और गुलामों की भांति खट रहे मजदूरों की जिंदगियों से कोई मतलब नहीं रह गया है. 

गोपाल रविदास ने आगे कहा- यहाँ की घटना तो महज शुरुआत है जो ज़ल्द ही राजधानी में बसे अन्य सभी मलाही पकड़ी जैसी झुग्गी बस्तियों में अंजाम दी जायेगी. 

सभा में वहाँ उपस्थित सभी विस्थापितों से अपने जीने-रहने के बुनियादी अधिकार के लिए एकजुट संघर्ष करने का महत्व बताते हुए महागठबंधन के भी सभी दलों से भी आह्वान किया कि गरीब विरोधी ‘डबल इंजन की सरकार’ को अब हर क़दम पर घेर लेने की ज़रूरत है। बाद में सभा में सर्वसम्मत फैसला लिया गया कि मालाही पकड़ी के विस्थापित किये गए सभी गरीबों को अविलम्ब बसाये जाने की की मांग को लेकर मुख्यमंत्री का घेराव किया जाएगा।

ये भी पढ़ें: खोरी गांव विस्थापन संकट : घरों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू, निवासियों ने जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन

फिलहाल मलाही पकड़ी बस्ती का अब कहीं नामों-निशान तक नहीं बचा, ज़ल्द ही सरकार द्वारा वहाँ भव्य मेट्रो स्टेशन निर्माण किया जाना तय है. वहाँ से उजाड़े गए सभी गरीब बेघरों के लिए कहीं कोई ठिकाना नहीं रह गया है. सब अपने बच्चों को लेकर वहीँ आस पास प्लास्टिक तानकर किसी तरह से रह रहें हैं।

पीयूसीएल से जुड़े और पिछले 40 वर्षों से भी अधिक समय से पटना की झुग्गी झोपड़ीवासियों और बेघरों के सवालों को लेकर सड़क से लेकर हाई कोर्ट तक की लड़ाई लड़ रहे किशोरी दास, मलाही पकड़ी के बेघरों को उजाड़े जाने से काफी क्षुब्द्ध हैं. जिसकी प्रतिक्रया में उनका कहना है कि वैसे तो आज तक किसी भी सरकार ने गरीब बेघरों के लिए कोई ठोस काम नहीं किया है. फिर भी पिछली कांग्रेस व राजद सरकारों के शासन काल में बेघरों को पटना के कुछेक स्थानों पर कानूनी तरीके से बसाया गया था. लेकिन जब से नीतीश कुमार व भाजपा की डबल इंजन की सरकार सत्ताशीन हुई है, आज तक एक भी शहरी बेघर और गरीबों को उनका आवास नहीं मिल सका है. उलटे इन्हें हर जगह से अतिक्रमणकारी कह कर पुलिसिया डंडों के बल पर खदेड़ दिया जा रहा है. यह सब सिर्फ इसलिए है कि राजधानी पटना को सुन्दर बनाने के लिए सारे गरीब यहाँ से हटा दिए जाएँ. इनके अन्दर से कोई संगठित आवाज़ नहीं उठ सके इसके लिए दारु पैसा देकर इनके नौजवानों को हिन्दूवाद की घुट्टी पिला दी जा रही।                                                         

इसी साल 21 जुलाई को नितीश कुमार सरकार के उप मुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री ने घोषण की थी कि उनकी सरकार के सुशासन कार्यक्रम 2020-25 के तहत आत्मनिर्भर सभी शहरी गरीबों को बहुमंजिला भवन बनाकर पक्का मकान दिलाने की योजना है।

ये भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ : “विकास के नाम पर पुनर्वास बिना दोबारा विस्थापन स्वीकार नहीं”

Bihar
Malahi
Homeless People
Nitish Kumar
nitish goernement

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • सरोजिनी बिष्ट
    विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 
    17 May 2022
    ये आशायें लखनऊ में "उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन- (AICCTU, ऐक्टू) के बैनर तले एकत्रित हुईं थीं।
  • जितेन्द्र कुमार
    बिहार में विकास की जाति क्या है? क्या ख़ास जातियों वाले ज़िलों में ही किया जा रहा विकास? 
    17 May 2022
    बिहार में एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध है, इसे लगभग हर बार चुनाव के समय दुहराया जाता है: ‘रोम पोप का, मधेपुरा गोप का और दरभंगा ठोप का’ (मतलब रोम में पोप का वर्चस्व है, मधेपुरा में यादवों का वर्चस्व है और…
  • असद रिज़वी
    लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश
    17 May 2022
    एडवा से जुड़ी महिलाएं घर-घर जाकर सांप्रदायिकता और नफ़रत से दूर रहने की लोगों से अपील कर रही हैं।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 43 फ़ीसदी से ज़्यादा नए मामले दिल्ली एनसीआर से सामने आए 
    17 May 2022
    देश में क़रीब एक महीने बाद कोरोना के 2 हज़ार से कम यानी 1,569 नए मामले सामने आए हैं | इसमें से 43 फीसदी से ज्यादा यानी 663 मामले दिल्ली एनसीआर से सामने आए हैं। 
  • एम. के. भद्रकुमार
    श्रीलंका की मौजूदा स्थिति ख़तरे से भरी
    17 May 2022
    यहां ख़तरा इस बात को लेकर है कि जिस तरह के राजनीतिक परिदृश्य सामने आ रहे हैं, उनसे आर्थिक बहाली की संभावनाएं कमज़ोर होंगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License