NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
श्रम कानूनों में बदलाव का विरोध: राजघाट पर भूख हड़ताल, पुलिस ने मज़दूर नेताओं को हिरासत में लिया
सीटू महासचिव और पूर्व सांसद तपन सेन सहित ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय स्तर के कई नेता दिल्ली के राजघाट पर एक दिन की भूख हड़ताल पर बैठ थे। सभी मज़दूर नेताओं को राजघाट से पुलिस ने हिरासत में लिया है। इससे पहले सुबह यूपी पुलिस ने भी तीन ट्रेड यूनियन नेताओं को हिरासत में लिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 May 2020
श्रम कानूनों में बदलाव का विरोध

देश में राज्यों द्वारा किए गए श्रम कानूनों में हालिया बदलावों को चुनौती देते हुए, दस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने 22 मई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। अखिल भरतीय विरोध दिवस के दिन कश्मीर से तमिलनाडु, असम, गुजरात,बिहार ,दिल्ली ,  बंगाल तक...रेलवे, बंदरगाह, एचएएल, निर्माण मज़दूर , आंगनबाड़ी कर्मचारी सहित तमाम मज़दूरों ने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

सीटू महासचिव और पूर्व सांसद तपन सेन सहित ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय स्तर के कई नेता  दिल्ली के राजघाट पर एक दिन की भूख हड़ताल भी बैठे, लेकिन सभी मज़दूर नेताओं को राजघाट से पुलिस ने हिरासत में लिया।

इसमें सीटू महासचिव तपन सेन, अध्यक्ष हेमलता, सचिव ए आर सिंधु और अमितावा गुहा, इंटक के नेता अशोक सिंह,  एटक के विद्या सागर

गिरी, हिन्द मज़दूर सभा के एच एस सिद्धू, , ऐक्टू के राजीव डिमरी,  और सेवा की नेता  लता  समेत दर्जनों नेताओ को हिरासत में ले लिया गया हैं।  

मज़दूर नेताओ ने कहा "हम लोग शांति पूर्वक अपना विरोध दर्ज करा रहे थे लेकिन सरकार ने उनके इस प्रदर्शन को रोकने और मज़दूरों की आवाज को दबाने के लिए पुलिस की मदद ले रही है। पहले तो करोड़ो मज़दूरों के अधिकारों को छीना और अब हमारे विरोध का अधिकार भी छीन रही है।"

इससे पहले आज यानी शुक्रवार सुबह,  उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने ट्रेड यूनियनों के तीन नेताओं को हिरासत में लिया। इनमें से सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) दिल्ली एनसीआर के उपाध्यक्ष, , गंगेश्वर और हिंद मजदूर सभा (एचएमएस) के एक अन्य नेता शामिल हैं  ।

इस बात की पुष्टि करते हुए, दिल्ली के सीटू के महासचिव, अनुराग सक्सेना ने कहा, “तीनों को देशव्यापी विरोध के आगे अपने घर से गिरफ्तार किया गया। वर्तमान में उन्हें विरोध करने से रोकने के लिए यूपी पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया है।”
 
पश्चिम बंगाल के चाय श्रमिकों ने अपने मांग पत्र के साथ मालिकों के खिलाफ एक संयुक्त विरोध प्रदर्शन किया। राज्य में चाय श्रमिकों को कोरोनोवायरस-प्रेरित लॉकडाउन और अम्फैन चक्रवात की दोहरी मार झेल रहे हैं।

तमिलनाडु में भी रेलवे कर्मचारियों ने शरीरिक दुरी का ध्यान रखते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जो भारत के रूप में सीओवीआईडी -19 से लड़ रहे  हैं, अपनी नौकरी नियमित करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। पंजाब में आंगनवाड़ी महिला श्रमिकों ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया लिया। इस दौरन सभी ने अपने मुँह को कपड़े से ढका हुआ था।

ट्रेड यूनियनों ने  15 मई के अपने बयान में कहा था, " कोविड 19 की आड़ में हर दिन सरकार मज़दूर वर्ग व देश की आम जनता पर हमला करते हुए कोई न कोई फैसला ले रही है, तब जब कि वो पहले से ही लॉक डाउन के हालातों में संकट और तकलीफ़ें झेल रहे हैं। ट्रेड यूनियनों ने प्रधानमंत्री तथा श्रम मंत्री को स्वतंत्र व संयुक्त दोनों स्तरों पर इस बाबत व इसके साथ-साथ लॉकडाउन अवधि में वेतन के पूरे भुगतान करने व नौकरी से न निकालने के सरकार के अपने दिशानिर्देशों/सलाहों की अवहेलना के बारे में कई पत्र लिखें हैं। परन्तु इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए। इसके अलावा राशन वितरण, औरतों तथा वृद्धों को कैश ट्रांस्फर आदि सरकार की अधिकतर घोषणाएं विफल साबित हुई हैं व इनका फायदा ज़मीनी स्तर पर संभावित लाभार्थियों को नहीं मिल रहा है।"

अब तक, कम से कम नौ राज्यों ने कारखानों में मज़दूरों की दैनिक कामकाजी समय को आठ घंटे से बढ़ाकर बारह घंटे करने का फैसला किया जा चुका है। इस बीच, एक अध्यादेश के माध्यम से, उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश सहित राज्यों ने अगले 1000 दिनों के लिए राज्य में 38 श्रम कानूनों के रूप में कई कंपनियों को छूट देने के पूर्व निर्णय के साथ, श्रम कानूनों में परिवर्तन लाने की मांग की है।

दस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने 22 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और सरकारी विभागों के "निजीकरण" को रोकने सहित अपनी अन्य मांगों को दोहराया है। इनमें प्रमुख माँगें हैं : फंसे हुए प्रवासी मज़दूरों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं, सभी के लिए भोजन, सभी के लिए राशन, लॉक डाउन की अवधि में वेतन भुगतान को सुनिश्चित करना, असंगठित क्षेत्र के तमाम श्रमिकों (पंजीकृत, गैर पंजीकृत और स्वरोजगार में लगे हुए) के लिए कैश ट्रांस्फर, केंद्र सरकार व केन्द्र सरकार के उपक्रमों के कर्मचारियों   की डीए तथा पेंशनरों की डीआर पर लगी रोक को हटाना, खाली पदों के लिए घोषित भर्तियों पर रोक को हटाना।

इस विशाल मानवीय समस्या से निपटने में केंद्र और राज्यों के बिच समन्वय की कमी है, कोरोनवायरस-प्रेरित लॉकडाउन के मद्देनजर, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने फंसे श्रमिकों को तत्काल राहत देने, 'न्यू पार्लियामेंट प्रोजेक्ट' पर बजट खर्च को वापस लेने और प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण से संबंधित कानून को मजबूत बनाने की भी मांग की।

labor laws
Protest against labor law
hunger strike
Labor leaders
delhi police
Rajghat
trade unions
CITU
Center of indian trade unions

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

मुस्लिम विरोधी हिंसा के ख़िलाफ़ अमन का संदेश देने के लिए एकजुट हुए दिल्ली के नागरिक

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • corona
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,778 नए मामले, 62 मरीज़ों की मौत
    23 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.05 फ़ीसदी यानी 23 हज़ार 87 हो गयी है।
  • moon
    संदीपन तालुकदार
    चीनी मिशन में इकट्ठा किये गये चंद्रमा के चट्टानों से शोध और नये निष्कर्षों को मिल रही रफ़्तार
    23 Mar 2022
    इस परिष्कृत चीनी चंद्र मिशन ने चीन और उसके बाहर दोनों ही जगहों पर पृथ्वी या उसके वायुमंडल से बाहर के चट्टानों पर शोध किया है। जानकार उम्मीद जता रहे हैं कि इससे हमें सौर मंडल के बारे में नयी-नयी…
  • bhagat singh
    हर्षवर्धन
    जाति के सवाल पर भगत सिंह के विचार
    23 Mar 2022
    भगत सिंह के जाति व्यवस्था के आलोचना के केंद्र में पुनर्जन्म और कर्म का सिद्धांत है। उनके अनुसार इन दोनों सिद्धांतों का काम जाति व्यवस्था से हो रहे भीषण अत्याचार के कारण उत्पन्न होने वाले आक्रोश और…
  • bhagat singh
    लाल बहादुर सिंह
    भगत सिंह की फ़ोटो नहीं, उनके विचार और जीवन-मूल्यों पर ज़ोर देना ज़रूरी
    23 Mar 2022
    शहादत दिवस पर विशेष: भगत सिंह चाहते थे कि आज़ाद भारत में सत्ता किसानों-मजदूरों के हाथ में हो, पर आज देश को कम्पनियां चला रही हैं, यह बात समाज में सबसे पिछड़े माने जाने वाले किसान भी अपने आन्दोलन के…
  • भाषा
    साल 2021 में दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी थी : रिपोर्ट
    22 Mar 2022
    साल 2021 में वैश्विक स्तर पर वायु गुणवत्ता की स्थिति बयां करने वाली यह रिपोर्ट 117 देशों के 6,475 शहरों की आबोहवा में पीएम-2.5 सूक्ष्म कणों की मौजूदगी से जुड़े डेटा पर आधारित है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License