NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
स्वामीनाथन रिपोर्ट जमा हुए 14 साल हो गए, लेकिन संसद में आधे घंटे भी चर्चा नहीं हुई : पी.साईनाथ
'किसानों की आत्महत्या की घटनाएं कम नहीं हुई हैं। इतना जरूर हुआ है कि सरकार ने अब उनका सही आंकड़ा जारी करना ही बंद कर दिया है। 2014 के बाद से किसान आत्महत्या का जो डेटा (एनसीआरबी) आया है उसकी पिछले 19 साल के डेटा से तुलना नहीं की जा सकती है क्योंकि डेटा काउंटिंग का तरीका बदल दिया गया।'
रिज़वाना तबस्सुम
30 Nov 2019
sainath

वाराणसी: 'साल 2014 के बाद भी किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में भारी इजाफा हुआ है। अब तक 35 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन सरकारी फाइलों से ये आंकड़े गायब हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की आत्महत्या की घटनाएं कम नहीं हुई हैं। इतना जरूर हुआ है कि सरकार ने अब उनका सही आंकड़ा जारी करना ही बंद कर दिया है।'

ये कहना है प्रख्यात पत्रकार व किसान कार्यकर्ता पी. साईनाथ का। वे शुक्रवार को वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। पी. साईनाथ का कहना है कि किसान, कृषि संकट और किसान की आत्महत्या का मुद्दा बीस साल से ज्यादा से चल रहा है। यूपीए सरकार ने भी किसान की आत्महत्या नंबर बदलने की कोशिश की, लेकिन 2014 में जब नई सरकार आई तो जहां 10 पैसे का बदलाव हो रहा था इसने 100 रुपये का बदलाव ला दिया।
Sainath VNS2.jpg
उनके मुताबिक 2014 के बाद से किसान आत्महत्या का जो डेटा (एनसीआरबी) आया है उसकी पिछले 19 साल के डेटा से तुलना नहीं की जा सकती है क्योंकि डेटा काउंटिंग का तरीका बदल दिया गया। इस सरकार ने किसान की आत्महत्या नंबर बदलने के लिए किसान को ही अलग पार्ट में कर दिया है। जैसे- बटाई वाले किसान का अलग से एक कॉलम बनाया, लेकिन हमारे देश में बहुत से ऐसे बटाई वाले किसान हैं जिनके पास जमीन के कागजात नहीं होते हैं। बटाई वाले किसान जुबान से काम करते हैं।

एक किसान जो बटाई (दूसरों की जमीन पर खेती) वाला है अगर वो आत्महत्या करता है तो वह मजदूर की लिस्ट में आ जाता है और उसे किसान की लिस्ट में नहीं रखते, जिससे किसान आत्महत्या के आंकड़ें कम किए जाते हैं। इतना ही नहीं, हजारों किसानों की मौत की वजह सरकार कृषि मानती ही नहीं। उसकी वजह कुछ और बता दिया जाता है। और उन्हें अदर्स के कॉलम में डाल दिया जाता है।

साईनाथ कहते हैं कि सरकार किसानों के प्रति कोई ठोस नीति नही बना पा रही है। यह उदासीनता खतरनाक साबित होगी। रातों-रात की गई नोटबंदी और जीएसटी की मार देश के किसानों पर पड़ी है। जिस दौर में लोग सड़क पर आ गए, उस दौर में कॉरपोरेट घराने जमकर फले-फूले और अपनी आमदनी हजारों गुना ज्यादा बढ़ा ली।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि, 'किसान आज भी आत्महत्या करने पर विवश है, क्योंकि सरकार ने राष्ट्रीय बैंकों की क्रेडिट संरचना को खत्म कर दिया है। बैंक किसानों के स्थान पर उच्च मध्यमवर्गीय और कॉर्पोरेट घराना को लोन देने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।'
Sainath VNS.jpg
किसान और किसानों पर संकट के बारे में बोलते हुए साईनाथ ने कहा कि, 'किसानों की समस्या के मूल में नीति जनक गलतियां हैं। नीतियां बदलने से ही हालात में सुधार होंगे। स्वामीनाथन रिपोर्ट 2006 में जमा हुई। 14 साल बीत गए, लेकिन आधे-एक घंटे भी संसद में इस पर बहस नहीं हुई। मगर जब बात कारपोरेट सेक्टर की आती है तो चार घंटे में बिल पास हो जाते हैं।

किसानों के संकट के हल पर साईनाथ ने कहा, 'राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन होना चाहिए और संसद का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए, जिसमें सिर्फ कृषि संकट पर भी चर्चा की जानी चाहिए। इसमें तीन दिन स्वामीनाथन आयोग की रपट पर चर्चा हो और तीन दिन किसान क्रेडिट कार्ड पर। एमएसपी और सिंचाई समस्या का मुद्दा संसद में गंभीरता से उठाया जाना चाहिए। कृषि संकट के पीड़ितों को भी संसद में बुलाया जाए और उनकी बात भी सुनी जाए। उन्हें भी बोलने का मौका दिया जाए। देश भर के लगभग दस लाख किसानों को संसद के बाहर बुलाकर एक प्रोजेक्टर के माध्यम से संसद की कार्रवाई को भी दिखाने की व्यवस्था की जाए।'

ग्रामीण पत्रकार और पत्रकारिता पर बोलते हुए पी. साईनाथ ने कहा कि, 'ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले पत्रकार सही मायने में काम कर रहे हैं। हमले भी इन्हीं पत्रकारों पर हो रहे हैं। हाल के सालों में जितने पत्रकारों की हत्याएं हुईं उनमें सभी ग्रामीण पत्रकार थे और वो क्षेत्रीय भाषाओं में काम करते थे।

'कितनी आज़ाद है ग्रामीण पत्रकारों की कलम' विषय पर संवाद में वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि, 'सियासी दल और माफिया गिरोह ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले पत्रकारों को ही निशाना बनाते रहे हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।' पत्रकारों को सतर्क रहने की बात कहते हुए कहा कि, 'ग्रामीण पत्रकारों पर हमले की घटनाएं बढ़ सकती हैं।' उन्होंने कहा कि मीडिया और पत्रकारिता में अंतर है। 'मीडिया कारपोरेट घरानों के लिए काम करती है और पत्रकारिता आम आदमी के लिए। दोनों के फर्क को समझना अब बेहद जरूरी है।'

caaj
Swaminathan Report
Peasant suicide
workers and peasant
varanasi
Central Government
Parliament of India
P.Sainath
National Farmers Commission

Related Stories

उनके बारे में सोचिये जो इस झुलसा देने वाली गर्मी में चारदीवारी के बाहर काम करने के लिए अभिशप्त हैं

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित

किसानों ने बनारसियों से पूछा- तुमने कैसा सांसद चुना है?

दिल्ली: ट्रेड यूनियन के साइकिल अभियान ने कामगारों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा शुरू करवाई

यूपी में पश्चिम से पूरब तक रही भारत बंद की धमक, नज़रबंद किए गए किसान नेता

कोविड-19: प्रवासी कामगारों के लिये खाद्य सुरक्षा, नकद आहरण,परिवहन को लेकर याचिका

विशेष: जब भगत सिंह ने किया किसानों को संगठित करने का प्रयास

बजट के दिन संसद की तरफ़ पैदल कूच करेंगे किसान

'दिल्ली चलो' : अच्छी तरह से प्रबंधित सिंघु बॉर्डर प्रदर्शन की रचना

पंजाब में किसान आंदोलनः राज्य की आर्थिक व राजनीतिक घेराबंदी करती केंद्र सरकार


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    आप ने भगवंत मान को बनाया सीएम उम्मीदवार, चुनाव आयोग पर भेदभाव का आरोप और अन्य ख़बरें
    18 Jan 2022
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी आम आदमी पार्टी का भगवंत मान को सीएम उम्मीदवार घोषित करने पर , चुनाव आयोग की कार्रवाइयों पर उठते सवाल और अन्य ख़बरों पर।
  • up elections
    अजय कुमार
    5 साल के कामकाज में महंगाई और मज़दूरी के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पूरी तरह से फेल!
    18 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश और पंजाब में 5 साल में रोजगार पहले से भी कम हुआ है। बेरोजगारी बढ़ी है। महंगाई बढ़ी है। कमाई कम हुई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: क्या कोरोना के नए मामलों में आई है कमी? या जाँच में कमी का है असर? 
    18 Jan 2022
    दिल्ली में अचानक कोरोना मामलों में कमी आई है। आखिर केस कम होने के पीछे क्या कारण है? क्योंकि इस बीच कोरोना जाँच में भी भारी कमी हुई है। आँकड़े बताते हैं कि जाँच की संख्या घटाकर आधी कर दी गई है।
  • BJP
    रवि शंकर दुबे
    बीजेपी में चरम पर है वंशवाद!, विधायक, मंत्री, सांसद छोड़िए राज्यपाल तक को चाहिए परिवार के लिए टिकट
    18 Jan 2022
    यूपी विधानसभा चुनावों से पहले इन दिनों बीजेपी के भीतर जमकर बवाल चल रहा है। हर नेता अपने परिवार के सदस्यों के लिए टिकट मांग रहा है, ऐसे में बीजेपी ने कुछ की ख्वाहिशें तो पूरी कर दी हैं, लेकिन कुछ…
  • Asaduddin Owaisi
    अजय गुदावर्ती
    राजनीतिक धर्मनिरपेक्षता के बारे में ओवैसी के विचार मुसलमानों के सशक्तिकरण के ख़िलाफ़ है
    18 Jan 2022
    मुसलमानों के सामाजिक बस्तीकरण के खिलाफ और उनकी आर्थिक गतिशीलता के लिए निरंतर अभियान, जो एआइएमआइएम और उसके नेताओं की राजनीति से परे है, के जरिए ही देश की अल्पसंख्यक राजनीति सही दिशा में आगे बढ़ेगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License