NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अगले महीने होने वाला फ़िलिस्तीनी चुनाव हो सकता है स्थगित
15 वर्षों में घोषित पहले फ़िलिस्तीनी आम चुनाव के स्थगित होने का ख़तरा बना हुआ है क्योंकि इज़रायल ने पूर्वी जेरूसलम के फ़िलिस्तीनी लोगों को अपने मतपत्र डालने की अनुमति नहीं दी है।
पीपल्स डिस्पैच
28 Apr 2021
अगले महीने होने वाला फ़िलिस्तीनी चुनाव हो सकता है स्थगित

5 वर्षों में पहली बार कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों (ओपीटी) में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों की संभावनाओं को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब इजरायल कब्जे वाले पूर्वी येरूशेलम में 22 मई को निर्धारित चुनावों कराने की अनुमति नहीं दे रहा है।

इस निर्णय की घोषणा कथित तौर पर सार्वजनिक रूप से गुरुवार 29 अप्रैल को कैबिनेट की बैठक में की जाएगी जिसमें वेस्ट बैंक, पूर्वी येरुशेलम और गाजा के तीन क्षेत्रों के सभी फिलिस्तीनी राजनीतिक गुट शामिल होंगे।

यह बताया गया है कि चुनाव स्थगित करने का निर्णय इजरायल और मिस्र के बीच समझौता विफल होने के कारण अंतिम क्षण की बातचीत के बाद हुआ था। इस समझौते के तहत इजरायल को पूर्वी येरूशेलम के फिलीस्तीनी निवासियों को चुनाव में भाग लेने की अनुमति देना था। पीए के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने सप्ताह की शुरुआत में घोषणा कर दिया था कि पूर्वी येरूशेलम की भागीदारी के बिना फिलिस्तीन में आम चुनाव नहीं होंगे, इसे "रेड लाइन" करार दिया था।

पिछले रविवार को आधिकारिक डबल्यूएएफए समाचार एजेंसी द्वारा प्रकाशित एक बयान में, अब्बास ने कहा था कि "येरूशेलम रेड लाइन है और हम इसका कोई नुकसान स्वीकार नहीं करेंगे।" उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय विशेषकर अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, रूस और चीन से आग्रह किया कि वे पूर्वी येरुशेलम में फिलिस्तीनियों को चुनाव में भाग लेने की अनुमति देने के लिए इजरायल पर दबाव डाले। ये प्रक्रिया 1993 के ओस्लो समझौते जैसे पीए और इजरायल के बीच पिछले समझौतों के अनुरूप कराए।

1967 के युद्ध के बाद से इजरायल के कब्जे वाले पूर्वी येरूशेलम में लगभग 150,000 फिलिस्तीनी निवासी हैं। इनमें से अधिकांश इजरायल की अनुमति के बिना आम चुनावों में मतदान कर सकते हैं। हालांकि, लगभग 6,000 फिलिस्तीनियों को इजरायल की अनुमति की आवश्यकता है क्योंकि उन्हें अपने मतपत्र इज़रायली डाकघरों के माध्यम से जमा करने हैं। राजनीतिक संबद्धता या विचारधारा के विपरीत फिलिस्तीनी मानते हैं कि यह मुद्दा न केवल इन चुनावों के लिए बल्कि व्यापक फिलिस्तीनी मामलों के लिए भी काफी प्रतीकात्मक महत्व रखता है क्योंकि मई में होने वाले चुनाव और जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के साथ शहर के पूर्वी हिस्से पर इजरायल के संप्रभुता के दावे को सरेंडर करने का दबाव बढ़ जाएगा।

Palestine
palestine elections
Jerusalem
Israel
Israeli Occupation

Related Stories

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

अल-जज़ीरा की वरिष्ठ पत्रकार शिरीन अबु अकलेह की क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में इज़रायली सुरक्षाबलों ने हत्या की

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

इज़रायली सुरक्षाबलों ने अल-अक़्सा परिसर में प्रार्थना कर रहे लोगों पर किया हमला, 150 से ज़्यादा घायल

लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया

अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई

ईरान नाभिकीय सौदे में दोबारा प्राण फूंकना मुमकिन तो है पर यह आसान नहीं होगा

शता ओदेह की गिरफ़्तारी फ़िलिस्तीनी नागरिक समाज पर इस्राइली हमले का प्रतीक बन गया है

141 दिनों की भूख हड़ताल के बाद हिशाम अबू हव्वाश की रिहाई के लिए इज़रायली अधिकारी तैयार


बाकी खबरें

  • Poem
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: अक्टूबर के आरंभ की बरसती साँझ
    03 Oct 2021
    इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी के सह प्राध्यापक और छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर में जन्मे कवि बसंत त्रिपाठी ने ‘अक्टूबर के आरंभ की बरसती साँझ’ शीर्षक से क्या ख़ूब कविता कही है। वे कहते हैं- बरसो हे मेघ/…
  • GANDHI JI CARTOON
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: बापू मिले 'सरकार जी' से
    03 Oct 2021
    "तो बापू", सरकार जी ने कहा, "आप यहां आए किसलिए हैं। आप तो जानते ही हैं आपके और मेरे रास्ते जुदा जुदा हैं। आप सत्य के प्रयोगधर्मी और मैं असत्य को सत्य बनाने के प्रयोग में जुटा हूं। आप प्रेम के पुजारी…
  • The Country With a Burnt Post Office
    फ़राह बशीरी
    जले हुए डाकख़ाने वाला देश
    03 Oct 2021
    “रूमर ऑफ़ स्प्रिंग: अ चाइल्डहुड इन कश्मीर” 1990 के दशक में श्रीनगर में बितायी गयी फ़राह बशीर की किशोरावस्था का एक अविस्मरणीय वृत्तांत है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    राजनीति के अति-महत्वाकांक्षियों की दास्तान और किसानों पर कोर्ट
    02 Oct 2021
    आकांक्षी होना अच्छी बात है लेकिन जन-हित, समाज-हित को दरकिनार कर किन्हीं निहित स्वार्थों के लिए अति-महत्वाकांक्षी होना बुरी बात है. राष्ट्रीय राजनीति में इस सप्ताह तीन अति-महत्वाकांक्षी लोग अलग-अलग…
  • Modi
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: राष्ट्रपिता (देश) से राष्ट्रपिता (विदेश) तक
    02 Oct 2021
    हमें नहीं लगता कि राष्ट्रपिता-(विदेश) ही रहने में बापू को कोई आपत्ति होगी। बल्कि उन्हें जानने वाले तो कहते हैं कि वह अब और राष्ट्रपिता रहना ही नहीं चाहते हैं। फिर अब मोदी जी तो हैं ही। बुजुर्ग का देश…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License