NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
प्रशांत भूषण अपने रुख़ पर कायम, कहा- माफ़ी मांगना मेरे अन्त:करण की अवमानना
प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि अपने विचारों को व्यक्त करने पर सशर्त अथवा बिना किसी शर्त माफ़ी मांगना ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि निष्ठाहीन माफ़ी मांगना मेरे अन्तःकरण की और एक संस्था की अवमानना के समान होगा।

न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Aug 2020
प्रशांत भूषण अपने रुख़ पर कायम, कहा- माफ़ी मांगना मेरे अन्त:करण की अवमानना

अधिवक्ता और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय में अपने दो ट्वीट के लिए माफ़ी मांगने से इनकार कर दिया और कहा कि वह उनका विचार था और वह उस पर कायम हैं।

प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि अपने विचारों को व्यक्त करने पर सशर्त अथवा बिना किसी शर्त माफ़ी मांगना ठीक नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि निष्ठाहीन माफ़ी मांगना मेरे अन्तःकरण की और एक संस्था की अवमानना के समान होगा।

आपको बता दें कि  प्रशांत भूषण को उनके दो ट्वीट के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी ठहराया है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या को प्रशांत भूषण को दोषी ठहराया गया और सज़ा की मात्रा के लिए 20 अगस्त की तारीख़ तय की गई। लेकिन 20 अगस्त को सज़ा की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने माफ़ी मांगने से इंकार करते हुए अपने लिए सज़ा की मांग की। आज की ही तरह उन्होंने अपना बयान पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ से कहा कि वे माफ़ी नहीं मागेंगे और न ही उनके प्रति किसी भी तरह की उदारता बरतने की अपील करते हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट जो भी सजा उन्हें देगा, उसे वे स्वीकार करेंगे।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को उनके बयान पर पुनर्विचार करने के लिए 2-3 दिन का समय दिया। हालांकि वरिष्ठ वकील ने कहा कि उन्होंने बहुत सोच-समझकर अपना बयान पेश किया है और इस तरह बेवजह समय देना कोर्ट के समय को बर्बाद करना होना।

इसे पढ़ें : अवमानना मामला: प्रशांत भूषण ने माफ़ी मांगने से इंकार किया

आपको यह भी बता दें कि इस मामले में प्रशांत भूषण के साथ देश भर से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं जिनमें लेखक, बुद्धिजीवी, वकील और पूर्व जज भी शामिल हैं।  

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

 

prashnat bhushan case
prashant bhushan court contempt case
supreme court and prashant bhushan
prashnat bhushan and apology to supreme court
prashant bhushan statement in supreme court

Related Stories

प्रशांत भूषण ने अंत तक नहीं मांगी माफ़ी, सज़ा पर फ़ैसला सुरक्षित

अवमानना मामला: प्रशांत भूषण ने माफ़ी मांगने से इंकार किया


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    रवि शंकर दुबे
    किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा
    10 Dec 2021
    ‘378’... ये महज़ एक संख्या नहीं बल्कि वो दिन और राते हैं, जो हमारे देश के अन्नदाताओं ने दिल्ली की सड़कों पर गुज़ारी हैं... चिलचिलाती धूप, मूसलाधार बारिश और भीषण ठंड को किसानों ने सिर्फ़ इसलिए झेला ताकि…
  •  Bihar
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार खाद संकटः रबी की बुआई में देरी से किसान चिंतित, सड़क जाम कर किया प्रदर्शन
    10 Dec 2021
    अब मुजफ्फरपुर जिले के दस गांव के किसानों ने डीएपी खाद समेत अन्य खाद और बीज की भारी कमी को लेकर एनएच-722 पर प्रदर्शन किया और करीब छह घंटे तक मार्ग को जाम रखा।
  • Ghanshyam Tiwari
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में सपा की जीत संविधान की जीत होगी : घनश्याम तिवारी
    10 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश के चुनाव नजदीक आते ही प्रदेश और देश की राजनीती में सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं. हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मेरठ में हुई रैली में लाखो की संख्या में लोग देखने को मिले। आने वाले…
  • omicron
    संदीपन तालुकदार
    ओमिक्रोन के नए संस्करण का पता चला, यह टीके की सुरक्षा को दे सकता है मात
    10 Dec 2021
    जैसा कि पहले प्रयोगशाला अध्ययनों के द्वारा सुझाया गया है, और यह सच हो सकता है कि कोविड टीकों के द्वारा प्रदान की गई कुछ सुरक्षा से ओमिक्रोन बचकर निकल सकता है।
  • rights
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पत्रकारों पर बढ़ते हमले क्या आलोचना की आवाज़ दबाने की कोशिश है?
    10 Dec 2021
    सीपीजे की रिपोर्ट के मुताबिक़ एक दिसंबर 2021 तक दुनिया भर में 293 पत्रकार अपने काम के लिए विभिन्न देशों की जेलों में बंद थे। रिपोर्ट के अनुसार चीन में पत्रकारों की सबसे बुरी स्थिति है, तो वहीं भारत…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License