NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
शिक्षा
भारत
राजनीति
‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार
मौजूदा निज़ामशाही में असहमति और विरोध के लिए जगह लगातार कम, और कम, होती जा रही है। ‘धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना’—यह ऐसा हथियार बन गया है, जिससे कभी भी किसी पर भी वार किया जा सकता है।
अजय सिंह
20 May 2022
Ravikand and Ratanlal
प्रोफ़ेसर डॉ. रविकांत चंदन (बाएं), प्रोफ़ेसर डॉ. रतनलाल (दाएं)

पहले रविकांत। अब रतनलाल। एक लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदी का प्रोफ़ेसर। दूसरा दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास का प्रोफ़ेसर। दोनों दलित मूल के। दोनों हिंदुत्व फ़ासीवादी लंपट गिरोह के निशाने पर। बल्कि रविकांत पर तो विश्वविद्यालय परिसर के अंदर शारीरिक हमला भी हुआ, बावजूद इसके कि उन्हें दो हथियारबंद सुरक्षाकर्मी मुहैया कराये गये हैं। सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में यह हमला हुआ।

हिंदुत्व फ़ासीवादी लंपट गिरोह को केंद्र की और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों का खुला समर्थन मिला हुआ है। ध्यान दीजिये कि यह लंपट गिरोह पूरी तरह संगठित और हथियारबंद है। इसे बाक़ायदा राजसत्ता की ओर से पाला-पोसा गया है। असहमति और विरोध की आवाज़ उठानेवालों को ‘सबक़’ सिखाने के लिए यह ‘फ़ौज’ तैयार की गयी है।

दोनों प्रोफ़ेसरों ने सार्वजनिक तौर पर यह आशंका जतायी है कि भाजपा-विरोधी विचारों की खातिर हमें लिंच कर दिये जाने (पीट-पीट कर मार डालने) का गंभीर ख़तरा है। जो माहौल बना है या बना दिया गया है, उसमें इस आशंका को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

अतीत में गौरी लंकेश, एमएम कलबुर्गी, गोविंद पानसरे व नरेंद्र दाभोलकर – जैसे बुद्धिजीवियों/एक्टीविस्टों की हत्या की जा चुकी है। इन हत्याओं में हिंदुत्व फ़ासीवादी ताक़तों का हाथ रहा है। ये हत्याएं सिर्फ़ इसलिए की गयीं कि इन चारों के विचार भाजपा/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचार से मेल नहीं खाते थे और ये बुद्धिजीवी असहमति व विरोध की आवाज़ को लगातार बुलंद कर रहे थे।

मई 2014 में केंद्र में हिंदुत्व फ़ासीवादी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के सरकार बना लेने और कट्टर हिंदुत्ववादी नेता नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ऐसी हत्याओं का सिलसिला शुरू हुआ। हालांकि दाभोलकर की हत्या अगस्त 2013 में हुई थी, लेकिन ऐसी हत्याओं का सिलसिला मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से शुरू हुआ।

इसे भी पढ़े : लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद के बारे में भाजपा/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विभाजनकारी और विध्वसंकारी नैरेटिव (आख्यान) भोंपू की तरह लगातार बजाया/सुनाया जा रहा है। प्रोफ़ेसर रविकांत और प्रोफ़ेसर रतनलाल ने उससे असहमति व विरोध जताते हुए अपनी अलग राय रखी। इस वजह से ये दोनों प्रोफ़ेसर हिंदुत्व फ़ासीवादी लंपट गिरोह के निशाने पर आ गये।

मौजूदा निज़ामशाही में असहमति और विरोध के लिए जगह लगातार कम, और कम, होती जा रही है। ‘धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना’—यह ऐसा हथियार बन गया है, जिससे कभी भी किसी पर भी वार किया जा सकता है।

जब यह कहा जाता है कि किसी विचार/लेख/किताब/टिप्पणी/पत्रिका/शोध-अनुसंधान से किसी की ‘धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंच रही है’ और इसलिए उस पर रोक लगानी चाहिए, तो इसका मतलब होता हैः बहस व विचार विमर्श को बंद कर देना; नये विचारों की आमद को रोक देना; ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, साहित्य-कला-संस्कृति के दरवाज़े बंद कर देना; मानव सभ्यता व चिंतन की विकास यात्रा को अवरुद्ध कर देना। यह ब्राह्मणी पितृसत्ता और सवर्ण सामंती वर्चस्वशाली प्रभुत्व को बनाये रखने का औज़ार है।

कोपरनिकस, न्यूटन, गैलेलियो, मार्क्स, पंडिता रमाबाई, भगत सिंह औऱ अंबेडकर के विचार व कामकाज से भी कई लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं!

(लेखक कवि व राजनीतिक विश्लेषक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

इसे भी पढ़े : लखनऊ: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत के साथ आए कई छात्र संगठन, विवि गेट पर प्रदर्शन

Professor Dr. Ravikant Chandan
Professor Dr. Ratanlal
Ravikant Chandan
religion
Kashi Vishwanath Temple
Gyanvapi mosque
Dalit atrocities
Dalit Professor
Lucknow University
Delhi University
Hindutva Fascist

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

संघियों के निशाने पर प्रोफेसर: वजह बता रहे हैं स्वयं डा. रविकांत

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

न्याय के लिए दलित महिलाओं ने खटखटाया राजधानी का दरवाज़ा

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

यूपी चुनाव: दलितों पर बढ़ते अत्याचार और आर्थिक संकट ने सामान्य दलित समीकरणों को फिर से बदल दिया है

राजस्थान: घोड़ी पर चढ़ने के कारण दलित दूल्हे पर पुलिस की मौजूदगी में हमला

यूपी: ‘प्रेम-प्रसंग’ के चलते यूपी के बस्ती में किशोर-उम्र के दलित जोड़े का मुंडन कर दिया गया, 15 गिरफ्तार 


बाकी खबरें

  • ज़ाहिद खान
    प्रलेस : फ़ासिज़्म के ख़िलाफ़ फिर बनाना होगा जनमोर्चा
    09 Apr 2022
    9 अप्रैल, प्रगतिशील लेखक संघ के स्थापना दिवस पर विशेष: प्रलेस का किस तरह से गठन हुआ?, संगठन के पीछे क्या उद्देश्य थे? इस संगठन के विस्तार में क्या-क्या परेशानियां पेश आईं?, प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    बेशर्म नंगई पर उतरा तंत्र, नफ़रती एजेंटों की पौ-बारा
    08 Apr 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने मध्यप्रदेश में पत्रकार व अन्य लोगों को थाने में अर्द्धग्न करने की घटना को लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया और पीड़ित पत्रकार कनिष्क तिवारी से बात की। महंगाई में…
  • एजाज़ अशरफ़
    गुजरात दंगे और मोदी के कट्टर आलोचक होने के कारण देवगौड़ा की पत्नी को आयकर का नोटिस?
    08 Apr 2022
    नरेन्द्र मोदी सरकार स्पष्ट रूप से हिंदुत्व के कट्टर आलोचक के साथ राजनीतिक हिसाब चुकता कर रही है, इस उम्मीद के साथ कि ऐसा करके वह उन्हें भाजपा को चुनौती देने से रोक सकेगी। 
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    बीजेपी शासित एमपी और उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर ज़ुल्म क्यों ?
    08 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे हैं मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा पत्रकारों के साथ हुई अभद्र घटना पर। स्थानीय यूट्यूब पत्रकार कनिष्क तिवारी ने बताया…
  • सुहित के सेन
    हिन्दू दक्षिणपंथ द्वारा नफरत फैलाने से सांप्रदायिक संकेतों वाली राजनीति बढ़ जाती है  
    08 Apr 2022
    पत्रकारों और अल्पसंख्यकों पर हमले और भाजपा सरकारों के बदतर शासन के रिकॉर्ड दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License