NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
देशभर में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन
यह अध्यादेश आवश्यक रक्षा सेवाओं के कामकाज, "सुरक्षा या रखरखाव" को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल के उपयोग की अनुमति दी। साथ ही संबंधित प्रबंधन को कर्मचारियों को बर्खास्त करने का अधिकार देता है जो बिना किसी जानकारी के हड़ताल की कार्रवाई में भाग लेता पाया जाएगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Jul 2021
देशभर में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर शुक्रवार 23 जुलाई  को पूरे देश में केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश (ईडीएसओ) 2021 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए। राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़ सहित अन्य में सरकारी कर्मचारियों द्वारा प्रदर्शन किए जाने की सूचना है। इसी क्रम में राजधानी  दिल्ली की ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच इंटक, एटक, एचएमएस सीआईटीयू, ऐक्टू, सेवा सहित तमाम यूनियनों के राष्ट्रीय नेता नेतृत्व में प्रदर्शनकारी मज़दूर बैंक ऑफ बडौदा, संसद मार्ग के सामने झंडे, बैनर, नारों की तख्तियां लेकर संसद मार्ग पर जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जंतर-मंतर रेड लाईट से पहले रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने केन्द्र सरकार के मजदूर विरोधी अध्यादेश (ईडीएसओ) 2021, प्रतिरक्षा क्षेत्र के निगमीकरण व निजीकरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।    

प्रदर्शन के बाद अनुराग सक्सेना महामंत्री सीटू दिल्ली राज्य कमेटी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री एवं श्रम मंत्री भारत सरकार को ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शनकारियों को  एटक की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर, सीआईटीयू के राष्ट्रीय महासचिव तपन सेन, राष्ट्रीय महासचिव, ऐक्टू के के राष्ट्रीय महासचिव राजीव डीमरी सहित कई मज़दूर नेताओं ने  सम्बोधित किया। दिल्ली के शकुर बस्ती व केन्टोंमेंट क्षेत्र में स्थित आयुध डिपो से आयुध कर्मचारियों ने भी भाग लिया।  

वक्ताओं ने केन्द्र की मोदी सरकार से मांग की कि आयुध कारखानों में काम करने वाले मजदूरों/कर्मचारियों के हड़ताल एवं अन्य संगठनात्मक गतिविधियों पर लगाई गई रोक को तुरन्त वापस लिया जाये, प्रस्तावित निगमीकरण-निजीकरण को रदद किया जाए। साथ ही मजदूर विरोधी 4 श्रम कोड एवं किसान विरोधी 3 कृषि कानून को रद्द किया जाये।

क्या है अध्यादेश और क्यों हो रहा है इसका विरोध

पिछले महीने की शुरुआत में केंद्र द्वारा एक अध्यादेश लाया गया था,  जिससे देश में कर्मचारी संगठनों के हड़ताल और विरोध को दबाने के लिए  सशक्त क़ानून बनाने का प्रयास है। आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) के निगमीकरण के विरोध में मान्यता प्राप्त रक्षा संघों द्वारा बुलाए गए अनिश्चितकालीन हड़ताल के मद्देनजर 30 जून को भारत के राष्ट्रपति द्वारा 'द एसेंशियल डिफेंस सर्विसेज ऑर्डिनेंस, 2021' शीर्षक वाली एक गजट अधिसूचना जारी की गई थी।)

अध्यादेश नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय सरकार को रक्षा उपकरणउत्पाद, सेवाओं के उत्पादन और सेना से जुड़े किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान के संचालन या रखरखाव के साथ-साथ रक्षा की मरम्मत और रखरखाव में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा हड़ताल को प्रतिबंधित करने का आदेश जारी करने का अधिकार देता है।  

इसके अलावा, इसने "आवश्यक रक्षा सेवाओं के कामकाज, सुरक्षा या रखरखाव" को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल के उपयोग की अनुमति दी, साथ ही संबंधित प्रबंधन को कर्मचारियों को बर्खास्त करने का अधिकार दिया, जो बिना किसी जानकारी के हड़ताल की कार्रवाई में भाग लेता पाया जाएगा।

अधिसूचना के अनुसार, छह महीने के लिए वैद्य होगा, लेकिन केंद्र द्वारा इसे "जनहित में" आवश्यक होने पर बढ़ाया जा सकता है। उक्त अध्यादेश को बदलने की मांग वाला एक विधेयक भी गुरुवार को संसद में पेश किया गया था। शुक्रवार को इसी के ख़िलाफ़ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के बैनर तले विरोध प्रदर्शन करते हुए श्रमिकों ने अध्यादेश (ईडीएसओ 2021) को वापस लेने की मांग की जबकि यह दावा किया कि इसमें "विभिन्न कठोर दंड प्रावधान" शामिल हैं, जो यकीनन श्रमिकों के हड़ताल के कानूनी अधिकार को छीन लेता है।

अमरजीत कौर ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, “यह केवल रक्षा क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य लोगों तक भी सीमित है। इसलिए, यह एक बहुत ही खतरनाक अध्यादेश है जिसका एकजुट तरीके से विरोध किया जाना चाहिए", उसने न्यूज़क्लिक को बताया।
 
सीटू के महासचिव तपन सेन ने कहा कि ट्रेड यूनियन "इस अध्यादेश को मान्यता नहीं देंगे। “हम सरकार की राष्ट्र विरोधी नीतियों का विरोध करेंगे; जरूरत पड़ी तो कर्मचारी हड़ताल पर भी जाएंगे।

ट्रेड यूनियनों सयुंक्त रूप से कहा कि केन्द्र सरकार अगर मजदूरों की न्याय संगत मागें नहीं मानी गई और मजदूर अधिकारों को रौंदा गया तो मजदूर संगठन 2 से 3 दिन की देशव्यापी हड़ताल पर जाएंगे, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की होगी। 9 अगस्त 2021 को देशव्यापी ‘‘देश बचाओ" कार्यक्रम की तैयारी के लिए भी आह्वान किया।   

All India Trade Unions
EDSO
CITU
AICCTU
trade unions
Narendra modi
Modi government

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामले घटकर 10 लाख से नीचे आए 
    08 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 67,597 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 9 लाख 94 हज़ार 891 हो गयी है।
  • Education Instructors
    सत्येन्द्र सार्थक
    शिक्षा अनुदेशक लड़ रहे संस्थागत उत्पीड़न के ख़िलाफ़ हक़ की लड़ाई
    08 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को आश्वस्त किया था कि 2019 तक उन्हें नियमित कर दिया जायेगा। लेकिन इस वादे से भाजपा पूरी तरह से पलट गई है।
  • Chitaura Gathering
    प्रज्ञा सिंह
    यूपी चुनाव: मुसलमान भी विकास चाहते हैं, लेकिन इससे पहले भाईचारा चाहते हैं
    08 Feb 2022
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गांव के मुआयने से नफ़रत की राजनीति की सीमा, इस इलाक़े के मुसलमानों की राजनीतिक समझ उजागर होती है और यह बात भी सामने आ जाती है कि आख़िर भाजपा सरकारों की ओर से पहुंचायी जा…
  • Rajju's parents
    तारिक़ अनवर, अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव : गांवों के प्रवासी मज़दूरों की आत्महत्या की कहानी
    08 Feb 2022
    महामारी की शुरूआत होने के बाद अपने पैतृक गांवों में लौटने पर प्रवासी मज़दूरों ने ख़ुद को बेहद कमज़ोर स्थिति में पाया। कई प्रवासी मज़दूर ऐसी स्थिति में अपने परिवार का भरण पोषण करने में पूरी तरह से असहाय…
  • Rakesh Tikait
    प्रज्ञा सिंह
    सरकार सिर्फ़ गर्मी, चर्बी और बदले की बात करती है - राकेश टिकैत
    08 Feb 2022
    'वो जाटों को बदनाम करते हैं क्योंकि उन्हें कोई भी ताक़तवर पसंद नहीं है' - राकेश टिकैत
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License