NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
निजीकरण पर सवाल: कैग की रिपोर्ट से कई अहम बातों का खुलासा, सरकारी कंपनियों ने दिया 36,709 करोड़ का मुनाफ़ा
संसद में पेश की गई कैग की रिपोर्ट से कई खुलासे हुए हैं। एक तरफ़ सरकार सार्वजनिक उपक्रमों को बेच रही है जबकि सौ सार्वजनिक उपक्रमों ने 2018-19 में सरकार को 36,709 करोड़ रुपये का लाभांश दिया है। दूसरी तरफ रिपोर्ट ने यह भी बताया की एनटीपीसी-सेल के संयुक्त उद्यम के रख-रखाव का ठेका देने में सीवीसी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया है।

न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Feb 2021
निजीकरण पर सवाल: कैग की रिपोर्ट से कई अहम बातों का खुलासा, सरकारी कंपनियों ने दिया 36,709 करोड़ का मुनाफ़ा

नयी दिल्ली:  अभी पहली फरवरी को देश का आम बजट संसद के पटल पर रखा गया। जिसमें सरकार का पूरा जोर सरकारी कंपनियों के विनिवेश या आसान शब्दों में कहें तो निजी हाथों में सौंपने का था। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि सौ सरकारी कंपनियों और निगमों ने 2018-19 के दौरान केंद्र को 36,709 करोड़ रुपये के लाभांश दिये। अब कई लोग सवाल कर रहे हैं कि फिर सरकार इनको क्यों बेच रही है। इस रिपोर्ट में सरकार द्वारा सार्वजनिक उपक्रम एनटीपीसी-सेल के संयुक्त उद्यम के रख-रखाव का ठेका देने में भी अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं।

सरकारी कंपनियों क्या रहा लेखा-जोखा

संसद में मंगलवार को पेश कैग रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘सौ सरकारी कंपनियों और निगमों ने 2018-19 के दौरान कुल 71,857 करोड़ रुपये के लाभांश की घोषणा की है।’’ ‘‘इसमें से केंद्र सरकार को 36,709 करोड़ रुपये का लाभांश मिला। यह सभी सरकारी कंपनियों और निगमों में किये गये भारत सरकार के 4,00,909 करोड़ रुपये के कुल निवेश पर 9.16 प्रतिशत प्रतिफल के बराबर है।’’

इसके अनुसार पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन आने वाली 13 सरकारी कंपनियों ने 29,272 करोड़ रुपये का योगदान दिया जो सरकारी कंपनियों और निगमों द्वारा घोषित कुल लाभांश का 40.74 प्रतिशत है।

कैग ने कहा कि 36 केंद्रीय लोक उपक्रमों (सीपीएसई) ने लाभांश घोषणा को लेकर केंद्र सरकार के निर्देश का अनुपालन नहीं किया। इससे 2018-19 में लाभांश भुगतान में 8,011.33 करोड़ रुपये की कमी रही।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 157 केंद्रीय लोक उपक्रमों को 2018-19 के दौरान घाटा हुआ। कुल घाटा 37,310 करोड़ रुपये रहा जो 2017-18 में 41,180 करोड़ रुपये था।

कैग के अनुसार 189 सरकारी कंपनियों और निगमों का 31 मार्च, 2019 को संचित घाटा 1,40,307.55 करोड़ रुपये रहा। इनमें से 77 कंपनियों का संचित घाटा नेटवर्थ को पार कर गया था। यानी उनका नेटवर्थ समाप्त हो गया था।

इसके कारण, 31 मार्च, 2019 की स्थिति के अनुसार इन कंपनियों की शुद्ध परिसम्पत्ति शुद्ध देनदारी से 83,394.28 करोड़ रुपये कम रही। इन 77 कंपनियों में से 15 ने 2018-19 के दौरान कुल मिला कर 662.45 करोड़ रुपये का लाभ कमाया।

कैग रिपोर्ट की माने तो सरकारी कंपनियां जो घाटे में भी है उनका प्रदर्शन पिछले सालों के मुकाबले बेहतर ही हुआ है। जबकि सरकार ने जिन पेट्रोलियम और गैस कंपनी के विनिवेश की योजना बनाई है वो सरकार को लगातार मुनाफ़ा दे रही हैं।

एनटीपीसी-सेल के संयुक्त उद्यम ने रख-रखाव का ठेका देने में किया सीवीसी दिशानिर्देशों का उल्लंघन: कैग

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी और सेल के संयुक्त उद्यम एनटीपीसी सेल पावर कंपनी लि. (एनएसपीसी) ने 129.76 करोड़ रुपये के नियमित रखरखाव के काम का ठेका प्रतिस्पर्धी बोली के बिना सीधे देते हुए एक निजी इकाई को अनुचित लाभ पहुंचाया। कैग ने कहा है कि इस तरह ठेका देना केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

कैग की 18वीं रिपोर्ट के अनुसार इस कार्य का आबंटन 2013-14 से 2018-19 के दौरान किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘एनटीपीसी सेल पावर कंपनी लि. ने 2013-14 से 2018-19 के दौरान एक निजी इकाई को 129.76 करोड़ रुपये मूल्य का नियमित रखरखाव का काम सौंपा। यह कार्य सीवीसी के दिशानिर्देशों/सार्वजनिक खरीद नियमन की अनदेखी कर अनुबंध मूल्य के 10 प्रतिशत लाभ के मार्जिन के आधार पर सीधे सौंपा।’’

एनटीपीसी और भारतीय इस्पात प्राधिकरण की संयुक्त उद्यम एनटीपीसी सेल पावर कंपनी लि. (एनएसपीसीएल) बिजली उत्पादक कंपनी है। कंपनी के बिजलीघर भिलाई,दुर्गापुर और राऊरकेला में हैं।

रिपोर्ट के अनुसार एनएसपीसीएल निदेशक मंडल ने अगस्त 2007 में यूटिलिटी पावरटेक लि. (यूपीएल) के साथ एनटीपीसी के समझौतों की तर्ज पर बिजलीघर रखरखाव समझौता किया।

यूपीएल के रखरखाव समझौते को जनवरी 2008 में 10 साल के लिये मंजूरी दी गयी। लेकिन दोनों पक्षों की आपसी सहमति से समझौता मई 2016 में समाप्त कर दिया गया।

उसके बाद कंपनी ने यूपीएल के साथ मई 2016 में पांच साल के लिये नया रखरखाव समझौता किया।

एनएसपीसीएल भिलाई, राऊरकेला और दुर्गापुर में यूपीएल ने 2013-19 के दौरान कुल 346 कार्य किये। इसमें उप-ठेके पर किये गये कार्य शामिल थे। इसके लिये कंपनी को 129.76 करोड़ रुपये के भुगतान किये गये। इसमें 11.53 करोड़ रुपये का लाभ मार्जिन शामिल था।

 इनमें से 4.58 करोड़ रुपये के 75 कार्य यूपीएल ने स्वयं किये जबकि 125.18 करोड़ रुपये का 271 कार्य उप-ठके पर कराये गये।

सीवीसी के जुलाई 2007 के आदेश के तहत किसी भी सरकारी एजेंसी के लिये काम का ठेका देने के लिये निविदा प्रक्रिया या सार्वजनिक नीलामी जरूरी है। कोई भी दूसरा तरीका खासकर नामांकन आधार पर कार्य का ठेका देना संविधान के अनुच्छे 14 में प्रदत्त समानता के अधिकार , सार्वजनिक खरीद अधिनियम, सीवीसी दिशानिर्देश और उच्चतम न्यायालय के 2006 के आदेश का उल्लंघन है। साथ ही यह कंपनी के हित के भी खिलाफ है।

 सरकार द्वारा सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में सौंपने के फैसले के ख़िलाफ़ माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने हमला बोलते हुए कहा कि यह ‘राष्ट्रीय संपत्तियों की लूट’ है।

येचुरी ने ट्वीट किया, ‘‘भारत की जनता सरकारी क्षेत्र की मालिक है। सरकारें आती हैं और जाती हैं। कोई भी जनता की अनुमति के बिना संपत्तियों को नहीं बेच सकती।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लोग राष्ट्रीय संपत्तियों की लूट की अनुमति नहीं दे सकते हैं। हम इसका कड़ा विरोध करते हैं।’’

 जबकि सरकार के इस फैसले के ख़िलाफ़ देशभर में कर्मचारी और मज़दूर संघ भी इसका विरोध कर रहे है। बजट के तुरंत बाद 3 फरवरी को मज़दूर और कर्मचारियों ने देशभर में प्रदर्शन किया। जबकि बैंक कर्मचारियों ने मार्च में दो दिन के हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है।

इन कर्मचारियों का कहना है सरकार जानबूझकर सरकारी कंपनियों को बेचकर अपने पूंजीपति दोस्तों की मदद करना चाहती है।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

privatization
CAG report
India
Modi Govt

Related Stories

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

सरकारी एजेंसियाँ सिर्फ विपक्ष पर हमलावर क्यों, मोदी जी?

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

भारत में संसदीय लोकतंत्र का लगातार पतन

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

UN में भारत: देश में 30 करोड़ लोग आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर, सरकार उनके अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध


बाकी खबरें

  • punjab
    भाषा सिंह
    पंजाब चुनावः परदे के पीछे के खेल पर चर्चा
    19 Feb 2022
    पंजाब में जिस तरह से चुनावी लड़ाई फंसी है वह अपने-आप में कई ज़ाहिर और गुप्त समझौतों की आशंका को बलवती कर रही है। पंजाब विधानसभा चुनावों में इतने दांव चले जाएंगे, इसका अंदाजा—कॉरपोरेट मीडिया घरानों…
  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License