NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
यूरोप
पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन
फरवरी में यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूस पर एकतरफा प्रतिबंध लगाए हैं। इन देशों ने रूस पर यूक्रेन से खाद्यान्न और उर्वरक के निर्यात को रोकने का भी आरोप लगाया है।
अब्दुल रहमान
31 May 2022
putin
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फोटो: शिन्हुआ)

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले गुरुवार को यह दावा किया कि उनका देश बढ़ते खाद्य संकट को देखते हुए दुनिया की मदद के लिए तैयार है, बशर्तें पश्चिमी देश यूक्रेन से जंग छिड़ने के बाद रूस पर लगाए अपने प्रतिबंधों और रोकों को हटा लेता है। गौरतलब है कि रूस के खिलाफ लगे प्रतिबंधों के तीन महीने से भी ऊपर का समय बीत चुका है।

एक तो रूस-यूक्रेन में युद्ध अब भी जारी है, और ऊपर से रूस पर लगे प्रतिबंधों ने वैश्विक खाद्य संकट को गहरा कर दिया है। इसलिए कि रूस और यूक्रेन दोनों ही दुनिया में प्रमुख खाद्य आपूर्तिकर्ता देश हैं।

इसको देखते हुए रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि रूस खाद्यान्न और उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति को बढ़ावा दे सकता है, और उस मुद्रास्फीति को कम करने में भी मदद कर सकता है, जिससे कि इस समय बड़ी संख्या में दुनिया के देश जूझ रहे हैं। पुतिन ये बातें इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्राघी से कर रहे थे, जो उनके साथ लाइन पर थे। इस बारे में तास की रिपोर्ट कहती है कि ड्राघी ने इसी वैश्विक खाद्य संकट पर चर्चा करने के लिए पुतिन को फोन किया था।

पुतिन ने इटली के प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में यह भी कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने "राजनीतिक रूप से प्रेरित" हो कर रूस के विरुद्ध प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि गुरुवार को ड्राघी से बातचीत के पहले, पुतिन ने यूरेशियन इकोनॉमिक फोरम को संबोधित किया था। इसमें उन्होंने दावा किया कि यह प्रतिबंध उन देशों के लिए हानिकारक है,जिन्होंने उन पर प्रतिबंध लगाए हैं। उन्होंने इस प्रसंग में अभूतपूर्व महंगाई की ओर इशारा किया, जिसका कि अधिकतर देश सामना कर रहे हैं।

रूसी नेता पुतिन ने जोर देकर कहा कि “हालांकि वे देश आंतरिक स्तर पर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और मुझे आशा है कि उन्हें इसका एहसास है कि इस (रूस के खिलाफ प्रतिबंध की) नीति का बिल्कुल ही कोई भविष्य नहीं है।" पुतिन ने यह भी दावा किया कि पश्चिम उन देशों को कमजोर करने के लिए प्रतिबंधों का एक हथियार के रूप में उपयोग करता रहा है, जो स्वतंत्र नीतियों का पालन करने का प्रयास करते हैं।

पश्चिमी देशों के आरोपों पर पुतिन का जवाब

इटली के प्रधानमंत्री ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उन्होंने पुतिन से इस अनुरोध के साथ बातचीत की थी कि उनका देश यूक्रेन के बंदरगाहों से दुनिया को खाद्यान्न की आपूर्ति करने की अनुमति दे। पश्चिमी देशों ने यूक्रेन के विभिन्न बंदरगाहों पर निर्यात के लिए रखे खाद्यान्नों पर अपना दखल करने के लिए रूस को दोषी ठहराया है। पश्चिम का यह भी दावा है कि यूक्रेनी खाद्यान्न की कमी के कारण वैश्विक स्तर पर खाद्य कीमतों में वृद्धि हुई है और इसके चलते, कुछ अफ्रीकी देशों में यह स्थिति खाद्य संकट की वजह बन सकती है।

रूस ने पश्चिमी आरोपों से इनकार किया है। उसने दावा किया है कि पश्चिम खुद दुनिया में वर्तमान खाद्य संकट के लिए जिम्मेदार है क्योंकि उसने रूस के खिलाफ अविवेकपूर्ण प्रतिबंध लगाए हैं। रूस और यूक्रेन दोनों देश मिलकर विश्व को गेहूं, मक्का, जौ और कुछ खाद्य तेल जैसे प्रमुख खाद्यान्न के सभी वैश्विक निर्यात का एक तिहाई हिस्सा आपूर्ति करते हैं। रूस विभिन्न प्रकार के उर्वरकों के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। उसकी तरफ से इन चीजों के निर्यात में कमी होने से खाद्य उत्पादन में कमी हो सकती है। इससे कृषि उत्पादन की लागत में वृद्धि हो सकती है, जिससे कि वैश्विक खाद्य संकट बढ़ सकता है।

पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया के देशों से अपील की थी कि वे एकजुटता के साथ मिलकर तत्काल कदम उठाएं। उन्होंने दावा किया कि खाद्य असुरक्षा से गंभीर रूप से पीड़ित लोगों की संख्या पिछले दो वर्षों में 135 मिलियन से बढ़कर 276 मिलियन हो गई है।

तेल और गैस के रूसी निर्यात पर प्रतिबंध और रोक ने विभिन्न देशों में मुद्रास्फीति बढ़ा दी है, क्योंकि रूस तेल का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक और दुनिया में गैस का सबसे बड़ा निर्यातक है। इससे खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमत पर भी बुरा असर पड़ा है।

यूक्रेन में युद्ध चौथे महीने में

डोनबास क्षेत्र में युद्ध एक महत्त्वपूर्ण चरण में दाखिल हो गया है, जिसमें रूसी सेना पिछले हफ्ते मरियुपोल के पतन के बाद इस क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण पैठ बनाने का दावा किया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, रूस अब इस क्षेत्र में अपने लाभ को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, यूक्रेन में युद्ध में मारे गए नागरिकों की संख्या 4,000 को पार कर गई है। लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और बड़ी संख्या में यूक्रेन के लोग रूस सहित यूरोप के विभिन्न देशों में शरण लेने पर मजबूर हुए हैं।

पुतिन ने ड्राघी से बातचीत में यूक्रेन के इन दावों का खंडन किया कि रूसी सेना डोनबास क्षेत्र में "नरसंहार" कर रही है। इसके उलट उन्होंने दावा किया कि रूस अजोव और काला सागर में जहाजों को बंदरगाहों से आवाजाही की अनुमति देकर दैनिक मानवीय गलियारों का संचालन कर रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन नागरिक की युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित निकासी में "यूक्रेनी पक्ष” बाधा डाल रहा है।

पुतिन ने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्र में शांति के लिए बातचीत आवश्यक है, और उन्होंने यूक्रेन को इस बात के लिए दोषी ठहराया कि उसने अपने पश्चिमी सहयोगियों के दबाव में रूस से बातचीत को रोक दिया है। यह भी कि कहा कि मार्च में इस्तांबुल में रूस से शुरू हुई बातचीत पर भी अप्रैल से रोक लगा दी गई है।

इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडॉयमर जेलेंस्की ने इस सप्ताह की शुरुआत में दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक के दौरान अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर की रूस से बातचीत की पहल करने की सलाह पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ज़ेलेंस्की ने कहा कि डोनबास पर रूसी दावों को पहचानने के बारे में किसिंजर के सुझाव द्वितीय विश्व युद्ध से पहले जर्मनी के खिलाफ ब्रिटेन और अन्य देशों के बाद तुष्टिकरण की नीति जैसे हैं।

रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन में अपने “विशेष अभियान'’ की शुरुआत करते हुए दावा किया कि यूक्रेन ने 2015 के मिन्स्क समझौते का उल्लंघन किया है और अपने पूर्व में रूसी भाषी क्षेत्रों की स्वायत्तता की पहचान करने से इनकार कर दिया है। क्रेमलिन ने यूक्रेन पर नव-नाजी तत्वों को शरण देने का आरोप लगाया, जो देश में रूसी भाषी आबादी के खिलाफ अत्याचार कर रहे हैं। वे नाटो के साथ सहयोग कर रहे हैं, और रूसी सुरक्षा बलों को धमकी दे रहे हैं।

साभार : पीपल्स डिस्पैच 

Global Food crisis
Food Crisis
Putin
Russia
ukraine
Zelensky

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

विश्व खाद्य संकट: कारण, इसके नतीजे और समाधान

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन


बाकी खबरें

  •  Bihar
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार खाद संकटः रबी की बुआई में देरी से किसान चिंतित, सड़क जाम कर किया प्रदर्शन
    10 Dec 2021
    अब मुजफ्फरपुर जिले के दस गांव के किसानों ने डीएपी खाद समेत अन्य खाद और बीज की भारी कमी को लेकर एनएच-722 पर प्रदर्शन किया और करीब छह घंटे तक मार्ग को जाम रखा।
  • Ghanshyam Tiwari
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में सपा की जीत संविधान की जीत होगी : घनश्याम तिवारी
    10 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश के चुनाव नजदीक आते ही प्रदेश और देश की राजनीती में सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं. हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मेरठ में हुई रैली में लाखो की संख्या में लोग देखने को मिले। आने वाले…
  • omicron
    संदीपन तालुकदार
    ओमिक्रोन के नए संस्करण का पता चला, यह टीके की सुरक्षा को दे सकता है मात
    10 Dec 2021
    जैसा कि पहले प्रयोगशाला अध्ययनों के द्वारा सुझाया गया है, और यह सच हो सकता है कि कोविड टीकों के द्वारा प्रदान की गई कुछ सुरक्षा से ओमिक्रोन बचकर निकल सकता है।
  • rights
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पत्रकारों पर बढ़ते हमले क्या आलोचना की आवाज़ दबाने की कोशिश है?
    10 Dec 2021
    सीपीजे की रिपोर्ट के मुताबिक़ एक दिसंबर 2021 तक दुनिया भर में 293 पत्रकार अपने काम के लिए विभिन्न देशों की जेलों में बंद थे। रिपोर्ट के अनुसार चीन में पत्रकारों की सबसे बुरी स्थिति है, तो वहीं भारत…
  • opposition
    बी. सिवरामन
    विपक्षी खेमे की चिंताजनक विभाजनकारी प्रवृत्तियां
    10 Dec 2021
    टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हाल ही में मुंबई में फ़िल्मकारों के बीच जा कर कहा था कि "“यूपीए क्या है? कोई यूपीए नहीं है!" उनकी इस टिप्पणी की आलोचना शिवसेना ने भी की है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License