NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
प्रशांत भूषण ने अंत तक नहीं मांगी माफ़ी, सज़ा पर फ़ैसला सुरक्षित
अवमानना मामले में कोर्ट द्वारा बार-बार माफ़ी के लिए कहने के बावजूद प्रशांत भूषण अंत-अंत तक अपने रुख पर कायम रहे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Aug 2020
प्रशांत भूषण ने अंत तक नहीं मांगी माफ़ी, सज़ा पर फ़ैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण के उनके दो ट्वीट के जरिये अदालत की अवमानना मामले में सज़ा का फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट द्वारा बार-बार माफ़ी के लिए कहने के बावजूद प्रशांत भूषण अंत-अंत तक अपने रुख पर कायम रहे, जिसके बाद जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सज़ा पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया।

अपने फ़ैसले में कोर्ट ने यहां तक कहा कि माफ़ी मांगने में क्या गलत है, क्या यह बहुत बुरा शब्द है।

लाइव लॉ के मुताबिक जस्टिस अरुण मिश्रा ने अपने जजमेंट में कहा- "हमें बताएं कि 'माफ़ी' शब्द का उपयोग करने में क्या ग़लत है? माफ़ी मांगने में क्या ग़लत है? क्या दोषी का प्रतिबिंब होगा? माफ़ी एक जादुई शब्द है, जो कई चीज़ों को ठीक कर सकता है। मैं प्रशांत के बारे में नहीं बल्कि सामान्य तौर पर बात कर रहा हूं। यदि आप माफ़ी मांगते हैं तो आप महात्मा गांधी की श्रेणी में आ जाएंगे। गांधी जी ऐसा करते थे। यदि आपने किसी को चोट पहुंचाई है, तो आपको मरहम लगाना चाहिए।"

समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार इससे पहले अदालत ने प्रशांत भूषण के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन से अवमानना मामले में सज़ा को लेकर विचार मांगे।

राजीव धवन ने अदालत से कहा कि न सिर्फ भूषण से संबंधित अवमानना के मामले को बंद किया जाए, बल्कि विवाद का भी अंत किया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय की ओर से ‘स्टेट्समैन’ जैसा संदेश दिया जाना चाहिए।

धवन ने कहा कि भूषण को शहीद न बनाएं, उन्होंने कोई कत्ल या चोरी नहीं की है। उन्होंने कहा कि प्रशांत भूषण को दोषी करार देने वाले फैसले को वापस लिया जाना चाहिए, उन्हें किसी प्रकार की सज़ा नहीं दी जानी चाहिए।

आपको मालूम है कि प्रशांत भूषण को उनके दो ट्वीट के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी ठहराया है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या को प्रशांत भूषण को दोषी ठहराया गया और सज़ा की मात्रा के लिए 20 अगस्त की तारीख़ तय की गई। लेकिन 20 अगस्त को सज़ा की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने माफ़ी मांगने से इंकार करते हुए अपने लिए सज़ा की मांग की। उन्होंने अपना बयान पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ से कहा कि वे माफ़ी नहीं मागेंगे और न ही उनके प्रति किसी भी तरह की उदारता बरतने की अपील करते हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट जो भी सज़ा उन्हें देगा, उसे वे स्वीकार करेंगे।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को उनके बयान पर पुनर्विचार करने के लिए 2-3 दिन का समय दिया। हालांकि वरिष्ठ वकील ने कहा कि उन्होंने बहुत सोच-समझकर अपना बयान पेश किया है और इस तरह बेवजह समय देना कोर्ट के समय को बर्बाद करना होगा।

इसके बाद कोर्ट में कल, सोमवार को सज़ा को लेकर सुनवाई की और एक बार फिर चाहा कि प्रशांत भूषण माफ़ी मांगें। इस पर प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि अपने विचारों को व्यक्त करने पर सशर्त अथवा बिना किसी शर्त माफ़ी मांगना ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा, “निष्ठाहीन माफ़ी मांगना मेरे अन्तःकरण की और एक संस्था की अवमानना के समान होगा।”

इसके बाद आज मंगलवार को फिर कोर्ट में यह बहस आगे बढ़ी। आज भी कोर्ट ने अपने ट्वीट को लेकर खेद नहीं प्रकट करने के अपने रुख पर दोबारा विचार करने के लिए प्रशांत भूषण को दोपहर में 30 मिनट का समय दिया। शीर्ष अदालत ने भूषण को एक और मौका तब दिया जब अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने उनके लिए माफ़ी का अनुरोध किया।

पीठ ने जब भूषण के ‘अवहेलना’ वाले बयान पर उनके विचार पूछे जाने पर शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा, “उन्हें (भूषण को) सभी बयान वापस लेने चाहिए और खेद प्रकट करना चाहिए।”

पीठ ने पूछा, “भूषण ने कहा कि उच्चतम न्यायालय चरमरा गया है, क्या यह आपत्तिजनक नहीं है।”

पीठ ने कहा कि अदालत केवल अपने आदेशों के जरिए बोलती है और अपने हलफनामे में भी, भूषण ने न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की हैं।

वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि अदालत को उन्हें चेतावनी देनी चाहिए और दयापूर्ण रुख अपनाना चाहिए।

पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी भी शामिल थे।

पीठ ने कहा कि जब भूषण को लगता है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया तो उन्हें इसे न दोहराने की सलाह देने का क्या मतलब है।

पीठ ने कहा, “एक व्यक्ति को गलती का एहसास होना चाहिए, हमने भूषण को समय दिया लेकिन उन्होंने कहा कि वह माफ़ी नहीं मांगेंगे।”

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया कि अदालत की अवमानना मामले में उनकी दोषसिद्धि निरस्त की जानी चाहिए और शीर्ष अदालत की ओर से ‘‘स्टेट्समैन जैसा संदेश’’ दिया जाना चाहिए।

न्यायालय ने भूषण के खिलाफ 2009 के अवमानना मामले को दूसरी पीठ को भेजा

उच्चतम न्यायालय ने कार्यकर्ता-अधिवक्ता प्रशांत भूषण तथा पत्रकार तरूण तेजपाल के खिलाफ 2009 के अवमानना मामले को मंगलवार को दूसरी पीठ को सौंपने का फैसला किया है।

एक समाचार पत्रिका को दिए साक्षात्कार में भूषण ने शीर्ष अदालत के कुछ तत्कालीन न्यायाधीशों और पूर्व न्यायाधीशों पर कथित तौर पर कुछ आरोप लगाए थे, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने नवंबर 2009 में भूषण और तेजपाल को अवमानना के नोटिस जारी किये थे। जिस पत्रिका को भूषण ने साक्षात्कार दिया था, उसके संपादक तेजपाल थे।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रशांत भूषण की ओर से पेश अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा था कि उनके मुवक्किल की ओर से उठाए गए कम से कम दस प्रश्न ऐसे हैं, जो संवैधानिक महत्व के हैं तथा उन्हें संविधान पीठ को ही देखने की जरूरत है।

न्यायमूर्ति बीआर गवई तथा न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी भी पीठ का हिस्सा हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘ये व्यापक मुद्दे हैं, जिन पर विस्तार से विचार करने की आवश्यकता है। हम इसमें न्याय मित्र की मदद ले सकते हैं और मामले पर एक उपयुक्त पीठ विचार कर सकती है।’’

वीडियो कॉन्फ्रेस के माध्यम से हुई सुनवाई में पीठ ने कहा कि यह मामला काफी समय से लंबित है, इसे 10 सितंबर को एक उपयुक्त पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

दो सितंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि इस मामले को देखने के लिए समय चाहिए अत: इसे ‘‘एक उपयुक्त पीठ को सौंपते हैं’’।

 

 

prashant bhushan
Prashant Bhushan Contempt case
Supreme Court of India
supreme court and prashant bhushan
Prashant Bhushan Tweets

Related Stories

लखीमपुर खीरी कांड में एक और अहम गवाह पर हमले की खबर  

क्यों मोदी का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में सबसे शर्मनाक दौर है

भारतीय अंग्रेज़ी, क़ानूनी अंग्रेज़ी और क़ानूनी भारतीय अंग्रेज़ी

चंपारण से बनारस पहुंची सत्याग्रह यात्रा, पंचायत में बोले प्रशांत भूषण- किसानों की सुनामी में बह जाएगी भाजपा 

क्या सीजेआई हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति की पहल कर सकते हैं?

क्या नए मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन्ना सुप्रीम कोर्ट की साख को दोबारा स्थापित कर पाएंगे?

दिशा रवि गिरफ़्तारी प्रकरण: हमवतनों के ख़िलाफ़ उतरी सरकार

अमीश देवगन मामले में सुप्रीम कोर्ट का अजीब-ओ-ग़रीब फ़ैसला: अनगिनत सवाल

कार्टून बनाने वाले दूत की हत्या

क्या सूचना का अधिकार क़ानून सूचना को गुमराह करने का क़ानून  बन जाएगा?


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    करनाल में किसान महापंचायत, रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन और अन्य
    07 Sep 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी हरियाणा के करनाल में किसान महापंचायत, रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ रेल कर्मियों का बुधवार को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन,यूपी में डेंगू और वायरल बुखार का…
  • निमहांस के बर्ख़ास्त किये गए कर्मचारी जुलाई से हैं हड़ताल पर
    रोसम्मा थॉमस
    निमहांस के बर्ख़ास्त किये गए कर्मचारी जुलाई से हैं हड़ताल पर
    07 Sep 2021
    19 कर्मचारियों को इसलिये बर्ख़ास्त कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने अस्पताल प्रशासन से कोविड कर्फ़्यू के दौरान रात को घर जाने की व्यवस्था करने की मांग की थी।
  • मुज़फ़्फ़रनगर: 2013 की हिंसा के ज़ख़्म ज़िंदा है जौला गांव में
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुज़फ़्फ़रनगर: 2013 की हिंसा के ज़ख़्म ज़िंदा है जौला गांव में
    07 Sep 2021
    ग्राउंड रिपोर्ट में मुज़फ़्फ़नगर के जौला गांव में पहुंची वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह, जहां 2013 के सांप्रदायिक हिंसा के शिकार लोगों को पनाह मिली। किसान आंदोलन के भविष्य का रास्ता जौला गांव से होकर ही…
  • पेगासस विवाद : उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए और समय दिया
    भाषा
    पेगासस विवाद : उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए और समय दिया
    07 Sep 2021
    मामले में अगली सुनवाई के लिए 13 सितंबर की तारीख तय की है।
  • जातीय जनगणना: जलता अंगार
    बी. सिवरामन
    जातीय जनगणना: जलता अंगार
    07 Sep 2021
    यदि नीतीश सचमुच में इस मुद्दे पर ईमानदार हैं, तो उन्हें मांग करनी चाहिये थी कि केंद्र सरकार, जिसको आरएसएस-भाजपा का ओबीसी मास्टहेड मोदी का नेतृत्व मिला है, 2011 के सामाजिक-आर्थिक व जातीय जनगणना के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License