NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
दिल्ली सरकार के विश्वविद्यालय से निकाले गए सफ़ाईकर्मी, नई ठेका एजेंसी का लिया बहाना
इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वीमेन (IGDTUW) के शीर्ष अधिकारियों की ओर से सफ़ाई कर्मचारियों को सूचना दी गयी है कि मौजूदा ACME कंपनी का टेंडर खत्म होने के कारण से 15 सितम्बर से सभी सफाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Sep 2021
दिल्ली सरकार के विश्वविद्यालय में से निकाले गए सफाईकर्मी, नई ठेका एजेंसी का लिया बहाना

14 सितम्बर को इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वीमेन (IGDTUW) के शीर्ष अधिकारियों की ओर से सफाई कर्मचारियों को सूचना दी गयी कि मौजूदा ACME कंपनी का टेंडर खत्म होने के कारण से दिनांक 15 सितम्बर से सभी सफाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। इस संबंध में यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय में सोमवार से ही सभी कर्मियों की एंट्री बंद है। 

इसके बाद कर्मचारियों ने वाइस चांसलर (वीसी) कार्यालय का घेराव कर लिया। जिसके बाद प्रशासन ने कर्मचारियो को राहत देते हुए कहा कि 15 दिनों तक उन्हें नही निकाला जाएगा और वो इस दौरान नई ठेका कंपनी में अपने कागजात जमा कराए। सफाई कर्मचारी यूनियन (एसकेयू) ने मंगलवार को ही सफाईकर्मियों को नौकरी से निकाले जाने के संबंध में विश्वविद्यालय की वाइस चान्सलर व श्रम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा था।
  
यूनियन ने अपने बयान में कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि दिल्ली सरकार के तहत आने वाले विश्वविद्यालय में धड़ल्ले से श्रम कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है और मजदूरों अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ज्ञात हो कि मौजूदा श्रम कानून के प्रावधानों के तहत यह आवश्यक है कि नौकरी खत्म होने की स्थिति में, कर्मचारियों को इसकी सूचना कम-से-कम एक माह पूर्व दी जानी चाहिए, कर्मचारियों के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा ये नहीं किया गया है।

यूनियन के नेता हरीश गौतम ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि बिना पूर्व सूचना के नौकरी निकाले जाने के कारण कर्मचरियों में भारी डर की स्थिति उत्पन्न हो गयी है और जीवन-यापन व रोजगार के प्रति गहरी चिंता पैदा हो गयी है। ध्यान देने कि बात है कि विश्वविद्यालय में कार्यरत कई सफाईकर्मी 15-16 साल से कार्यरत हैं और अधिकतर सफाईकर्मी ACME कंपनी का टेंडर लागू होने से पूर्व भी यहाँ कार्यरत थे। सफाई कर्मियों ने कोविड-19 महमारी में लगाए गए लॉकडाउन तथा इसके उपरांत महामारी की पहली व दूसरी लहर में भी रोजाना काम किया है।

हरीश गौतम ने आगे कहा कि महामारी के इस दौर में कई सफाई कर्मियों से अपने परिवारजनों को खोया भी है तथा उनके इलाज हेतु कर्जा भी लेने को मजबूर हुए हैं। यहाँ कार्यरत सफाई कर्मियों के लिए रोजगार का यही एकमात्र साधन है और महामारी के इस दौर में बिना पूर्व सूचना के नौकरी से निकाला जाना न केवल सफाईकर्मियों बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए मुश्किलों का पहाड़ खड़ा कर देगा।

हरीश गौतम ने न्यूज़ क्लिक से बात करते हुए बताया कि कर्मचारियों और यूनियन द्वारा घेरावा करने के बाद प्रशासन ने कर्मचारियों को राहत तो दी है। परंतु यूनिवर्सिटी जो मुख्य नियोक्ता है वो अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। सब कुछ वो निजी ठेका कंपनी पर ही छोड़ रही है।
 
उन्होंने आगे बताया ''यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कर्मचारियों से कहा है कि वो नई कंपनी में जाकर अपने पेपर जमा कराएं, जबकि ये कर्मचारी पिछले एक दशक से अधिक से काम कर रहे हैं और इनके पेपर पहले से ही जमा हैं। लेकिन प्रशासन टैक्निकल बातों का सहारा लेकर कर्मचारियों के अधिकारों पर हमला कर रहा है।
 
यूनियन नेताओं के मन में अभी भी आशंका है कि सभी कर्मचारियो को बहाल किया जाएगा या नहीं। यूनियन ने कहा है कि यूनिवर्सिटी  में सफाईकर्मियों को महामारी के इस कठिन समय में नौकरी से निकालना उनके लिए भारी प्रताड़ना के समान है। इस संबंध में एसकेयू ने मांग की है कि टेंडर बदलने कि स्थिति में भी सभी कर्मचारियों की पुनः नियुक्ति सुनिश्चित की जाये। इस मांग को पूरा न किए जाने की स्थिति में एसकेयू ने चेतावनी दी है कि वो व्यापक आंदोलन करेगी।

सरकार इस महामारी में सफ़ाई कर्मचारियों को कोरोना योद्धा बता रही है परन्तु हक़ीक़त यह है कि इन कर्मचारियों का न वेतन मिल रहा है और न ही कोई सुरक्षा मिल रही है। इस महामारी के समय में भी उन्हें उनका वेतन नहीं दिया जा रहा है।

आपको बता दें कि ये यूनिवर्सिटी दिल्ली सरकार के अधीन है, जो कर्मचारियों के हितैषी होने का दावा करती है। लेकिन ज़मीन पर उनकी संस्थाएं ही लगातार मजदूरों के ख़िलाफ़ कार्य कर रही है। यह कोई अकेला मामला नहीं है जहाँ सफ़ाई कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। बल्कि इस  यूनिवर्सिटी से सटी अंबेडकर यूनिवर्सिटी है वहां भी कर्मचारियों को इस तरह की समस्याओं का समाना करना पड़ा था। इसी तरह इस यूनिवर्सिटी  में भी 60 सफाई कर्मचारियों को 'अस्थायी' कर्मचारी बताकर निकाला गया था, जबकि हर बार ऐसे लोगों को निकाला गया है जो 10-15 साल से कार्यरत रह चुके हैं, जुझारू मज़दूरों और छात्रों के संघर्ष से इन दोनों हादसों में प्रशासन निकाले गए कर्मचारियों को वापस लेने पर मजबूर हुआ था। इसी तरह की स्थिति नगर निगम के सफ़ाई कर्मचारियों की भी है उन्हें भी समय पर वेतन नहीं मिलता है।

Sanitation Workers
delhi government
IGDTUW
Indira Gandhi Delhi Technical University for Women
ACME

Related Stories

दिल्ली: ट्रेड यूनियन के साइकिल अभियान ने कामगारों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा शुरू करवाई

उत्तराखंड में स्वच्छता के सिपाही सड़कों पर, सफाई व्यवस्था चौपट; भाजपा मांगों से छुड़ा रही पीछा

तमिलनाडु: अगर पग़ार में देरी का मसला हल नहीं हुआ तो प्रदर्शन जारी रखेंगे सफ़ाईकर्मी

सरकार और किसान नेताओं के बीच बातचीत बेनतीजा, अगली बैठक 3 दिसंबर को

इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वीमेन में सफ़ाई कर्मचारियों का आंदोलन जारी

लंदन : यूके ट्रांसपोर्ट यूनियन ने मेट्रो सफ़ाईकर्मियों के लिए न्याय की मांग की

अनाज मंडी अग्निकांड को लेकर मज़दूरों का प्रदर्शन, कहा-ज़िंदा जलाकर मारना बंद करो

दिल्ली अनाज मंडी अग्निकांड : मुनाफे की हवस और प्रशासन के गठजोड़ से मरते मजदूर

न्यूनतम मजदूरी के मसले पर दिल्ली के मजदूरों की ऐतिहासिक जीत

रेहड़ी पटरी दुकानदारों ने किया नगर निगम के खिलाफ धरना प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • रिचर्ड हिल
    स्पैम व्यापार का मुद्दा क्यों है? क्योंकि यह विकसित देशों के अनुकूल काम करता है
    24 Nov 2021
    2012 में, विकसित देशों ने वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशंस (डब्ल्यूसीआईटी) के इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशंस यूनियन (आईटीयू) के विश्व सम्मेलन में संधि के रूप में अपने अंतर्राष्
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    जेपीसी में डाटा क़ानून को मंज़ूरी, जारी रहेगा किसान आंदोलन और अन्य ख़बरें
    23 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी निजी डाटा सुरक्षा क़ानून को जेपीसी में मंज़ूरी, जारी रहेगा किसान आंदोलन और अन्य ख़बरों पर
  • pollution
    सतीश भारतीय
    दिल्ली ही नहीं गुरुग्राम में भी बढ़ते प्रदूषण से सांसों पर संकट
    23 Nov 2021
    "नाक साफ करते हैं तो नाक के अंदर से काली परत जमीं निकलती है जो प्रदूषण की गंभीरता के संकेत है।"
  • MSP
    अजय कुमार
    MSP की लीगल गारंटी नहीं पड़ेगी देश की जेब पर भारी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था संभल जाएगी
    23 Nov 2021
    भाजपा और सरकार समर्थक कह रहे हैं कि एमएससी की लीगल गारंटी देने से देश का खजाना खाली हो जाएगा और देश का दिवाला निकल जाएगा। चलिए समझते हैं कि क्यों ऐसा नहीं होगा, और इससे कैसे देश की अर्थव्यवस्था पहले…
  • Taiwan and Ukraine
    एम. के. भद्रकुमार
    अमेरिका जो चाल ताइवान में चल रहा है, हूबहू वही यूक्रेन में भी
    23 Nov 2021
    वास्तव में ताइवान और यूक्रेन  दोनों ही एक दूसरे से कूल्हे से जुड़े हुए हैं। अतः रूस एवं चीन के लिए कोई भी  दांव इसके ऊंचा नहीं हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License