NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
खेल
भारत
राजनीति
नये इंडिया को सोना मिला- धन्यवाद मोदी जी!
कटाक्ष: आख़िरकार, मोदी जी की मेहनत रंग लायी। बेशक, खिलाडिय़ों ने भी मेहनत की थी। पर हमारे खिलाड़ी तो हमेशा ही मेहनत करते थे...
राजेंद्र शर्मा
09 Aug 2021
नये इंडिया को सोना मिला- धन्यवाद मोदी जी!
तस्वीर केवल प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए। फोटो साभार: आजतक

दुनिया वालो! अब तो मान लो कि मोदी जी का नया इंडिया आ चुका है। हो सकता है कि बाकायदा फीता काटने के लिए मोदी जी इस या अगले पंद्रह अगस्त तक इंतजार करना चाहें। कहते हैं कि सब्र का फल मीठा होता है। स्वतंत्रता की हीरक जयंती पर, मोदी जी एक सौ पैंतीस करोड़ भारतवासियों को नये इंडिया का गिफ्ट देना चाहते हों तो, विरोधियों को कम से कम इस पर किच-किच नहीं करनी चाहिए। मोदी जी का नया इंडिया है, उसका फीता काटने का ऑकेज़न चुनने का उन्हें पूरा अधिकार है। वैसे हो सकता है कि मोदी जी नये इंडिया का फीता काटने के लिए कोई दूसरा ही मुहूर्त चुनें। स्वतंत्रता महा-महोत्सव तो वैसे भी होना ही होना है; लाल किले के मोदी जी के भाषण से लेकर, साल भर की मन की बात तक। फिर मोदी जी नये इंडिया के उद्घाटन के एक और उत्सव का मौका क्यों हाथ से जाने देंगे। वैसे होने को तो यह भी हो सकता है कि मोदी जी नये इंडिया का फीता काटें ही नहीं, अच्छे दिनों की तरह। और जब इसका ज्यादा शोर मचे कि नया इंडिया कहां रह गया, नया इंडिया कब आएगा, तो एक दिन आइटी सेल आंखों में उंगली डालकर पब्लिक को दिखा दे कि नया इंडिया तो कब का आ चुका है!

खैर! मुद्दे की बात यह है कि फीता चाहे कभी भी कटे या नहीं भी कटे, पर मोदी जी का नया इंडिया आ चुका है। नीरज चोपड़ा के गोल्ड से बड़ा, नये इंडिया के आ पहुंचने का सबूत क्या होगा?

हमें पता है कि विरोधी अब भी बाल की खाल निकालने से बाज नहीं आएंगे। हैरानी की बात नहीं है कि इसका सबूत मांगने लगें कि नीरज चोपड़ा का गोल्ड आने का मोदी जी के नया इंडिया लाने से क्या लेना-देना है? पर लेना-देना सूरज की तरह साफ है, अगर फिर भी विरोधियों को दिखाई न दे तो कोई क्या कर सकता है! सचाई यही है कि टोक्यो में नीरज का फेंका भाला, जैसे उड़ते हुए सबसे दूर जाकर गिरा, तो इसीलिए कि नीरज की पीठ पर मोदी जी का हाथ था। नीरज के भाले में जो अदृश्य पंख लगे, वो मोदी जी ने ही लगाए थे। मोदी जी नीरज के कोच तो नहीं थे, पर उसके लिए कोच से कम भी नहीं थे। फेंकने के खेल से प्रेम कहो या नये इंडिया को लाने के लिए फेंकने के महत्व का एहसास कहो, मोदी जी ओलंपिक खेलों के बहुत पहले से बल्कि पिछले कई वर्षों से, नीरज के फेंकने की प्रगति पर नजदीक से नजर रखे हुए थे। जब नीरज के हाथ में इंजरी हो गयी, तब मोदी जी ने बराबर फेंकने का उसका उत्साह बढ़ाया, उसकी कोहनी और बाजुओं की ताकत बढ़ायी। और तो और, चुनाव की व्यस्तताओं के बीच भी मोदी जी फेंकने के लिए उसका उत्साह बढ़ाते रहे और बदले में प्रधानमंत्री का दूसरा कार्यकाल मिलने पर, उसकी शुभकामनाएं भी पाते रहे। मोदी जी की सरकार ने उसके लिए बाहर जाने, वहां ट्रेनिंग लेने वगैरह के सारे इंतजामात तो किए ही, पर उसको सबसे ज्यादा प्रेरणा मिली खुद मोदी जी के उदाहरण से। पूरा दम लगाकर फेंकने से अगर दोबारा प्रधानमंत्री का पद मिल सकता है, तो ओलंपिक गोल्ड मेडल क्यों नहीं मिल सकता? मोदी मॉडल का ध्यान कर के उसने भाला फेंका और सीधे सोने के मेडल पर जाकर लगा। वैसे भी खेल रत्न पुरस्कार के नाम में से राजीव गांधी का नाम हटाकर, हॉकी रत्न ध्यानचंद का नाम जोडऩे के मोदी जी के मास्टरस्ट्रोक के बाद तो रही-सही पनौती भी खत्म हो गयी। फिर तो बस नीरज का सोना ही सोना था।

लेकिन, नीरज के सोना लाने के पीछे मोदी जी का हाथ होने का मतलब यह नहीं है कि दूसरे पदक लाने वालों की पीठ पर मोदी जी का हाथ नहीं था। मोदी जी का हाथ था और भरपूर हाथ था। मोदी जी ने टोक्यो जाने से पहले खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाकर ही नहीं छोड़ दिया। मोदी जी ने एक-एक जीत पर उत्साह बढ़ाया और एक-एक हार पर तसल्ली दी और वह भी फोन कर-कर के। दुष्ट विरोधियों ने तो दबे सुर में यह भी कहना शुरू कर दिया था कि फोन, ट्वीट और भाषण करने के सिवा, बंदे के पास और कोई काम ही नहीं है क्या? खैर! आखिरकार, मोदी जी की मेहनत रंग लायी। बेशक, खिलाडिय़ों ने भी मेहनत की थी। पर हमारे खिलाड़ी तो हमेशा ही मेहनत करते थे। लेकिन, मेडल कहां आते थे! इस बार मोदी जी ने मेहनत की तो मेडल आए ही नहीं, मेडलों की बरसात हो गयी। और वह भी सोना, चांदी, तांबा, हर रंग के मेडल। ये अगर मोदी जी नये इंडिया का कमाल नहीं है तो और किस का कमाल है?

अब कोई ये मत गिनाने लगना कि मेडल तो मोदी जी की मेहनत के बिना पुराने इंडिया में भी हमारे खिलाड़ी जब-तब ले ही आते थे। यहां तक कि नेहरू जी वाले पुराने भारत में हाकी खिलाड़ी तीन-चार बार तो सोना ही लाए थे। और मौन-मोहन सिंह वाले नाति-पुराने भारत में भी, चीन से अभिनव बिंद्रा सोना लाए थे, तो 2012 में इंग्लेंड से खिलाड़ी सात तो नहीं, पर कुल छ: मेडल जरूर जीत कर आए थे। लेकिन, बात न सिर्फ मेडलों की संख्या की है और न सिर्फ मेडलों के रंग की। पता है, पुराने भारत की प्राब्लम क्या थी? कभी सोना मिल गया, तो एक मेडल पर ही संतुष्ट होकर बैठ गए। कभी कई मेडल मिल गए, तो सोना हाथ से फिसल जाने दिया। लेकिन, ये मोदी जी का नया इंडिया है। एक ही ज्यादा हुआ तो क्या हुआ, 2012 से एक मेडल भी फालतू है। और वह भी ऐसा-वैसा नहीं सोने का! यानी सोने में भी तरक्की और मेडलों में भी। अब तरक्की के इस सोने वाले मैडल पर मोदी जी का, उनके नये इंडिया का, नीरज के जितना हक तो बनता ही है। यह भी याद रहे कि सोने से शुरूआत कर दी है, अब मोदी जी विदेश से काला धन भी जरूर लाएंगे। तब शायद पेट्रोल/डीजल/ गैस के दाम भी कुछ न कुछ नीचे आएंगे।

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।) 

sarcasm
Gold Medal for India
tokyo olympics 2020
Narendra modi
BJP

Related Stories

त्रिपुरा के अखबार के खिलाफ भाजपाई हिंसा

विक्रम और बेताल: सरकार जी और खेल में खेला

खेल: ये भाजपा सरकार सिर्फ जीत का श्रेय लेना जानती है?

‘आगे बढ़ने के संदेश’ के साथ टोक्यो ओलंपिक का समापन, अब पेरिस में मिलेंगे

नीरज ने भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास, पूरे देश ने दी बधाई

बलात्कार हो या खेल, जाति की ज़हरीली सोच पर क्यों चुप और गायब हैं MR PM

जर्मनी को हराकर भारत ने कांस्य पदक जीता, 41 साल बाद ओलंपिक पदक; देशभर से आ रही हैं बधाईयां

आईपीएल 2021: भ्रम के बुलबुले और दिमाग़ में भूंसे भरे हुए आदमज़ाद

बेदी का सवाल जेटली पर नहीं, देश के सबसे ताकतवर व्यवस्था पर है

किसानों के समर्थन में ‘भारत बंद’ सफल, बीजेपी शासित राज्यों में भी रहा असर, कई नेता हिरासत में या नज़रबंद रहे


बाकी खबरें

  • africa
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    अफ़्रीका का विद्रोह, उम्मीद से भरे अपने विलाप के साथ जम चुका है!
    08 Sep 2021
    अफ़्रीकी राजधानियों को डर है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और फ़्रांस टोटल और एक्सॉनमोबिल की संपत्ति की रक्षा करने के लिए उत्तरी मोज़ाम्बिक पर हमला करेंगे।
  • छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (बाएं) और उनके पिता नंद कुमार बघेल (दाएं)
    सत्यम श्रीवास्तव
    नंद कुमार बघेल की गिरफ़्तारी: भूपेश बघेल का नैतिक साहस है या तुष्टीकरण का दांव?
    08 Sep 2021
    नंद कुमार बघेल की राजनैतिक विचारधारा हमेशा से दलितों, वंचितों और पिछड़ों की सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक दशा की उपज से प्रेरित बल्कि उद्वेलित रही है। सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय नंद बघेल की असहमतियाँ…
  • Taliban
    अनिंदा डे
    तालिबान की अगली बड़ी चुनौती चारों तरफ़ फ़ैले आतंकी संगठन हैं
    08 Sep 2021
    अफ़ग़ानिस्तान जल्द ही इन संगठनों के चलाये जाने वाले इलाक़ों और इनके हमलों के पैमाने का विस्तार करने की महत्वाकांक्षाओं को रखने वाले विभिन्न गुटों, ख़ास तौर पर आईएसकेपी जैसे आतंकी संगठन का पनाहग़ाह बन…
  • price
    अजय कुमार
    पेट्रोल-डीज़ल पर बढ़ते टैक्स के नीचे दबते मज़दूर और किसान
    08 Sep 2021
    वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 4 महीने में, एक्साइज ड्यूटी से ही सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की है।
  • करनाल : बेनतीजा रही बातचीत, किसानों ने सचिवालय घेरा
    न्यूज़क्लिक टीम
    करनाल : बेनतीजा रही बातचीत, किसानों ने सचिवालय घेरा
    07 Sep 2021
    करनाल में किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत बेनतीजा रही जिसके बाद किसानों ने अनाज मंडी से मिनी सचिवालय को घेरने का निर्णय लिया. संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ़ किया कि जब तक उनकी माँगे नहीं मानी जाती, वे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License