NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शाहीन बाग़ आंदोलन को प्रायोजित बताना देश की महिलाओं का अपमान
आम आदमी पार्टी देश की आम महिलाओँ के उस ऐतिहासिक संघर्ष को कलंकित करने का दुस्साहस कर रही है, जिसकी तारीफ़ पूरी दुनिया में हुई है। ख़ासतौर पर मुस्लिम महिलाएं पहली बार बंदिशों तो तोड़ कर अपने अधिकार और पहचान के लिए सड़कों पर उतरीं। कड़ाके की ठंड और पुलिस की लाठियों की परवाह किए बिना उन्होंने अपने संघर्ष को जारी रखा। यदि यह आंदोलन प्रायोजित था तो फिर अन्ना आंदोलन क्या था?
अफ़ज़ल इमाम
23 Aug 2020
शाहीन बाग़

आम आदमी पार्टी (आप) ने एनआरसी और सीएए के मुद्दों को लेकर दिल्ली के शाहीन बाग़ में हुए आंदोलन को भाजपा प्रायोजित बता कर लाखों लोगों और विशेषरूप से महिलाओं का अपमान किया है। शाहीन बाग तो सिर्फ़ महिलाओं का धरना था, लेकिन इसकी चिंगारी देशभर में फैली और लाखों जनता सड़कों पर उतर पड़ी और इस तरह के धरने कई शहरों में शुरू हो गए। हैरत की बात है कि जो पार्टी ख़ुद अपने को अन्ना आंदोलन की पैदावार बताती है, वह संविधान की रक्षा के लिए हुए देशव्यापी आंदोलन और जनता के सामूहिक विवेक पर सवाल खड़े कर रही है। कुछ लोगों को लगता है कि यह अपरिपक्व बयान था, लेकिन आम आदमी पार्टी की अब तक की राजनीति और उसके इतिहास को देखा जाए तो यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगता है, क्योंकि पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज से लेकर संजय सिंह की भाषा एक ही है। पिछले 6 वर्षों के दौरान देश के बदले हुए मिज़ाज को देखते हुए यह पार्टी किसी भी तरह से अल्पसंख्यकों के साथ खड़े दिखने का जोखिम नहीं उठाना चाहती है। उसकी चिंता सिर्फ़ हिन्दू वोटरों को साधने की है। उसे लगता है कि मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्यक तो मजबूरी में उसे वोट देंगे ही। वैसे यह सोच आम आदमी पार्टी के अलावा कुछ अन्य दलों में भी दिखाई पड़ती है, हालांकि लिंचिंग व मुसलमानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर उनकी ओर से बयान व ट्वीट आ जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले 18 अगस्त को शाहीन बाग़ के कुछ लोग भाजपा में शामिल हो गए। बताया गया कि इनमें से दो-तीन लोगों ने एनआरसी आंदोलन में हिस्सा लिया था। यदि इस बात को सच भी मान ली जाए तो, यह धरना किसी पार्टी या संगठन का तो था नहीं और इसका कोई नेता भी नहीं था। इसमें विभिन्न राजनीतिक पार्टियों व सामाजिक संगठनों के लोग का आना-जाना लगा रहता था। धरने में तो कुछ ऐसे लोग भी पकड़ गए थे जो ‘स्टिंग आपरेशन’ करने और व्यवधान की फिराक में थे। बाद में उनकी असलियत पता चली कि वे किसी संगठन से संबंधित थे? इन सारी बातों को जानने के बावजूद आम आदमी पार्टी ने न सिर्फ यह कहा कि आंदोलन की पटकथा भाजपा ने लिखी थी, बल्कि यह आरोप भी लगाया कि धरनें में देश विरोधी नारे लगे। दरअसल उसने दिल्ली चुनाव के पहले से ही अपनी लाईन तय कर ली थी। यही कारण है कि जब उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शाहीन बाग़ के पक्ष में बयान दिया था, तो पार्टी ने उससे अपनी कन्नी काट ली थी। इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने को बजरंगबली के भक्त के रूप में पेश किया और चुनाव खत्म होने के बाद भी सौरभ भारद्वाज ने राजधानी में हर माह के पहले मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ कराने की घोषणा कर दी।

अब उस पर कितना अमल हुआ यह अलग बात है! चुनावों के दौरान धर्म और धार्मिक नारों के इस्तेमाल का चलन बढ़ गया है, इसलिए अल्पसंख्यक वोटरों ने इसे कोई अहमियत नहीं दी और थोक के हिसाब से आम आदमी पार्टी को वोट दिया। लिहाजा इस चुनाव में भी उसे को जबरदस्त जीत हासिल हुई, लेकिन अब उसके व्यवहार में काफ़ी बदलाव नज़र आ रहा है। ऐसा लगता है कि केजरीवाल ‘डेवलपमेंट और गुडगवर्नेंस’ के नारे के साथ अन्य विपक्षी दलों से अलग दिखते हुए अपनी पार्टी को भाजपा के विकल्प के रूप में पेश करना चाहते हैं। 16 फ़रवरी को उनके शपथग्रहण समारोह में न सिर्फ लोगों से आह्वान किया गया कि वे ‘राष्ट्र निर्माण’ के लिए आम आदमी पार्टी से जुड़े, बल्कि उन्होंने यह भी कहा कि वे पीएम मोदी से आशीर्वाद चाहते हैं। इसके ठीक तीसरे दिन वे गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे और फिर बयान दिया कि बैठक फलदायी रही। फिर एक हफ़्ते बाद उनकी सरकार ने जेएन यू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी भी दे दी। सरकार बनने के बाद भी उन्होंने जेएनयू में गुडों के हमलों और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में पुलिस बर्बरता के मुद्दे पर कुछ नहीं किया। इसबीच एनआरसी का आंदोलन चल ही रहा था कि जाफ़राबाद में समेत उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई क्षेत्रों में दंगे भड़क गए। इसमें आम आदमी पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए कपिल मिश्रा का नाम काफी सुर्खियों रहा, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इस भीषण दंगे में करीब 52 लोगों की जाने गईं और 526 लोग घायल हुए। माली नुकसान भी बहुत हुआ। राजधानी में जारी हिंसा के बीच केजरीवाल अपने कुछ मंत्रियों के साथ महात्मा गांधी की समाधि पर पहुंचे और वहां शांति के लिए प्रार्थना की। अपने एक बयान में उन्होंने सेना बुलाने की बात जरूर कही थी, लेकिन इसकी सिफारिश नहीं की। यदि दंगा प्रभावित क्षेत्रों में सेना लगा दी गई होती तो शायद इतनी जाने न जाती।

ध्यान रहे कि केजरीवाल ने जब अपनी पार्टी बनाई थी तो दावा किया था कि वे व्यवस्था परिवर्तन के लिए राजनीति में आए हैं। सांप्रदायिक्ता व सामाजिक न्याय के मुद्दों पर तो वे पहले भी नहीं बोलते थे, लेकिन अब भ्रष्टाचार पर भी मौन हो गए हैं। पिछले 6 वर्षों में उन्हें कहीं पर भी कोई गड़बड़ी नजर नहीं आई। सत्ता हासिल करने के लिए वे भी वही सारे फ़ंडे अपना रहे हैं, जो दूसरी पार्टियां अपनाती हैं। अब उनकी पार्टी देश की आम महिलाओँ के उस ऐतिहासिक संघर्ष को कलंकित करने का दुस्साहस कर रही है, जिसकी तारीफ़ पूरी दुनिया में हुई है। ख़ासतौर पर मुस्लिम महिलाएं पहली बार बंदिशों तो तोड़ कर अपने अधिकार और पहचान के लिए सड़कों पर उतरीं। कड़ाके की ठंड और पुलिस की लाठियों की परवाह किए बिना उन्होंने अपने संघर्ष को जारी रखा। यदि यह आंदोलन प्रायोजित था तो फिर अन्ना आंदोलन क्या था?

Shaheen Bagh
aam aadmi party
Shaheen Bagh Protest
Anti CAA Protest
shaheen bagh and bjp

Related Stories

धनशोधन क़ानून के तहत ईडी ने दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया

शाहीन बाग से खरगोन : मुस्लिम महिलाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष !

जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

'नथिंग विल बी फॉरगॉटन' : जामिया छात्रों के संघर्ष की बात करती किताब

जहांगीरपुरी से शाहीन बाग़: बुलडोज़र का रोड मैप तैयार!

शाहीन बाग़ की पुकार : तेरी नफ़रत, मेरा प्यार

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

केजरीवाल का पाखंड: अनुच्छेद 370 हटाए जाने का समर्थन किया, अब एमसीडी चुनाव पर हायतौबा मचा रहे हैं


बाकी खबरें

  • BCI
    भाषा
    बीसीआई ने खोसला को दोषी ठहराने के ख़िलाफ़ जारी वकीलों की हड़ताल वापस लेने का निर्देश दिया
    09 Nov 2021
    बीसीआई ने कहा कि यह कानून के तहत प्रदत्त वैध तरीका नहीं है। एक निचली अदालत ने 1994 में एक महिला वकील के साथ मारपीट करने के मामले में 29 अक्टूबर को खोसला को दोषी ठहराया था। सजा पर बहस 15 नवंबर को होगी।
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चैक: भाजपा द्वारा बुंदेलखंड में घर-घर नल से जल का दावा ग़लत
    09 Nov 2021
    भाजपा उत्तर प्रदेश के आधिकारिक अकाउंट से एक ट्वीट किया गया है। ट्वीट किये गए ग्रैफिक में बुंदेलखंड में पानी के संबंध में दो तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। इन तस्वीरों के जरिये सपा, बसपा, कांग्रेस…
  • rafale
    भाषा
    रफ़ाल मामले पर पर्दा डालने के लिए मोदी सरकार और सीबीआई-ईडी के बीच सांठगांठ हुई: कांग्रेस
    09 Nov 2021
    कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से ये आरोप उस वक्त लगाए गए हैं जब फ्रांस के पोर्टल ‘मीडिया पार्ट’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि रफ़ाल निर्माता कंपनी दसॉल्ट की ओर से बिचौलियों को कम से कम 75…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: पर्यावरण को दांव पर लगाकर पर्यावरणविद् का सम्मान!
    09 Nov 2021
    पर्यावरण को बचाना ही पर्यावरण का सच्चा सम्मान है। पर्यावरण को लेकर देश-दुनिया में चिंता है, ऐसे में पर्यावरणविद् तुलसी गौड़ा को पद्मश्री से सम्मानित किया जाना अच्छा कदम है, लेकिन इससे भी अच्छा होता…
  • Demonetisation
    अनिल जैन
    नोटबंदी: पांच साल में इस 'मास्टर स्ट्रोक’ ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया
    09 Nov 2021
    नोटबंदी का फ़ैसला भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए हर लिहाज से आत्मघाती साबित हुआ। इसीलिए सरकार और उसके ढिंढोरची की भूमिका निभा रहे मीडिया ने भी नोटबंदी के पांच साल पूरे होने पर इस मसले पर पूरी तरह खामोशी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License