NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
विशेष: ...मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए
हिन्दी में ग़ज़ल को लोकप्रिय बनाने वाले जनता के कवि-शायर दुष्यंत कुमार का आज (1 सितंबर) जन्मदिन है। 30 दिसंबर को पुण्यतिथि के मौके पर 2019 में ये वीडियो पैकेज तैयार किया गया था। लेकिन ये आज भी उतना ही ताज़ा और प्रासंगिक है। उस समय सीएए के ख़िलाफ़ शाहीनबाग़ आंदोलन बुलंद था और आज कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान आंदोलन। प्रतिरोध की मशाल लगातार जल रही है।
न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
01 Sep 2021

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं,

गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं।

 

अब तो इस तालाब का पानी बदल दो,

ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं।

वाक़ई...आज स्थिति यही है...लेकिन आज ये कहना जोखिम मोल लेना है।

लेकिन दुष्यंत, और दुष्यंत के वारिस (प्रगतिशील कवि-शायर, लेखक, संस्कृतिकर्मी, आंदोलनकारी) बार-बार यह जोखिम लेते हैं, लेते रहेंगे।

हिन्दी में ग़ज़ल को लोकप्रिय बनाने वाले जनता के कवि-शायर दुष्यंत कुमार का आज जन्मदिन है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले के राजपुर नवादा गांव में 1 सितंबर, 1933 को जन्में दुष्यंत ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनकी कर्मभूमि भोपाल (मध्यप्रदेश) रही, और वहीं 42 साल की कम उम्र में उन्होंने 30 दिसंबर, 1975 को दुनिया से विदा ली। पुण्यतिथि के मौके पर ही 2019 में ये वीडियो पैकेज तैयार किया गया था। लेकिन ये आज भी उतना ही ताज़ा और प्रासंगिक है। उस समय सीएए के ख़िलाफ़ शाहीनबाग़ आंदोलन बुलंद था और आज कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान आंदोलन। प्रतिरोध की मशाल लगातार जल रही है और तय है कि स्थितियां ज़रूर बदलेंगी। दुष्यंत के ही शब्दों में-

वो मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता,

मैं बेक़रार हूं आवाज़ में असर के लिए।

dushyant kumar
hindi urdu
progressive poetry
hindi poet
urdu poet
ghazal

Related Stories

वे डरते हैं...तमाम गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज और बुलडोज़र के बावजूद!

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

इतवार की कविता: सभी से पूछता हूं मैं… मुहब्बत काम आएगी कि झगड़े काम आएंगे

अदम गोंडवी : “धरती की सतह पर” खड़े होकर “समय से मुठभेड़” करने वाला शायर

हमें यह शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है : भगत सिंह की पसंदीदा शायरी

इतवार की कविता : 3 भोजपुरी ग़ज़लें

नहीं रहे अली जावेद: तरक़्क़ीपसंद-जम्हूरियतपसंद तहरीक के लिए बड़ा सदमा

इतवार की कविता: ...मैं यूपी का चेहरा हूं

इतवार की कविता : 'सिर्फ़ अपना घर न बचा शहर को बचा...'

माना कि राष्ट्रवाद की सब्ज़ी भी चाहिए/ लेकिन हुज़ूर पेट में रोटी भी चाहिए


बाकी खबरें

  • किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में करनाल में महापंचायत, अधिकारियों का घेराव
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में करनाल में महापंचायत, अधिकारियों का घेराव
    07 Sep 2021
    महापंचायत के लिए जमा हुए किसानों ने आईजी, एसपी और डीसी का घेराव किया। इसके बाद अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की पेशकश की। जिसपर किसानों की ओर से एक ग्यारह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाया गया। इस…
  • मुज़फ़्फ़रनगर: 2013 के दंगों के बाद किसान आंदोलन ने किया जाटों और मुसलमानों को फिर से एकजुट
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    मुज़फ़्फ़रनगर: 2013 के दंगों के बाद किसान आंदोलन ने किया जाटों और मुसलमानों को फिर से एकजुट
    07 Sep 2021
    मुजफ्फरनगर महापंचायत जाट-मुस्लिम एकता प्रदर्शित करने वाले संदेश देने में प्रतीकात्मक रूप से सफल रही।
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: भूखे भजन न होय गोपाला लेकिन...
    07 Sep 2021
    जनता को रोज़ी-रोटी देने में नाकाम हमारी सरकारें, हमारे जनप्रतिनिधि जनता को पूजा-नमाज़ में ही उलझाए रखना चाहते हैं। शायद यही वजह है कि झारखंड के बाद अब उत्तर प्रदेश और बिहार में भी विधानसभा में इबादत…
  • रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ रेल कर्मियों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कल!
    रौनक छाबड़ा
    रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ रेल कर्मियों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कल!
    07 Sep 2021
    “चेतावनी दिवस” के रूप में मनाए जाने वाले इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में देश के सभी 68 रेलवे मंडलों के रेलकर्मियों के भाग लेने की उम्मीद है। 
  • गुजरात: गन्ने के खेत में काम करने वाली आदिवासी महिलाओं की बंधुआ ज़िंदगी
    दमयन्ती धर
    गुजरात: गन्ने के खेत में काम करने वाली आदिवासी महिलाओं की बंधुआ ज़िंदगी
    07 Sep 2021
    दक्षिण गुजरात की आदिवासी महिलाओं की कहानी बेहद दर्दनाक है। वे यहां काम कर रहे 2.5 लाख गन्ना श्रमिकों की संख्या की तक़रीबन आधी हैं, लेकिन ये महिलायें चीनी उद्योग में आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License