NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
आंदोलन
उत्पीड़न
कानून
भारत
राजनीति
स्टेन स्वामी की मौत के ख़िलाफ़ देशभर में उठ रही आवाज़; एल्गार मामले के अन्य आरोपियों ने जेल में भूख हड़ताल की
इस मामले में अन्य आरोपियों ने स्वामी की मौत को ‘‘संस्थागत हत्या’’ बताया और इसके लिए ‘‘जेलों की लापरवाही, अदालतों की उदासीनता और जांच एजेंसियों की दुर्भावना’’ को जिम्मेदार ठहराया। प्रदर्शन के तौर पर मामले में सह-आरोपियों ने बुधवार को तलोजा जेल में एक दिन की भूख हड़ताल की।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 Jul 2021
Stan Swamy

84 वर्षीय मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई, जिसको लेकर देशभर में लोग सवाल उठा रहे हैं। इसे हिरासत में की गई सांस्थानिक हत्या बता रहे हैं। इसके ख़िलाफ़ देश के कई राजनेताओं ने आवाज़ बुलंद की और संयुक्त विपक्ष ने एक पत्र लिखकर सरकार से गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) जैसे कानूनों को रद्द करने की मांग की। इसके साथ ही देश के कई हिस्सों में लोग सडकों पर उतरकर अपना विरोध जता रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे लोग जहां एक तरफ हिरासत में स्वामी की मौत से गुस्से में है, वहीं वो दूसरी तरफ जेल में बंद अन्य राजनैतिक कैदियों की रिहाई की भी मांग उठा रहे हैं। इसके साथ ही भीमा कोरेगांव केस में बंद अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी स्वामी के मौत के खिलाफ जेल में भी आज यानि बुधवार को अनशन करने का एलान किया है।

स्वामी को यूएपीए के तहत अक्टूबर 2020 में रांची से एनआईए ने गिरफ्तार किया था और नवी मुंबई के तलोजा केंद्रीय कारागार में बंद रखा गया था। उन्हें सोमवार को मुंबई के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। वह स्वास्थ्य आधार पर जमानत दिए जाने के लिए लड़ाई लड़ रहे थे।

एल्गार मामले के आरोपियों ने जेल में भूख हड़ताल की

एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में 10 आरोपी पड़ोसी नवी मुंबई में तलोजा जेल में एक दिन की भूख हड़ताल पर चले गए हैं। उन्होंने सह-आरोपी स्टेन स्वामी की ‘‘संस्थागत हत्या’’ के विरोध में बुधवार को प्रदर्शन किया।

उन्होंने एल्गार परिषद मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अधिकारियों और तलोजा जेल के पूर्व अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की।

इस मामले में अन्य आरोपियों ने स्वामी की मौत को ‘‘संस्थागत हत्या’’ बताया और इसके लिए ‘‘जेलों की लापरवाही, अदालतों की उदासीनता और जांच एजेंसियों की दुर्भावना’’ को जिम्मेदार ठहराया। प्रदर्शन के तौर पर मामले में सह-आरोपी रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धावले, महेश राउत, अरुण फेरेरा, वर्नोन गोन्साल्विस, गौतम नवलखा, आनंद तेलतुम्बडे, रमेश गाइचोर और सागर गोरखे बुधवार को तलोजा जेल में एक दिन की भूख हड़ताल पर चले गए।

उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को प्रदर्शन के बारे में सूचित किया। परिवार के सदस्यों ने एक बयान जारी कर कहा कि एल्गार मामले के सभी कैदियों ने फादर स्टेन स्वामी की मौत के लिए एनआईए और तलोजा जेल के पूर्व अधीक्षक कौस्तुभ कुर्लेकर को जिम्मेदार ठहराया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि उनका मानना है कि ‘‘स्टेन स्वामी को उनसे अलग करना सोची समझी संस्थागत हत्या है।’’

बयान में कहा गया है कि एनआईए और कुर्लेकर ने स्टेन स्वामी को ‘‘प्रताड़ित’’ करने का एक भी मौका नहीं छोड़ा, चाहे वह जेल में ‘‘भयावह बर्ताव’’ हो, अस्पताल से उन्हें जेल में लाने की जल्दबाजी हो या सिपर जैसी छोटी सी चीजों के खिलाफ प्रदर्शन हो जिसकी स्वामी को अपने स्वास्थ्य के कारण जरूरत होती थी। 

बयान में उनकी मौत की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा गया है, ‘‘इन वजहों से स्टेन स्वामी की मौत हुई और अत: इस संस्थागत हत्या के लिए एनआईए अधिकारियों और कुर्लेकर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत मुकदमा चलना चाहिए।’’

बयान में कहा गया है कि आरोपियों के परिवार के सदस्य तलोजा जेल प्रशासन के जरिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के समक्ष इन मांगों को रखेंगे। इसमें यह भी कहा गया है कि अलग-अलग बैरक में बंद होने के बावजूद ये आरोपी मंगलवार को मिले और उन्होंने फादर स्टेन स्वामी की अपनी यादों को साझा किया तथा उनकी याद में दो मिनट का मौन भी रखा।

मामले में तीन महिला आरोपी सुधा भारद्वाज, शोमा सेन और ज्योति जगताप मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं।

देशभर में उठ रही आवाज़

बिहार, झारखंड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु सहित देश के कई अन्य राज्यों में स्वामी की मौत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए।

मंगलवार को पटना के नागरिकों ने 'हम पटना के लोग' बैनर तले प्रतिवाद दर्ज किया। साथ ही उन्होंने स्वामी को भावभीनी श्रद्धाजंलि दी। पटना के नागरिकों ने एक स्वर में कहा कि सत्ता की ताकतों ने स्टेन स्वामी की हत्या की है। यह साधारण मौत नहीं है। उनकी मौत के जरिये सत्ता-सरकार हमें डराने की कोशिश कर रही है।  इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा और लोकतंत्र की लड़ाई जारी रहेगी।

यह सभा स्टेशन गोलम्बर स्थित बुद्ध स्मृति पार्क के पास हुई।

अपने भाषण में प्रो. डेज़ी नारायण ने कहा कि यह एक महज वश्रद्धाजंलि सभा नहीं, बल्कि संविधान-लोकतंत्र और लोगों के जीने के अधिकार को लेकर लड़ाई को तेज करने का संकल्प लेने का समय है। फादर स्टेन स्वामी हमारे लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। हम मजबूती से UAPA जैसे कानूनों को खत्म करने की मांग करते हैं, जिसका दुरुपयोग लोगों की आवाज दबाने में किया जा रहा है। भीमा कोरेगांव में फंसाये गए लोग देश के चर्चित बुद्धिजीवी हैं, लेकिन उनके साथ देश की सरकार व न्यायपालिका जो व्यवहार कर रही है, वह हतप्रभ करने वाली है। हम न्याय व लोकतंत्र की लड़ाई जारी रखेंगे।

कविता कृष्णन ने कहा कि फादर स्टेन की जमानत की सुनवाई ने भारतीय न्याय व्यवस्था में गिरावट के नये प्रतिमान दर्ज किए हैं, जो आगामी इतिहास में दर्ज रहेगा।  न्यायाधीशों ने सुनवाईयों में दो महीनों से अधिक का समय सिर्फ एक सिपर देने की अनुमति देने में काट दिया जिससे फादर स्टेन सम्मानजनक तरीके से पानी पी सकते थे। सब जानते थे कि कोविड के काल में 84 वर्षीय व्यक्ति को जेल में डालना उन्हें मौत के मुंह मे धकेलना था।

आगे उन्होंने कुछ गंभीर सवाल उठाते हुए कहा हमारा देश लोकतांत्रिक है, तो अदालत में हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है। हम सारे लोग कह रहे थे कि सरकार गिरफ्तार सभी 16 लोगों की सुनवाई क्यों नही करवा रही है? यदि NIA सबूत पेश नहीं कर रही थी तो उन्हें बेल क्यों नहीं दी जा रही है? क्योंकि ये लोग जानते हैं कि यदि अदालत में सुनवाई होगी तो अदालत उन्हें रिहा करने के लिए मजबूर होगी, इनके खिलाफ कोई सबूत ही नहीं है।

सुधा वर्गीज ने कहा कि स्टेन स्वामी समझौता करने वाले आदमी नहीं थे। 15 लोग और हैं, जो उसी तरह के झूठे मुकदमे में फंसा दिए गए हैं। उनके साथ ऐसा न हो और उनको बेल मिले, इसके लिए हमलोगों को लड़ना पड़ेगा। आज UAPA में क्या हो रहा है, हम सब जानते हैं। न्यायपालिका किसी के इशारे पर काम कर रही है। वह नागरिकों के खिलाफ काम कर रही है।

फ़ादर जोस ने कहा कि फादर स्टेन स्वामी ने अपने कैरियर को छोड़कर गरीबों की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दिया, आज उनके साथ यह बर्ताव निंदनीय है।

इसी तरह दिल्ली में संसद से कुछ सौ मीटर दूर जंतर-मंतर पर छात्र संगठन स्टूडेंट फ़ेडेरेशन ऑफ़ इण्डिया (एसएफआई) सहित कुछ छात्र संगठनों ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी जब तक अपनी सभा को समाप्त करते उससे पहले ही दिल्ली पुलिस ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियो को हिरासत में ले लिया। हालांकि कुछ घंटो बाद सभी को रिहा कर दिया गया। लेकिन प्रदर्शनकारियो ने पुलिस के रैवेये पर सवाल उठाए और इसे उनके अधिकार पर हमला बताया। एसएफआई ने दावा किया की उनके कई महिला कार्यकर्ताओं को पुरुष पुलिस बल ने पीटा और बदसलूकी की।

एसएफआई दिल्ली प्रदेश ने एक बयान जारी कर कहा कि उनके दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुमित कटारिया, सचिव प्रीतीश मेनन और जेएनयूएसयू अध्यक्ष, एसएफआई दिल्ली राज्य समिति की सदस्य आइशी घोष और अखिल भारतीय संयुक्त सचिव दिप्सिता धर सहित लगभग 25 एसएफआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।

साथ ही एसएफआई ने अपने बयाना में कहा कि जंतर-मंतर पर कार्यकर्ताओं को क्रूर लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा और उन्हें बस में खींच कर ले जाया गया। इसमें उनकी महिला सदस्यों सहित कई कार्यकर्ता घायल हो गए।

एसएफआई ने कहा, “हम झूठे आरोपों के तहत क्रूर राज्य दमन और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी देख रहे हैं। भाजपा सरकार यूएपीए का इस्तेमाल विरोध की आवाजों पर लगाम लगाने और कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और वकीलों को सलाखों के पीछे डालने के लिए एक उपकरण के रूप में कर रही है। हम भीमा कोरेगांव गिरफ्तार सहित सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग करते हैं।”

इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी छात्रों ने प्रदर्शन किया, जबकि झारखंड और चंडीगढ़ में कई नागरिक और मज़दूर संगठन भी सड़क पर उतर आए।

Stan Swamy
elgar parishad
Bhima Koregaon
UAPA
SFI Student
SFI Protest

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखण्ड : फ़ादर स्टेन स्वामी समेत सभी राजनीतिक बंदियों की जीवन रक्षा के लिए नागरिक अभियान शुरू

एल्गार मामला : परिजनों ने मुख्यमंत्री से की कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग

फादर स्वामी ने एनआईए को "झूठे सबूतों" के बारे में बताया था: सहकर्मी


बाकी खबरें

  • sbi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    DCW का SBI को नोटिस, गर्भवती महिलाओं से संबंधित रोजगार दिशा-निर्देश वापस लेने की मांग
    29 Jan 2022
    एसबीआई ने नयी भर्तियों या पदोन्नत लोगों के लिए अपने नवीनतम मेडिकल फिटनेस दिशानिर्देशों में कहा कि तीन महीने से अधिक अवधि की गर्भवती महिला उम्मीदवारों को ‘‘अस्थायी रूप से अयोग्य’’ माना जाएगा।
  • Yogi
    रश्मि सहगल
    यूपी चुनाव: पिछले 5 साल के वे मुद्दे, जो योगी सरकार को पलट सकते हैं! 
    29 Jan 2022
    यूपी की जनता में इस सरकार का एक अजीब ही डर का माहौल है, लोग डर के मारे खुलकर अपना मत ज़ाहिर नहीं कर रहे हैं लेकिन अंदर ही अंदर एक अलग ही लहर जन्म ले रही है, जो दिखाई नहीं देती। 
  • Pegasus
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    पेगासस मामले में नया खुलासा, सीधे प्रधानमंत्री कठघरे में, कांग्रेस हुई हमलावर
    29 Jan 2022
    अमेरिकी समाचार पत्र ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर के अनुसार, 2017 में भारत और इजराइल के बीच हुए लगभग दो अरब डॉलर के अत्याधुनिक हथियारों एवं खुफिया उपकरणों के सौदे में पेगासस स्पाईवेयर तथा एक मिसाइल…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: कैसे करेंगे चुनाव प्रचार? जब बागों में ही नहीं है कोई बहार! 
    29 Jan 2022
    बिहार चुनाव होते हैं तो नीतीश बाबू अपने 15 साल के शासन को भुलाकर लालू-राबड़ी की सरकार को कोसते रहते हैं, लेकिन यूपी में किसको कोसेंगे? यहाँ तो उनके ही भाई-बंधुओं की सरकार है।
  • potato farming UP
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: आलू की कीमतों में भारी गिरावट ने उत्तर प्रदेश के किसानों की बढ़ाईं मुश्किलें
    29 Jan 2022
    ख़राब मौसम और फसल की बीमारियों के बावजूद, यूपी की आलू बेल्ट में किसानों ने ऊंचे दामों की चाह में आलू की अच्छी पैदावार की है। हालांकि, मौजूदा खुदाई के मौसम में गिरती कीमतों ने उनकी उम्मीदों पर पानी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License