NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
जेएनयू हिंसा और सीएए के खिलाफ छात्रों का दिल्ली में मार्च
दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में हिंसा और नागरिकता कानून के खिलाफ छात्र, शिक्षक और लेफ्ट समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने मंडी हाउस से लेकर मानव संसाधन मंत्रालय तक मार्च निकाला।
अजय कुमार
09 Jan 2020
CAA protest

दिल्ली में गुरुवार को नागरिकता कानून और जेएनयू में हुई हिंसा के विरोध में मंडी हाउस से लेकर मानव संसाधन मंत्रालय तक मार्च निकाला गया। नागरिक संस्थाओं के सदस्यों और छात्रों समेत सैकड़ों लोगों ने जेएनयू में हुए हमले और सीएए के विरोध में सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति के इस्तीफे की मांग की गई।

माकपा नेता सीताराम येचुरी, प्रकाश करात, बृंदा करात, भाकपा महासचिव डी राजा और लोकतांत्रिक जनता दल के प्रमुख शरद यादव भी जुलूस में शामिल थे। हाथ में तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने मंडी हाउस से जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारी हल्ला बोल और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। तख्तियों पर “सीएए नहीं, एनआरसी नहीं”, “विश्वविद्यालय परिसर में घुसने पर एबीवीपी पर प्रतिबंध लगाओ”, “हिंसा त्याग करो”, “शिक्षा खरीदने बेचने की चीज नहीं है” के नारे लिखे हुए थे।
IMG-20200109-WA0021.jpg

पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ, छात्र संघ पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल की मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कराई।

इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए जवाहर लाल नेहरू के छात्र मनीष जायसवाल ने कहा, 'पांच जनवरी का दिन जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय पर कहर बनकर टूटा। सरकार के गुंडों ने छात्रों और शिक्षकों पर अपना दुश्मन मानकर हमला किया। ऐसे हमले पर अगर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है तो इसका मतलब होगा भारत को संभालने वाला कोई नहीं बचा है।'

वहीं, प्रदर्शन में शामिल हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुरेश चौहान का कहना है,'आज की दुनिया डिजिटल पर चलती है। हमें पता नहीं होता लेकिन हमारी समझ का बहुत बड़ा हिस्सा डिजिटल बनाता है। नागरिकता संशोधन कानून के बाद से मैं देख रहा हूं जिस तरह से समाज में इनफॉरमेशन फ्लो हो रहा है, वह एक दूसरे के मन में नफरत पैदा करने वाला है। मैं इस नफरत के माहौल से लड़ने के लिए पिछले कई दिनों से इन प्रदर्शनों में शामिल हो रहा हूं।'
IMG-20200109-WA0022.jpg
प्रदर्शन में शामिल जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में सक्रिय लवप्रीत कहते हैं,'हम मानते हैं कि छात्र राजनीति में हिंसक झड़पें होती है और इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन को कारवाई करने का हक है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ मिलकर सरकार के गुंडों ने पुलिस के आंख के सामने जवाहर लाल विश्व विद्यालय पर हमला लिया। मीडिया इसकी सबसे बड़ी गवाह है। छात्र राजनीति में क्या आपने कभी ऐसा देखा है?'

हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि जब वह इस विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे तब 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' नहीं हुआ करता था।
IMG-20200109-WA0016.jpg

जयशंकर के इस बयान को प्रदर्शन में शामिल जेएनयू में हिंदी के प्रोफेसर रहे पुरुषोत्तम अग्रवाल खारिज करते हैं। उन्होंने कहा, 'वो (जयशंकर) पता नहीं कहा की बात कर रहे हैं। इससे पहले की सरकारों से जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने जमकर सवाल पूछा है। इतिहास उठाकर देखिए इंदिरा गांधी से लेकर मनमोहन सिंह तक का इस विश्वविद्यालय ने जमकर विरोध किया है। लेकिन अब यह होता है कि सवाल पूछने पर एंटीनेशनल कह दिया जाता है। छात्रों और शिक्षकों पर दमन किया जाता है।'

सीएसडीएस के मशहूर समाजशास्त्री आदित्य निगम भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल थे। उन्होंने कहा, 'नागरिकता कानून में भेदभाव करने का एजेंडा तो उनका बहुत पहले से था। इस बार उन्हें मौका मिला उन्होंने लागू कर दिया। पहचान के आधार पर काम करने वाले पार्टियां अपने वोट बैंक तक पहुंचने के लिए ऐसे ही कदम उठाते रहते हैं। इस सरकार ने भी यही किया। सरकार के ऐसे क़दमों का विरोध करने के लिए ऐसे विरोध प्रदर्शन जरूर होने चाहिए। लोकतंत्र ऐसे ही जिंदा रहता है।'

JNU
JNU Violence
Attack on JNU
CAA
Protest against CAA
NRC
Protest against NRC
BJP
modi sarkar
JNUSU
JNUTA
CPM
CPIM
d Raja
ABVP

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • sedition
    भाषा
    सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामलों की कार्यवाही पर लगाई रोक, नई FIR दर्ज नहीं करने का आदेश
    11 May 2022
    पीठ ने कहा कि राजद्रोह के आरोप से संबंधित सभी लंबित मामले, अपील और कार्यवाही को स्थगित रखा जाना चाहिए। अदालतों द्वारा आरोपियों को दी गई राहत जारी रहेगी। उसने आगे कहा कि प्रावधान की वैधता को चुनौती…
  • बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे
    एम.ओबैद
    बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे
    11 May 2022
    "ख़ासकर बिहार में बड़ी संख्या में वैसे बच्चे जाते हैं जिनके घरों में खाना उपलब्ध नहीं होता है। उनके लिए कम से कम एक वक्त के खाने का स्कूल ही आसरा है। लेकिन उन्हें ये भी न मिलना बिहार सरकार की विफलता…
  • मार्को फ़र्नांडीज़
    लैटिन अमेरिका को क्यों एक नई विश्व व्यवस्था की ज़रूरत है?
    11 May 2022
    दुनिया यूक्रेन में युद्ध का अंत देखना चाहती है। हालाँकि, नाटो देश यूक्रेन को हथियारों की खेप बढ़ाकर युद्ध को लम्बा खींचना चाहते हैं और इस घोषणा के साथ कि वे "रूस को कमजोर" बनाना चाहते हैं। यूक्रेन
  • assad
    एम. के. भद्रकुमार
    असद ने फिर सीरिया के ईरान से रिश्तों की नई शुरुआत की
    11 May 2022
    राष्ट्रपति बशर अल-असद का यह तेहरान दौरा इस बात का संकेत है कि ईरान, सीरिया की भविष्य की रणनीति का मुख्य आधार बना हुआ है।
  • रवि शंकर दुबे
    इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा यूपी में: कबीर और भारतेंदु से लेकर बिस्मिल्लाह तक के आंगन से इकट्ठा की मिट्टी
    11 May 2022
    इप्टा की ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा उत्तर प्रदेश पहुंच चुकी है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में गीतों, नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License