NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लॉकडाउन के दौरान शिक्षकों, छात्रों और एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी को लेकर छात्रों का ट्विटर पर विरोध
एसएफआई ने कहा कि अगर सरकार एवं पुलिस वास्तविक गुनहगारों पर कार्रवाई नहीं करती है तो एसएफआई द्वारा भविष्य में लॉकडाउन की स्थिति को देखते हुए खुले में शारीरिक दूरी बनाकर प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
28 May 2020
DU

दिल्ली और देश के हज़ारो छात्रों ने हाल ही में की गई गिरफ्तारियों के विरोध में सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं, शिक्षकों व छात्रों को विभिन्न धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार किया जा रहा है या हिरासत में लिया जा रहा है। कई कार्यकर्ताओं को UAPA के तहत गिरफ़्तार किया गया है। 23 मई को पिंजरा तोड़ की दो सदस्यों पर भी UAPA लगाया गया। इसके विरोध में एसएफआई, अइसा, दिशा,पछास, एआईएसफ सहित कई अन्य छात्र संगठन और छात्रसंघों ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन किया। छात्रों ने #ReleaseAllPoliticalPrisoners और #StopArrestingStudents हैशटैग के तहत अपनी बातों को रखा और ट्वीट किए। इन्होंने आरोप लगया कि लॉकडाउन की आड़ में विभिन्न एक्टिविस्ट, शिक्षकों, छात्रों को दिल्ली में हुए दंगो की संलिप्तता के साथ जोड़कर मुकदमें दर्ज किए जा रहे है।

जेएनयू छात्रसंघ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा गया कि "ऐसा लगता है कि सरकार ने कोरोनोवायरस के बीच लोकतंत्र को दांव पर लगाने का मन बना लिया है। वह महामारी से निपटने के बजाय छात्रों को कैद करने में लगा है।"

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष और एसफआई की नेता आइशी घोष ने ट्वीट किया और कहा कि यह मुश्किल समय है और इस समय हम सभी को एक साथ मिलाकर लड़ाना होगा।  

एसएफआई के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुमित कटारिया ने लिखा, " प्रतिरोध गुनाह नहीं बल्कि चुप्पी गुनाह है! दिल्ली पुलिस छात्रों को जिस तरह फर्जी केस में गिरफ़्तार कर रही है इसपर चुप रहना अपराध है।"

पिंजरा तोड़ ने भी ट्वीट करते हुए लिखा कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन को कुचल रही है। इसलिए सीएए के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल लोगो को गिरफ़्तार कर रही है। उन्होंने पिंजरा तोड़ के दोनों कार्यकर्ताओ की तत्काल रिहाई की मांग की है।

quicksquarenew_3.jpg

जामिया के एक छात्र अहमद बशर ने लिखा कि "लॉकडाउन अधिकारों पर लॉकडाउन नहीं कर सकता है "

इसी तरह छात्र संगठन आइसा ने भी ट्वीट कर दिल्ली पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े किये और कहा कि "सच बताना दिल्ली पुलिस! कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा, अनुराग ठाकुर, रागिनी तिवारी जैसे दंगाइयों को न गिरफ्तार करने के लिए गृहमंत्रालय से कोई आदेश मिला है क्या? या प्रमोशन का लालच देकर छात्रों को डराने/चुप कराने का कोई ठेका मिला है?"

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने दिल्ली पुलिस से सरकार का विरोध करने वालों का अपराधीकरण बंद करने! सफूरा, मीरान, शिफा-उर-रहमान, आसिफ़, शरजील, नताशा, देवांगना व अन्य छात्रों कार्यकर्ताओं पर लगे फर्जी मुकदमे वापस लेने की मांग की!

छात्र संगठन एसएफआई ने एक बयान जारी कर कहा कि सीएए, एनआरसी, एनपीआर के दौरान सक्रिय कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए क्योंकि एसएफआई इन मुकदमों को राजनीति द्वारा प्रोत्साहित मानता है। आगे उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक व संविधान सम्मत है। प्रदर्शनकारीयों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर संविधान के दायरे में रहकर प्रदर्शन किए गए थे।

वहीं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा समेत अन्य भाजपा नेताओं के भड़काऊ भाषणों के बाद दिल्ली में दंगे हुए। इससे पहले सभी प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे। इनके भड़काऊ भाषणों के सभी सबूत मौजूद है। लेकिन केंद्र के तहत आने वाली दिल्ली पुलिस ने जिनपर कार्रवाई करनी चाहिए थी उन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।

एसएफआई ने यह भी कहा कि अगर सरकार एवं पुलिस वास्तविक गुनहगारों पर कार्रवाई नहीं करती है तो एसएफआई द्वारा भविष्य में लॉकडाउन की स्थिति को देखते हुए खुले में शारीरिक दूरी बनाकर प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।  

Student Protests
Delhi University
Jamia Milia Islamia
JNU
SFI
UAPA
#StopArrestingStudents
#ReleaseAllPoliticalPrisoners
JNU Students Union
twitter
AISA
JNUSU

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

ज्ञानवापी पर फेसबुक पर टिप्पणी के मामले में डीयू के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल को ज़मानत मिली

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

डीवाईएफ़आई ने भारत में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया

लखनऊ: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत के साथ आए कई छात्र संगठन, विवि गेट पर प्रदर्शन

दिल्ली: ''बुलडोज़र राजनीति'' के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे वाम दल और नागरिक समाज


बाकी खबरें

  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    धर्म के नाम पर काशी-मथुरा का शुद्ध सियासी-प्रपंच और कानून का कोण
    19 May 2022
    ज्ञानवापी विवाद के बाद मथुरा को भी गरमाने की कोशिश शुरू हो गयी है. क्या यह धर्म भावना है? क्या यह धार्मिक मांग है या शुद्ध राजनीतिक अभियान है? सन् 1991 के धर्मस्थल विशेष प्रोविजन कानून के रहते क्या…
  • hemant soren
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार
    18 May 2022
    एक ओर, राज्यपाल द्वारा हेमंत सोरेन सरकार के कई अहम फैसलों पर मुहर नहीं लगाई गई है, वहीं दूसरी ओर, हेमंत सोरेन सरकार ने पिछली भाजपा सरकार में हुए कथित भ्रष्टाचार-घोटाला मामलों की न्यायिक जांच के आदेश…
  • सोनिया यादव
    असम में बाढ़ का कहर जारी, नियति बनती आपदा की क्या है वजह?
    18 May 2022
    असम में हर साल बाढ़ के कारण भारी तबाही होती है। प्रशासन बाढ़ की रोकथाम के लिए मौजूद सरकारी योजनाओं को समय पर लागू तक नहीं कर पाता, जिससे आम जन को ख़ासी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है।
  • mundka
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुंडका अग्निकांड : क्या मज़दूरों की जान की कोई क़ीमत नहीं?
    18 May 2022
    मुंडका, अनाज मंडी, करोल बाग़ और दिल्ली के तमाम इलाकों में बनी ग़ैरकानूनी फ़ैक्टरियों में काम कर रहे मज़दूर एक दिन अचानक लगी आग का शिकार हो जाते हैं और उनकी जान चली जाती है। न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में…
  • inflation
    न्यूज़क्लिक टीम
    जब 'ज्ञानवापी' पर हो चर्चा, तब महंगाई की किसको परवाह?
    18 May 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार शर्मा सवाल उठा रहे हैं कि क्या सरकार के पास महंगाई रोकने का कोई ज़रिया नहीं है जो देश को धार्मिक बटवारे की तरफ धकेला जा रहा है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License