NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
एक बड़े आन्दोलन की राह पर लखीमपुर के गन्ना किसान, बंद किया चीनी मिलों को गन्ना देना..
लखीमपुर खीरी के गन्ना किसान पिछले दो साल से अपने बकाया राशि का इंतजार कर रहा है। आक्रोशित किसान कह रहे हैं कि इंतजार नहीं अब लड़ाई आर - पार की होगी। भुगतान नहीं तो गन्ना नहीं।
सरोजिनी बिष्ट
09 Dec 2021
kisan andolan

"मेहनत हमारी, लागत हमारी और मुनाफा पूंजीपति को - अब हम गन्ना किसानों ने फैसला ले लिया है कि जब तक हमारे बकाया मूल्य का भुगतान नहीं होगा, हम लखीमपुर खीरी के किसान यहां के चीनी मिलों को न गन्ना देंगे और न चीनी मिलों को चलने देंगे।
हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक हमें हमारी मेहनत का भुगतान नहीं हो जाता....,"

यह हर उस आक्रोशित लखीमपुर खीरी के गन्ना किसान की आवाज़ है जो पिछले दो साल से अपने बकाया राशि का इंतजार कर रहा है। आक्रोशित किसान कह रहे हैं कि इंतजार नहीं अब सीधे लड़ाई आर पार की होगी। भुगतान नहीं तो गन्ना नहीं।

इसी क्रम में बीते 9 दिसम्बर को पलिया के किसानों ने चक्का जाम भी किया।आंदोलन के दौरान दो घंटे के लिए पलिया-भीरा रोड पर किसानों ने सांकेतिक चक्का जाम किया। किसानों ने एलान किया है कि अगर एक हफ्ते में भुगतान नहीं होता है तो पूरी तरह से चक्का जाम कर अपने बकाया गन्ना भुगतान को पुरजोर तरीके से मांगा जाएगा। इस दौरान दो घंटे तक दोनों तरफ से आवागमन पूरी तरह से बंद रहा।

लखीमपुर खीरी के हजारों किसान अपने घरों से निकलकर पिछले ग्यारह दिनों से खुले आसमान के नीचे दिसम्बर की इस ठंड में न केवल धरने में डटे हुए हैं बल्कि कुछ जगह उनका क्रमिक भूख हड़ताल भी चल रही है। बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल के ख़िलाफ़ पलिया, गोला, मक्सूदापुर आदि जगहों पर किसानों का आंदोलन जारी है। खंबार खेड़ा में भी किसान आंदोलनरत थे लेकिन फिलहाल इस आश्वासन पर वहां अभी किसानों ने आंदोलन को वापस ले लिया है कि उनका पूरा भुगतान जनवरी तक कर दिया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक जिले में बजाज हिंदुस्तान की 14 मिलें मौजूद हैं, जिनपर लगभग चार हजार करोड़ रुपए का बकाया है। मात्र तीन चीनी मिलें पलिया, गोला, खंबारखेड़ा में ही तकरीबन 701 करोड़ का बकाया है। पहले ही दिन से ही किसानों के साथ आंदोलन में जुटी पलिया क्षेत्र की एपवा नेत्री आरती राय के मुताबिक दस दिन से ऊपर होने को आया, लेकिन शासन, प्रशासन का कोई व्यक्ति किसानों से मिलने तक नहीं आया।

वे कहती हैं बेशक बजाज चीनी मिल के ख़िलाफ़ यह आंदोलन है लेकिन सरकारी चीनी मिलों द्वारा भी इसी तरह से किसानों का शोषण जारी है, किसानों को उनकी रात दिन की मेहनत का भुगतान कहीं भी समय से नहीं हो रहा। हजारों करोड़ का बकाया चीनी मिलों पर है लेकिन मिलें यह कहकर अपना पल्ला झाड़ रही हैं कि वे घाटे पर हैं इसलिए समय से भुगतान नहीं हो पा रहा, देर सबेर भुगतान जरूर होगा लेकिन आज यही सुनते सुनते दो साल  गुजर गए और उधर राज्य सरकार भी इन किसानों का बकाया भुगतान करवाने में कोई रुचि नहीं दिखा रही। आरती जी कहती हैं किसानों के पास अब उसके अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं कि वे चीनी मिलों को ठप्प करवा दे।

बजाज की चार चीनी मिले ठप्प करवाई गई जिसमें अभी खंबार खेड़ा की चालू कर दी गई है क्योंंकि वहां जल्दी ही भुगतान का आश्वासन दे दिया गया है लेकिन किसानों का कहना है कि यदि फिर बकाया भुगतान को  दिया बताया कि हद यह है कि जो हमारे किसान भाई भुक्तभोगी हैं उल्टे उन्हीं पर केस दर्ज होने का खौफ दिखाया जा रहा है।  तो वहीं अख़िल भारतीय किसान महासभा की नेता कृष्णा अधिकारी कहती हैं एक तरफ किसान प्राकृतिक आपदा से बेहाल हुआ, बाढ़ ने उनका सब कुछ तबाह किया। धान की फसलें बरबाद हुईं।  जीवन यापन के लिए उनके पास गन्ना ही बचता है जिसको बेचकर वे अपने परिवार का पेट भर सके, अपनें बच्चो को पढ़ा सके, उस गन्ने का पैसा भी उसे नहीं मिल रहा जो खुद उसका अपना पैसा है।

कृष्णा जी कहती है यह कैसी विडम्बना है कि आज हमारे देश के किसान को अपनी खेती बाड़ी छोड़ कर सड़कों पर उतरना पड़ा और उस पूंजी को हासिल करने के लिए उसे लड़ना पर रहा है उसी की है। वे कहती हैं जब तक इन चीनी मिलों को किसान गन्ना नहीं देता तब तक राज्य सरकार को चाहिए कि वे किसानों का गन्ना कहीं और बिकवाने की व्यवस्था करे।

पिछले दिनों किसान के पक्ष में पलिया विधायक का एक बेहद भावुक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से रोते हुए किसानों के हित में सोचने और बकाया भुगतान जल्द करवाने की अपील कर रहे हैं। हालांकि इस वीडियो का आंदोलित किसानों पर कोई असर नहीं हुआ।

किसान किसान कहते हैं अगर विधायक जी पहले ही इतने भावुक हो जाते और जो भूमिका वे आज निभा रहे हैं समय रहते निभाते तो आज किसानों को आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ती। किसान मानते हैं कि चूंकि विधानसभा चुनाव नजदीक है, इसलिए विधायक जी इस तरह कि अपील कर रहे हैं जबकि किसान पिछले दो साल से अपनी मेहनत का पैसा मांग रहा है।

  तो वहीं  हालात की गंभीरता को देखते हुए गन्ना किसानों का बकाया भुगतान नहीं करने पर  लखीमपुर में बजाज चीनी मिल के अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है. सहकारी गन्ना समिति के विशेष सचिव राजेश सिंह ने लखीमपुर खीरी के पलिया थाने में ये FIR दर्ज कराई है. यहां बजाज चीनी मिल के फाइनेंस मैनेजर समेत चार अफसर पर केस दर्ज हुआ है। मिली जानकारी के मताबिक किसानों को गन्ना खरीद के 38701.57 लाख रुपये में 12099.38 लाख भुगतान किया गया और बाकी भुगतान नहीं हुआ. डीएम लखीमपुर के बार-बार निर्देश के बाद भी उन्होंने गन्ना किसानों को भुगतान नहीं किया. इसको लेकर किसानों ने कई बार प्रदर्शन भी किया। बीते शनिवार को ही किसानों ने इसको लेकर बैलगाड़ी मार्च निकाला था।

  चक्का जाम के दौरान धरने को संबोधित करते हुए किसानों ने कहा कि दस दिन से ऊपर का समय किसानों को अपना गन्ना भुगतान मांगते हुए धरना देकर बीत गया है, लेकिन किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है। चीनी मिल मालिक व अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद भी उनकी गिरफ्तारी न होने से भी किसानों में रोष है। किसानों ने कहा कि आम आदमी के ऊपर अगर एफआईआर दर्ज होती तो 24 घंटे के भीतर ही गिरफ्तारी हो चुकी होती, लेकिन यहां बात मिल मालिक व अधिकारियों की है तो प्रशासन भी मौन धारण कर रहा है। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर एक हफ्ते के अंदर बकाया गन्ना भुगतान नहीं होता है तो किसान पूरी तरह से सड़क पर उतरकर चक्का जाम करेगा, जिसकी जिम्मेदारी मिल व प्रशासन की होगी।

बहरहाल लखीमपुर की यह तस्वीर बता रही है कि जिस तरीके से आज वहाँ हजारों हजार किसान सड़क पर उतर आयें हैं तो उनके लिए अब पीछे हटना संभव नहीं और अब न उनका इरादा आन्दोलन को वापस लेने का है, तो निश्चित ही यह राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती से कम नहीं । यदि सरकार सचमुच किसान हितैषी होने का दंभ भरती है तो इस दिशा में क्या उसके पास कोई ठोस समाधान है, आज यह सवाल हर आन्दोलनरत किसान की जुबाँ पर है।

(लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं)

kisan andolan
Lakhimpur
sugarcane farmers
LakhimpurKheri

Related Stories

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

किसानों को आंदोलन और राजनीति दोनों को साधना होगा

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’

किसान आंदोलन ने देश को संघर्ष ही नहीं, बल्कि सेवा का भाव भी सिखाया

किसान आंदोलन की जीत का जश्न कैसे मना रहे हैं प्रवासी भारतीय?

चुनाव चक्र: किसान और राजनीति, क्या दिल्ली की तरह फ़तह होगा यूपी का मोर्चा!

ग्राउंड रिपोर्टः मोदी को झुकाया, जीत की ख़ुशी पर भारी मन से छोड़ रहे बॉर्डर

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा


बाकी खबरें

  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    लखनऊ ही नहीं पूरे अवध में खिसकी भाजपा की ज़मीन
    22 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने लखनऊ और उसके आसपास के गांवों में जानने की कोशिश की कि आखिर अवध में भाजपा की ज़मीन को आवारा पशु, महंगाई और बेरोज़गारी ने कितना नुकसान पहुंचाया। वाम…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या कोविड के पुराने वेरिएंट से बने टीके अब भी कारगर हैं?
    22 Feb 2022
    आज हम डॉ. सत्यजीत के साथ कोविड -19 के मौजूदा हालात के बारे में बात करेंगे और यह समझेंगे की क्या कोविड के पुराने वेरिएंट से बने टीके अब भी कारगर हैं व उसके नए वेरिएंट्स पर प्रभावकारी है। इसके अलावा हम…
  • unemployment
    अजय कुमार
    बढ़ती बेरोजगारी पूछ रही है कि देश का बढ़ा हुआ कर्ज इस्तेमाल कहां हो रहा है?
    22 Feb 2022
    कहीं ऐसा तो नहीं कि भाजपा अपने लिए चुनावी चंदा इकट्ठा करने के लिए देश पर क़र्ज़ का बोझ डाल रही है?
  • abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: भाजपा का कोई मुद्दा नहीं चल रहा!
    22 Feb 2022
    आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश में होने वाले चौथे चरण के मतदान की जहाँ उन्हें लगता है की भाजपा को नुकसान हो सकता है।
  • party
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव पांचवा चरण:  दाग़ी और करोड़पति प्रत्याशियों पर ज्यादा विश्वास करती हैं राजनीतिक पार्टियां
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के चुनाव जारी हैं, ऐसे में ADR ने पांचवे चरण के लिए प्रत्याशियों की कुंडली खंगालकर लोगों के सामने रख दी। भाजपा से लेकर सपा तक सभी पार्टियों में दाग़ी और करोड़पति प्रत्याशियों की भीड़ है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License