NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
माँ पर नहीं लिख सकता कविता!
कहते हैं आज माँ का दिन है। वैसे तो हर दिन माँ का होता है और सच तो यही है कि माँ की बदौलत हमने ‘दिन’ देखा। लेकिन कहते हैं कि आज ख़ास दिन है, आज ‘मदर्स डे’ है, तो मान लेते हैं। और ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं प्रख्यात कवि चन्द्रकान्त देवताले की माँ पर लिखी एक कविता जिसमें उन्हें कहना पड़ता है- माँ पर नहीं लिख सकता कविता!
न्यूज़क्लिक डेस्क
10 May 2020
Mothers Day
Image courtesy: The Union Journal

माँ के लिए सम्भव नहीं होगी मुझसे कविता

अमर चिऊँटियों का एक दस्ता मेरे मस्तिष्क में रेंगता रहता है

माँ वहाँ हर रोज़ चुटकी-दो-चुटकी आटा डाल देती है

मैं जब भी सोचना शुरू करता हूँ

यह किस तरह होता होगा

घट्टी पीसने की आवाज़ मुझे घेरने लगती है

और मैं बैठे-बैठे दूसरी दुनिया में ऊँघने लगता हूँ

जब कोई भी माँ छिलके उतार कर

चने, मूँगफली या मटर के दाने नन्ही हथेलियों पर रख देती है

तब मेरे हाथ अपनी जगह पर थरथराने लगते हैं

माँ ने हर चीज़ के छिलके उतारे मेरे लिए

देह, आत्मा, आग और पानी तक के छिलके उतारे

और मुझे कभी भूखा नहीं सोने दिया

 

मैंने धरती पर कविता लिखी है

चन्द्रमा को गिटार में बदला है

समुद्र को शेर की तरह आकाश के पिंजरे में खड़ा कर दिया

सूरज पर कभी भी कविता लिख दूँगा

माँ पर नहीं लिख सकता कविता!

                                      चन्द्रकान्त देवताले
                                    (07 नवम्बर 1936-14 अगस्त 2017)
                                    (कविता कोश से साभार)

इसे भी पढ़े : हम बच तो जाएंगे, लेकिन कितना बच पाएंगे ?

इसे भी पढ़े : सन्नाटा बरस रहा है देश में...

Sunday Poem
poem
mothers day
Mothers Day Poem
Women
Hindi poem

Related Stories

वे डरते हैं...तमाम गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज और बुलडोज़र के बावजूद!

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

मेरे लेखन का उद्देश्य मूलरूप से दलित और स्त्री विमर्श है: सुशीला टाकभौरे

इतवार की कविता : माँओं के नाम कविताएं

मदर्स डे: प्यार का इज़हार भी ज़रूरी है

...हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान


बाकी खबरें

  • श्रुति एमडी
    ‘तमिलनाडु सरकार मंदिर की ज़मीन पर रहने वाले लोगों पर हमले बंद करे’
    05 Apr 2022
    द्रमुक के दक्षिणपंथी हमले का प्रतिरोध करने और स्वयं को हिंदू की दोस्त पार्टी साबित करने की कोशिशों के बीच, मंदिरों की भूमि पर रहने वाले लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 
  • भाषा
    श्रीलंका में सत्ता पर राजपक्षे की पकड़ कमज़ोर हुई
    05 Apr 2022
    "सरकारी बजट पर मतदान के दौरान गठबंधन के पास 225 सांसदों में से 157 का समर्थन था, लेकिन अब 50 से 60 सदस्य इससे अलग होने वाले हैं। इसके परिणामस्वरूप सरकार न सिर्फ दो-तिहाई बहुमत खो देगी, बल्कि सामान्य…
  • विजय विनीत
    एमएलसी चुनाव: बनारस में बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी के आगे दीन-हीन क्यों बन गई है भाजपा?
    05 Apr 2022
    पीएम नरेंद्र मोदी का दुर्ग समझे जाने वाले बनारस में भाजपा के एमएलसी प्रत्याशी डॉ. सुदामा पटेल ऐलानिया तौर पर अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर आरोप जड़ रहे हैं कि वो…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: आज दूसरे दिन भी एक हज़ार से कम नए मामले 
    05 Apr 2022
    देश में कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 96 हज़ार 369 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है। और एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 54 रह गयी है।
  • मुकुल सरल
    नफ़रत की क्रोनोलॉजी: वो धीरे-धीरे हमारी सांसों को बैन कर देंगे
    05 Apr 2022
    नज़रिया: अगर किसी को लगता है कि ये (अ)धर्म संसद, ये अज़ान विवाद, ये हिजाब का मुद्दा ये सब यूं ही आक्समिक हैं, आने-जाने वाले मुद्दे हैं तो वह बहुत बड़ा नादान है। या फिर मूर्ख या फिर धूर्त। यह सब यूं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License