NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
...गले में दिल को लिए चीख़ता है सन्नाटा
“वो इंतज़ाम करेंगे ज़रूर चीख़ों का/ कि चैनलों के लिए बेमज़ा है सन्नाटा।” या फिर “सत्ता के हिप्नोटिज़्म की सब हैं गिरफ़्त में/ उनका फ़रेब तोड़ने वाला नहीं मिला।” इस तेवर के साथ हमारे समय की तल्ख़ सच्चाई हमारे सामने रखने वाले शायर हैं विवेक भटनागर। आप पेशे से पत्रकार हैं। आइए ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं उनकी कुछ ऐसी ही चुनिंदा ग़ज़लें
न्यूज़क्लिक डेस्क
17 May 2020
muzaffarnagar accident
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : नवभारत टाइम्स

ग़ज़ल-1

 

सड़क पे फैल गया जा-ब-जा है सन्नाटा

घुटा-घुटा सा घरों से उठा है सन्नाटा

 

बन आई जान पे इंसानियत की क्या आफ़त

गले में दिल को लिए चीख़ता है सन्नाटा

 

मिलाने आया है हमको हमीं से ये वक्फ़ा

हमारी ओर खुला रास्ता है सन्नाटा

 

वो इंतज़ाम करेंगे ज़रूर चीख़ों का

कि चैनलों के लिए बेमज़ा है सन्नाटा

 

यही तो वक़्त है, ख़ुद पर उठाइए उंगली

कोई जो पूछे कि किसकी ख़ता है सन्नाटा

 

ग़ज़ल-2

 

किस तरह की भूख का मंज़र नज़र आने लगा

चांद रोटी की जगह बर्गर नज़र आने लगा

 

दोस्तो! इन बाग़बानों से ज़रा यह पूछ लो

ये गुलिस्तां आज क्यूं बंजर नज़र आने लगा

 

अब तो हर अख़बार, चैनल, हर गली, हर मोड़ पर

इक मदारी और इक बंदर नज़र आने लगा 

 

लूट लेना जिसकी फ़ितरत है, वही बाज़ार अब

दोस्त बनकर घर के ही अंदर नज़र आने लगा 

 

जिनके क़त्लेआम पर सबकी ज़ुबां ख़ामोश थी

उनको मेरा शे'र ही ख़ंजर नज़र आने लगा  

 

ग़ज़ल-3

 

हमको सिला वफ़ाओं का अच्छा नहीं मिला

हमने जिसे भी टूट के चाहा, नहीं मिला

 

ताकतवरों के साथ सभी लोग हो लिए

कमज़ोर आदमी को सहारा नहीं मिला

 

सत्ता के हिप्नोटिज़्म की सब हैं गिरफ़्त में

उनका फ़रेब तोड़ने वाला नहीं मिला

 

महंगाई बढ़ रही है दिनोंदिन बुरी तरह

लेकिन किसी भी न्यूज़ में लिक्खा नहीं मिला

 

मुफ़लिस को राष्ट्रवाद का प्रवचन पिलाइए

किसकी मज़ाल कह दे कि खाना नहीं मिला

 

इक बेगुनाह भीड़ के हत्थे चढ़ा कि उफ़!

उसको सिवाय मरने के रस्ता नहीं मिला

 

पानी ही मर गया है नज़र का इसीलिए

दरिया दिलों के बीच से बहता नहीं मिला

 

हालत बुरी है अर्थ व्यवस्था की इस क़दर

जिनका छिना था काम, दुबारा नहीं मिला

 

बच्चों के सर पे इतनी उमीदों का बोझ है

जितना कि उनको पीठ पे बस्ता नहीं मिला

 

सस्ते में अपनी शर्मो हया हमने बेच दी

ख़ुद्दारियों का दाम भी अच्छा नहीं मिला

 

मज़बूत नींव थी कि इमारत नहीं गिरी

हमको, ख़ुदा का शुक्र है मलबा नहीं मिला

 

- विवेक भटनागर

इसे भी पढ़े : माँ पर नहीं लिख सकता कविता!

इसे भी पढ़े : हम बच तो जाएंगे, लेकिन कितना बच पाएंगे ?

Sunday Poem
poem
Hindi poem
ghazal
Migrant workers
Lockdown
modi sarkar
Coronavirus

Related Stories

वे डरते हैं...तमाम गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज और बुलडोज़र के बावजूद!

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

...हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान

फ़ासीवादी व्यवस्था से टक्कर लेतीं  अजय सिंह की कविताएं

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 16,326 नए मामले, 666 मरीज़ों की मौत
    23 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.51 फ़ीसदी यानी 1 लाख 73 हज़ार 728 हो गयी है।
  • Privatisation
    न्यूज़क्लिक टीम
    निजीकरण से बढ़ती है ग़रीबी, अमीर होते और अमीर
    22 Oct 2021
    पिछले तीन दशकों से हमारे देश में निजीकरण के पक्ष में प्रचार चलाया गया है। 1991 की राव-मनमोहन 'रिफ़ोर्म्स' के बाद बताया गया था कि इससे न सिर्फ़ भारत की आर्थिक विकास दर तेज़ी से बढ़ेगी, साथ में ग़रीबी…
  • kerala
    अज़हर मोईदीन
    केरल में जनता रेस्तरां भूखों का पेट भरने के लिए आगे आये 
    22 Oct 2021
    जनकीय होटल इस बात का जीता-जागता सुबूत हैं कि कैसे सामजिक कल्याण की परियोजनाएं एवं सामुदायिक भागीदारी के जरिये भूख से निपटा जा सकता है।
  • data
    विनीत भल्ला
    10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण अप्रमाणिक और निराधार: डेटा
    22 Oct 2021
    सुप्रीम कोर्ट ने 'आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों' को चिह्नित करने के लिए आय का मानदंड तय करने वाले केंद्र सरकार के तर्क के बारे में पूछा है कि इसके तहत सरकारी रोजगार पाने और उच्च शिक्षा संस्थानों में…
  • Afghanistan
    न्यूज़क्लिक टीम
    तालिबान से 10 देशों की वार्ता और बांग्लादेश में नफ़रत के ख़िलाफ़ आवाज़ें, दिखाती हैंं राह
    22 Oct 2021
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने रूस में तालिबान के साथ 10 देशों की वार्ता और बांग्लादेश में हिंसा पर न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की और यह जानने की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License