NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
कानून
समाज
भारत
राजनीति
मराठा आरक्षण: उच्चतम न्यायालय ने अति महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी राज्यों को नोटिस जारी किए
मराठा आरक्षण के मामले में उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक बेंच ने सभी राज्यों को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या आरक्षण पर 50% की सीमा को बढ़ाया जा सकता है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
08 Mar 2021
Supreme Court

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के बरसों पुराने मराठा समुदाय के आरक्षण की मांग पर सुनवाई शुरू कर दी है। उछ न्यायालय की पांच जजों की बेंच ने सभी सभी राज्यों से नोटिस भेज कर इस ‘अति महत्वपूर्ण’ मुद्दे पर जवाब मांगा कि क्या संविधान का 102वां संशोधन राज्य विधायिकाओं को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों का निर्धारण करने को लेकर कानून बनाने और अपने शक्तियों के तहत उन्हें लाभ प्रदान करने से वंचित करता है। 18 मार्च तक इस मुद्दे से जुड़े सभी संवैधानिक प्रश्नों पर सुनवाई पूरी हो जाएगी

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष 102वें संशोधन की व्याख्या का मुद्दा उठा। पीठ शिक्षा और नौकरियों में मराठों को आरक्षण देने के 2018 महाराष्ट्र कानून से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आरक्षण के मामले पर पर सभी राज्यों की राय जरूरी है क्योंकि इस मामले पर किसी भी फ़ैसले का असर राज्यों पर पड़ेगा।

संविधान में 2018 में किये गए 102 वां संशोधन अधिनियम के जरिये अनुच्छेद 338 बी जोड़ा गया, जो राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन, उसके कार्यों और शक्तियों से संबंधित है जबकि अनुच्छेद 342 ए राष्ट्रपति को किसी खास जाति को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा अधिसूचित करने और सूची में बदलाव करने की संसद की शक्ति से संबंधित है।

पीठ ने सभी राज्यों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर भी दलीलें सुनेगी कि क्या इंदिरा साहनी मामले में 1992 में आए ऐतिहासिक फैसले, जिसे ‘मंडल फैसला’ के नाम से जाना जाता है, उस पर पुन: विचार करने की आवश्यकता है।

उच्चतम न्यायालय ने 1992 में अधिवक्ता इंदिरा साहनी की याचिका पर ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाते हुए जाति-आधारित आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय कर दी थी।

पीठ में न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति आर रवीन्द्र भट्ट शामिल हैं।

पीठ ने कहा कि वह 15 मार्च से सुनवाई शुरू करेगी। पीठ ने राज्यों से इस मुद्दे पर लिखित जवाब दाखिल करने को कहा। उसने यह स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत महाराष्ट्र के लिए पेश होने वाले वकीलों को सुनने के बाद राज्यों को सुनेगी।

उसने कहा, ‘‘हम उन व्यापक मुद्दों को भी इंगित करते हैं जिन्हें इस संविधान पीठ ने विचार करने का प्रस्ताव दिया है। हम इन व्यापक मुद्दों का संकेत दे रहे हैं ताकि राज्यों सहित सभी संबंधित पक्ष अपने जवाब तैयार कर सकें।’’

महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं मुकुल रोहतगी, कपिल सिब्बल और पी एस पटवालिया की उस दलील पर पीठ ने गौर किया कि 102 वें संशोधन की व्याख्या के सवाल पर फैसला राज्यों के संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकता है और इसलिए उन्हें सुनने की जरूरत है।

केन्द्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि 102 वें संशोधन की व्याख्या पर अदालत के फैसले से राज्य प्रभावित हो सकते हैं और यह बेहतर होगा कि सभी राज्यों को नोटिस जारी किए जाए।

उच्चतम न्यायालय ने पांच फरवरी को कहा था कि शिक्षा एवं नौकरियों में मराठा समुदाय को आरक्षण देने से संबंधित महाराष्ट्र के 2018 के कानून को लेकर दाखिल याचिकाओं पर वह आठ मार्च से अदालत कक्ष के साथ ही ऑनलाइन सुनवाई शुरू करेगा।

पिछले साल नौ दिसंबर को शीर्ष अदालत ने कहा था कि महाराष्ट्र के 2018 के कानून से जुड़े मुद्दों पर ‘‘अविलंब सुनवाई’’ की जरूरत है क्योंकि कानून स्थगित है और लोगों तक इसका ‘फायदा’ नहीं पहुंच पा रहा है।

नौकरियों और दाखिले में मराठा समुदाय के लोगों को आरक्षण प्रदान करने के लिए सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) कानून, 2018 को लागू किया गया था।

((समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ))

Supreme Court
Maratha reservation
Reservation Policy

Related Stories

महाराष्ट्र सरकार का एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर नया प्रस्ताव : असमंजस में ज़मीनी कार्यकर्ता

प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिशा निर्देश दिए?

क़ानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बिना सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतारे जा रहे सफाईकर्मी

मध्यप्रदेश ओबीसी सीट मामला: सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला अप्रत्याशित; पुनर्विचार की मांग करेगी माकपा

ईडब्ल्यूएस आरक्षण की 8 लाख रुपये की आय सीमा का 'जनरल' और 'ओबीसी' श्रेणियों के बीच फ़र्क़ मिटाने वाला दावा भ्रामक

खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा एक सप्ताह में निगम खोरीवासियों को अस्थायी रूप से घर आवंटित करे

ओबीसी से जुड़े विधेयक का सभी दलों ने किया समर्थन, 50 फ़ीसद आरक्षण की सीमा हटाने की भी मांग  

जातिवार जनगणना की ज़रूरत क्यों?

"सरकार इंसाफ करें, नहीं तो हमें भी गटर में मार दे"

झारखंड: हेमंत सोरेन के "आदिवासी हिन्दू नहीं हैं" बयान पर विवाद, भाजपा परेशान!


बाकी खबरें

  • सबरंग इंडिया
    फादर स्टेन स्वामी की हिरासत में मौत 'हमेशा के लिए दाग': संयुक्त राष्ट्र समूह
    21 Mar 2022
    संयुक्त राष्ट्र वर्किंग ग्रुप ने मनमानी हिरासत पर भारत सरकार से उन परिस्थितियों की प्रभावी जांच करने को कहा जिनके कारण फादर स्टेन स्वामी की मृत्यु हुई थी
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    कांग्रेस का असल संकट और 'आप' के भगत अम्बेडकर
    20 Mar 2022
    कांग्रेस का असल संकट क्या है? 18 और 23 असंतुष्ट नेताओं के ग्रुप वैचारिक दबाव-समूह हैं या चुनावी राजनीति में अपने-अपने स्वार्थ के अखाड़ेबाज? पंजाब में अपनी शानदार चुनावी सफलता के बाद आम आदमी पार्टी(आप…
  • itihas ke panne
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या लाभार्थी थे भाजपा की जीत की वज़ह?
    20 Mar 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में नीलांजन बात करते हैं समाजशास्त्री हिलाल अहमद से. वे बात करते हैं देश के बदलते चरित्र की.
  • Kanwal Bharti
    राज वाल्मीकि
    भेदभाव का सवाल व्यक्ति की पढ़ाई-लिखाई, धन और पद से नहीं बल्कि जाति से जुड़ा है : कंवल भारती 
    20 Mar 2022
    आपने 2022 में दलित साहित्य के समक्ष चुनौतियों की बात पूछी है, तो मैं कहूँगा कि यह चुनौती अब ज्यादा बड़ी है। हालांकि स्थापना का संघर्ष अब नहीं है, परन्तु विकास और दिशा की चुनौती अभी भी है।
  • Aap
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक
    20 Mar 2022
    हर हफ़्ते की ज़रूरी ख़बरों को एक पिटारे में एक बार फिर लेकर हाज़िर हैं अनिल जैन
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License