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TISS मुंबई ने सफ़दर हाशमी पर लिखी किताब का विमोचन रद्द किया
TISS में इससे पहले आनंद पटवर्धन की फ़िल्म 'राम के नाम' की स्क्रीनिंग को भी रद्द कर दिया गया था।
सत्यम् तिवारी
06 Mar 2020
सफ़दर हाशमी

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइन्सेज़ (TISS) मुंबई ने सफ़दर हाशमी पर लिखी किताब 'हल्ला बोल' के विमोचन, नाटक 'हल्ला बोल' की रीडिंग और नाटक 'मशीन' के मंचन के साथ होने वाले एक कार्यक्रम की अनुमति ख़ारिज कर दी है।

टीआईएसएस ने इससे पहले आनंद पटवर्धन की डॉक्यूमेंटरी फ़िल्म 'राम के नाम' की स्क्रीनिंग को भी रद्द कर दिया था। प्रशासन ने वजह बताते हुए कहा है कि सेमेस्टर ख़त्म होने वाला है इसलिए उसने अनुमति ख़ारिज की है।

सुधन्वा देशपांडे द्वारा लिखी किताब 'हल्ला बोल' के साथ दिल्ली का एक नाटक ग्रुप जन नाट्य मंच फ़िलहाल मुंबई में बुक टूर पर है। 4 और 5 मार्च को किताब के विमोचन का कार्यक्रम हो चुका है जिसमें अलग-अलग जगहों पर नंदिता दास, ज़ीशान अय्युब और नसीरुद्दीन शाह ने इसमें हिस्सा लिया था और जनम के साथ सफ़दर हाश्मी का लिखा नाटक हल्ला बोल को पढ़ा था, और किताब पर चर्च भी की थी। इसी सिलसिले में 6 मार्च को टीआईएसएस मुंबई में किताब का विमोचन दोपहर 1 बजे होना था। इस कार्यक्रम को टीआईएसएस के छात्र संगठन प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फ़ोरम(पीएसएफ़) ने आयोजित किया था।

इस कार्यक्रम में जन नाट्य मंच नाटक 'मशीन' खेलने वाला था और जॉय सेनगुप्ता, मलयश्री हाश्मी और सुधन्वा देशपांडे हल्ला बोल पर चर्चा करने के साथ नाटक के कुछ हिस्से पढ़ने वाले थे।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए पीएसएफ़ से जुड़े छात्र रामदास ने कहा, "हमने प्रशासन से जब इसकी इजाज़त मांगी तो उसने हमारा लेटर वापस लौटा दिया। हमने सोचा कि हम इसे खुली जगह पर करेंगे लेकिन प्रशासन ने एक नोटिस दे कर कहा है कि सेमेस्टर ख़त्म हो जाने तक छात्र कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं कर सकते हैं जिसमें बाहर से कोई स्पीकर आने वाला है।"

रामदास ने बताया कि प्रशासन पिछले 2 महीनों से ऐसे हर कार्यक्रम को रद्द कर रहा है जो कि मौजूदा सरकार या दक्षिणपंथ की आलोचना करता है। छात्रों ने इससे पहले आनंद पटवर्धन की फ़िल्म 'राम के नाम' की स्क्रीनिंग भी आयोजित की थी, जिसे प्रशासन ने रद्द कर दिया था।

रामदास ने बताया, "हमने हाल ही में भगत सिंह स्मृति व्याख्यान भी आयोजित करना चाहा था, जिसे प्रशासन ने यह कह कर रद्द कर दिया था कि उनके पास भगत सिंह से जुड़ी पाठन सामग्री नहीं है।"

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़ प्रशासन ने अगली सूचना तक छात्रों द्वारा आयोजित सभी कार्यक्रम रद्द कर दिये हैं। रजिस्ट्रार एमपी बालामुरगन ने कहा है कि प्रशासन ऐसे क़दम कैम्पस में शांति स्थापित करने के लिए उठा रहा है।

टीआईएसएस में दिसम्बर से ही नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध शुरू हो गया था। इसके तहत छात्रों ने 15 दिसम्बर को जामिया के छात्रों पर हुई हिंसा के विरोध में और दिल्ली पुलिस के विरोध में प्रदर्शन भी किए थे। रामदास ने बताया कि अभी प्रशासन ने किसी भी तरह का प्रदर्शन-धरना करने की अनुमति देने से भी इंकार कर दिया है। वहीं रामदास ने यह भी बताया कि वो कार्यक्रम जिनमें दक्षिणपंथी सोच और मौजूदा सरकार का समर्थन किया जाता है, उनसे प्रशासन को कोई दिक़्क़त नहीं है।

हल्ला बोल : सफ़दर हाशमी की ज़िंदगी और मौत किताब के लेखक सुधन्वा देशपांडे ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, "एक उच्च शिक्षा और सामाजिक विज्ञान के संस्थान में सामाजिक ज्ञान की एक किताब पर चर्चा करने की अनुमति न देना, इसका कोई तुक नहीं बनता है।"

पीएसएफ़ ने प्रशासन के इस रवैये की निंदा करते हुए बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है, "यह सत्ताधारी ताक़तों द्वारा छात्रों की आवाज़ दबाने की साज़िश है। टीआईएसएस में हमेशा से बहस और चर्चाएँ होती रही हैं, और यहाँ पिछड़े लोगों की आवाज़ उठाई गई है, जिनकी आवाज़ मेनस्ट्रीम से ग़ायब हो गई है। हम ऐसे क़दम की निंदा करते हैं और छात्रों से एकजुट होने की अपील करते हैं।"

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TISS मुंबई
सफ़दर हाशमी
Safdar Hashmi
Tata Institute of Social Sciences
PSF
Progressive Students Forum

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