NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
पीएम केयर्स फ़ंड: अनावश्यक मुद्दे पर भी खींचातानी ?
कैबिनेट सचिव का यह स्पष्ट निर्देश था कि वेतन से काटी गयी राशि को दर्ज करने के लिए पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल करें,न कि प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ)।आख़िर सरकारी अफ़सरों के पास अपनी पसंद के किसी अन्य फ़ंड को दान करने या योगदान करने का कोई विकल्प क्यों नहीं होना चाहिए ?
सुधांशु मोहंती
04 May 2020
पीएम केयर्स फ़ंड

इस बात की सराहना की जानी चाहिए कि राजस्व विभाग (DoR) ने 17 अप्रैल, 2020 से जारी अपने पहले के सर्कुलर की व्यापक आलोचना को महसूस किया और 29 अप्रैल, 2020 को एक अन्य सर्कुलर के ज़रिये इसे संशोधित कर दिया। लेकिन, ऐसा आंशिक रूप से ही किया गया है।

मोटे तौर पर राजस्व विभाग के 17 अप्रैल के इस सर्कुलर में दो परेशान करने वाले मुद्दे थे। पहला मुद्दा तो यह था कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के सभी महीनों के लिए हर एक कर्मचारी के मासिक वेतन में एक प्रतिशत की कटौती का था, जब तक कि किसी को इस "कटौती को लेकर आपत्ति" न हो, और इसके लिए उसने राजस्व विभाग के डीडीओ(आहरण और वितरण अधिकारी) को लिखित में इसकी सूचना न दे दी हो। दूसरा मुद्दा प्रधानमंत्री की नागरिक सहायता और आपातकालीन राहत स्थिति (पीएम-केयर) फ़ंड में में डाले जाने वाली राशि से सम्बन्धित है।

पहले सर्कुलर में वेतन से “कटौती के सिलसिले में होने वाली आपत्ति” को लेकर जो रंगरोगन किया गया था,उसे डीडीओ को “अपनी इच्छा के हिसाब से सूचित करने” के विकल्प में संशोसन किया गया है।  हालांकि अब भी इस डिफ़ॉल्ट रिकवरी को लेकर अप्रैल के वेतन में कटौती के सर्कुलर वाली ज़ोर-ज़बरदस्ती पहले की तरह ही बनी हुई है।अगर किसी को इस रिकवरी से किसी तरह की आपत्ति है,तो उसके लिए कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है। उम्मीद की जानी चाहिए कि यह भी जल्दी हल हो जायेगा।

दूसरा मुद्दा प्रधानमंत्री के नागरिक सहायता और आपातकालीन राहत स्थिति (PM-CARES) फ़ंड में योगदान राशि दिये जाने की हिदायत का है, जिसे लेकर किसी तरह की कोई परवाह नहीं दिख रही है। यह हिदायत बेहद असरदार है। जैसा कि मैंने द वायर में लिखा है, “…यह फ़ैसला सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से एक अपील का था कि वे इस देश की महामारी को देखते हुए योगदान दें... जैसे ही डोनेशन मिलेगा, यह स्वाभाविक रूप से कहा जायेगा कि वह योगदान स्वैच्छिक था - अपील महज अपील ही नहीं होती है,बल्कि अधिकारियों के लिए एक इशारा होता है कि वे अपनी पसंद की निर्धारित राशि/राशियों की प्रति महीने की कटौती से अवगत करायें, या जो भी फ़ंड उन्हें ठीक लगता है,उसमें वह धनराशि दान करें।”

कोई शक नहीं कि कर्मचारियों के वेतन उनके और उनके नियोक्ता के बीच सेवा समझौते के मुताबिक़ किये गये कार्य के लिए किया गया भुगतान होता है,जो कर्मचारी का व्यक्तिगत पैसा होता है। इसलिए, यह पूरी तरह से उन पर निर्भर करता है कि पहले तो यह तय करें कि क्या वे कोरोनोवायरस महामारी से लड़ने के लिए अपने हिस्से में से योगदान देने के लिए इस सर्कुलर में की गयी अपील के आह्वान का साकारात्मक जवाब देंगे; और दूसरी बात, यदि ऐसा वे करते हैं, तो वे पीएम-CARES फंड में योगदान के रूप में कर्मचारी के वेतन से पूर्व-भुगतान और स्थायी रूप से रिकवरी की बजाय किस फंड में योगदान करना चाहते हैं। यह वही बात है, जहां राजस्व विभाग के फ़ैसले पर सवालिया निशान लग जाता है, जिसकी पृष्ठभूमि साफ़गोई वाली नहीं रही है !

पहले से ही मौजूद और 1948 में स्थापित जाने-माने प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ़) फ़ंड से मिलते-जुलते नाम के साथ प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन राहत स्थिति (पीएम-केयर्स) नामक एक और नये फ़ंड बनाये जाने की ज़रूरत का कोई मतलब नहीं था।

लगता है कि कैबिनेट सचिव ने इस प्रक्रिया को तेज़ी के साथ शुरु की है। 16 अप्रैल, 2020 को सभी मंत्रालयों / विभागों के सभी सचिवों को संबोधित एक अर्ध-आधिकारिक पत्र में  अन्य बातों के साथ-साथ उन्होंने यह भी लिखा कि “यदि इस अभूतपूर्व स्थिति से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों में योगदान देने को लेकर आपके मंत्रालय / विभाग में काम करने वाले सभी अधिकारियों के साथ-साथ संलग्न / अधीनस्थ कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए आपके स्तर पर अपील जारी की जाती है, तो यह सराहनीय बात होगी। मंत्रालय / विभाग के अपने वेतन में काटे गये सभी इच्छुक अधिकारियों के स्वैच्छिक योगदान को PFMS प्रणाली के ज़रिये प्रधान मंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति राहत फ़ंड (PM CARES Fund) में डाला जा सकता है।”

कैबिनेट सचिव का यह स्पष्ट निर्देश था कि वेतन से काटी गयी राशि को दर्ज करने के लिए पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल करें,न कि प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) या किसी भी मुख्यमंत्री राहत कोष सहित किसी अन्य फ़ंड का उपयोग करें। लेकिन, स्पष्ट होने करने के लिए, न तो उन्होंने पूरे वित्त वर्ष 2020-21 के लिए हर महीने एक प्रतिशत वेतन की रिकवरी का सुझाव दिया, और न ही संशोधित होने के बाद 17 अप्रैल को जारी सर्कुलर के कुशल लेखन के ज़रिये योगदान करने को लेकर कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती ही की है। लेकिन,इसके बाद राजस्व विभाग ने  इसे भविष्य में करियर के स्थिति निर्धारण या बिना ज़िम्मेदारी वाली नौकरी के कृपापात्र होने के तरीकों में से एक के रूप में प्रतिस्पर्धी अनुग्रह बना दिया है।

इस बात के बावजूद कि सावधानी के साथ 17 अप्रैल के इस सर्कुलर को पूरा करने का आदेश दिया गया, जिसके द्वारा अधिकारियों को मौका दिये जाने की पेशकश की गयी, जिन्होंने अपने अप्रैल 2020 के वेतन से कटौती के लिए लिखित तौर पर आपत्ति नहीं जतायी थी। यह कम से कम इस हक़ीक़त की रौशनी में अनैतिक और कपटपूर्ण है कि 1 जनवरी, 2020 से 30 जून, 2021 तक सेवारत / सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता / राहत (डीए / डीआर) जमा करने का आदेश 23 अप्रैल, 2020 तक आया,जबकि तीन दिन पहले ही 17 अप्रैल को उन्हें इसके लिए लिखित रूप में आपत्ति दर्ज किये जाने का विकल्प दिया गया था। डीए / डीआर पर लगायी जाने वाली रोक अपने आप में परेशान कर देने वाली बात है, लेकिन यह एक अलग कहानी है, और इसकी चर्चा यहां करना ठीक नहीं है।

बैंक की ब्याज दर को कम करने के साथ-साथ किसी नागरिक द्वारा अपने किसी क़िमती मक़सद से दान देने की इच्छा और डीए पर लगाये जाने वाले रोक के आदेश ने उनकी ज़िंदगी और इस्तेमाल किये जाने वाले पैसे पर एक दबाव डाल दिया है, और इससे तो सामान्य बुद्धि में भी यह बात समझ में आ जा वाली बात यही होगी कि वे किन तरीक़ों का वे चयन करेंगे,इसका फ़ैसला उन्हीं पर छोड़ दिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आचरण संहिता में उल्लेखित अनेक नियमों में से एक होता है- शीर्ष से थोपे गये आदेश का अनुपालन करना,लेकिन आधिकारिक व्यक्तिगत फ़ंड इस दायरे में तो निश्चित रूप से नहीं आता है !  

फिर भी पीएम केयर्स फ़ंड में योगदान के धुंधले सवाल का अब भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है। आख़िर सरकारी अफ़सरों के पास अपनी पसंद के किसी अन्य फ़ंड को दान करने या योगदान करने का कोई विकल्प क्यों नहीं होना चाहिए ? प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इस ख़बर को पीएम-केयर फ़ंड से संबंधित दस्तावेजों के साथ बाहर लाने और उन्हें सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। दान देने वालों को यह जानने का अधिकार आख़िर क्यों नहीं है कि उसके दान का इस्तेमाल कैसे किया गया है ? अगर विनम्रता से कहा जाय,तो यह एक अजीब बात है।

जो भ्रम की स्थिति बनी हुई है,वह यह है कि 31 मार्च, 2019 तक पीएमएनआरएफ़ में 3800 करोड़ रुपये शेष थे,जबकि अब शायद 5000 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। PM-CARES फ़ंड में कंपनियों के योगदान वाली राशि,CSR फ़ंड लेकर संदेहास्पद स्थिति बनी हुई है, इससे सच्चाई क्या है,इसके बारे में चौतरफ़ा भ्रम की झलक मिलती है। ऐसे में इस भ्रम की स्थिति को दूर करने, पारदर्शिता और जनता की जानकारी दिये जाने को लेकर महामारी के दौर में भरोसा और विश्वसनीयता के लिए क्या  PM-CARES को PMNRF में विलय नहीं कर दिया जाना  चाहिए ?

इसे समझने के लिए दूसरे सिलसिले में इस्तेमाल होने वाली एक कहावत को यहां उद्धृत किया जा सकता है: मेरा यह जानने का अधिकार तो बनता ही है कि वह फंड कहां है, जिसे मैं दान देत रहा हूं, आख़िर उसका इस्तेमाल हो कहां हो रहा है !

(लेखक एक पूर्व सिविल सर्वेंट हैं, जो रक्षा मंत्रालय के वित्तीय सलाहकार के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं। इनके विचार व्यक्तिगत हैं।)

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल लेख को नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है।

The PM-CARES Fund: Flip-Flops on an Unnecessary Issue?

COVID-19
PM-CARES
Prime Minister Relief Fund
Coronavirus
Lockdown
PMO

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Delhi: One Year After Suicide of LSR Student
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लेडी श्रीराम कॉलेजः छात्रा को दी गई श्रद्धांजलि, आत्महत्या के एक साल बाद भी नहीं जागा प्रशासन
    09 Nov 2021
    'ऐश्वर्या की संस्थागत हत्या को एक साल हो गए है। छात्रवृत्ति में देरी के कारण उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा।'
  • fire hospital
    अमेय तिरोदकर
    महाराष्ट्र के अस्पतालों में आग की घटनाओं ने खोल दी व्यवस्था की पोल
    09 Nov 2021
    राज्य सरकार ने अस्पतालों में बार-बार हो रहीं आग की घटनाओं पर मिले कई सुझावों के बावजूद, इसकी रोकथाम के लिए अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 10,126 नए मामले, 332 मरीज़ों की मौत
    09 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.41 फ़ीसदी यानी 1 लाख 40 हज़ार 638 हो गयी है।
  • kashi vishwanath
    विजय विनीत
    स्पेशल रिपोर्टः चोर दरवाजे से काशी विश्वनाथ मंदिर में कॉरपोरेट घरानों को घुसाने की तैयारी!
    09 Nov 2021
    काशी विश्वनाथ धाम परियोजना का ज्यादातर काम पूरा हो चुका है। अब इसे आमदनी का जरिया बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। मंदिर का रेवेन्यु मॉडल विकसित करने के लिए ब्रिटेन की बहुराष्ट्रीय कंपनी अर्न्स्ट एंड…
  • Demonetisation
    वी श्रीधर
    तबाही मचाने वाली नोटबंदी के पांच साल बाद भी परेशान है जनता
    09 Nov 2021
    2016 की नोटबंदी के दुस्साहसिक क़दम और उससे लगे आघात ने आम जनता की आजीविका को नष्ट कर दिया था और भारतीय मुद्रा प्रणाली की अखंडता को नुकसान पहुंचाया था, पांच साल गुज़रने के बाद, इसका भूत आज भी भारतीयों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License