NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
ऐप-आधारित डिलीवरी के काम के जोखिम…
अगरचे नए डिलीवरी स्टार्टअप के द्वारा रिकॉर्ड निवेश आय का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी तादाद में उनके कर्मचारी थका देने वाली मेहनत, कम पारिश्रमिक और कंपनी के भीतर के मुद्दों के बारे में शिकायत करते हैं। बर्लिन से पॉल क्रांत्ज़ की रिपोर्ट।
पॉल क्रांत्ज़
25 May 2022
DILEVERY

पूरे जर्मनी भर में डिलीवरी स्टार्टअप की कोई कमी नहीं है। लेकिन कई कर्मचारी अपने काम की परिस्थतियों से नाखुश हैं।

डिलीवरी सर्विस के व्यवसाय ने एक दशक पहले ही बर्लिन में लोकप्रियता हासिल कर ली थी, जब बर्लिन-स्थित लिएफेरहेल्ड जैसी कंपनियों ने ग्राहकों के लिए रेस्तरां से भोजन का आर्डर करने के लिए विभिन्न मंच पेश किये, जिसमें रेस्तरां के कर्मचारियों के द्वारा डिलीवरी संपन्न कराई जाती थी।

लगभग 2013 के आसपास, इस मॉडल को प्रभावी तौर पर ऑनलाइन और ऐप-आधारित सेवाओं के द्वारा स्थानापन्न कर दिया गया था, जिन्होंने अपने खुद के डिलीवरी कर्मचारियों को काम पर रखा था। इसने ग्राहकों को ऐसे रेस्तरां से आर्डर करने में सक्षम बना दिया, जिन्होंने अपने स्वंय के डिलीवरी स्टाफ को नियुक्त नहीं किया था, और इसी के साथ ही इसने हजारों की संख्या में डिलीवरी का काम करने वाले रोजगार को उत्पन्न किया, जो लचीले काम के घंटे की पेशकश करती थीं और इस काम के लिए न के बराबर प्रशिक्षण की जरूरत पड़ती थी।

आज के दिन डिलीवरी बिज़नेस का बाजार भोजन एवं किराना सेवाओं से भी आगे विस्तारित हो चुका है। जर्मन-स्थित मेड (मेड्स आपके द्वार तक), ने पिछले वर्ष निजी घरों तक दवाइयों को पहुंचाने का काम शुरू किया और इसने अभी से अपने व्यवसाय को 25 जर्मन शहरों तक विस्तारित कर दिया है और इसके लिए 900 कर्मचारियों को काम पर नियुक्त किया है।

मेड के सह-संस्थापक हंनो हेंत्ज़न्बर्ग का इस बारे में कहना था कि, “इस वर्ष के अंत तक हम पूरे जर्मनी में अपने काम को विस्तारित कर लेंगे।” इसी के साथ उन्होंने आगे कहा कि कंपनी की ऑस्ट्रिया और फ्रांस में भी विस्तार करने की योजना है।

ड्रापप नामक, एक अन्य कंपनी भी बर्लिन में ग्राहकों को ई-कॉमर्स उत्पादों को वितरित करने के लिए कुछ इसी प्रकार के मॉडल को प्रयोग में ला रही है।

संदिग्ध बिज़नेस मॉडल

ऐप-आधारित डिलीवरी स्टार्टअप्स के बचाव में एक आम तर्क यह दिया जाता है कि वे ढेर सारे रोजगार को पैदा करते हैं। कर्मचारियों के कई मुद्दों के बारे में टिप्पणी करने के बारे पूछे जाने पर एक बर्लिन-आधारित किराने की डिलीवरी सर्विस प्रदान करने वाले, गोरिल्ला के प्रवक्ता ने तत्काल इंगित किया कि 2020 से गोरिल्ला ने 15,000 लोगों को काम पर रखा है।

आज के दिन, बर्लिन में दसियों हजार की संख्या में डिलीवरी कर्मचारी हैं। ये काम के अवसर, सहूलियत के मुताबिक काम के घंटे और जर्मन भाषा के बगैर ही जर्मनी के कई विदेशी छात्रों के लिए आय का अवसर प्रदान करते हैं। हालाँकि, काम से संबंधित चोटों, वेतन के न मिलने और यूनियन के ध्वस्त हो जाने जैसी कई रिपोर्टें बताती हैं कि इन डिलीवरी कंपनियों के द्वारा निर्मित नौकरियां शोषणकारी हो सकती हैं।

श्रमिकों के मुद्दे

डिलीवरी कर्मियों के सामने गंभीर रूप से घायल होने के जोखिम से लेकर मौत तक की चिंताएं कोई कम नहीं हैं। साईकिल से डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों पर किये गए सर्वेक्षणों में नियमित तौर पर इस बात का पता चला है कि उनमें से लगभग आधे लोगों को हर साल यातायात से संबंधित गंभीर चोटों से गुजरना पड़ता है।

यातायात से जुडी दुर्घटनाओं के जोखिम के अलावा कई डिलीवरी करने वाले साईकिल चालक मांसपेशीय संबंधी चोटों की रिपोर्ट करते हैं, जिसकी शिकायत उन्हें कुछ समय के उपरान्त पीठ पर भारी बोझ ढोने के परिणामस्वरूप हो जाती है।

जर्मनी में, ऐसे डिलीवरी कर्मचारियों को आश्रित माना जाता है यदि वे एक कंपनी के लिए ही काम करते हैं और उस कंपनी के उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। अधिकांश लोगों के लिए, काम करने के लिए कंपनी के ऐप का इस्तेमाल ही उन्हें आश्रित कर्मचारियों के तौर पर योग्य बना देता है।

लीपजिग विश्वविद्यालय में एल्से-फ्रेंकेल-ब्रुन्सविक इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी रिसर्च के उप निदेशक, जोहन्नेस किएस ने कहा, “इसके साथ कुछ विशिष्ट अधिकार भी मिल जाते हैं, जिसमें राष्ट्रीय न्यूनतम आय, स्वास्थ्य बीमा आदि शामिल हैं।”

हालांकि, इसके बावजूद जर्मनी में डिलीवरी कर्मचारियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जो कि गिग वर्क के लिए आम बात है।

किएस ने बताया, “हाँ, ये कर्मचारी शोषण का शिकार हैं और इन्हें तुलनात्मक रूप में कम वेतन मिलता है। इनके साथ इस्तेमाल करो और भूल जाओ के तौर पर व्यवहार किया जाता है। इनके काम को नियमित रोजगार के बजाय ‘काम=चलाऊ काम’ समझा जाता है।

‘निवेश की गंभीर कमी’

पिछले साल, गोरिल्ला चालकों के समूहों ने गायब होते वेतन, अचानक से बर्खास्त कर दिये जाने और अन्य मुददों के विरोधस्वरुप अदूरदर्शी हड़ताल का आयोजन किया था। इसके लगभग एक साल बाद भी कई गोरिल्ला कर्मचारियों के लिए भुगतान का मुददा अभी भी एक समस्या बनी हुई है।

वेतन के भुगतान के संबंध में गोरिल्ला ने यह बयान दिया था: “ जैसा कि बड़ी कंपनियों में कई कर्मचारियों के होने के कारण ऐसा होता है …संभव है कुछेक मामलों में कभी-कभार ऐसी त्रुटियाँ हो सकती हैं…वर्तमान में, लगभग 1% से लेकर 4% तक वेतन के भुगतान संबंधी त्रुटियाँ हों, जिन्हें हम समयबद्ध तरीके से सुधारने का प्रयास कर रहे हैं।”

हालांकि, एक पूर्व गोरिल्ला कर्मचारी संचालन प्रबंधक, जिन्होंने अभी भी कंपनी में कार्यरत संपर्कों की सुरक्षा के लिए खुद को गुमनाम रखे जाने की शर्त पर बताया कि, गोरिल्ला की मानव संसाधन टीम तभी से बेहद कम स्टाफ की कमी से जूझ रही है जब उन्होंने वहां पर एक साल पहले काम करना शुरू किया था।

उनकी टीम को हर महीने भुगतान में चूक होने के बारे में औसतन 900 शिकायतें मिला करती थीं। उनके अनुमान के मुताबिक, इनमें से लगभग आधी त्रुटियाँ कंपनी की थीं, जिनमें से ज्यादातर बीमारी में अवकाश और छुट्टियों के दिनों को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले एक पुरातन प्रणाली की वजह से था।

एक पूर्व प्रबन्धक का कहना था, “निवेश की भारी कमी है। जब कंपनी में आपके पास 10,000 लोग काम कर रहे हैं, तो आप इतने लोगों को महज एक एक्सेल शीट के माध्यम से भुगतान नहीं कर सकते हैं।”

भुगतान की समस्या को दुरुस्त करने के लिए उन्होंने सैप पेरोल प्रणाली को लागू किये जाने को प्रस्तावित किया था, लेकिन गोरिल्ला इस लागत को वहन नहीं करना चाहता था। उन्होंने आगे बताया, हालाँकि, उन्हें ऐसा करना पड़ा, हाल ही में उन्होंने इन-हाउस रिकॉर्ड लेबल को शुरू करने के लिए भुगतान किया है।

गोरिल्ला की किराने की आपूर्ति श्रृंखला के कर्मचारियों को पिछले साल बर्लिन में खराब कामकाज की परिस्थितियों के विरोध में विरोध प्रदर्शन करते हुए देखा गया था।

कर्मचारियों को समर्थन और मुनाफा कमाना कैसे संभव है?

मिगुएल जुडेज़ स्पेन के 27 वर्षीय जैवप्रौद्योगिकीविद हैं, जो पिछले छह महीने से बर्लिन में रह रहे हैं। वे विज्ञान संचार में अपनी मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के करीब हैं, और साथ ही वे भाषा स्कूल से जर्मन भी पढ़ रहे हैं। उन्होंने दिसंबर से एक किराना डिलीवरी ऐप, फ्लिंक के लिए डिलीवरी का काम शुरू किया था।

अपने अभी तक के काम के अनुभव के बारे में जुडेज़ का कहना था कि “यह उम्मीद से कहीं बेहतर रहा। मेरे मालिकों में सभी लोग अच्छे लोग हैं, और मुझे ढेर सारा मुफ्त भोजन मिलता है।”

हालांकि, डिलीवरी कंपनियां जिन्हें शुरू-शुरू में कर्मचारियों द्वारा सकारात्मक रूप से देखा जाता है, कुछ समय बाद उनमें ज्यादा शोषक बनने की प्रवृति दिखने लगती है, क्योंकि निवेश के लिए धन कम पड़ने लगता है और वे अपने मुनाफे के लिए नए-नए तरीके खोजने लगते हैं।

जुडेज़ ने अभी से फ्लिंक संगठन के भीतर कुछ सूक्ष्म परिवर्तनों को महसूस कर लिया है। शुरू-शुरू में वे अपनी क्लास के निर्धारित कार्यक्रम के हिसाब से अपने लिए काम को निर्धारित कर सकते थे। फिर व्यवस्था में बदलाव हो गया, और अब वे सिर्फ अपने काम के घंटों की प्राथमिकता को तय करते समय “रूचि के नोटिसों” को ही तय कर सकते हैं। इस सूक्ष्म बदलाव को अनिवार्य तौर पर कर्मचारियों के उपलब्ध न होने पर निर्धारित कीया जाता है, जिसके चलते उनकी अनुपस्थिति और नतीजे के तौर पर उनकी बर्खास्तगी को संभव बनाया जा सकता है।

निवेश से संचालित होने वाली स्टार्टअप की दुनिया में, जो संभावनामय कंपनियां होती हैं उन्हें निवेश में करोड़ों डॉलर हासिल हो जाते हैं। गोरिल्ला ने अपने पहले ही वर्ष में अपने लिए निवेश निधि में 1 अरब डॉलर (96 करोड़ यूरो) जुटाकर बिजनेस न्यूज़ में धूम मचा दी। मेड को इस वर्ष जनवरी तक 4.3करोड़ यूरो हासिल हो गये थे।

लेकिन इन नई-नई और अभी भी विकसित हो रही कंपनियों के पास काफी लागत की समस्या भी बनी हुई है। नये ग्राहकों के लिए रियायती दरों पर डिलीवरी देने के बाद, लगातार बढ़ते जा रहे वेयरहाउस स्पेस के लिए किराए का भुगतान, क्योंकि उन्हें अपने काम के नए-नए क्षेत्रों को लगातार विस्तारित करना पड़ता है और हजारों कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करना पड़ता है, जिसके चलते अंततः ये निवेश खत्म होने लगते हैं – और कंपनियों को मुनाफे को शुरू करने की जरूरत महसूस होने लगती है।

कंपनी के द्वारा उपलब्ध कराए गये एक बयान में कहा गया है, “गहन विकास की अवधि के बाद, गोरिल्ला का पूरा ध्यान अब एक मजबूत और लाभदायक बिजनेस को बनाने पर स्थानांतरित हो गया है। हमारे 25 से अधिक सूक्ष्म-पूर्ति केंद्र पहले से ही मुनाफे के साथ संचालित हो रहे हैं।”

हालांकि, वे कर्मचारी जो अपने लापता वेतन, या चोटों से उबरने के दौरान अपना किराया भाड़ा दे पाने की स्थिति में नहीं हैं, उनका तर्क होगा कि यह मुनाफा उन्हें उनके जीवन की गुणवत्ता की कीमत पर हासिल हो रही है। यह देखा जाना अभी बाकी है कि क्या कोई कंपनी अपने ग्राहकों उन दरों पर अपनी डिलीवरी सेवा की पेशकश कर सकती है, जिसे वे सहर्ष चुका सकें और साथ ही अपने कर्मचारियों जीने लायक वेतन और अन्य लाभों में मदद कर सके।

Delivery Service
berlin
Startups
Working conditions
pay

बाकी खबरें

  • hum bharat ke log
    डॉ. लेनिन रघुवंशी
    एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता
    22 Feb 2022
    सभी 'टूटे हुए लोगों' और प्रगतिशील लोगों, की एकता दण्डहीनता की संस्कृति व वंचितिकरण के ख़िलाफ़ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगा, जो इस प्रणाली से लाभ उठाते…
  • MGNREGA
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ग्रामीण संकट को देखते हुए भारतीय कॉरपोरेट का मनरेगा में भारी धन आवंटन का आह्वान 
    22 Feb 2022
    ऐसा करते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र ने सरकार को औद्योगिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर आने की उसकी उम्मीद के खिलाफ आगाह किया है क्योंकि खपत की मांग में कमी से उद्योग की क्षमता निष्क्रिय पड़ी हुई है। 
  • Ethiopia
    मारिया गर्थ
    इथियोपिया 30 साल में सबसे ख़राब सूखे से जूझ रहा है
    22 Feb 2022
    इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 70 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है क्योंकि लगातार तीसरी बार बरसात न होने की वजह से देहाती समुदाय तबाही झेल रहे हैं।
  • Pinarayi Vijayan
    भाषा
    किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन
    22 Feb 2022
    विजयन ने राज्य विधानसभा में कहा, ‘‘केरल विभिन्न क्षेत्रों में कहीं आगे है और राज्य ने जो वृद्धि हासिल की है वह अद्वितीय है। उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक हितों के साथ की गयी अनुचित टिप्पणियों के तौर पर…
  • mathura
    भाषा
    मथुरा में पार्टी विशेष को वोट न देने पर अनुसूचित जाति के लोगों की पिटाई, दस घायल
    22 Feb 2022
    आरोपियों ने रविवार की शाम को यह कहते हुए कुछ लोगों को पीटा कि उनके कहने के बावजूद उनके प्रत्याशी को वोट क्यों नहीं दिया गया। इस घटना में दस लोग घायल हुए हैं जो अनुसूचित जाति के बताए जाते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License