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बिहार में दिखा 'भारत बंद' का असर, महागठबंधन भी उतरा सड़कों पर
वाम दल सीपीआई (एम) सीपीआई (एमएल), सीपीआई, फारवर्ड ब्लाॅक, आरएसपी सहित महागठबंधन के कांग्रेस और राजद ने भी आज के भारत बंद में हिस्सा लिया। महागठबंधन दलों के नेताओं ने कहा कि आज का भारत बंद पूरी तरह से सफल और शांतिपूर्ण रहा।
एम.ओबैद
27 Sep 2021
bihar
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आयोजित किसानों के भारत बंद का असर बिहार में भी देखने को मिला

मोदी सरकार के तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने सहित अन्य मांगों को लेकर किए गए 'भारत बंद' का व्यापक असर बिहार में देखने को मिला। महागठबंधन के दलों ने कहा कि आज का भारत बंद पूरी तरह सफल रहा। संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर बुलाए गए इस बंद का सीपीआई (एम) सहित महागठबंधन के सभी दलों ने समर्थन किया। विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने इस बंद को लेकर बिहार में जगह-जगह पर कार्यक्रमों का आयोजन किया और रैलियां निकालीं।

वाम दल सीपीआई (एम) सीपीआई (एमएल), सीपीआई, फारवर्ड ब्लाॅक, आरएसपी सहित महागठबंधन के कांग्रेस और राजद ने भी आज के भारत बंद में हिस्सा लिया। महागठबंधन दलों के नेताओं ने कहा कि आज का बंद पूरी तरह से सफल और शांतिपूर्ण रहा।

ये भी पढ़ें: चौथे दिन भी बिहार के सफ़ाई कर्मियों की हड़ताल जारी, बढ़ते जा रहे कूड़े के ढेर

पटना में आयोजित किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान संबोधित करते हुए सीपीआई (एम) के प्रदेश सचिव अवधेश कुमार ने कहा कि "केंद्र सरकार की ओर से किसानों पर जो काले कानून थोप दिए गए हैं उनका नतीजा बहुत ही खराब होने वाला है। कृषि, जमीन, उपज सहित सभी कुछ कॉरपोरेट का हाथों में कर दिए जाएंगे। गरीबों को दो रूपये किलो गेंहू और तीन रूपये किलो मिलने वाला चावल बंद कर दिया जाएगा। ये आंदोलन सिर्फ किसानों का नहीं है बल्कि देश की पूरी जनता से जुड़ा हुआ आंदोलन है। केंद्र सरकार जिस तरह सार्वजनिक संपत्तियों को बेच रही है उसका नतीजा है कि महंगाई और बेरोजगारी बढ़ती ही जा रही है। सरकार औने-पौने दामों में सरकारी संपत्तियों को कॉरपोरेट के हाथों बेच रही है। रेलवे बेचा जा रहा है, हवाई अड्डे बेचे जा रहे हैं, बीएसएनएल, एलआईसी बेचा जा रहा है। केंद्र सरकार तानाशाही सांप्रदायिक एजेंडे के साथ बढ़ रही है। बिहार की सरकार ने 19 लाख नौजवानों को रोजगार देने का वादा किया था लेकिन उस पर अभी तक कुछ नहीं हुआ है।"

सीपीआई (एमएल) ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, प्रस्तावित बिजली बिल 2020 वापस लेने, बिहार में कृषि मंडी पुनर्बहाल करने, श्रम कानूनों पर हमला बंद करने, महंगाई, रोजगार, बाढ़ सहित अन्य मांगों को लेकर किसान संगठनों के संयुक्त आह्वान पर, आज भारत बंद का बिहार के ग्रामीण इलाकों में भी व्यापक असर देखने को मिला। किसान समुदाय के साथ-साथ ग्रामीण मजदूर व छात्र-नौजवान बड़ी संख्या में सड़क पर उतर कर मोदी सरकार की तानाशाही का विरोध कर रहे हैं।

सीतामढ़ी में भी केंद्र सरकार के खिलाफ किया गया प्रदर्शन 

बिहार के सीतामढ़ी में भी आज का बंद शांतिपूर्ण और सफल रहा। बिहार यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता मो. शम्स शाहनवाज ने न्यूजक्लिक से फोन पर बात करते हुए कहा कि "सीतामढ़ी जिला युवा कांग्रेस ने भारत बंद में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। किसानों के अधिकारों की इस लड़ाई में कांग्रेस पार्टी मजबूती से खड़ी है, उसी कड़ी को मजबूत करते हुए ललित आश्रम स्थित कांग्रेस के मुख्यालय से निकल कर मेहसौल चौक के पास आकर हम लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से जाम किया। यहां पर करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। इस दौरान सड़कें जाम रहीं लेकिन इमर्जेंसी सेवाओं जैसे एंबुलेंस और मरीजों और आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले वाहनों नहीं रोका गया।

उन्होंने आगे कहा ‘’महागठबंधन के सभी दलों ने एक साथ मिलकर पूरे शहर में जुलूस निकाला और प्रदर्शन किया। लोगों से अपील की कि वे अपनी दुकानें बंद रखें। शहर की लगभग सभी दुकानें बंद रही हैं। हर वर्ग के लोगों ने हमारा समर्थन किया है। लोगों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखीं। शहर के रिक्शा चालकों, वाहन चालकों समेत हर वर्ग के लोगों ने इस बंद में सहयोग किया है। किसी भी तरीके कोई विवाद नहीं हुआ है। इस बंद का मकसद सिर्फ यही है कि जो तीन कृषि कानून हैं उनके खिलाफ देश के अंदर गुस्सा है जिसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानकर भी नजरअंदाज कर रहे हैं और अपने पूंजीपति साथी अडानी-अंबानी को मदद करने के लिए देश के किसानों की जमीन का सौदा करना चाहते हैं। इसी के खिलाफ लोगों में आक्रोश है। 

 

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मो. शम्स शाहनवाज ने आगे कहा ‘’आज के प्रदर्शन का एक संदेश ये भी है कि अगर आप देश के किसानों की बात नहीं सुनेंगे तो आने वाला समय अपके लिए बहुत मुश्किल होगा। मेहसौल चौक, कर्गिल चौक, गांधी चौक, जानकी स्थान, पासवान चौक से लेकर पूरे शहर के अंदर में तमाम चौक पर कांग्रेस के भी कार्यकर्ताओं ने और अन्य महागठबंधन दलों के कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया है। लोगों ने इस बंद में पूरी तरह से सहयोग किया है। हमलोगों ने सभी दुकानदारों से दोपहर तक दुकान बंद रखने की अपील की थी इसलिए लोगों ने सहयोग करते हुए एक बजे तक अपनी अपनी दुकानें बंद रखी हैं।"

मुजफ्फरपुर में भारत बंद का असर देखने को मिला 

मुजफ्फरपुर सीपीआई (एम) के जिला सचिव अब्दुल गफ्फार ने कहा कि "हम लोग काफी पहले से ही शांतिपूर्ण बंद की अपील जनता से कर रहे थे। इस बंद में लोगों की ओर से काफी सहयोग भी मिला है। हम लोग खुद्दी राम बोस स्मारक से निकले और शहर के सभी चौराहे पर घूमते हुए फिर खुद्दी राम बोस स्मारक के पास आकर रैली समाप्त की। हम लोगों ने शांतिपूर्वक बंद कराया है। मुजफ्फरपुर से होकर गुजरने वाले सभी एनएच (नेशनल हाइवे) को हमारे साथी कार्यकर्ताओं ने बंद कराया है। तुर्की ओवरब्रीज के पास एनएच बंद कराया गया, मोतिहारी मार्ग को भी बंद कराया गया। इसमें एक बात खास है कि इस दौरान आपातकालीन सेवाओं जैसे एंबुलेंस, मरीजों के ले जाने वाले वाहन, आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले वाहनों को बाधित नहीं किया गया। हमने अपने साथियों को आपातकालीन सेवाओं को न रोकने के संबंध में पहले से बता दिया था। आज पूरी तरह बंद का व्यापक असर दिखाई दिया। सभी एनएच को करीब दो घंटे से ऊपर तक जाम किया गया। दो-तीन घंटे के बाद सभी मार्ग को खोल दिया गया।"

हाजीपुर में वामदलों ने निकाला मार्च 

उधर हाजीपुर में भी इस बंद का व्यापक असर देखने को मिला। वैशाली जिला का मुख्यालय हाजीपुर पूरी तरह बंद रहा। शहर के व्यापारियों, ठेला चालक, रिक्शा चालक, फुटकर दुकानदारों सहित आम जनता ने इस बंद का पूर्ण समर्थन किया। स्टेशन परिसर से सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता झंडा और बैनर के साथ सिनेमा रोड, कचहरी रोड सहित अन्य मार्गों पर उपरोक्त मांगों से संबंधित नारे लगाते हुए रैलियां निकालीं, इस दौरान वाहन चालकों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों से बंद करने की अपील करते हुए आगे बढ़ते रहे। प्रदर्शन गांधी चौक पर पहुंचकर सभा के रूप में तब्दील हो गया। 

इस सभा को सीपीआई के जिला सचिव अमित गिरी, सीपीएम के जिला सचिव राज नारायण सिंह, सीपीआई माले के जिला सचिव योगेंद्र राय, राष्ट्रीय लोक दल के शैलेंद्र यादव, एसयूसीआई कम्युनिस्ट के नवल किशोर प्रसाद, कांग्रेस के मुकेश रंजन, मनरेगा मजदूर सभा के जितेंद्र पासवान, इंकलाबी नौजवान सभा के सुरेंद्र पासवान, दीपक कुमार, किसान सभा के नन्हे आलम, खेत मजदूर सभा के रामकिशुन माझी, केदार चौधरी आदि ने संबोधित किया और भारत बंद को पूरी तरह सफल बताया। बंद के दौरान हाजीपुर के रामचौरा महारानी चौक पर घंटों जाम किया गया। गांधी सेतु के पास गर्दनया चौक पर जाम किया गया और एनएच 22 के इमादपुर चौक के पास भी मार्ग को बाधित किया गया।

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सुबह से ही माले व महागठबंधन के अन्य दल सड़क पर उतर आए थे। माले कार्यकर्ताओं ने लगभग सभी जिला मुख्यालयों पर मार्च आयोजित किया और आम लोगों से बंद को व्यापक समर्थन देने की अपील की।

जहानाबाद में भी पटना-गया पैसेंजर के परिचालन को ठप्प कर दिया गया, जिससे पटना-गया रेल खंड पर ट्रेन का परिचालन पूरी तरह बाधित हो गया। बेगूसराय में माले कार्यकर्ताओं ने सुबह 7 बजे ही एनएच-31 पर जाम लगा दिया और यातायात व्यवस्था को ठप्प कर दिया।

उधर आरा में एनएच-30 को बस पड़ाव के पास सुबह 7 बजे से ही सैंकड़ों किसान-मजदूरों व छात्र-नौजवानों ने जाम कर दिया। इसका नेतृत्व तरारी विधायक व बिहार के किसान नेता सुदामा प्रसाद, राजू यादव, अगिआंव विधायक मनोज मंजिल ने किया। 

वहीं कोइलवर में आरा-पटना मुख्य मार्ग को गीधा में जाम किया गया। सहार में आरा-अरवल पुल भी सुबह 7 बजे से बंद कर दिया गया। भोजपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में बंद का व्यापक असर है और लगभग सभी मुख्य मार्गों पर परिचालन बाधित रहा।

जहानाबाद में ट्रेन जाम के बाद माले व महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने पटना-गया सड़क मार्ग पर मार्च किया और तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग उठाई। मुजफ्फरपुर में माले कार्यकर्ताओं ने बंदरा में बड़गांव के पास चक्का जाम किया। जीरो माइल चौक को भी जाम किया गया। मुजफ्फरपुर में माले, खेग्रामस व किसान महासभा के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मार्गों पर जुलूस निकाला। गायघाट-बेनीबाद में एनएच-57 पर जाम लगा दिया गया, जिसका नेतृत्व किसान महासभा के नेता जितेन्द्र यादव ने किया।

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वहीं सहरसा में भारत बंद के दौरान शंकर चैक पर माले जिला सचिव ललन यादव के नेतृत्व में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप्प रहा। गया जिला के टिकारी व गया शहर में बंद का असर दिखा। गया के केजी रोड पर वाम दलों ने संयुक्त रूप से मार्च निकाला और दुकानदारों से बंद को समर्थन देने की अपील की। अरवल में माले विधायक महानंद सिंह के नेतृत्व में वाम दलों ने पटना-औरंगाबाद और अरवल-जहानाबाद मार्ग पर मार्च निकाला तथा भगत सिंह चैक पर सभा आयोजित की।

पूर्णिया, वैशाली के बिदुपुर, नालंदा के विभिन्न प्रखंडों में भी बंद के समर्थन जुलूस निकाला गया। दरभंगा के लहेरियासराय में माले, किसान महासभा व ऐक्टू नेताओं के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया और सभा आयोजित की गई। दरभंगा स्टेशन रोड जाम करते हुए माले व किसान महासभा के नेताओं ने मार्च निकाला। भागलपुर में एनएच-80 को जाम किया गया और फिर स्टेशन चैक से जुलूस निकला गया।

बक्सर के डुमरांव में माले कार्यालय से जुलूस निकला गया और एनएच-120, नगर परिषद कार्यालय, राजगढ़ होते हुए नया थाना पहुंचा और 120-एनएच को जाम कर दिया गया। ब्रह्मपुर, सोनवर्षा, नवानगर और बक्सर में भी जुलूस निकाला गया। एनएच 84 को ब्रह्मपुर में जाम करके सभा आयोजित की गई।

उधर फुलवारी में माले विधायक गोपाल रविदास के नेतृत्व में महागठबंधन का विशाल मार्च निकला गया। सभी दुकानदारों से मोदी सरकार की तानाशाही के खिलाफ आज के भारत बंद को समर्थन देने की अपील की। पटना जिले के पालीगंज, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, दुल्हिनबाजार, बिहटा में भी बंद का व्यापक असर दिखा। सिवान में बंद के दौरान लगभग 400 लोग सड़क पर उतरे। 9 बजे से लेकर 12 बजे तक गोपालगंज मोड़ को जाम कर दिया गया। फिर शहर में मार्च निकाला गया और अंबेडकर पार्क में सभा की गई। इस कार्यक्रम का नेतृत्व माले विधायक सत्यदेव राम व अमरजीत कुशवाहा ने किया। गोपालगंज में वाम कार्यकर्ताओं ने शहर में मार्च किया और अंबेडकर चैक को जाम कर दिया। वहीं पश्चिम चंपारण में बगहा, मैनाटांड़, नरकटियागंज, बेतिया में बंद का व्यापक असर रहा। सुबह से ही माले कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर मार्च निकाला। मधुबनी ब्लाॅक में माले समर्थकों ने ब्लाॅक परिसर को पूरी तरह से बंद करा दिया।

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