NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली हिंसा की भेंट चढ़े गड़िया लोहारों की कहानी
दिल्ली हिंसा में शिवविहार नाले के पास स्थिति गड़िया लोहारों की झुग्गी बस्ती को भी जला दिया गया है। दंगों के दौरान किसी तरह जान बचाकर भागे घुमंतू जाति के इन लोगों के पास अब मुआवजे के लिए जरूरी कागजात भी नहीं है।
मुकुंद झा, सोनाली
07 Mar 2020
गड़िया लोहार

हाल ही में हिंदू मुस्लिम विरोधी नफरत के कारण दिल्ली का उत्तरी पूर्वी इलाका मारपीट, हत्याओं और सांप्रदायिकता के नफरत भरे नारों की जगह बन गया था। इस दौरान हुए दंगों में कई लोगों और परिवारों की जिंदगी भर की कमाई जलकर खाक हो गई। इसमें सबसे ज्यादा उनका नुकसान हुआ जो सड़क किनारे जीवन यापन करके मुश्किल से दो वक्त की रोटी कमाते हैं।

ऐसे ही उत्तरी पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद से शिवविहार की तरफ जाने वाले रास्ते के तिराहे पर गाड़िया लोहार की बस्ती है। ये लोग गंदे नाले के किनारे अपनी झुग्गियां बनाकर रहते थे। वहीं पर लोहों को अपने हाथों से पीटकर औजार बनाते थे। इन्हीं औजारों को बेचकर किसी तरह से अपना गुजारा करते थे लेकिन 24 फरवरी को ये लोग दंगे की चपेट में आ गए। दंगाइयों ने इनकी झुग्गियों में आग लगा दी और इनके सभी औजार, घर के समान और जमा पूंजी लूट ले गए।

अभी स्थिति यह है कि उनके पास बर्तन नहीं है कि वे सामाजिक संगठनों द्वारा दिए जा रहे राशन से खाना पका सकें। इन कई परिवारों को मिलाकर एक बर्तन है जिसमें ये लोग केवल चाय बना पाते हैं। इसके अलावा कोई अगर पका हुआ खाना देता है तो खा लेते हैं।
 गड़िया लोहार

न्यूज़क्लिक से बातचीत में गड़िया लोहारों की बस्ती में रहने वाले राजकुमार कहते हैं, 'हम शिव विहार तिराहे के नाले पर बीते 20 साल से रह रहे हैं। इस दौरान जो भी कमाया वह सब इस हिंसा की आग में जल चुका है। अब हम लोगों के सिर पर रहने को छत भी नहीं बची है। यहा तक की बारिश में भी खुले आसमान के नीचे रहने को मज़बूर हैं।'

हालांकि यह पूछे जाने पर की आप लोग किसी राहत शिविर में क्यों नहीं जाते हैं। इस पर बस्ती वालों का कहना था कि हम न हिंदू शिविर में जाएंगे और न ही मुस्लिम शिविर में जाएंगे। हमने अपनी पूरी जिंदगी इन दोनों समुदायों के बीच में यही बिताई है। ऐसे में हमारी सरकार से गुजारिश है कि बस हमारी यही मदद करें।

बस्ती की रहने वाली अनारकली बताती हैं, 'इस दंगे में हमारे घर के बर्तन से लेकर बिस्तर तक सब कुछ या तो लूट लिया गया या फिर जला दिया गया है। इन सभी घरों में मिलाकर 30 से अधिक खाट थी। अब केवल एक या दो बची है। इसके अलावा सब जल गई हैं। दंगे में हम न तो हिन्दू की तरफ थे और न मुस्लिम की तरफ। हम तो मज़दूर हैं, मज़दूरी करते हैं। हम औजार हिंदू और मुसलमान दोनों के लिए बनाते हैं।'

इस पूरे हिंसा पर वो कहती है कि इन दंगों में न हिंदू मरा है और न ही मुसलमान मरा है। मरे तो सिर्फ मजदूर हैं।    

अनारकली आगे बताती हैं, 'हम लोगों के पास बैंक खाता नहीं है। इसलिए जो कुछ हम अपनी मेहनत की कमाई में से बचाते थे सब घर में ही रखते थे,सब कुछ लूट लिया गया है।' उनके साथ खड़ी अन्य महिलाओं ने भी दावा किया कि उनके सोने के ज़ेवर जो उन्होंने बुरे वक्त के लिए रखे थे सब दंगाई लूटकर ले गए है।  

रजनी जिनका शरीर का एक हिस्सा पूरी तरह से निष्क्रिय है वो बताती है कि हम लोग किसी तरह से अपने बच्चों को लेकर अपनी जान बचाकर भागे। हम मेहनत करके खाने वाले लोग हैं लेकिन आज हमें एक समय के खाने के लिए दूसरों का मुंह ताकना पड़ रहा है।'

रजनी कहती हैं कि हमें सरकार से बड़ी राशि की मांग नहीं है। बस सरकार हमारी झोपड़ियां हमें वापस कर दें और औजार लौटा दें। हम उसी से अपना जीवन यापन कर लेंगे।  

आपको बता दें कि गड़िया लोहार राजस्थान की घूमतूं जाति है। पिछले कई सालों से कुछ परिवार शिव विहार के गंदे नाले के पास झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। हालांकि शिव विहार में जहाँ यह रह रहे थे, वहां भी दंगे से पहले भी उनकी स्थिति कोई अच्छी नहीं थी।

वहां रहने वाले लोगों ने बताया कि उन झोपड़ियों में बिजली, पानी की सुविधा नहीं थी। इसमें से अधिकतर के बच्चे भी स्कूल नहीं जाते थे। आपको याद होगा कि 2014 में मोदी सरकार और 2015 की दिल्ली सरकार ने भी अपने चुनाव में वादा किया था, जहाँ झुग्गी वही मकान लेकिन उनकी सत्ता का समय पूरा हो गया, यहां तक कि ये दोनों सरकारें दोबारा भी चुनकर आ गई लेकिन ये अब भी सड़क किनारे झुग्गी में रह रहे थे।

अब भी मुआवजे को लेकर मजदूरों का कहना है कि सरकार उन्हें क्या देगी। एक तो उनके पास ज्यादा कागजात नहीं है और जो थे भी वो आग में जल गए हैं। सरकार मुआवजे को लेकर बैंक का डिटेल और आधार कार्ड मांग रही है। ऐसे में उन्हें मुआवजा कहा से मिलेगा। गौरतलब है कि सरकार ने वैसे सभी क्षेत्रों के एसडीएम को यह जिम्मेदारी दी है कि जिनके कागज़ात पूरे नहीं है उसे पूरा करने और अगर बैंक खाता नहीं है तो उसे खोलने में उनकी मदद करें। हालांकि अभी तक गड़िया लोहारों के पास इस तरह की पेशकश लेकर कोई नहीं आया है। 

Delhi Violence
Delhi riots
communal violence
Communal riots
Shiv Vihar
slums
Religion Politics
गड़िया लोहार

Related Stories

कानपुर हिंसा: दोषियों पर गैंगस्टर के तहत मुकदमे का आदेश... नूपुर शर्मा पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं!

मध्य प्रदेश : खरगोन हिंसा के एक महीने बाद नीमच में दो समुदायों के बीच टकराव

रुड़की : दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवार ने घर के बाहर लिखा 'यह मकान बिकाऊ है', पुलिस-प्रशासन ने मिटाया

जोधपुर में कर्फ्यू जारी, उपद्रव के आरोप में 97 गिरफ़्तार

उमर खालिद पर क्यों आग बबूला हो रही है अदालत?

दिल्ली दंगा : अदालत ने ख़ालिद की ज़मानत पर सुनवाई टाली, इमाम की याचिका पर पुलिस का रुख़ पूछा

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

बिना अनुमति जुलूस और भड़काऊ नारों से भड़का दंगा

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान


बाकी खबरें

  • बिहारः कोरोना टीके से मौत का आरोप लगाकर चिकित्सा पदाधिकारी को बनाया बंधक
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः कोरोना टीके से मौत का आरोप लगाकर चिकित्सा पदाधिकारी को बनाया बंधक
    15 Dec 2021
    कोरोना टीके से मौत का आरोप लगाते हुए कटिहार में वैक्सीनेशन महाअभियान के तहत टीकाकरण के लिए मनसाही के छोटी बथना गांव गए चिकित्सा पदाधिकारी को ग्रामीणों ने दो घंटे तक बंधक बनाए रखा।
  • kisan@378
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान आंदोलन : पूरे 378 दिनों का ब्यौरा
    15 Dec 2021
    ‘378’... ये महज़ एक संख्या नहीं है, बल्कि वो दिन और राते हैं, जो हमारे देश के अन्नदाताओं ने दिल्ली की सड़कों पर गुज़ारी हैं, उसके बाद उन्हें एक ऐतिहासिक जीत मिली है।
  • Asha
    सरोजिनी बिष्ट
    एक बड़े आंदोलन की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशा बहनें, लखनऊ में हुआ हजारों का जुटान
    15 Dec 2021
    13 दिसंबर को "उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन" (सम्बद्ध एक्टू) के बैनर तले विभिन्न जिलों से आईं हजारों आशा बहनों ने लखनऊ के इको गार्डेन में हुंकार भरी।
  • Uttrakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: गढ़वाल मंडल विकास निगम को राज्य सरकार से मदद की आस
    15 Dec 2021
    “गढ़वाल मंडल विकास निगम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड राज्य में पर्यटन की सम्भावनाएँ तलाशना, रोजगार के अवसर तलाशना और पलायन को रोकना है ना कि मुनाफा कमाना”
  • अमेरिका में नागरिक शिक्षा क़ानूनों से जुड़े सुधार को हम भारतीय कैसे देखें?
    शिरीष खरे
    अमेरिका में नागरिक शिक्षा क़ानूनों से जुड़े सुधार को हम भारतीय कैसे देखें?
    15 Dec 2021
    "यह सुनिश्चित करना अति महत्त्वपूर्ण है कि हम अपने बच्चों को पढ़ाएं कि वे कैसे ज़िम्मेदार नागरिक बन सकें।" अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के गवर्नर रॉन डेसेंटिस ने पिछले दिनों वहां के एक मिडिल स्कूल में यह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License