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शोर और अंधेरे से डरने वाला वायरस: कोरोना
कोरोना वायरस के शांतिप्रिय होने के अलावा मोदी जी के हालिया अनुसंधान से यह भी पता चला है कि यह वायरस प्रकाश के बिना जी नहीं पाता है। अंधेरे में यह दीवारों पर सर पटक पटक कर मर जाता है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
05 Apr 2020
coronavirus
Image courtesy: Arre

कोरोना वायरस का प्रकोप पूरे विश्व में फैल रहा है। देश में भी फैल रहा है। जिस तरह से सारे विश्व में वैज्ञानिक इस वायरस के इलाज और बचाव के लिए तरह तरह के प्रयोग कर रहे हैं उसी तरह से हमारे देश में भी वैज्ञानिक इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। 

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लेकिन हमारे देश में विज्ञान की एक अलग धारा भी हमेशा से ही प्रचलित रही है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी बताती है कि हजारों साल पहले लिखे वेद-पुराणों में ही इस महामारी की भविष्यवाणी कर दी गई थी। अब यह हजारों साल पहले की गई भविष्यवाणी समय रहते ही पता चल जाती तो हम इस महामारी को टाल भले ही न पाते पर समय रहते तैयारी तो पूरी कर लेते। ये वेदों-पुराणों की भविष्यवाणियां भी शायद नास्त्रेदमस (Nostradamus) की भविष्यवाणियों की तरह से ही हैं, घटना होने के बाद ही पता चलता है कि इस घटना की भविष्यवाणी तो पहले से ही कर दी गई थी।

बात तो हम अपने यहां मौजूद विज्ञान की कर रहे थे। जैसे हमारे यहां वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है, ठीक उसी प्रकार छद्म विज्ञान भी है। जैसे वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति हमें बताती है कि कोरोना से बचाव के लिए गौमूत्र-गोबर, हल्दी, काली मिर्च, फिटकरी से लेकर शराब और गर्म पानी का सेवन करना चाहिये, उसी तरह छद्म विज्ञान ने भी कोरोना से बचने के लिए तरह तरह के अनुसंधान किये हैं।

हमारे देश में पहली खोज यह हुई थी कि कोरोना वायरस कोविड-19 सुगंध प्रेमी है अतः गौमूत्र और गोबर से भागता है। उससे आगे खोज की गई कि ये जो कोविड-19 वायरस है, यह शांति प्रिय भी है। यह पाया गया है कि जिन देशों में यह अधिक फैला है वे सारे देश ऐसे हैं कि वहां आप गाड़ी में सवार हो मीलों दूर निकल जायें, आपको हॉर्न तक न सुनाई दे। अब इससे तो यह ही समझ में आता है कि यह कोरोना वायरस शोर से घबराता है।

अब क्योंकि हमारे वैज्ञानिक अनुसंधान से सिद्ध हो गया है कि कोरोना वायरस शोर मचाने से दूर भागता है अतः हमारे प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर 22 मार्च को "जनता कर्फ्यू" के बीच में शाम को पांच बजे लोगों से थाली, घंटे, ताली, पतीले और न जाने क्या क्या बजा कर शोर मचवाया गया। और शोर भी सामूहिक। उस सामूहिक शोर से कोरोना वायरस निश्चित रूप से घबरा गया होगा। संभव है, अरबों-खरबों वायरसों ने सामूहिक आत्महत्या भी कर ली हो।

पर अब देश में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, सभी पूजा स्थल बंद हो चुके हैं। उनसे निकलने वाली घंटियों और घंटों की आवाजें, लाउडस्पीकरों पर आरतियों और अजान के स्वर तथा गुरु ग्रंथ साहिब जी का पाठ, सभी धीमे स्वर में सुनाई दे रहे हैं। देश में सन्नाटा छाया हुआ है। इसीलिए कोरोना वायरस का प्रकोप दिन दूना, रात चौगुना बढ़ रहा है। हमें तो शोर को बढा़वा दे कर कोरोना के बढा़व को रोकना चाहिए परलॉकडाउन में उलटा ही हो रहा है। चारों ओर शांति छाई हुई है और कोरोना बढ़ता ही जा रहा है।

कोरोना वायरस के शांतिप्रिय होने के अलावा हालिया अनुसंधान से यह भी पता चला है कि यह वायरस प्रकाश के बिना जी नहीं पाता है। इसको जीवन के लिए बिजली की रोशनी अत्यंत आवश्यक है। अंधेरे में यह दीवारों पर सर पटक पटक कर मर जाता है। इसके अलावा प्रकाश को लेकर इसकी एक और प्रवृत्ति का पता चला है। यह जुगनुओं और पतंगों की तरह दीये या मोमबत्ती को लौ की ओर खिंचा आता है और लौ में जल कर अपने प्राण नौछावर कर देता है।

अब क्योंकि यह खोज अभी हाल में ही, शुक्रवार की सुबह ही हुई है, प्रधानमंत्री जी ने आनन फानन में लोगों को संबोधित किया और कोरोना वायरस से लडा़ई का यह नया औजार लोगों को थमाया। तो देशवासियों, पांच अप्रैल को, रविवार को, रात ठीक नौ बजे, ठीक नौ मिनट के लिए अपनी सारी लाइटें ऑफ करनी हैं। लाइटें ऑफ कर घर के दरवाजे या बॉलकनी में दीया या मोमबत्ती जलाने हैं। जो अभागे इस लॉकडाउन में दिये या मोमबत्ती का प्रबंध न कर पायें, वे टार्च या मोबाइल की रोशनी से काम चला सकते हैं।

यह काम सबको करना है और ज़रूर करना है। यह कोई जादू टोटका नहीं है। यह एक नई नई हुई खोज है। प्रधानमंत्री जी ने की है। सारी पुलिस देखेगी कि आप निर्देश का पालन कर देश के द्वारा कोरोना वायरस को भगाने के प्रयास में भागीदार बन रहे हैं या नहीं। जो भी व्यक्ति इसका पालन नहीं करेगा, वह देशद्रोही माना जायेगा और शासन के प्रकोप का भागी होगा। उत्तर प्रदेश में उस पर योगी जी रासुका भी लगा सकते हैं।

अंत में: प्रधानमंत्री चाहे जो भी कहें, हमें अंधविश्वासों में नहीं फंसना है। कोरोना से बचाव के लिए ज़रूरी है

1. खांसी और बुखार के मरीज को अलग रखना।

2. आपस में पर्याप्त (कम से कम 1 मीटर) दूरी बनाये रखना।

3. बार बार हाथों को साबुन और पानी से धोना या सैनेटाईज़ करना।

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Narendra modi
Corona Virus
COVID-19
India Lockdown
Light off
9 minutes Drama

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