NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र : कोरोना से जंग में शराब का योगदान!
शराब पी कर आप लीवर की बीमारी से भले ही मर जायें पर आप लोगों को कोरोना से बचा ले जायेंगे। कोरोना के इस काल में शराब पीने वालों का यह योगदान अमिट अक्षरों में लिखा जायेगा।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
10 May 2020
शराब का योगदान
Image courtesy: Head Topics

जब से कोविड-19, या आम भाषा में कहें कि कोरोना वायरस फैला है, इसका संबंध अल्कोहल यानी शराब से तब से ही है। शुरू से ही कोविड-19 के वायरस को मारने के लिए बार बार हाथ धोने के अलावा अल्कोहल आधारित सैनेटाइजर के प्रयोग का सुझाव दिया गया। बताया गया कि ऐसे सैनेटाईजर के प्रयोग से, जिसमें कम से कम सत्तर प्रतिशत अल्कोहल हो, इस वायरस का खात्मा हो सकता है। लॉकडाउन में हाथ धोने के लिए अल्कोहल मिलने लगा पर पीने के लिए मिलना बंद हो गया।

tirchi nazar_1.png

यह शराब इतने काम की चीज है, यह इस काल के मनुष्य को कोरोना की वजह से ही पता ही चला है। नहीं तो आजकल शराब को और उसके पीने वाले को बहुत ही हेय दृष्टि से देखा जाता है। ऐसा नहीं है कि हमेशा से ही ऐसा था। हमारे ऋषियों-मुनियों ने तो हजारों साल पहले ही शराब की महिमा में ग्रंथ भर डाले थे। उस समय शराब की महिमा निराली होती थी। वह देवताओं को ही उपलब्ध होती थी या फिर ऋषियों-मुनियों को, जो इसे पी कर ज्ञान प्राप्त करते थे। उन दिनों शराब का नाम भी अच्छा सा था, सोमरस, सुरा और इस तरह सुरापान अच्छा माना जाता था।

सिर्फ़ ऋषियों-मुनियों ने ही नही, उसके बाद भी शायरों और कवियों ने भी शराब की महिमा बखूबी बखान की है। शराब और इश्क़, कवियों और शायरों के, भक्ति काल से लेकर आधुनिक काल तक प्रिय विषय रहे हैं। गांधी जी के आने तक, शराब ने अपनी गरिमा कायम रखी थी। शराब को जितना नुकसान गांधी जी ने पहुंचाया, शायद ही किसी और ने पहुंचाया हो।

लॉकडाउन एक और दो की सफलता से उत्साहित हो सरकार ने लगे हाथ लॉकडाउन तीन भी लगा दिया है। लॉकडाउन तीन में सभी जिलों को तीन रंगों में बांट दिया गया।  हरा, लाल और नारंगी। हरे ज़िले वे हैं जिनमें पिछले अट्ठाइस दिनों से कोरोना का कोई मरीज नहीं ढूंढ पाये हैं। इन जिलों में लॉकडाउन में काफी छूट दी गयी है। नारंगी ज़िले वे जिनमें प्रशासन को पिछले चौदह दिन से कोई कोरोना संक्रमित मरीज नहीं मिला है। यहां पर भी कुछ छूटों के साथ लॉकडाउन जारी है। लाल ज़िले वे ज़िले हैं जिसमें अभी भी कोरोना के नये मरीज सामने आ रहे हैं। अब लॉकडाउन तीन में खाने पीने की चीजों और दवा के साथ साथ दारू भी मिल रही है। ज़िला किसी भी रंग का हो, लाल परी हर रंग के ज़िले में उपलब्ध है।

कोरोना काल में सरकारों को, चाहे वे भाजपा की हों, कांग्रेस की हों या फिर किसी और दल की, शराब की महत्ता का ज्ञान हो गया है। वे जान चुकी हैं कि यह शराब आज भी ज्ञान प्राप्त करने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण साधन है। आदमी कितना भी अज्ञानी हो, शराब का एक पैग अंदर जाते ही ज्ञानी बन जाता है। दो-तीन पैग अंदर पहुंचे नहीं कि वह पहुंचा हुआ ज्ञानी बन जाता है। कुछ और पैग अंदर गये नहीं कि वह जीनियस बन सभी विषयों पर धुरंधर बोलने लगता है। जैसे ही सरकारों को यह ज्ञान हुआ, सभी राज्यों की सरकारों ने स्कूल कॉलेज भले ही बंद कर रखे हैं, शराब के ठेके खोल दिये हैं। देश में ज्ञान प्राप्ति के लिए पढाई से अधिक शराब की आवश्यकता है।

कोरोना से युद्ध में शराब का रोल सिर्फ अल्कोहल युक्त सैनेटाईजर बनाने तक ही सीमित नहीं है। शराब की बिक्री तो अस्पतालों में पीपीई किट से लेकर वैंटिलेटर तक मुहैया कराने के लिए जरूरी है। गरीबों को खाना खिलाने और मुफ्त राशन बांटने के लिए भी लोगों का शराब पीना जरूरी है। तीन मई को जो हैलीकॉप्टर द्वारा कोरोना वारियर्स पर पुष्प वर्षा की गई, वह चिकित्सा कर्मियों को यही विश्वास दिलाने के लिए की गई थी कि अब चार मई से शराब की बिक्री शुरू कर रहे हैं, आपको किसी चीज की कमी नहीं रहेगी।

तो साहिबानों, कद्रदानों! कोरोना से जंग के लिये अल्कोहल से हाथ सैनेटाईज करना ही जरूरी नहीं है। अल्कोहल का सेवन भी जरूरी है। अल्कोहल नहीं पीयेंगे तो सरकार न तो पीपीई किट खरीद पायेगी और न ही वैंटिलेटर। गरीबों को खाना भी शराब के पैसे से मिल रहा है और मुफ्त राशन भी। शराब पी कर आप लीवर की बीमारी से भले ही मर जायें पर आप लोगों को कोरोना से बचा ले जायेंगे। कोरोना के इस काल में शराब पीने वालों का यह योगदान अमिट अक्षरों में लिखा जायेगा।

तो देश भक्त, मोदी भक्त, अंध भक्त, सारी जनता से अपील है कि कोरोना से युद्ध में योगदान देने के लिए शराब खरीदें। आप जितनी शराब खरीदेंगे, आपका योगदान उतना ही कोरोना के खिलाफ युद्ध में बढ़ेगा। पीएम केयर फंड में योगदान देने से तो आप पीएम जी की केयर के लिए योगदान देंगे। पर शराब बिक्री होने से दिया गया योगदान राज्य सरकारों द्वारा कोरोना के खिलाफ युद्ध में ही काम आयेगा। इसलिए बन्धुओं, आप शराब नहीं पीते हैं तो भी दो चार बोतल खरीद ही डालिये। कोरोना के विरुद्ध युद्ध में आपका योगदान देश भुलाये नहीं भूलेगा।

अंत में

नोट : यह एक व्यंग्यात्मक आलेख है। इन सलाह पर बिल्कुल अमल न करें।

(लेखक पेशे से एक चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Liquor shop open
Liquor shops
Social Distancing
Coronavirus
Lockdown
modi sarkar
Lockdown crisis

Related Stories

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

कटाक्ष: नये साल के लक्षण अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू


बाकी खबरें

  • लेखनाथ पांडे (काठमांडू)
    नेपाल की अर्थव्यवस्था पर बिजली कटौती की मार
    16 May 2022
    नेपाल भारत से आयातित बिजली पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, जहां सालों से बिजली संकटों की बुरी स्थितियों के बीच बिजली उत्पादन का काम चल रहा है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: गिर रहा कोरोना का स्तर लेकिन गंभीर संक्रमण से गुजर चुके लोगों की ज़िंदगी अभी भी सामान्य नहीं
    16 May 2022
    देश में कोरोना के मामलों में एक बार फिर लगातार गिरावट देखी जा रही है। पिछले एक सप्ताह के भीतर कोरोना का दैनिक आंकड़ा 3 हज़ार से भी कम रहा है |
  • सुबोध वर्मा
    कमरतोड़ महंगाई को नियंत्रित करने में नाकाम मोदी सरकार 
    16 May 2022
    गेहूं और आटे के साथ-साथ सब्ज़ियों, खाना पकाने के तेल, दूध और एलपीजी सिलेंडर के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
  • gandhi ji
    न्यूज़क्लिक टीम
    वैष्णव जन: गांधी जी के मनपसंद भजन के मायने
    15 May 2022
    हाल ही में धार्मिक गीत और मंत्र पूजा अर्चना की जगह भड़काऊ माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसी सन्दर्भ में नीलांजन और प्रोफेसर अपूर्वानंद गाँधी जी को प्रिय भजन वैष्णव जन पर चर्चा कर रहे हैं।
  • Gyanvapi
    न्यूज़क्लिक टीम
    ज्ञानवापी विवाद: क्या और क्यों?
    15 May 2022
    जो लोग यह कहते या समझते थे कि अयोध्या का बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद आख़िरी है, वे ग़लत थे। अब ज्ञानवापी विवाद नये सिरे से शुरू कर दिया गया है। और इसके साथ कई नए विवाद इस कड़ी में हैं। ज्ञानवापी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License