NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
हमारा स्वतंत्रता दिवस, उनका स्वतंत्रता दिवस
वे लोग जो देश की आज़ादी की लड़ाई में एक ओर बैठे देख रहे थे वे मजबूर हैं। उन्होंने इसी मजबूरी के कारण ही राम मंदिर के नाम पर किये गए सत्ता प्राप्ति आंदोलन की तुलना स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन से की है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
16 Aug 2020
 स्वतंत्रता दिवस
फोटो साभार : अमर उजाला

आज़ादी के इस पावन पर्व की सभी बंधुओं को बधाई और बहुत बहुत शुभकामनाएं। आज़ादी की इस लड़ाई में माँ भारती के बहुत से वीर सपुत्र-सपुत्रियों ने अँग्रेजों से लोहा लिया था और अपने प्राणों का बलिदान दिया था। पर उस समय कुछ लोग थे जो अँग्रेजों के साथ थे और उनकी चमचागिरी कर रहे थे, उनसे माफ़ी मांग रहे थे, उन्हें भी यही दिन स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व के रूप में मनाना पड़ रहा है। यह उनकी मजबूरी है। इसी मजबूरी के कारण वे लोग विभिन्न तारीखों को नया स्वतंत्रता दिवस और जिस मर्जी आंदोलन को स्वतंत्रता आंदोलन बताते रहते हैं।

tirchi nazar_6.png

सबसे पहले 26 मई की तारीख को नई आज़ादी का दिन घोषित किया गया। वैसे तो जब भी निज़ाम बदलता है, अपने को औरों से अलग और ऊपर ही बताता है पर इस बार बताया गया कि सात सौ साल बाद हिन्दू हृदय सम्राट दिल्ली का राजा बना है, दिल्ली पर हिन्दू राज आया है। तो ऐसे लोगों के लिए पहला स्वतंत्रता दिवस तो 26 मई हुआ न!

इससे पहले भी जब जीएसटी लागू किया था, तब उस दिन को नये स्वतंत्रता दिवस के रूप में बताया था। वह कौन सी तारीख थी, आज किसी को भी याद नहीं है। जो व्यक्ति उस दिन को जानना चाहे, वह गूगल कर सकता है। उस दिन मध्य रात्रि में संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया गया था। ठीक उसी तरह जैसे 14 और 15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि को किया गया था।

मित्रो, जीएसटी लागू करने का दिन वास्तव में ही आज़ादी का दिन था। जीएसटी लागू करने के लिए तब के वित्त मंत्री जी को पूरी आज़ादी दी गई थी। कहा जाता है कि इस शासन काल में ऐसा पहली बार और अंतिम बार हुआ था कि किसी भी मंत्री को किसी भी काम को करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई हो। माना जाता है कि आज भी किसी भी मंत्री को अपना काम करने की पूरी स्वतंत्रता नहीं है। आज कोरोना काल में भी कोविड के बारे में सारी घोषणाएं करने की आज़ादी स्वास्थ्य मंत्री जी को नहीं है। तो मित्रो, आगे से जीएसटी लागू करने के दिन को भी स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व के रूप में मनाया जा सकता है। तिथि आप गूगल कर जान सकते हैं।

उन लोगों द्वारा, जिन लोगों ने 15 अगस्त 1947 में मिली स्वतंत्रता में रत्ती भर भी योगदान नहीं दिया था, भविष्य में आठ नवम्बर को भी स्वतंत्रता दिवस मनाया जा सकता है। वह दिन सबको याद है और आगे भी याद रहेगा। इसी दिन तो हमारे ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया गया था जिससे नई आर्थिक आज़ादी मिली थी। काला धन समाप्त हो गया था। आतंकवाद और नक्सलवाद से मुक्ति मिल गई थी। देश को भ्रष्टाचार से निजात मिल गई थी और रिश्वतखोरी तो ऐसे समाप्त हो गई थी जैसे गुजरे ज़माने की बात हो। और वह किया कैसे गया था। पुराने बदरंग नोट बंद कर नये रंग-बिरंगे नोट जारी किये गए थे। तो वे लोग चाहे तो आठ नवम्बर को भी स्वतंत्रता दिवस मना सकते हैं।

उन लोगों द्वारा स्वतंत्रता दिवस तो उस दिन भी मनाया जा सकता है जिस दिन कानून बना तीन तलाक़ को गैर कानूनी बनाया गया था। तारीख आप गूगल कर लेना। उस दिन देश के हिन्दू पुरुषों को एक ही झटके में खुश कर दिया गया था, और मुसलमान पुरुषों का जेल जाने का इंतजाम। वैसे कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इसमें मुसलमान औरतों की जीत हुई थी। वे अपने ऐसे शौहर को जिसने उन्हें गैर कानूनी ढंग से तलाक़ दिया हो जेल भिजवा सकती हैं। ऐसा हक़ अभी हिन्दू औरतों को नहीं मिला है कि वे अपने ऐसे पति को जिसने उन्हें बिना कानूनी रूप से तलाक़ दिये छोड़ रखा हो, जेल भिजवा सकें। हिन्दू औरतों का क्या है, मुसलमान औरतों को तो हक़ मिल गया न। तो अब वे लोग उस दिन को भी स्वतंत्रता दिवस मना सकते हैं जिस दिन तीन तलाक़ बिल कानून बना।

वे लोग जो देश की आज़ादी की लड़ाई में एक ओर बैठे देख रहे थे वे मजबूर हैं। उन्होंने इसी मजबूरी के कारण ही राम मंदिर के नाम पर किये गए सत्ता प्राप्ति आंदोलन की तुलना स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन से की है। उनकी इस तुलना के बाद कालांतर में वे लोग पांच अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मना सकेंगे और भगवान रामचंद्र जी के बनने वाले भव्य मंदिर पर भगवा ध्वज फहरा कर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दे सकेंगें। वैसे भी उनके पास पांच अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने के और भी कारण हैं।

जिनके पास पहले किया धरा कुछ नहीं है, वे अब जो भी कुछ करते हैं, वह एतिहासिक होता है, नया स्वतंत्रता संग्राम होता है, नया स्वतंत्रता दिवस होता है। हमें तो हमारा पुराना स्वतंत्रता संग्राम ही मुबारक है, पुराना स्वतंत्रता दिवस ही मुबारक है। बस अगर आपके बस में है तो ग़रीबी से आज़ादी दिला दीजिये। बेचारी, बेकारी और बेरोज़गारी से आज़ादी दिला दीजिये। चारों ओर फैल रही नफ़रत से आज़ादी दिला दीजिये।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
independence day
74th Independence Day

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!

तिरछी नज़र: विश्व गुरु को हंसना-हंसाना नहीं चाहिए


बाकी खबरें

  • kerala nun case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    केरल: चर्चित नन रेप केस में आरोपी बिशप बरी, फ़ैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगी नन
    15 Jan 2022
    एसआईटी का नेतृत्व कर रहे आईपीएस अधिकारी एस. हरिशंकर ने कहा कि ये फैसला स्वीकार्य नहीं है और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में यूपी नंबर वन, है या नहीं?
    15 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामलों में कमी नहीं बल्कि वृद्धि हुई है। रेप के मामलों में कुछ कमी दर्ज की गई है। लेकिन महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश अब भी देश में…
  • yogi ji
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: मास्टर स्ट्रोक ही मास्टर स्ट्रोक
    15 Jan 2022
    फिर भी यह न तो भगदड़ का मामला है और न तोड़-फोड़ के ग्लोबल षडयंत्र का। यह तो योगी जी के मास्टर स्ट्रोक का मामला है। हमें पता है कि भक्तों को आसानी से यह हजम नहीं होगा कि योगी भी मास्टरस्ट्रोक लगा सकते…
  • Bharti with Digvijay Singh
    काशिफ काकवी
    एमपी में एससी/एसटी के ख़िलाफ़ अत्याचार के 37,000 से अधिक मामले लंबित, दोष-सिद्धि की दर केवल 36 फ़ीसदी
    15 Jan 2022
    मध्य प्रदेश ने 2020 में एससी/एसटी के ख़िलाफ़ अत्याचार के 9,574 मामले दर्ज किए। लेकिन 2020 के केवल 95 मामले और इसके पिछले वर्ष में 594 मामले ही अदालतों में किसी नतीजे पर पहुंच सके थे। एनसीआरबी के…
  • kisan
    लाल बहादुर सिंह
    किसानों को आंदोलन और राजनीति दोनों को साधना होगा
    15 Jan 2022
    आज सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की अहम बैठक हो रही है। किसान आंदोलन के स्थगित होने के बाद यह पहली बैठक है। इस बैठक में केंद्र सरकार द्वारा किसानों के साथ किये गए समझौते के क्रियान्वयन की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License