NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: अर्नब सर तो बहुत ही बड़े देशभक्त हैं…
अर्नब सर भी न, दिल के इतने साफ़ हैं कि ये सारे के सारे राज अपने दिल में छुपा कर नहीं रखते हैं, आगे भी बता देते हैं। ठीक ही तो है, जब जिन्होंने छुपाने थे, उन्होंने ही नहीं छुपाये तो अर्नब सर भी क्यों छुपायें।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
24 Jan 2021
cartoon click

अर्नब गोस्वामी सर देश के सबसे बड़े पत्रकार हैं। ऐसा वे स्वयं तो  मानते ही हैं, और अब जब से उनकी वाट्सऐप चैट आउट हुई है तब से हम छोटे लोग भी उन्हें ऐसा ही मानने लगे हैं। और हम ही नहीं, सरकार जी भी यही मानते हैं। तभी तो सरकार जी भी और उनके बड़े बड़े मंत्री-संतरी भी सरकार के सारे के सारे भेद अर्नब सर जी को बता देते हैं। और अर्नब सर भी न, दिल के इतने साफ हैं कि ये सारे के सारे राज अपने दिल में छुपा कर नहीं रखते हैं, आगे भी बता देते हैं। ठीक ही तो है, जब जिन्होंने छुपाने थे, उन्होंने ही नहीं छुपाये तो अर्नब सर भी क्यों छुपायें। उन्होंने भी आगे बता दिये। वैसे भी तो राज फैलाने के लिए ही बताये जाते हैं। राज छुपाने होते तो बताते ही क्यों। 

अर्नब गोस्वामी सर टीवी पत्रकारिता में देश में पहले नम्बर पर हैं। जब से यह बात टीवी रेटिंग निकालने वाली संस्था बार्क ने जब से हमसे मनवाई है तब से हम भी यही मानते हैं। अब धीरे-धीरे अर्नब सर के चीखने चिल्लाने का पूरा ही देश कायल हो गया है। यहाँ तक कि राज्य सभा भी कानून पारित करने के लिए वोटों की गिनती की बजाय चीखने चिल्लाने पर ही निर्भर रहने लगी है। इधर उच्चतम न्यायालय भी अर्नब सर के चीखने चिल्लाने को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' मानने लगा है। 

उच्चतम न्यायालय की बात आई तो याद आया कि उच्चतम न्यायालय ने अर्नब सर जी की जमानत याचिका की सुनवाई पिछले एक साल में दो बार सुनी है। वह भी दोनों बार याचिका डालने के अगले ही दिन। और किसी का केस होता तो तारीख पे तारीख मिलती जाती पर उच्चतम न्यायालय भी अर्नब सर को इतना मानता है कि एक दम ही तारीख दे दी, याचिका दायर करने के अगले ही दिन की। और दोनों ही बार पहली ही तारीख पर जमानत भी दे दी। है न मानने वाली बात! न लंबी बहस और न ही अगली तारीख। वजह दोनों बार वही, अर्नब सर की 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता'। 

वैसे कानून की बारिकियों, पेचीदगियों से तो हम अनभिज्ञ ही हैं। पर न्यायधीश महोदय तो अवश्य ही इन्हें समझते होंगे। पहला केस अपने राष्ट्रीय टीवी चैनल पर एक कार्यक्रम में एक बड़ी महिला नेता को अपशब्द बोलने का था तो दूसरा एक मां-बेटे को आत्महत्या करने के लिए उकसाने का। दोनों में ही न्यायमूर्ति महोदय को अर्नब सर जी की बोलने की आजादी दिखाई दे गई। यहाँ तक कि आत्महत्या के लिए उकसाने वाले केस में भी। 

अर्नब गोस्वामी सर बहुत ही बड़े देशभक्त हैं। उनकी देशभक्ति के आगे किसी की भी देशभक्ति पानी भरती है, भगतसिंह और चंद्रशेखर आजाद की देशभक्ति भी। उनका टीवी चैनल भी देशभक्ति का ध्वजावाहक है, जहां  बड़े से बड़ा देशभक्त भी देशभक्ति पर लैक्चर सुने बिना नहीं जा सकता है। भगतसिंह भी एक बार अर्नब सर के चैनल पर आ जाते तो सर से देशभक्ति सीखे बिना नहीं जा सकते थे। इसी तरह अर्नब सर की वाट्सऐप चैट भी देशभक्ति से भरी हुई है। उनके जैसा देशभक्त ही पुलवामा में चालीस से अधिक जवानों के शहीद होने में भी भलाई ढूंढ सकता है। ऐसा दुर्गम कार्य भगतसिंह या आजाद भी नहीं कर सकते थे। 

अर्नब सर का दिल भी बहुत ही साफ है। जो भी काम करते हैं, मन लगा कर, खूब डूब कर और लगातार महीनों करते रहते हैं। फिर यह भी नहीं सोचते हैं कि सही कर रहे हैं या गलत। अब सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के पीछे पड़े तो महीनों निकाल दिये। अब नशीली दवाओं के पीछे पड़े तो नशे में ही डूब गये। अपने टीवी चैनल के कार्यक्रम में ही लाखों दर्शकों के सामने ही मांगने लगे 'मुझे ड्रग दो, ड्रग दो, ड्रग दो, मुझे ड्रग दो'। फिर भी मात्र वाट्सऐप चैट से पीछे पड़ने वाला नारकोटिक्स ब्यूरो अर्नब सर के पीछे नहीं पड़ा। उसे भी पता है कि अर्नब सर कितने सोर्स वाले और पूरे के पूरे नाटकबाज हैं। 

अर्नब गोस्वामी सर आजकल इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि उनकी बार्क के सीईओ से वाट्सऐप चैट लोगों को पता चल गई है। यह वही बार्क है जिसने अर्नब सर के चैनल को नम्बर एक बनाया है। तो उस चैट में भी अर्नब सर ऐसे डूब गये कि पांच सौ से अधिक पेज भर गए। और अपना दिल भी खोल बैठे। सब कुछ बता बैठे। यह तो बताया ही कि पुलवामा से फायदा होगा, यह भी बता दिया कि बालाकोट की सर्जिकल स्ट्राइक  और धारा  370 हटाने के बारे में भी उन्हें तीन दिन पहले से ही पता था। अर्नब सर जी जैसा साफ दिल कभी कोई देखा है भला?

अब इस मामले में सरकार जी और उनके मंत्री जी भी चुपचाप हैं। 'मौनम स्वीकृति लक्षणम'। ठीक है भई, बता दिया। किसी भी बड़े आदमी ने अर्नब गोस्वामी को बता दिया होगा। तो क्या बड़ी बात हो गई। अभी तो सिर्फ इतना ही पता चला है। अगर नोटबंदी के बारे में भी ऐसा ही कुछ खुलासा हो गया तो। तो भी कौन सा गजब ढा जायेगा। हम तो पहले से ही कह रहे हैं कि वाट्सऐप पर सब सुरक्षित नहीं है। सरकार जी को वाट्सऐप से जल्दी ही बात कर कम से कम अर्नब सर की बाकी सारी वाट्सऐप चैट सीक्रेट करवा देनी चाहिए। इस कांड में सारी की सारी गलती वाट्सऐप वालों की ही है। 

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
arnab goswami
Arnab Whatsapp Chat

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!

तिरछी नज़र: विश्व गुरु को हंसना-हंसाना नहीं चाहिए


बाकी खबरें

  • union budget
    नेसार अहमद
    केंद्रीय बजट: SDG लक्ष्यों में पिछड़ने के बावजूद वंचित समुदायों के लिए आवंटन में कोई वृद्धि नहीं
    03 Feb 2022
    कुछ क्षेत्रों में मामूली वृद्धि को छोड़कर, कुल मिलाकर, बजट में वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित योजनाओं और व्यापक (अम्ब्रेला) कार्यक्रमों के लिए आवंटन में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं की गई है…
  • NTPC
    ओंकार सिंह
    छात्रों-युवाओं का आक्रोश : पिछले तीन दशक के छलावे-भुलावे का उबाल
    03 Feb 2022
    इस साल के बजट में बेरोजगारी के हल के लिए किसी तरह की ठोस योजना नहीं।
  • Julian Assange
    अनीश आर एम
    ज़ोर पकड़ती  रिहाई की मांग के बीच जूलियन असांज नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित
    03 Feb 2022
    संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रत्यर्पण के ख़िलाफ़ लड़ते हुए एक ब्रिटिश जेल में 1,000 से ज़्यादा दिन बिता चुके विकिलीक्स के संस्थापक को तीसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।
  • Aaj Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    बजट का संदेश: सरकार को जनता की तनिक परवाह नहीं!
    03 Feb 2022
    केंद्रीय बजट की आर्थिकी पर काफी चर्चा हो रही है. लेकिन इस बजट की हैरतंगेज राजनीति अपने ढंग की अनोखी और अविश्वसनीय है! बजट देश की आम जनता के हितों को नज़रंदाज़ करता है. किसी लोकतंत्र में ऐसा कम देखा…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1.72 लाख से ज़्यादा नए मामले, 1,008 मरीज़ों की मौत
    03 Feb 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 18 लाख 3 हज़ार 318 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License