NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: ...गर पुलिस भी प्राइवेट हो जाये
आज-कल देश में इतनी ईमानदार सरकार है पर उसे अपने खर्च तक चलाने के लिए देश बेचना पड़ रहा है। सच ही है कि ईश्वर की लीला अपरम्पार है। भ्रष्ट सरकारें देश बना रही थीं और महा ईमानदार, देश की रखवाले चौकीदार की सरकार है कि देश को बेचे जा रही है। 
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
28 Mar 2021
तिरछी नज़र: ...गर पुलिस भी प्राइवेट हो जाये
सिर्फ़ प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए। फाइल। कार्टून साभार: नवभारत टाइम्स  

निजीकरण का दौर है और सरकार जी को निजीकरण का दौरा पड़ा हुआ है। सरकारी चीजों को निजी कंपनियों को बेचा जा रहा है। अभी भारतीय जीवन बीमा निगम और अन्य बीमा कंपनियों को, बैंकों को बेचने का काम शुरू होने वाला है। हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों को बेचने का काम तो पहले से ही हो रहा है। जब धीरे-धीरे सब कुछ बिक जायेगा, सरकार जी के पास बेचने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा, तब भी तो सरकार जी को अपने खर्च चलाने के लिए कुछ न कुछ तो बेचना ही पड़ेगा। आखिर सपूत इसी तरह तो अपने घर के खर्च चलाते हैं। 

एक दिन ऐसा जरूर आयेगा जब सरकार जी के पास अपना खर्च चलाने के लिए बेचने लायक कुछ भी नहीं बचेगा। तब तक हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन ही नहीं, बीमा कंपनियां और बैंक भी बिक चुके होंगे। तब तक सारी की सारी सरकारी कंपनियां और खेल के मैदान ही नहीं, इसरो और आण्विक संस्थान भी बिक चुके होंगे। हमारे उपग्रह भी निजी कंपनियां ही उड़ा रही होंगी और एटम बम के विस्फोट भी निजी कंपनियां ही कर रही होंगी। अखबारों में खबरें प्रकाशित होंगी कि कल अंबानी यान आसमान में सफलता पूर्वक उड़ गया और आज पोखरन में अडानी का एटम बम फुस्स हो गया।

जब सब कुछ बिक जायेगा तब भी सरकार जी को सरकार चलाने के लिए पैसे की जरूरत तो पड़ेगी ही। पर वह पैसा आयेगा कहाँ से? हे प्रभु! ये तेरी कैसी माया है। बेईमान, भ्रष्ट लोगों की सरकार तो देश भी चला रही थी और देश में नई नई चीजें भी बना रही थी, नये संसाधन लगा रही थी, नये संस्थान खोल रही थी। दूसरी ओर आज-कल देश में इतनी ईमानदार सरकार है पर उसे अपने खर्च तक चलाने के लिए देश बेचना पड़ रहा है। सच ही है कि ईश्वर की लीला अपरम्पार है। भ्रष्ट सरकारें देश बना रही थीं और महा ईमानदार, देश की रखवाले चौकीदार की सरकार है कि देश को बेचे जा रही है। 

तो जब सब कुछ, जिस जिस भी चीज की बिक्री का जिक्र इस बजट में है, और वह सब कुछ भी जिसकी बिक्री का इस बजट में जिक्र तक नहीं है, बिक जाये, और सरकार जी को फिर भी पैसे की कमी पड़ जाये, तो मेरा मत है कि सरकार जी पुलिस को बेच दें। पुलिस चौकी, थाना, जिला और प्रदेश की पुलिस, सभी को बेच दें। वैसे तो सभी को पता है कि ये सब थाने आदि पहले से ही बिकते रहे हैं पर तब 'ऑफिसियली' बिक सकेंगे। फिर बड़े कारोबारी काले धन से नहीं अपितु सफेद धन से पूरे प्रदेश की पुलिस खरीद सकते हैं और उसके बाद जिले और थाने अपनी फ्रेंचाइजी, यानी कि छोटे कारोबारियों को दे सकते हैं। सरकार जी को भी अपने खर्च चलाने के लिए ही नहीं, अपने दल के और मुख्यालय बनाने के लिए भी सफेद धन मिलेगा। साथ ही कारोबारियों को भी एक और नया व्यवसाय मिलेगा। 

मान लो सरकार जी ने एक दिन पुलिस का भी निजीकरण कर दिया, यानी कि थाने भी ऑफिसियली बिक गये। तब थाने में हर चीज़ के रेट फिक्स हो जायेंगे। वैसे तो रेट अभी भी हैं पर वे रेट न तो फिक्स हैं और न ही ईमानदारी के हैं। वे रेट अभी बेईमानी के हैं। तब इस ईमानदार सरकार के कार्यकाल में वे रेट भी ईमानदारी के हो जायेंगे। उदाहरण के लिए एफआईआर दर्ज कराने के रेट। जैसे चेन झपटने और मोबाइल छीनने की शिकायत दर्ज कराने के रेट दो हजार रुपये, चोरी की शिकायत के लिए पांच हजार रुपये। रेप की शिकायत दर्ज करानी हो तो दस हजार रुपये दीजिए और हत्या का मामला दर्ज कराने के लिए बीस हजार रुपये। मोबाइल या चेन झपटने और चोरी की शिकायत की फीस नुकसान की कीमत का दस या बीस प्रतिशत भी हो सकती है। इसी तरह सभी सेवाओं की फीस निश्चित हो सकती है। जैसे शिकायत दर्ज करने का शुल्क होगा वैसे ही एफआईआर दर्ज न करने का भी शुल्क हो सकता है। जैसे अगर कोई शिकायत दर्ज करने का शुल्क दस हजार है तो शिकायत दर्ज न करने का शुल्क एक लाख रुपये हो सकता है। ऐसा अब भी होता है पर निजीकरण के बाद कानूनन हो जायेगा।

पुलिस के निजीकरण से सरकार को लाभ ही लाभ होगा। जैसे सरकारी उपक्रमों के निजीकरण से सरकार उनके कर्मचारियों को वेतन और पेंशन देने से बचती है उसी प्रकार पुलिस के निजीकरण से भी सरकार पुलिस वालों को तनख्वाह और पेंशन देने से मुक्ति पायेगी। इससे बचने वाले पैसे से सरकार अपना खर्च चला सकेगी और सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को वेतन, भत्ते और पेंशन दे सकेगी। 

निजीकरण से, जैसे सबकी कार्यकुशलता बढ़ती है, उसी तरह से पुलिस वालों की कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। पुलिस वालों के, थानों के लक्ष्य निर्धारित हो जायेंगे। सभी पुलिस चौकियों और को अपने लिए निर्धारित लक्ष्य पूरे करने होंगे। जिन थानों में लक्ष्य से कम अपराध होंगे और जिनका कलेक्शन कम होगा, उन थानों को घाटे में चल रहा मान कर बंद कर दिया जायेगा। निजी कंपनियां घाटे के थानों को बर्दाश्त क्यों करेंगी। 

पुलिस के निजीकरण के बाद जो पुलिस को अधिक फीस देगा, पुलिस उसी का काम करेगी। यदि अपराधी भी फीस देगा तो उसका काम भी अधिक मुस्तैदी से किया जायेगा। मतलब पुलिस अधिक कार्यकुशल हो जायेगी। अगर सरकार भी किसानों को रास्ते में ही रोकना चाहेगी तो उसे भी पुलिस को भुगतान करना ही पड़ेगा। और अगर सरकार ने निर्धारित भुगतान नहीं किया या फिर किसानों ने अधिक भुगतान कर दिया तो पुलिस किसानों को सम्मान सहित संसद तक छोड़ कर आयेगी। 

खैर पुलिस के निजीकरण से मिले पैसे से सरकार जी का काम एक या दो वर्ष तो चल जायेगा पर उसके बाद। उसके बाद सरकार जी को किसी और चीज को बेचना ही पड़ेगा। सरकार जी तब न्यायालय या सेना को बेच सकते हैं। सेना को बेचने के बाद यदि चीन आक्रमण करेगा तो निजी हो चुकी भारतीय सेना के कोर्पोरेट मालिक लड़ने से मना कर सकते हैं। कह सकते हैं कि चीन हमें अधिक पैसा दे रहा है, हम तो चीन की ओर से लड़ेंगे। आखिर कारोबारियों को कारोबार ही तो करना है। 

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
privatization
police

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!

तिरछी नज़र: विश्व गुरु को हंसना-हंसाना नहीं चाहिए


बाकी खबरें

  • kerala nun case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    केरल: चर्चित नन रेप केस में आरोपी बिशप बरी, फ़ैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगी नन
    15 Jan 2022
    एसआईटी का नेतृत्व कर रहे आईपीएस अधिकारी एस. हरिशंकर ने कहा कि ये फैसला स्वीकार्य नहीं है और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में यूपी नंबर वन, है या नहीं?
    15 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामलों में कमी नहीं बल्कि वृद्धि हुई है। रेप के मामलों में कुछ कमी दर्ज की गई है। लेकिन महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश अब भी देश में…
  • yogi ji
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: मास्टर स्ट्रोक ही मास्टर स्ट्रोक
    15 Jan 2022
    फिर भी यह न तो भगदड़ का मामला है और न तोड़-फोड़ के ग्लोबल षडयंत्र का। यह तो योगी जी के मास्टर स्ट्रोक का मामला है। हमें पता है कि भक्तों को आसानी से यह हजम नहीं होगा कि योगी भी मास्टरस्ट्रोक लगा सकते…
  • Bharti with Digvijay Singh
    काशिफ काकवी
    एमपी में एससी/एसटी के ख़िलाफ़ अत्याचार के 37,000 से अधिक मामले लंबित, दोष-सिद्धि की दर केवल 36 फ़ीसदी
    15 Jan 2022
    मध्य प्रदेश ने 2020 में एससी/एसटी के ख़िलाफ़ अत्याचार के 9,574 मामले दर्ज किए। लेकिन 2020 के केवल 95 मामले और इसके पिछले वर्ष में 594 मामले ही अदालतों में किसी नतीजे पर पहुंच सके थे। एनसीआरबी के…
  • kisan
    लाल बहादुर सिंह
    किसानों को आंदोलन और राजनीति दोनों को साधना होगा
    15 Jan 2022
    आज सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की अहम बैठक हो रही है। किसान आंदोलन के स्थगित होने के बाद यह पहली बैठक है। इस बैठक में केंद्र सरकार द्वारा किसानों के साथ किये गए समझौते के क्रियान्वयन की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License