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भारत
राजनीति
देश के सबसे अमीर मंदिर के पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं हैं!
लगभग 50 हजार करोड़ की कुल संपत्ति वाले तिरुपति बालाजी मंदिर ट्रस्ट ने कोरोना महामारी के चलते 1300 कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं किया। मंदिर ट्रस्ट के इस फैसले से जहां पीड़ित कर्मचारी काफी दुखी हैं तो वहीं ट्रेड यूनियनों ने ट्रस्ट के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कड़ी आलोचना की है।
सोनिया यादव
04 May 2020
 तिरुपति बालाजी

देश के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार, लगभग दो हजार साल पुराना तिरुपति बालाजी मंदिर पहली बार अपनी संपत्ति या मिलने वाले दान को लेकर सुर्खियों में नहीं है बल्कि इस बार ये अमीर मंदिर अपने 1300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने को लेकर चर्चा में बना हुआ है।

काम से निकाले गए सभी 1300 कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट पर थे और ये लोग मंदिर ट्रस्ट के तीन गेस्ट हाउस विष्णु निवासम, श्रीनिवासम और माधवम में कई सालों से आव-भगत और सफाई का काम करते थे। बीते 30 अप्रैल को इनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया। जिसके बाद कोरोना महामारी के बीच मंदिर प्रशासन ने 1 मई से इन सभी कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं किया। मंदिर ट्रस्ट के इस फैसले से जहां पीड़ित कर्मचारी काफी दुखी हैं तो वहीं ट्रेड यूनियनों ने ट्रस्ट के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कड़ी आलोचना की है।

किसने क्या कहा?

काम से हटाए गए एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया कि कोरोना वायरस के चलते मंदिर 20 मार्च से ही बंद है। लेकिन यहां पर मंदिर के अंदर सुबह-शाम के अनुष्ठान और आरती-पूजा होती है।

उन्होंने कहा, “हमें पहले से कुछ खबर नहीं था इस बारे में। अभी भी बस इतना ही कहा गया है कि हम लोग जिस फर्म के जरिए यहां काम पर लगे थे, टीटीडी प्रशासन अब उसका कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं कर रहा, जिसकी वजह से हम सब की नौकरी चली गई है। हमारी टीटीडी प्रशासन से अपील की है कि वे इस मुश्किल समय में हमें काम से न निकाले। हम अभी कहां जाएंगे, क्या करेंगे। हमारा परिवार और बच्चा भी है, उन्हें क्या बोलेंगे, कैसे सब ठीक होगा?”

एक अन्य कर्मचारी ने बताया, हम यहां सालों से काम करते हैं, ट्रस्ट को इस समय हमारी मदद करनी चाहिए। सभी जानते हैं कि मेन मंदिर के अलावा 50 मंदिर और भी बंद हैं, जिसके चलते ट्रस्ट को दान नहीं मिल रहा, आमदनी नहीं हो रही। लेकिन ये भी सच है कि ट्रस्ट के पास बहुत पैसा है, हम छोटे लोगों का खर्चा तो ट्रस्ट आसानी से उठा सकता है। क्या अब मंदिर ट्रस्ट के पास हम लोगों को देने के लिए पैसा भी नहीं है? हमारा ट्रस्ट से अनुरोध है कि हमारी मदद करें, इस समय हमें काम से न निकालें।”

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने एक बयान जारी ट्रस्ट के इस कदम की सख्त आलोचना की है। सीटू का कहना है कि श्रमिक जिन्होंने हर वक्त मंदिर की स्वच्छता और रखरखाव का ध्यान रखा, तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए अपना जीवन जोखिम में डाल दिया। मंदिर ट्रस्ट ने संकट के वक्त उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट के प्रवक्ता टी रवि का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से सभी गेस्टहाउस बंद हैं, जिस वजह से इन कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि नियमित कर्मचारियों को भी इस दौरान कोई काम नहीं सौंपा है। सभी फैसले कानून के मुताबिक लिए गए हैं। काम बंद होने की वजह से कर्मचारियों को निकालने का फैसला लेना पड़ा।

हालांकि मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष वाई वी सुब्बा रेड्डी ने मुंबई मिरर को बताया कि कर्मचारियों की सेवाएं बंद कर दी गई हैं। उन्होंने कहा, "इस मुद्दे को मेरे संज्ञान में लाया गया है। हम मानवीय आधार पर उनकी मदद करने की कोशिश करेंगे।" 

आंध्र प्रदेश की स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता देविका वर्तकली कहती हैं, “ये कैसे संभव है कि देश के सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट के पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं है? रोजाना यहां औसतन 60 हजार लोग आते थे तब यही कर्मचारी सारी व्यवस्था संभाल रहे थे, अब जब मंदिर बंद हो गया तो इन्हें काम से निकालना गलत तो है ही साथ ही अमानवीय भी है। ईश्वर तो सबकी मदद के लिए है ना, फिर उसी ईश्वर के घर से इन लोगों को ऐसे समय में कोई कैसे निकाल सकता है? आखिर ट्रस्ट की संपत्ति किस दिन काम आएगी, यही समय है जब आप लोगों की सही मदद कर सकते हैं।”

मंदिर के बारे में खास बातें

आंध्र प्रदेश के तिरुमाला पर्वत पर स्थित भगवान वेंकटेश्र्वर का तिरुपति बालाजी मंदिर एक प्रसिद्ध हिंदू स्थल है। साल के बारहों महीने यहां भक्तों की भारी भीड़ जमा रहती है। भगवान के दर्शन को लंबी-लंबी लाइने लगी रहती हैं। एक अनुमान के मुताबिक ट्रस्ट के पास कुल संपत्ति 50 हजार करोड़ की है। जिसमें 9 हजार किलो सोना भी शामिल है। बालाजी भगवान का श्रृंगार लगभग 550 किलो सोने के आभूषण से किया गया है। यहां का प्रसाद विश्वभर में मशहूर है। औसतन हर दिन लगभग 3 लाख लड्डू बिकते हैं तो वहीं साल में 10 करोड़ से ज्यादा लड्डू प्रसाद की बिक्री होती है। इसके अलावा ट्रस्ट के गेस्ट हाउस में 47 हजार दर्शनार्थियों के एक साथ ठहरने की सुविधा मौजूद है, जिसकी बुकिंग पहले से करवानी पड़ती है।

बता दें कि साल 2020 की शुरुआत में ही मंदिर ट्रस्ट ने देशभर के पिछड़े और आदिवासी इलाकों में तिरुपति मंदिरों के निर्माण की योजना बनाई थी। जिसके तहत पहला मंदिर आंध्र प्रदेश के ही अमरावती में बनना तय किया गया है। इस मंदिर को मूल तिरुपति की तर्ज पर ही भव्य बनाया जाएगा। इसके डिजाइन, ले-आउट समेत भूमि पूजन का भी काम पूरा हो चुका है। शुरुआती दिनों में ही ट्रस्ट को करीब 3.2 करोड़ रुपये चंदा भी मिल गया था। जिसमें प्रति व्यक्ति 10 हजार रुपये दान राशि के जरिए भगवान तिरुपति के विशेष दर्शन कराने का प्रावधान है।

गौरतलब है कि कोरोना का कहर लगभग हर तबके के लोगों और उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इस महामारी के चलते हजारों लोगों के हाथ से काम चला गया तो वहीं लाखों-करोड़ों नौकरियां दांव पर लगी है। लेकिन ऐसे समय में जब कई लोगों को भगवान का ही सहारा है तो वहीं देश के सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट से आई ये खबर निश्चित ही कर्मचारियों को निराश करने वाली है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि मात्र 40 दिनों में आखिर मंदिर का ख़ज़ाना इतना कैसे खाली हो गया कि 1300 कर्मचारियों के वेतन के पैसे भी नहीं बचे।

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