NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
“चाहूँ ऐसा राज मैं जहाँ मिले सबन को अन्न”
आज संत रैदास की जयंती है। उनका चिंतन आज के संदर्भ में भी क्रांतिकारी है। आइए इस मौके पर पढ़ते हैं राज वाल्मीकि का विशेष आलेख।
राज वाल्मीकि
27 Feb 2021
संत रैदास
फोटो साभार: गूगल

दलित समाज की संत परम्परा बहुत प्राचीन रही है। पंद्रहवी सदी में कबीर और रैदास (रविदास) जैसे संत और महापुरुष हमारे गर्व और गौरव हैं। कबीर दास जी ने उस समय में जिस निर्भयता का परिचय देते हुए हिन्दुत्ववादी ताकतों को उनकी कुरीतियों के लिए फटकारा था उसी तरह संत रैदास ने उन सामाजिक विषमताओं, विसंगतियों के खिलाफ आईना दिखाया था।

संत रविदास के मंदिर को तोड़ा जाता है तो हम अपनी एकता का प्रदर्शन करते हैं। हम विरोध में उतर आते हैं। तब हमें लगता है ये हमारे संत का अपमान है। हमारी आस्था को ठेस पहुंचाई जा रही है। यह हिंदुत्ववादी सोच की तरह ही है। पर आज आवश्यकता इस बात की है कि हम उनके विचारों को अपनाएं।

रैदास जी बारे में संक्षेप में कहा जा सकता है आज भी हमारे समाज में जातिवाद है। भेदभाव है। छुआछूत है। अत्याचार है। उत्पीड़न है। शोषण है, पर हम हमारे संत से प्रेरणा लेकर इनके खिलाफ आवाज उठाएं। हमारे  समाज में आज भी अनेक विसंगतियां हैं। कुरीतियाँ हैं। अंधविश्वास हैं। क्यों नहीं हम अपने संत से प्रेरित होकर इनके खिलाफ आवाज उठाएं।

रैदास का जन्म काशी में माघ पूर्णिमा दिन रविवार को संवत 1433 को चर्मकार कुल में हुआ था। उनके पिता का नाम रग्घु और माता का नाम घुरविनिया था। उनकी पत्नी का नाम लोना बताया जाता है। रैदास ने साधु-सन्तों की संगति से पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया था। जूते बनाने का काम उनका पैतृक व्यवसाय था और उन्होंने इसे सहर्ष अपनाया। 

वे जूते बनाने का काम किया करते थे और ये उनका व्यवसाय था और अपना काम पूरी लगन तथा परिश्रम से करते थे और समय से काम को पूरा करने पर बहुत ध्यान देते थे। संत रामानंद के शिष्य बनकर उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित किया। संत रविदास जी ने स्वामी रामानंद जी को कबीर साहेब जी के कहने पर गुरु बनाया था, जबकि उनके वास्तविक आध्यात्मिक गुरु कबीर साहेब ही थे। उनकी समयानुपालन की प्रवृति तथा मधुर व्यवहार के कारण उनके सम्पर्क में आने वाले लोग भी बहुत प्रसन्न रहते थे। प्रारम्भ से ही रैदास बहुत परोपकारी तथा दयालु थे और दूसरों की सहायता करना उनका स्वभाव बन गया था। साधु-सन्तों की सहायता करने में उनको विशेष आनन्द मिलता था। वे उन्हें प्राय: मूल्य लिये बिना जूते भेंट कर दिया करते थे। उनके स्वभाव के कारण उनके माता-पिता उनसे अप्रसन्न रहते थे। कुछ समय बाद उन्होंने रैदास तथा उनकी पत्नी को अपने घर से निकाल दिया। रैदास पड़ोस में ही अपने लिए एक अलग इमारत बनाकर तत्परता से अपने व्यवसाय का काम करते थे और शेष समय ईश्वर-भजन तथा साधु-सन्तों के सत्संग में व्यतीत करते थे।

उनके जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं से समय तथा वचन के पालन सम्बन्धी उनके गुणों का पता चलता है। एक बार एक पर्व के अवसर पर पड़ोस के लोग गंगा-स्नान के लिए जा रहे थे। रैदास के शिष्यों में से एक ने उनसे भी चलने का आग्रह किया तो वे बोले, मन जो काम करने के लिए अन्त:करण से तैयार हो वही काम करना उचित है। मन सही है तो इसे कठौते के जल में ही गंगास्नान का पुण्य प्राप्त हो सकता है। कहा जाता है कि इस प्रकार के व्यवहार के बाद से ही कहावत प्रचलित हो गयी कि - मन चंगा तो कठौती में गंगा।

रैदास ने ऊँच-नीच की भावना तथा ईश्वर-भक्ति के नाम पर किये जाने वाले विवाद को सारहीन तथा निरर्थक बताया और सबको परस्पर मिलजुल कर प्रेमपूर्वक रहने का उपदेश दिया।

वे स्वयं मधुर तथा भक्तिपूर्ण भजनों की रचना करते थे और उन्हें भाव-विभोर होकर सुनाते थे। उनका विश्वास था कि राम, कृष्ण, करीम, राघव आदि सब एक ही परमेश्वर के विविध नाम हैं। वेद, कुरान, पुराण आदि ग्रन्थों में एक ही परमेश्वर का गुणगान किया गया है।

कृष्ण, करीम, राम, हरि, राघव, जब लग एक न पेखा।

वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।।

 

चारो वेद के करे खंडौती। जन रैदास करे दंडौती।।

उन्होंने जाति की बजाय गुणों को महत्व दिया -

ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन

पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीण

या फिर –

रैदास जन्म के करने होत न कोई नीच।

नर को नीच करि डारि है ओछ करम की कीच।।

उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ उठाई, छुआछूत आदि का विरोध किया। और पूरे जीवन ही इन कुरीतियों के खिलाफ काम करते रहे। उन्होंने लोगों को सन्देश दिया कि ईश्वर ने इंसान को बनाया है न कि इंसान ने ईश्वर को। वे कहना चाहते थे कि इस धरती पर सभी को भगवान ने बनाया है और सभी के अधिकार समान हैं। इन सामाजिक परिस्तिथियों के सन्दर्भ में संत रैदास जी ने लोगों को भाईचारा और मानवीयता का ज्ञान दिया। वे इस दुनिया के हर इंसान को सुखी और प्रसन्न देखना चाहते थे। इसलिए उन्होंने कहा –

चाहूँ ऐसा राज मैं जहाँ मिले सबन को अन्न।

छोटे-बड़े सब सम बसें रैदास रहे प्रसन्न।।

इसे आज के किसान आंदोलन के संदर्भ में देखा-पढ़ा जा सकता है। किसान जो आज लड़ाई लड़ रहे हैं वो उनकी खेती-किसानी के साथ-साथ सबके लिए अन्न की भी लड़ाई है। उनका सोचना है कि खेत-किसानी अगर कॉरपोरेट के हाथों में गई तो अन्न पर भी अधिकार चंद लोगों का हो जाएगा। संत रैदास भी सबके लिए अन्न यानी भोजन की गारंटी चाहते हैं- चाहूँ ऐसा राज मैं जहाँ मिले सबन को अन्न।

यही नहीं आज भी हमारे समाज में छोटा-बड़ा है, जातिवाद है, भेदभाव है। छुआछूत है, अत्याचार है। उत्पीड़न है, शोषण है। पर हम हमारे संत से प्रेरणा लेकर इनके खिलाफ आवाज उठाएं। हमारे समाज में आज भी अनेक विसंगतियां हैं। कुरीतियाँ हैं। अंधविश्वास हैं। क्यों नहीं हम अपने संत से प्रेरित होकर इनके खिलाफ आवाज उठाएं।

(लेखक सफाई कर्मचारी आंदोलन के सदस्य हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Ravidas
Sant Raidas
Birth Anniversary of Ravidas

Related Stories


बाकी खबरें

  • Ambedkar
    राज वाल्मीकि
    वर्तमान संदर्भ में डॉ. अंबेडकर की प्रासंगिकता
    06 Dec 2021
    बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की आज पुण्यतिथि है। 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में उनका निधन हुआ। उन्होंने हमें सफलता के तीन मंत्र दिए थे – ‘शिक्षित हो,  संगठित हो, संघर्ष करो।’ हाल ही में हमें किसान आंदोलन…
  • Alphons
    द लीफ़लेट
    संविधान की प्रस्तावना में संशोधन के लिहाज़ से प्राइवेट मेंबर बिल: एक व्याख्या
    06 Dec 2021
    झा के मुताबिक़, संविधान के बुनियादी ढांचे का एक हिस्सा होने के नाते प्रस्तावना में संशोधन नहीं किया जा सकता।
  •  Indian constitution
    डॉ. राजू पाण्डेय
    भारतीय संविधान पर चल रहे अलग-अलग विमर्शों के मायने!
    06 Dec 2021
    क्या संविधान से हमें कुछ भी हासिल नहीं हुआ? जब हमारे साथ स्वतंत्र हुए देशों में लोकतंत्र असफल एवं अल्पस्थायी सिद्ध हुआ और हमारे लोकतंत्र ने सात दशकों की सफल यात्रा पूरी कर ली है तो इस कामयाबी के पीछे…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 8,306 नए मामले, 211 मरीज़ों की मौत
    06 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.28 फ़ीसदी यानी 98 हज़ार 416 हो गयी है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में तनाव व अव्यवस्था की आंखमिचौली, नगालैंड में गोलीकांड और विनोद दुआ को श्रद्धांजलि
    06 Dec 2021
    यूपी के पश्चिमी हिस्से में किसान आंदोलन के सामाजिक राजनीतिक असर की काट के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की पुरजोर कोशिश हो रही है. क्या मथुरा में तनाव पैदा करने की मुहिम चला रहे कुछ हिन्दुत्ववादी संगठनों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License