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यमन की समस्याओं के बावजूद यूके की सऊदी अरब को हथियार बिक्री जारी रखने की घोषणा
पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या में शामिल होने के आरोप में सऊदी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाने के ठीक एक दिन बाद यूके सरकार ने ये घोषणा की है।
पीपल्स डिस्पैच
08 Jul 2020
 यमन की समस्याओं के बावजूद यूके की सऊदी अरब को हथियार बिक्री जारी रखने की घोषणा

जमाल खशोगी की हत्या को लेकर सऊदी अरब के नागरिकों पर प्रतिबंध लगाने के ठीक एक दिन बाद यूनाइटेड किंगडम ने मंगलवार 7 जुलाई को घोषणा की कि वह सऊदी अरब को हथियार बेचना जारी रखेगा। यूके के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सचिव लिज़ ट्रूस ने ब्रिटिश संसद को बताया कि कोई सरकारी मूल्यांकन "एक स्पष्ट जोखिम सिद्ध करने में सक्षम नहीं है कि सऊदी अरब को हथियारों और सैन्य उपकरणों के निर्यात का उपयोग [अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून] के गंभीर उल्लंघन के कृत्य में किया जा सकता है।"

ट्रूस ने कहा कि पिछले साल अदालत के फैसले के अनुपालन में हथियार निर्यात लाइसेंस को कैसे प्रदान किया गया है इसकी सरकार ने समीक्षा भी की है। अदालत के फैसले में सऊदी अरब को उसके यमन में युद्ध में शामिल होने और कार्रवाईयों को लेकर नए हथियारों की बिक्री को रोक दिया गया था।

सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन का मानव जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के विशाल और अहम सबूतों के साथ-साथ इसके स्पष्ट और दोहराव, जानबूझकर और लगातार निशाना बनाने और नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर बमबारी के बावजूद ट्रूस ने कहा कि यूके सरकार उन्हें अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखती है और उक्त समीक्षा में सरकार ने पाया कि सऊदी अरब का "वास्तविक उद्देश्य था और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय क़ानून का पालन करने की क्षमता थी।"

यूके ने मार्च 2015 से कम से कम 5.3 मिलियन ब्रिटिश पाउंड के हथियार और गोला-बारूद की सऊदी अरब को आपूर्ति की है। इसी वर्ष सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में सैन्य दखल देने का फैसला किया था।

पिछले साल जून में अदालत ने फैसला सुनाया था कि सरकार यमन में इस्तेमाल के लिए सऊदी को यूके- निर्मित हथियारों की बिक्री के लिए हथियार निर्यात लाइसेंस देकर ग़ैरक़ानूनी तरीके से काम कर रही थी। प्रतिकूल प्रभाव का आकलन किए बिना इसका वहां मानवीय स्थिति पर उलटा प्रभाव पड़ेगा या ऐसा न हो कि सऊदी सैन्य अभियान अंतर्राष्ट्रीय मानवीय क़ानून का उल्लंघन करता हो।

मंगलवार की घोषणा को संसद में विपक्षी नेताओं के साथ-साथ एक्टिविस्ट और मानवाधिकार समूहों द्वारा 'नैतिक रूप से असमर्थनीय' के रूप में निंदा की गई थी। कैंपेन अगेंस्ट द आर्म्स ट्रेड (सीएएटी) ने इस निर्णय को 'नैतिक रूप से दिवालिया' कहा। सीएएटी के एंड्रयू स्मिथ ने कहा, "यमन में सऊदी के नेतृत्व में बमबारी ने दुनिया का सबसे ख़राब मानवीय संकट पैदा कर दिया है और सरकार खुद स्वीकार करती है कि ऐसा हो सकता है कि यूके-निर्मित हथियारों ने इस बमबारी में अहम भूमिका निभाई हो। हम अपने वकीलों के साथ इस नए फैसले पर विचार करेंगे और इसे चुनौती देने के लिए उपलब्ध सभी विकल्पों की तलाश करेंगे।”

 

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