NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?
उत्तर प्रदेश में सात चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद अब नतीजों का इंतज़ार है, देखना दिलचस्प होगा कि ईवीएम से क्या रिजल्ट निकलता है।
रवि शंकर दुबे
09 Mar 2022
यूपी चुनाव:  इस बार किसकी सरकार?

उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार होगी?... इसका जवाब महज़ कुछ घंटों बाद मिल जाएगा। नतीजों से पहले सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं। इस बार उत्तर प्रदेश में औसतन 60.31 प्रतिशत वोटिंग हुई है, जो पिछली बार से कुछ कम है। ऐसे में इतिहास के आंकड़े ये बताते हैं कि कम वोटिंग का मतलब है सत्ताधारी पार्टी का सत्ता में बने रहना। और अगर ऐसा होता है तो उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में कई दशकों बाद ये पहली बार होगा।

ख़ैर उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 14 मई 2022 को पूरा हो रहा है, ऐसे में 14 मई से पहले हर हाल में विधानसभा और नई सरकार के गठन की प्रकिया पूरी होनी है। पिछली बार के आंकड़ों पर नज़र डालें तो भाजपा ने पूरी तरह से विपक्ष को साफ कर दिया था।

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 384 सीटें पर चुनाव लड़ी थी, जबकि 309 पर जीत हासिल की थी। वहीं पिछले चुनावों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन हुआ था, जिसमें सपा ने 47 और कांग्रेस ने महज़ 7 सीटें जीती थीं।

 

पिछले चुनावों में भले ही भाजपा ने विपक्ष को पूरी तरह से साफ कर दिया हो लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं, फिर चाहे वो पश्चिमी उत्तर प्रदेश हो या फिर पूर्वाचल... यही कारण है कि हर चरण में मतदान भी कहीं न कहीं विपक्ष के पक्ष में जाता हुआ नज़र आया। चरणवार कहां किस ज़िले में कितने प्रतिशत मतदान हुए।

 

 उत्तर प्रदेश में भले ही भाजपा सरकार ने ज़मीनी हकीकत से दूर राष्ट्रवाद को चुनावी मुद्दा बनाया हो लेकिन कुछ ऐसी चीज़ें भी हैं जो सरकार को धराशाई कर सकती हैं। हालांकि भाजपा के लिहाज़ से मुद्दे राम मंदिर, आतंकवाद, राष्ट्रवाद, बुल्डोज़र, लोगों के शरीर का तापमान आदि हैं। जबकि इन मुद्दों का वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। क्योंकि अयोध्या से लेकर वाराणसी तक किसानों की फसल बर्बादी का मंज़र है। हालांकि राशन और लाभार्थी

कार्ड का बीजेपी को ज़रूर फायदा मिल सकता है, लेकिन ओल्ड पेंशन बहाली का मुद्दा सीधे-सीधे समाजवादी पार्टी के पक्ष में जा सकता है। इनके अलावा भी कई मुद्दे हैं जो सरकार बनाने और बिगाड़ने में अहम रोल अदा करेंगे।

·   पिछले कुछ सालों में जिस तरह से आवारा पशुओं ने किसानों की खेती बर्बाद कर उनकी रीढ़ तोड़ी है, इसका ख़ामियाज़ा ज़रूर भाजपा को भुगतना पड़ेगा। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की नाराज़गी पर बात ज़रूर बोल दी कि 10 मार्च के बाद छुट्टा जानवरों से जुड़ी समस्याओं का पुख्ता इंतज़ाम किया जाएगा। लेकिन किसानों को मनाना भाजपा के लिए यह टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

·  ये कहना ग़लत न होगा कि भाजपा सरकार में जब-जब युवाओं ने रोज़गार मांगा है तब उन्हें सिर्फ लाठियां ही मिली हैं। हाल ही में हुई प्रयागराज की घटना को कौन भूल सकता है जहां हॉस्टल में घुस-घुसकर छात्रों को बुरी तरह पीटा गया था। यानी साफ है कि बेरोज़गारी के कारण भाजपा गच्चा ज़रूर खा सकती है।

·  बेरोज़गारी के अलावा लोगों में महंगाई को लेकर भी बहुत ज्यादा गुस्सा है, घरेलू गैस से लेकर रसोई का सामान तक लोगों के लिए आफत बनी हुई है।

·  योगी सरकार भले ही माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करती रही हो, लेकिन सरकार बनाने के लिए अपराधी से नेता बनने की फिराक में बैठे लोगों के दर माथा टेकना ही पड़ेगा। अयोध्या के गोसाईगंज में बबलू सिंह और आरती तिवारी में संघर्ष हो चुका है। सुल्तानपुर में भी माफिया सरगना आमने-सामने हैं तो चित्रकूट के मानिकपुर में दस्यु सम्राट रहे ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल चुनाव मैदान में हैं। प्रतापगढ़ के कुंडा से रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया व अमेठी में डॉ. संजय सिंह मैदान में हैं। इन दोनों को अपने रजवाड़ों की लाज रखनी है।

·  पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की परेशानी भला कौन भूल सकता है जो एक साल से ज़्यादा तक दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर प्रदर्शन करते रहे। अपने हक के लिए गुहार लगाते रहे लेकिन सरकार ने उन्हें बदले में नुकीली कीलें दी। इतना ही नहीं करीब 750 किसानों की शहादत का खामियाज़ा भी सरकार को भुगतना पड़ सकता है।

· किसानों से ही जुड़ा मुद्दा है लखीमपुर खीरी कांड। जिस तरह केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा ने किसानों पर गाड़ी चढ़ाई और जिस तरह ऐन चुनाव के समय उसे बेल मिली, उसने भी किसानों को और नाराज़ करने का काम किया।

·  योगी सरकार को विपक्ष सबसे ज्यादा हाथरस में दलित लड़की के साथ हुए बलात्कार के मामले पर घेरता रहा है। मामले को जिंदा रखने के लिए समाजवादी पार्टी हर महीने 'हाथरस की बेटी स्मृति दिवस' मना रही है। बाकी आपको तो याद ही होगा कि इस मामले के बाद कांग्रेस की ओर से कैसे प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने पीड़िता के घर जाकर उन्हें ढांढस बंधाया था और योगी सरकार पर आरोप मढ़े थे।

·  बिकरू कांड, विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर और उसके एक सहयोगी अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे को जेल भेजा जाना भी अहम मुद्दा है। जिसके जरिए विपक्ष ने योगी सरकार को ब्राह्मण विरोधी साबित करने की कोशिश की। कांग्रेस ने खुशी दुबे की बहन नेहा तिवारी को नारायणपुर से टिकट दिया है।

· विपक्ष की तरह भाजपा कन्नौज में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के यहां से मिले 250 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी और उसके कथित समाजवादी पार्टी के कनेक्शन का मुद्दा उठा रही है। हालांकि इसी मुद्दे पर सपा की ओर से भी भाजपा पर हमला किया जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार में कानून व्यवस्था की इतनी दुहाई दी जाती है तो इतने रुपये कहां से आए?

आलू किसान देगा भाजपा को जवाब?

अन्य किसानों के साथ आलू किसान भी आवारा पशुओं से बहुत ज्यादा परेशान है। यहां आलू की खेती यादव समाज ही नहीं बल्कि शाक्य और कुर्मी समुदाय के लोग भी बड़ी तादाद में करते हैं, जिन्हें बीजेपी का हार्ड कोर वोटर माना जा रहा है। लेकिन अगर इन सीटों पर बसपा और सपा का जातीय समीकरण फिट बैठ जाता है, तो भाजपा को बड़ा ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।

UP ELections 2022
AKHILESH YADAV
Yogi Adityanath

Related Stories

सियासत: अखिलेश ने क्यों तय किया सांसद की जगह विधायक रहना!

यूपी चुनाव नतीजे: कई सीटों पर 500 वोटों से भी कम रहा जीत-हार का अंतर

यूपी के नए राजनीतिक परिदृश्य में बसपा की बहुजन राजनीति का हाशिये पर चले जाना

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

यूपी चुनाव: कई दिग्गजों को देखना पड़ा हार का मुंह, डिप्टी सीएम तक नहीं बचा सके अपनी सीट

जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा

जनादेश-2022: यूपी समेत चार राज्यों में बीजेपी की वापसी और पंजाब में आप की जीत के मायने

यूपी चुनाव: प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की वापसी

यूपी चुनाव: रुझानों में कौन कितना आगे?

यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर


बाकी खबरें

  • night curfew
    रवि शंकर दुबे
    योगी जी ने नाइट कर्फ़्यू तो लगा दिया, लेकिन रैलियों में इकट्ठा हो रही भीड़ का क्या?
    24 Dec 2021
    देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई है, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों…
  • kafeel khan
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोरखपुर ऑक्सिजन कांड का खुलासा करती डॉ. कफ़ील ख़ान की किताब
    24 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार परंजोय गुहा ठाकुरता डॉ कफ़ील ख़ान की नई किताब ‘The Gorakhpur Hospital Tragedy, A Doctor's Memoir of a Deadly Medical Crisis’ पर उनसे बात कर रहे हैं। कफ़ील…
  • KHURRAM
    अनीस ज़रगर
    मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ की तत्काल रिहाई की मांग की
    24 Dec 2021
    कई अधिकार संगठनों और उनके सहयोगियों ने परवेज़ की गिरफ़्तारी और उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को कश्मीर में आलोचकों को चुप कराने का ज़रिया क़रार दिया है।
  •  boiler explosion
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गुजरात : दवाई बनाने वाली कंपनी में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा, चपेट में आए आसपास घर बनाकर रह रहे श्रमिक
    24 Dec 2021
    गुजरात के वडोदरा में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया, जिसकी चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।
  • Uddhav Thackeray
    सोनिया यादव
    लचर पुलिस व्यवस्था और जजों की कमी के बीच कितना कारगर है 'महाराष्ट्र का शक्ति बिल’?
    24 Dec 2021
    न्याय बहुत देर से हो तो भी न्याय नहीं रहता लेकिन तुरत-फुरत, जल्दबाज़ी में कर दिया जाए तो भी कई सवाल खड़े होते हैं। और सबसे ज़रूरी सवाल यह कि क्या फांसी जैसी सज़ा से वाक़ई पीड़त महिलाओं को इंसाफ़ मिल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License